साल में एक बार फाइलेरिया से बचाव की दवा खाएं,जीवन को सुरक्षित बनाएं :सीएमओ

साल में एक बार फाइलेरिया से बचाव की दवा खाएं, जीवन को सुरक्षित बनाएं – सीएमओ

सीएमओ कार्यालय सभागार में आयोजित हुई मीडिया संवेदीकरण कार्यशाला

फाइलेरिया उन्मूलन के लिए जनसहभागिता के साथ जागरूकता भी जरूरी : डीएमओ

जनपद के 13 ब्लॉक समेत नगर के सभी वार्डों में चलेगा एमडीए अभियान

करीब 34.42 लाख लोगों को खिलाई जाएगी फाइलेरिया से बचाव की दवा

ब्लॉक के लिए 3033 और नगर के लिए 120 टीम तैयार, अपने सामने खिलाएँगे दवा

पेशेंट सपोर्ट नेटवर्क सदस्यों ने साझा किया बीमारी के उपचार व प्रबंधन का अनुभव

गाजीपुर। राष्ट्रीय फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम के तहत बुधवार को मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय सभागार में सर्वजन दवा सेवन (एमडीए) कार्यक्रम को लेकर मीडिया संवेदीकरण कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में डब्ल्यूएचओ, पाथ, पीसीआई एवं सीफार संस्था ने महत्वपूर्ण सहयोग किया।
कार्यशाला की अध्यक्षता करते हुए मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ देश दीपक पाल ने कहा कि फाइलेरिया उन्मूलन को लेकर सर्वजन दवा सेवन अभियान के लिए समस्त तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। यह अभियान 10 अगस्त से दो सितंबर तक जनपद के 13 ब्लॉकों एवं नगर के सभी 25 वार्डों में संचालित किया जाएगा। अभियान के तहत करीब 34.42 लाख लक्षित आबादी को फाइलेरिया से बचाव की दवा (एल्बेण्डाजोल व डीईसी) खिलाई जाएगी। इसके लिए ब्लॉकों में 3033 टीमें और नगर के लिए 120 टीमें तैयार की गईं हैं। एक टीम में दो सदस्य (आशा कार्यकर्ता व स्वास्थ्य कर्मी) रहेंगे। छह हजार से अधिक ड्रग एडमिनिस्ट्रेटर और 600 से अधिक सुपरवाइज़र तैनात किए गए हैं। सभी ब्लाकों के ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन व सुपरवाइज़र का प्रशिक्षण एवं टास्क फोर्स की बैठक हो चुकी है। नगर सहित सभी ब्लॉकों में पर्याप्त मात्रा में दवा उपलब्ध है। अभियान में पंचायत राज विभाग, आजीविका मिशन, सार्वजनिक वितरण प्रणाली, शिक्षा विभाग, दिव्यांग कल्याण विभाग, आईसीडीएस, नगर विकास विभाग, अल्पसंख्यक विभाग, समाज कल्याण विभाग एवं आईएमए, रोटरी क्लब, लायन्स क्लब, इनरव्हील क्लब तथा व्यापार संगठन से सहयोग लिया जाएगा।
सीएमओ ने बताया कि फाइलेरिया (फीलपाँव या हाथीपाँव) वाहक मच्छर क्यूलेक्स के काटने के बाद इसके लक्षण पांच से 15 साल के बाद दिखाई देते हैं। इसलिए एक साल से ऊपर के सभी बच्चों, किशोर-किशोरियों, वयस्कों, वृद्धजनों को फाइलेरिया से बचाव की दवा जरूर खानी चाहिए। यह दवा स्वास्थ्यकर्मी और आशा कार्यकर्ताएं घर-घर जाकर अपने समक्ष खिलाएँगी। दवा खाली पेट नहीं खानी है। यह दवा एक वर्ष से कम उम्र के बच्चों, गर्भवती और अति गंभीर रूप से बीमार व्यक्तियों को नहीं खानी है। इस दवा के पाँच साल लगातार और साल में एक बार सेवन करने से हम अपना जीवन सुरक्षित बना सकते हैं। सीएमओ ने समस्त मीडिया बंधुओं के माध्यम से जनमानस से अपील की कि फाइलेरिया से बचाव के लिए दवा का सेवन जरूर करें और दूसरों को भी प्रेरित करें।
जिला मलेरिया अधिकारी (डीएमओ) मनोज कुमार ने कहा कि किसी भी संदेश को जनमानस तक पहुंचाने में मीडिया की अहम भूमिका होती है। इसी उद्देश्य से फाइलेरिया एमडीए कार्यक्रम को लेकर मीडिया संवेदीकरण कार्यशाला का आयोजन किया गया। उन्होंने कहा कि फाइलेरिया उन्मूलन के लिए वर्ष 2027 तक का लक्ष्य रखा गया है, जिसके तहत लगातार प्रभावी नियंत्रण को लेकर कार्यवाई की जा रही है। फाइलेरिया रोग से प्रभावित अंग के साफ-सफाई और व्यायाम से इसे सिर्फ नियंत्रित किया जा सकता है। अभियान में स्वास्थ्यकर्मी अपने सामने फाइलेरिया से बचाव की दवा खिलाएँगे। इन दवाओं का वितरण बिल्कुल भी नहीं किया जायेगा। दवा का सेवन खाली पेट नहीं करना है। यह दवाएं पूरी तरह से सुरक्षित हैं। हालांकि इन दवाओं का कोई विपरीत प्रभाव नहीं है। फिर भी किसी को दवा खाने के बाद उल्टी, चक्कर, खुजली या जी मिचलाने जैसे लक्षण होते हैंतो यह इस बात का प्रतीक हैं कि उस व्यक्ति के शरीर में फाइलेरिया के परजीवी मौजूद हैं। ऐसे लक्षण इन दवाओं के सेवन के उपरांत शरीर के भीतर परजीवियों के मरने के कारण उत्पन्न होते हैं। सामान्यतः यह लक्षण स्वतः ही समाप्त हो जाते हैं। परंतु ऐसी किसी भी परिस्थिति के लिए प्रशिक्षित रैपिड रिस्पॉन्स टीम (आरआरटी) भी बनाई गई हैं। आवश्यकता पड़ने पर आरआरटी को उपचार के लिए तुरंत बुलाया जा सकता है। यह अभियान सोमवार, मंगलवार, गुरुवार, शुक्रवार के साथ कार्य दिवसों में चलेगा।
कार्यशाला में फाइलेरिया पेशेंट सपोर्ट नेटवर्क की सदस्य कासिमाबाद निवासी गुड्डी मौर्य (42 वर्ष) और हृदयलाल पासवान (29 वर्ष) ने अपने फाइलेरिया बीमारी के अनुभवों को साझा किया और फाइलेरिया से बचाव की दवा खाने के लिए प्रेरित किया। गुड्डी ने बताया कि वह करीब 30 साल से हाथीपांव बीमारी से ग्रसित हैं। इलाज में बहुत पैसा खर्च किया लेकिन कोई लाभ नहीं मिला। सब्जी की दुकान से अपना घर चलाती हैं। दो साल से नेटवर्क के साथ जुड़ीं हैं। नेटवर्क के साथ जुड़ने और नियमित व्यायाम करने से उनके पैरों की सूजन बहुत कम हो गई है। उन्हें पता नहीं था कि कई साल पहले हुई यह बीमारी इतना गंभीर रूप ले सकती है। हृदयालाल ने कहा – वह 17 साल से फाइलेरिया से ग्रसित हैं। पिछले एक साल से नेटवर्क से जुड़कर अपने पैर की सूजन को कम करने के लिए नियमित व्यायाम और योग कर रहे हैं। पहले पता होता तो हम भी फाइलेरिया से बचाव की दवा खा लेते। लेकिन अब दूसरों को प्रेरित कर रहे हैं।
कार्यशाला में अन्य मच्छर जनित संचारी रोगों जैसे डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया, कालाजार आदि को लेकर की जा रहीं प्रभावी कार्यवाई के बारे में भी जानकारी दी गई। मीडिया बंधुओं के साथ सवाल-जवाब सत्र भी चलाया गया। कार्यशाला में एसीएमओ व नोडल अधिकारी डॉ जेएन सिंह, एसीएमओ डॉ मनोज कुमार, सहायक मलेरिया अधिकारी राम सिंह, बायोलोजिस्ट एपी मौर्य, डीवीबीडीसी अंकिता त्रिपाठी, पाथ से डॉ अबु कलीम, डब्ल्यूएचओ से डॉ मंजीत सिंह चौधरी, पीसीआई से मनीष दुबे, सीफार के मंडलीय, जिला व ब्लॉक प्रतिनिधि, फाइलेरिया व मलेरिया निरीक्षक सुनील, प्रमोद, राज कुमार, नागेंद्र एवं अन्य अधिकारी व स्वास्थ्यकर्मी मौजूद रहे।

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