अधिवक्ताओं ने दी बच्चों को उनके मौलिक अधिकार की जानकारी

आर्टिकल 21 (A) के तहत प्रत्येक बच्चे को शिक्षा जीवन का सर्वांगीण विकास का मौलिक अधिकार – जिला अधिवक्ता कल्याण समिति
गाजीपुर। जिला अधिवक्ता कल्याण समिति विधिक जागरूकता पर आधारित संस्था बी-लीगल के तत्वावधान में संचालित नो योर राइट्स कैंपेन में 14 मई 2026 को डिलियां क्षेत्र स्थित लोक भारती इंटर कॉलेज में विधिक जागरूकता सेमिनार का आयोजन किया गया।


सेमिनार में उपस्थित आर एन सिद्दकी ने संविधान को विस्तृत रूप से बच्चों के मध्य रखते हुवे संविधान के अनुच्छेद के संबंध में और संविधान की अधिकारों के ताकत से अपने अधिकारों को कैसे प्राप्त करे उसपर विस्तृत चर्चा कर अवगत कराया कि, संविधान के मौलिक अधिकार के तहत बच्चों को किसी भी प्रकार का प्रति व्यक्ति शुल्क देने की आवश्यकता नहीं होती है साथ ही मुफ्त शिक्षा और उचित स्कूल की व्यवस्था करना भी सरकार का दायित्व है।

उपस्थित न्यायालय वाराणसी के अधिवक्ता धनंजय सिंह ने मौलिक अधिकार के संबंध में विस्तृत चर्चा कर मौलिक अधिकारों में बताया कि, यह कानून बच्चों को शिक्षा पाने का संवैधानिक अधिकार देता है। राज्य सरकार की जिम्मेदारी है कि वह 6 वर्ष से 14 वर्ष के बच्चों को मुफ्त शिक्षा प्रदान करे। इस अधिकार के तहत यह सुनिश्चित करता है कि आर्थिक या सामाजिक कारणों से कोई भी बच्चा प्रथमिक शिक्षा से वंचित न रहे। जिला न्यायालय के अधिवक्ता राकेश कुमार ने बताया कि Article 21A प्रत्येक बच्चे को शिक्षा का मौलिक अधिकार प्रदान करता है। इसके अंतर्गत राज्य 6 से 14 वर्ष की आयु के सभी बच्चों को निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा प्रदान करने का प्रावधान करता है।


उन्होंने कहा कि उक्त आर्टिकल 21 (A) को भारतीय संविधान के 86वें संशोधन अधिनियम 2002 के तहत जोड़ा गया तथा इसे लागू करने के लिए भारत सरकार ने शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) Act 2009 को (4 अगस्त 2009) को पारित किया जो (1 अप्रैल 2010) से प्रभावी हुआ। उपस्थित अधिवक्ता चंद्र मोहन सिंह ने आर्टिकल 21a में शिक्षा के अधिकार के तहत अवगत कराया कि शिक्षा वह प्रक्रिया है, जिससे मनुष्य अपने अंदर की क्षमताओं की विकसित कर, समाज में सही तरीके से जीवन जीना सीखता है। जो मानव ज्ञान, कौशल, मूल्य, संस्कार और जीवन जीने की सही दिशा प्राप्त करता है। मूलभूत अधिकार जीवन का अधिकार केवल शारीरिक अस्तित्व तक सीमित नहीं बल्कि सम्मानजनक जीवन का अधिकार सुनिश्चित करता है।

इस दौरान प्रोफेसर आनंद कुशवाहा ने कहा कि बी-लीगल का प्रयास है कि प्रत्येक व्यक्ति को उनके संवैधानिक अधिकारों के प्रति जागरुक किया जाये जिससे समाज में और भी सशक्तता का वातावरण बनें और इसके लिए सामाजिकता के साथ संवैधानिकता का समन्वय आवश्यक है। इस अवसर पर सेमिनार के दौरान प्रश्नोत्तरी सत्र का भी आयोजित हुआ जिसमें विद्यार्थियों ने बढ़-चढ़कर प्रश्नों का उत्तर दिया । जिसके उपरांत छात्रों में से लिस्नर ऑफ द डे का चयन किया गया। लिस्नर ऑफ द डे के रूप में चयनित कक्षा 10 की छात्रा शिवानी यादव को संविधान की एक प्रति टीम लीगल द्वारा प्रदान कर सम्मानित किया गया।

अंत में कॉलेज के प्रिंसिपल ओमप्रकाश यादव द्वारा बी-लीगल संस्था द्वारा संचालित विधिक जागरूकता कार्यक्रम को सराहते हुए कहा कि कॉलेजों में इस प्रकार के कार्यक्रमों के आयोजनों से विद्यार्थियों में शिक्षा के प्रति उमंग के साथ सशक्तता का भाव उत्पन्न होता है साथ ही सम्मानित अधिवक्ता सहित पुरी टीम का आभार व्यक्त किया। सेमिनार का संचालन डीके विश्वा ने किया।

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