न्यायालय में 53 वादों का हुआ निस्तारण, 10 को हुई सजा, 38 रिहा

गाजीपुर। अपर जिलाधिकारी वि0/रा0 वेद सिंह चौहान की अध्यक्षता में सोमवार को अभियोजन की समीक्षा बैठक कलेक्ट्रेट सभागार में सम्पन्न हुयी। बैठक में बताया गया कि सत्र न्यायालय में कुल 53 वाद निस्तारित हुए जिसमें से 10 में सजा हुई, 38 वाद में अभियुक्त रिहा हुआ तथा 33 वाद में अभियुक्त पक्षदोहिता के कारण तथा 05 बाद में अभियुक्त गुण-दोष के आधार पर रिहा हुए। 01 वाद में अपील प्रस्तावित की गयी। अन्य अधिनियम के अन्तर्गत 05 बाद निस्तारित हुए, जिसमें से 05 वाद में अभियुक्त को सजा हुआ।
थाना कोतवाली मु0अ0सं0 68/2001 वाद सं0 51/2024 धारा 323,34,325,345 मा०द०वि० स्टेट बनाम हीरा लाल में जनपद न्यायाधीश न्यायालय, गाजीपुर द्वारा अभियुक्त को दोषसिद्ध करते हुए परिवीक्षा का लाभ प्रदान किया गया। उक्त वाद में कुशल पैरवी कृपाशंकर राय,डी.जी.सी. द्वारा किया गया।
थाना दुल्लहपुर मु0अ0सं0 102/2023 वाद सं0 935/2025 धारा 380,411,457,414 मा०द०वि० स्टेट बनाम भुंवर खरवार, थाना दुल्लहपुर मु0अ0सं0 105/2023 वाद सं० 936/2025 धारा 380,411,457,414 भा०द०वि० स्टेट बनाम भंवर खरवार, थाना दुल्लहपुर मु0अ0सं0 107/2023 वाद सं० 937/2025 धारा 380,411,457,414 भा०द०वि० स्टेट बनाम भंुवर खरवार तथा थाना दुल्लहपुर मु०अ०सं० 108/2023 वाद सं0 938/2025 धारा 380,411,457,414 भा०द0वि० स्टेट बनाम भुंवर खरवार में मा० ए०डी०जे० प्रथम- न्यायालय, गाजीपुर द्वारा अभियुक्त को 02 वर्ष 06 माह का कारावास व रू0 10000 अर्थदण्ड अधिरोपित किया गया। उक्त वादों में नीरज कुमार श्रीवास्तव,ए.डी.जी.सी. द्वारा कुशल पैरवी की गयी।
थाना सादात मु0अ0सं0 68/2024 वाद सं0 1131/2024 धारा 363,366,376 भा०द०वि० व 5एल/6 पाक्सो एक्ट स्टेट बनाम अरमान उर्फ भोला में मा० पाक्सो न्यायालय, गाजीपुर द्वारा अभियुक्त को 25 वर्ष की कठोर कारावास की सजा तथा अर्थदण्ड लगाया गया। उक्त वाद में कुशल पैरवी रविकान्त पाण्डेय विलो० अभि० द्वारा किया गया। अभियोजन संवर्ग अन्तर्गत कुल 438 वारण्ट निर्गत हुए जिसके सापेक्ष 243 वारण्ट तामिल हुए तथा 151 गवाह उपस्थित हुए जिसमें से 141 गवाह परीक्षित हुए तथा 10 गवाह अपरीक्षित हुए क्योंकि पीठासीन अधिकारी अवकाश पर रहे तथा अधिवक्ता न्यायिक कार्य से विरत रहे। सत्र न्यायालयों में सम्मन/वारण्ट/तलब गवाहों हेतु कुल 738 सम्मन निर्गत हुए जिसके सापेक्ष 533 तामिल हुए। तामिला के सापेक्ष कुल 304 गवाह उपस्थित हुए। उपस्थित गवाहों के सापेक्ष कुल 277 गवाह परीक्षित हुए तथा 27 गवाह अधिवक्ता के हड़ताल तथा पी.ओ. के अवकाश के कारण परीक्षित नहीं हो सके।
कुल 58 जमानत प्रार्थना पत्र दाखिल हुए जिसमें 01 जमानत स्वीकृत हुए तथा 57 जमानत प्रार्थना पत्र अस्वीकृत हुए। जमानत प्रार्थना पत्रों में सुनवाई के दौरान पुलिस द्वारा की गयी कार्यवाही पर सतर्क   दृष्टि रखी जाए, जिससे ज्ञात हो सके कि पुलिस विभाग द्वारा प्रकरण में गम्भीरता बरती जा रही है कि नहीं? सभी अभियोजकगण को निर्देशित किया गया कि प्रत्येक माह कम से कम एक वाद की केस डायरी बनायी जाए कि पुलिस द्वारा की गयी अपनी विवेचना में क्या-क्या त्रुटिया कमियां की गयी, जिससे कि वाद में स्टेट के विरुद्ध आदेश पारित हुआ, जिससे समीक्षा के दौरान उक्त बिन्दु पर भी सुधार किया जा सके तथा अधिक से अधिक वादों का निस्तारण सुनिश्चित किया जा सके। कुल 38 वादों में पक्षद्रोहिता के कारण अभियुक्त रिहा हो गए। अपर जिलाधिकारी द्वारा जिला शासकीय अधिवक्ता (फौजदारी) तथा लोक अभियोजकों को निर्देशित किया गया कि रिहा हुए अभियुक्तों के वादों की पुनः विधिवत समीक्षा कर ले। यदि पुनः अपील किया जाना शासकीय हित में हो तो पुनः अपील का प्रस्ताव तैयार कर प्रस्तुत करे। जिन वादों में गवाह पक्षद्रोही हो रहे है। कुछ वाद में पक्षद्रोही हुए गवाहों पर मुकदमा कर सजा दिलाने की कार्यवाही सुनिश्चित किया जाए, जिससे सुधार हो सके। हमारा प्रयास पीड़ित को न्याय दिलाना होना चाहिए। इसके लिए पत्रावली में वादी के अलावा अन्य उपलब्ध साक्षियों का भी साक्ष्य कराया जाए।

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