




गाजीपुर।शासन के निर्देश के क्रम में विभिन्न विद्यालयों में महिला एवं बालिकाओं की सुरक्षा, सम्मान एवं स्वावलम्बन के लिए विशेष अभियान मिशन शक्ति 5.0 विशेष अभियान संचालित किया गया। जिसके द्वारा नवरात्रि के अवसर पर विशेष अभियान कार्ययोजना तैयार की गयी है, जिसके संबंध में आज जनपद के राजकीय, अशासकीय सहायता प्राप्त एवं वित्त विहीन माध्यमिक विद्यालयों में कार्यक्रम आयोजित किया गया। जनपद स्तर पर बालिकाओं को प्रमुख प्रशासनिक पदो पर कार्यभार ग्रहण कराया गया।
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने बताया कि महिला एवं बालिकाओं की सुरक्षा, सम्मान एवं स्वावलंबन एक महत्वपूर्ण सामाजिक विषय है, जो समाज में महिलाओं और बालिकाओं की स्थिति को बेहतर बनाने की दिशा में उठाया गया एक व्यापक कदम है। इसी उद्देश्य से यह अभियान के तहत विभिन्न विद्यालयों में प्रधानाचार्य के रूप में कार्यभार ग्रहण कराकर, बच्चो एवं महिलाओं को सशक्त बनाया जाए यही सरकार की मंशा है। महिलाओं और बालिकाओं की सुरक्षा का अर्थ है उन्हें हर प्रकार की हिंसा, उत्पीड़न, शोषण और भेदभाव से मुक्त रखना। इसके लिए जरूरी कदम है। महिलाओं के खिलाफ अपराधों की सख्त रोकथाम और त्वरित न्याय। सुरक्षित पब्लिक ट्रांसपोर्ट, सीसीटीवी, हेल्पलाइन नंबर (जैसे 1091), महिला हेल्प डेस्क आदि। स्कूलों, कॉलेजों, कार्यस्थलों और सार्वजनिक स्थानों पर सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करना। महिलाओं को बराबरी का दर्जा देना और उन्हें सामाजिक, सांस्कृतिक और पारिवारिक स्तर पर सम्मानित स्थान देना होगा इसमें लैंगिक भेदभाव को समाप्त करना होगा, घरेलू कामकाज की भी मान्यता देना और श्रम का सम्मान करना। शिक्षा, रोजगार, राजनीति और विज्ञान सहित हर क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी को प्रोत्साहन देना।
स्वावलंबन का अर्थ है महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना ताकि वे अपनी ज़िंदगी के फैसले खुद ले सकें, शिक्षा और कौशल विकास के अवसर पर स्वरोजगार, स्टार्टअप्स और महिला उद्यमिता को बढ़ावा देना, वित्तीय स्वतंत्रता के लिए लोन योजनाएं, स्वयं सहायता समूह, और डिजिटल साक्षरता, बेटियों के लिए योजनाएं जैसे ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’, ‘उज्ज्वला योजना’, ‘सुकन्या समृद्धि योजना’ आदि संचालित है। महिला एवं बालिकाओं की सुरक्षा, सम्मान एवं स्वावलंबन केवल सरकार या किसी एक संस्था की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। जब महिलाएं सुरक्षित, सम्मानित और आत्मनिर्भर होंगी, तभी एक सशक्त राष्ट्र का निर्माण संभव है।