

गाजीपुर। शनिवार को जनपद न्यायालय में राष्ट्रीय लोक अदालत का शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर सुरेन्द्र सिंह- II जनपद न्यायाधीश द्वारा मॉ सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप-प्रज्ज्वलित कर लोक अदालत का उद्घाटन किया गया। उन्होंने बताया कि लोक अदालत मे न केवल मुकदमो का निस्तारण किया जाता है, बल्कि पक्षकारों के मध्य परस्पर बैमनस्यता भी समाप्त हो जाती हैं। राकेश कुमार- VII नोडल अधिकारी, लोक अदालत द्वारा राष्ट्रीय लोक अदालत में निस्तारण हेतु नियत वादों की विस्तृत रूपरेखा प्रस्तुत की गयी। इस अवसर पर पूर्णकालिक सचिव कामायनी दूबे ने बताया कि लोक अदालत से न्याय के क्षेत्र में क्रान्ति आई है और लोगो में विधिक जागरूकता भी बढ़ी हैं। इस राष्ट्रीय लोक अदालत में कुल 109511 मामले निस्तारण हेतु नियत किये गये थे, जिसमें से सुलह समझौतें एवं संस्वीकृति के आधार पर कुल 87095 वाद अंतिम रूप से निस्तारित किये गये। राजस्व विभाग आदि के 6531 मामले, विभिन्न न्यायालयों द्वारा 17762 मामले तथा बैंक एवं अन्य विभाग द्वारा कुल 62802 मामले निस्तारित किये गये। राष्ट्रीय लोक अदालत में कुल 146553773 की धनराशि के संबंध में आदेश पारित हुआ। दीवानी न्यायालय द्वारा कुल 82729394 रूपए के संबंध में आदेश पारित किया गया तथा राजस्व न्यायालयों एवं बैंक में कुल 63824379 रूपए के संबंध में सुलह-समझौता हुआ। इस लोक अदालत की सफलतापूर्वक समाप्ति पर नोडल अधिकारी द्वारा समस्त न्यायिक अधिकारी, वादकारी और अधिवक्ता के प्रति आभार व्यक्त करते हुए उन्हें सहयोग देने हेतु धन्यवाद ज्ञापित किया गया। न्यायालय मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण द्वारा कुल 98 वाद निस्तारित किये गये व कुल-54525000 की धनराशि के संबंध में आदेश पारित किया गया। प्रधान न्यायाधीश, कुटुम्ब न्यायालय गाजीपुर द्वारा 59 वाद निस्तारित किये गये जिसमें से 1 मामलों में पति-पत्नी में सुलह कराकर उन्हे न्यायालय से एक साथ विदा किया गया।
पूर्णकालिक सचिव द्वारा जनपद न्यायालय के कर्मचारी, अधिवक्ता, मीडियाकर्मी तथा पुलिस एवं प्रशासन विभाग के प्रति अपना धन्यवाद ज्ञापित किया गया।





