
गाजीपुर।सोमवार को समाजवादी पार्टी के तत्वावधान में जिलाध्यक्ष गोपाल यादव की अध्यक्षता में पार्टी कार्यालय समता भवन पर डॉ. राम मनोहर लोहिया की जयंती और शहीद भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरु के बलिदान दिवस पर माल्यार्पण कार्यक्रम एवं विचार गोष्ठी आयोजित हुई ।
जिलाध्यक्ष गोपाल यादव ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए डॉ. लोहिया को एक महान स्वतंत्रता सेनानी, समाजवादी चिंतक और प्रखर राजनेता बताते हुए कहा कि लोहिया जी ने अपने जीवन को समाज में व्याप्त कुरीतियों और असमानता के खिलाफ संघर्ष करने में समर्पित कर दिया। डॉ. लोहिया ने भारत की आजादी की लड़ाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और देश में व्याप्त सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक असमानता के खिलाफ आवाज उठाई। उन्होंने भाजपा को पूंजीपरस्त बताते हुए कहा कि लोहिया जी पूंजीवाद के घोर विरोधी थे। उनका मानना था कि पूंजीवादी व्यवस्था आर्थिक असमानता, शोषण और केन्द्रीयकरण को बढ़ावा देता है। इस व्यवस्था में निजी सम्पत्ति और मुनाफे के लिए आम जनता के हितों की अनदेखी की जाती है। पूंजीवाद ने केवल आर्थिक असमानता पैदा करता है बल्कि सामाजिक न्याय और मानवीय गरिमा का भी विरोधी है। उन्होंने कहा वर्तमान भाजपा सरकार की पूंजीवादी व्यवस्था के चलते देश का सारा धन और सम्पत्ति अडाणी जैसे चंद पूंजीपतियों के तिजोरी में कैद हो गयी है जिसके चलते लोहिया जी के विचार आज प्रासंगिक हो उठे हैं। आज जरूरत है हम सबको लोहिया जी के रास्ते पर चलकर इस पूंजीवादी भाजपा सरकार के खिलाफ संघर्ष कर उसको सत्ता से बेदखल करने की।
पूर्व जिलाध्यक्ष सुदर्शन यादव ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि वह एक प्रखर समाजवादी विचारक थे, जिन्होंने समाज में समानता और न्याय की वकालत की। उनके विचार आज भी प्रासंगिक हैं और समाजवादी पार्टी के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
इस गोष्ठी में मुख्य रूप से पूर्व जिलाध्यक्ष रामधारी यादव, डॉ नन्हकू यादव, रामाधार यादव,राम औतार शर्मा,रविन्द्र प्रताप यादव, अरूण कुमार श्रीवास्तव, विजय शंकर यादव,मार्कण्डेय यादव,आत्मा यादव, सुभाष यादव उर्फ गुड्डू,भरत यादव, राजेश यादव,दिनेश कुमार गुजराल, संतोष यादव,रामाशीष यादव, जयराम भारती, जुमाउद्दीन, कमलेश सोनकर,पंकज यादव,पवन यादव, लालू यादव,संतोष यादव, राजेश गोड़,नरेश गोड़ रमेश यादव,चुलबुल यादव, शेषनाथ,अमित मौर्या, मुलायम सिंह यादव आदि मौजूद थे।इस गोष्ठी का संचालन जिला महामंत्री कन्हैया लाल विश्वकर्मा ने किया।