मजदूरो ने भरी हुंकार,19 सूत्रीय का सौंपा मांग पत्र

मजदूरो ने भरी हुंकार, पुरानी पेंशन बहाल, संविदाकर्मियो को नियमित व पत्रकारो को सुरक्षा की हुई मांग

गाजीपुर। भारतीय मजदूर संघ अपने देशव्यापी अभियान के तहत जनपद मुख्यालय स्थित सरजू पाण्डेय पार्क में बुधवार को 19 सूत्रीय मांग पत्र सूबे के मुख्यमंत्री को संबोधित पत्र अपर जिलाधिकारी को सौपा गया। इसकी जानकारी देते हुए संघ के जिला मंत्री दीपक राय ने बताया कि भारतीय मजदूर संध एक राष्ट्रवादी संगठन है और पारस्परिक सहयोग के आधार पर कार्य करता है। आज मजदूर और कर्मचारी महंगाई, बेरोजगारी और सरकारी उपेक्षाओं के कारण अत्यंत परेशान है। आंगनबाड़ी बहनों के लिए सरकार के द्वारा तय किए गए मानदेय को भी नहीं लागू किया जा रहा है। आशा एवं आशा संगिनी बहनों के साथ भी पूर्ण रूप से अन्याय हो रहा है। संविदा कर्मियों को आउटसोर्सिंग के नाम पर उनको समय पर वेतन नहीं दिया जाता है तथा नौकरी से निकाले जाने का भय सदैव रहता है। उनके लिए कोई नियमावली भी नहीं बनाई गई है। सफाई कर्मचारी को बिना सुरक्षा उपकरण के ही कार्य कराया जाता है और उचित वेतन भी नहीं दिया जाता है। एनएचएम में कार्य कर रहे संविदा कर्मियों को बीमा का लाभ देने के लिए केंद्र सरकार से बजट मिला, लेकिन उसे भी अभी तक लागू नहीं कराया गया। स्थानांतरण का भय दिखाकर उनका शोषण किया जाता है। वेतन विसंगतियां पहले से ही विद्यमान है। 108 व 102 एंबुलेंस के बर्खास्त कर्मियों को वार्ता के बाद भी अभी तक वापस नहीं लिया गया। वो भुखमरी में जी रहे हैं। पटरी रेहाड़ी दुकानदारों को प्रतिदिन उत्पीड़न और जलालत झेलनी पड़ती है। असंगठित क्षेत्र में कार्य कर रहे दिहाड़ी मजदूर, ग्रामीण मजदूर, नाई, धोबी, दर्जी अन्य सभी को कोई सामाजिक सुरक्षा व प्रतिदिन भोजन की व्यवस्था भी नहीं है। सरकारी कर्मचारियों की बहुत समय से चली आ रही पुरानी पेंशन की मांग को सरकार ने अभी तक पूरा नहीं किया है। उसी के क्रम में 25 फरवरी 2026 को अपर जिलाधिकारी के माध्यम से आपको संबोधित 19 सूत्रीय यह ज्ञापन इस आपेक्षा के साथ प्रेषित है कि इन ज्वलंत समस्याओं पर विचार कर समाधान करने का कष्ट करें। आशा कर्मचारियों को सरकारी कर्मचारी घोषित किया जाए व उन्हें प्रोत्साहन राशि के स्थान पर मानदेय दिया जाए, आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों व सहायिकाओं को सरकारी कर्मचारी घोषित करें और मानदेय में वृद्धि की जाये, प्रदेश की डिस्टिलरी एवं शुगर उद्योग में कार्यरत कर्मचारियों के त्रिपक्षीय समझौते का जल्द से जल्द निवारण कर आदेश जारी किया जाए, एनएचएम के सभी संविदा कर्मियों की बीमा, स्थानांतरण, वेतन विसंगतियों की समस्याओं का समाधान किया जाए। आयुक्त व निबन्धक सहकारिता उ.प्र. के निर्गत वेतनमान पुनरीक्षण व विसंगतियों का निराकरण करते हुए 16 बैंकों के वेतनमान पुनरीक्षण करने एवं जिला सहकारी बैंकों में सहायक महाप्रबंधक के पद का सृजन किया जाये।
बैंकिंग उद्योग में 5 दिवसीय कार्य सप्ताह लागू किया जाये। वर्ष 2001 से पूर्व के संविदा कर्मचारियों को नियमित करने व उत्तर प्रदेश परिवहन निगम के मृतक आश्रितों को नौकरी देने के आदेश का अनुपालन कराया जाए। निकायों में वर्षों से वाहन चालक का कार्य करने वाले समस्त चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को ड्राइवर के रिक्त पदों पर समायोजित किया जाए। निकायों में पं. दीनदयाल उपाध्याय कैशलेस योजना को लागू किया जाए। पटरी रेहाड़ी दुकानदारों को समुचित स्थान दिया जाये एवं उनका उत्पीड़न बंद किया जाये। ई रिक्शा, आटो को स्टैंड दिया जाए। ई रिक्शा चालक, आटो चालक, धोबी, दर्जी, बढ़ई, लुहार, मोची, कुम्हार को मजदूर की श्रेणी प्रदान की जाए और सामाजिक सुरक्षा दिया जाए। कृषि ग्रामीण एवं दिहाड़ी मजदूरों का पारिश्रमिक तय किया जाए एवं सामाजिक सुरक्षा प्रदान की जाए। संविदा व निविदा सफाई कर्मचारियों को 18 हजार रूपये का वेतन दिया जाए एवं उन्हें नियमित किया जाए। 108 व 102 एंबुलेंस के बर्खास्त कर्मियों की बहाली हो एवं धन उगाही को बंद किया जाए। संविदा व आउटसोर्सिंग कर्मचारियों की नियमावली बनाई जाये। मिड-डे मील के कर्मचारियों का मानदेय 10 हजार रूपया किया जाए। पुरानी पेंशन बहाल की जाये। पत्रकारों व श्रमजीवी पत्रकारों को सुरक्षा बीमा एवं सामाजिक सुरक्षा प्रदान की जाए।

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