12 फरवरी को होगा एकदिवसीय देशव्यापी हड़ताल

गाजीपुर। देश की दस प्रमुख केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के आह्वान पर बैंकिंग एवं बीमा क्षेत्र की प्रमुख यूनियनें,ऑल इंडिया बैंक एम्प्लाइज एसोसिएशन, ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स एसोसिएशन और बैंक एम्प्लाइज फेडरेशन ऑफ इंडिया सहित अन्य स्वतंत्र फेडरेशन एवं संगठन सरकार द्वारा लागू की जा रही चार श्रम संहिताओं के विरोध में 12 फरवरी 2026 को देशव्यापी एकदिवसीय आम हड़ताल के लिये तैयार हैं।

यूपी बैंक इम्प्लाइज यूनियन, गाजीपुर इकाई के जिला मंत्री सत्येन्द्र गुप्ता ने जानकारी देते हुए बताया कि बैंक यूनियनों में एआईबीईए, एआईबीओए एवं बीईएफआई ने बैंकिंग एवं बीमा क्षेत्र के सभी कर्मचारियों और अधिकारियों से अपील की है कि वे इस आम हड़ताल में पूर्ण एकजुटता, अनुशासन और व्यापक भागीदारी सुनिश्चित करें।

ट्रेड यूनियनों का आरोप है कि सरकार द्वारा लागू की जा रही चारों श्रम संहिताएं कॉरपोरेट हितों को ध्यान में रखकर बनाई गई हैं, जिनमें ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को प्राथमिकता देते हुए करोड़ों श्रमिकों की ‘ईज ऑफ लिविंग’ को कमजोर किया जा रहा है। संगठन बनाने का अधिकार, सामूहिक सौदेबाजी का अधिकार तथा नियमित आठ घंटे का कार्यदिवस जैसे बुनियादी श्रमिक अधिकारों पर गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया है।
यूनियनों का कहना है कि लंबे संघर्षों से प्राप्त मौजूदा श्रम कानून- जिनमें वेतन, सामाजिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्यस्थल सुरक्षा की न्यूनतम गारंटियां शामिल थीं- नई श्रम संहिताओं के माध्यम से नियोक्ताओं के पक्ष में कमजोर किए जा रहे हैं। इसके साथ-साथ सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और बीमा कंपनियों के निजीकरण एवं विनिवेश को लेकर भी गहरी चिंता व्यक्त की गई है, जिससे इन संस्थानों की सार्वजनिक सेवा भूमिका पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।

बैंककर्मी नेता सत्येन्द्र गुप्ता ने बताया कि बीमा कानून (संशोधन) विधेयक 2025 के तहत बीमा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) की सीमा 74 प्रतिशत से बढ़ाकर 100 प्रतिशत किया जाना निजीकरण की दिशा में एक गंभीर कदम है। एलआईसी का आईपीओ, आईडीबीआई बैंक में रणनीतिक हिस्सेदारी की बिक्री तथा सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में एफडीआई सीमा बढ़ाने जैसे निर्णय इसी नीति की निरंतरता हैं।

उन्होंने कहा कि ट्रेड यूनियनों का स्पष्ट मत है कि ये नीतियां न केवल बैंक और बीमा कर्मचारियों के भविष्य को खतरे में डालती हैं, बल्कि देश की वित्तीय स्थिरता, सामाजिक सुरक्षा और व्यापक राष्ट्रीय हितों को भी नुकसान पहुंचाती हैं। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक और बीमा संस्थान राष्ट्र निर्माण और आर्थिक विकास में ऐतिहासिक भूमिका निभाते आए हैं, जिन्हें निजी हितों के हवाले करना जनविरोधी है।

यूनियनों ने दोहराया कि 12 फरवरी 2026 की आम हड़ताल श्रमिक अधिकारों की रक्षा, सार्वजनिक क्षेत्र के संस्थानों के संरक्षण और जनविरोधी नीतियों के खिलाफ सामूहिक संकल्प की अभिव्यक्ति होगी।

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