पृथ्वी में डाले गए बीज व गाय की सेवा से फल की प्राप्ति होती है:पंडित अशोक कृष्ण

गाज़ीपुर। शास्त्रीनगर के हरिहर पैलेस में चल रही भागवत कथा के छठे दिन कथा वाचक पंडित अशोक कृष्ण महाराज ने रुक्मिणी – कृष्ण विवाह प्रसंग पर प्रकाश डाला। भगवान श्रीकृष्ण की झांकी स्वरूप बारात डीएम आवास के पास स्थित काली माता मंदिर से चलकर कथा स्थल तक आयी। वृंदावन से पधारे कथा वाचक अशोक कृष्ण महाराज का कहना है कि ब्राह्मण के मुख से निकले वेद मंत्र से भगवान गदगद होकर शिष्य पर कृपा की वर्षा करते है। उनका कहना है कि जीवन में सार्थकता व भजन हो तो भगवान जीव से दूर नही रहते। आंखों में चढ़ी माया रुपी मोतियाबिंद दूर होते ही, भगवान भक्त को दिखने लगते है। भगवान जब भक्त को अपना बनाते है तो उसके पास दो मार्ग प्रदान करते है। प्रथम गुरु का द्वितीय स्वयं अपना। पृथ्वी और गाय को एक समान बताते हुए कहा कि जिस प्रकार पृथ्वी में डाले गए अन्न से फल की प्राप्ति होती है, उसी प्रकार गाय की सेवा से हमें फल मिलता है। पृथ्वी का दोहन नही करना चाहिए और साक्षात पृथ्वी स्वरूपा गौ माता की सेवा करें। गृहस्थ आश्रम को सबसे बड़ा बताते हुए कहा कि परिवार में मनुष्य इंसान बन कर रहे तो रामलीला है, नही तो महाभारत है। मनुष्य तप, जप और ज्ञान के बल से भगवान की प्राप्ति कर सकता है। इस मौके पर डा. डीपी सिंह, रामानंद सिंह, गर्वजीत सिंह, शालिनी सिंह, रीता सिंह, अर्चना तिवारी, शकुंतला सिंह, विजय सिंह, गिरजा राय, सरोज, जयदीप, संजय , डिंपल आदि मौजूद रहे।

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