बैंककर्मियों की हुंकार, सरकार को आर-पार की चेतावनी

मजदूर विरोधी चार लेबर कोड के खिलाफ गूंजा गाजीपुर – बैंककर्मियों की हुंकार, सरकार को आर-पार की चेतावनी
गाजीपुर। केंद्र सरकार द्वारा थोपे गए चारों लेबर कोड, सार्वजनिक उपक्रमों के निजीकरण और कॉरपोरेटपरस्त नीतियों के खिलाफ गुरुवार को देशव्यापी आम हड़ताल के तहत जिले में बैंककर्मियों का जबरदस्त आक्रोश देखने को मिला। पीएनबी मुख्य शाखा, विशेश्वरगंज पर बड़ी संख्या में एकत्र होकर कर्मचारियों और अधिकारियों ने जोरदार प्रदर्शन किया और स्पष्ट संदेश दिया कि श्रमिक अधिकारों पर कुठाराघात किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जाएगा।
सत्येन्द्र गुप्ता, जिला संयोजक यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस एवं जिला मंत्री, यूपी बैंक इम्प्लाइज यूनियन, गाजीपुर इकाई ने कहा कि चारों लेबर कोड मजदूर वर्ग के अधिकारों पर सीधा युद्ध हैं। यह कानून नहीं, बल्कि दशकों के संघर्ष, त्याग और बलिदान पर प्रहार हैं। 8 घंटे कार्यदिवस, नौकरी की सुरक्षा, सामाजिक सुरक्षा और ट्रेड यूनियन के अधिकारों को खत्म करने की साजिश रची जा रही है। उन्होंने दो टूक कहा कि बैंककर्मी अपने अधिकारों की बलि नहीं चढ़ने देंगे और हर अन्याय का मुंहतोड़ जवाब देंगे।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार कॉरपोरेट घरानों को लाभ पहुंचाने के लिए सार्वजनिक क्षेत्र को कमजोर कर रही है और देश की आर्थिक रीढ़—सार्वजनिक बैंकों—को निजी हाथों में सौंपने की तैयारी कर रही है। यह केवल कर्मचारियों का प्रश्न नहीं, बल्कि देश की आर्थिक संप्रभुता और आम जनता की गाढ़ी कमाई की सुरक्षा का मुद्दा है। यदि मजदूरों की आवाज दबाने का प्रयास किया गया, तो आंदोलन और अधिक व्यापक, उग्र और निर्णायक रूप लेगा।
सत्येन्द्र गुप्ता ने स्पष्ट घोषणा किया कि “यह संघर्ष समझौते का नहीं, अधिकारों की पुनर्स्थापना का है। हम झुकेंगे नहीं, रुकेंगे नहीं अधिकार लेकर रहेंगे!”
रामजी, जिलामंत्री बैंक ऑफ इंडिया ने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को कमजोर करना देश की आत्मनिर्भरता पर सीधा हमला है। बैंककर्मी निजीकरण की हर कोशिश का सड़क से संसद तक विरोध करेंगे।
जितेन्द्र शर्मा, जिलामंत्री BEFI ने कहा कि लेबर कोड के माध्यम से 8 घंटे कार्यदिवस, ओवरटाइम अधिकार और सामूहिक सौदेबाजी की ताकत को समाप्त करने की कोशिश की जा रही है, जिसे मजदूर वर्ग किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं करेगा।
कमलेश सिंह, जिलामंत्री पीएनबी ने कहा कि सरकार की नीतियां कॉरपोरेट मुनाफाखोरी को बढ़ावा देती हैं और कर्मचारियों के भविष्य से खिलवाड़ करती हैं। यह संघर्ष केवल वेतन का नहीं, बल्कि सम्मान, सुरक्षा और अस्तित्व का है।
शुभम सिंह ने कहा कि यदि सरकार ने मजदूर-विरोधी नीतियां वापस नहीं लीं तो आंदोलन को और अधिक व्यापक और राष्ट्रव्यापी स्वरूप दिया जाएगा।
प्रदर्शन के दौरान बैंककर्मियों की आवाज पूरे शहर में गूंज उठी —
“चार लेबर कोड वापस लो!”
“निजीकरण बंद करो!”
“मजदूर एकता जिंदाबाद!”
“कॉरपोरेटपरस्ती मुर्दाबाद!”
बैंककर्मियों ने एक स्वर में घोषणा की कि यह आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक श्रमिक अधिकारों की पूर्ण सुरक्षा सुनिश्चित नहीं हो जाती।

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