भोजपुरी की संस्कृति सामासिक संस्कृति है:प्रो. राम नारायण तिवारी

गाजीपुर। राजकीय महिला स्नातकोत्तर महाविद्यालय में कल्चरल क्लब द्वारा ‘भोजपुरी लोक संस्कृति: परिचय और महत्त्व’ विषय पर प्रो राम नारायन तिवारी का व्याख्यान मंगलवार को आयोजित किया गया। इस अवसर उन्होंने कहा कि भोजपुरी की संस्कृति सामासिक संस्कृति है। भारतीय लोक शास्त्र का विरोधी नहीं अपितु पूरक है। जब जब शास्त्र रूढ़ हुआ तब तक लोक ने उसे गति प्रदान किया है। संस्कृति इसी लोक और शास्त्र के मध्य प्रवाहमान है। शास्त्र ने जहां जहां मंत्र रचे, लोक ने वहां वहां गीत रचे। हमारे यहां के विवाह इसके प्रत्यक्ष प्रमाण हैं। विवाह में एक तरफ़ पण्डित मंत्र पढ़ता है और दूसरी तरफ औरतें गीत गाती हैं। हमारा लोक प्रकृति उन्मुख है। प्रकृति की अवहेलना वहां निषिद्ध है। वहां एक पारिवारिक रिश्ता है। धरती – आकाश, नदी -तालाब, पेड़ -पल्लव से माता – पिता और भाई बहन का रिश्ता है।

यही वसुधैव कुटुंबकम् है। जहां सभी अपने हैं। इस अवसर पर बी ए प्रथम वर्ष की छात्रा खुशबू ने ‘जागा हिंद ललनवा’ बिरहा गीत का पूरी भाव भंगिमा के साथ गायन किया। जिस पर छात्राओं ने खूब तालियां बजाई। पूनम यादव ने अपने घर में नित्य गाए जाने वाले भजन का पाठ किया ‘माई बाबू से बढ़ी के ई दुनिया में का बा/उन्हीं से रोशन दुनिया जहान बा’ आफ़रीन ने मां सरस्वती की बंदना गीत प्रस्तुत किया। इस अवसर पर कल्चरल क्लब प्रभारी डा निरंजन कुमार यादव ने कहा कि बिना अपनी संस्कृति को जाने समझे, उस दिशा में कोई ठोस काम नहीं किया जा सकता। जब तक हम उसके महत्व को नहीं समझेंगे तब तक उसके प्रति हमारा लगाव नहीं होगा। प्राचार्य प्रो अनीता कुमारी ने कहा पाश्चात्य संस्कृति से मुक्ति के लिए लोक संस्कृति का सरंक्षण आवाश्यक है। इस अवसर पर डा विकास सिंह, डा अमित यादव, सहित कल्चरल क्लब के सभी सदस्य उपस्थित रहे।

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