इमाम हुसैन की याद में निकालते हैं ताजिया और घोड़ा: डॉ. आजम क़ादरी

गाजीपुर। मुस्लिम समाज में मोहर्रम गम के त्यौहार के रूप में मनाया जाता है जो एक मोहर्रम से शुरू होकर 10 मोहरम तक चलता है। इसी 10 मोहरम को जनपद के विभिन्न इलाकों से सैकड़ो ताजिया निकाल कर अपने अपने इमामबाड़े में दफन किया जाता है। जिसको लेकर जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन की तरफ से सुरक्षा के मुकम्मल व्यवस्था करने का दावा भी किया जाता है जिसको लेकर गाजीपुर में भी जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक खुद रूट मार्च किया और ताजिया वाले मार्गों पर पुलिस की विशेष व्यवस्था लगाई गई ताकि किसी को भी कोई दिक्कत ना हो।

10 मुहर्रम को एक ऐसी घटना हुई थी, जिसका विश्व इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान है। इराक स्थित कर्बला में हुई यह घटना दरअसल सत्य के लिए जान न्योछावर कर देने की जिंदा मिसाल है। इस घटना में हजरत मुहम्मद के नवासे (नाती) हजरत हुसैन को शहीद कर दिया गया था। कर्बला की घटना अपने आप में बड़ी विभत्स और निंदनीय है। बुजुर्ग कहते हैं कि इसे याद करते हुए भी हमें हजरत मुहम्मद का तरीका अपनाना चाहिए। जबकि आज आमजन को दीन की जानकारी न के बराबर है।

अल्लाह के रसूल वाले तरीकोंसे लोग वाकिफ नहीं हैं। आज जनपद गाजीपुर में 10 मोहर्रम के अवसर पर जनपद में अलग-अलग जगहों पर अलग अलग कमेटियों के ताजिया चारों के द्वारा मोहर्रम का जुलूस निकाला गया जो अपने तय मार्गो से घूमते हुए इमाम बाड़े तक पहुंचा। इस अवसर पर मुस्लिम समाज से जुड़े लोगों ने मातम भी करते हुए नजर आए मातम के बाद इन लोगों ने इमाम बाड़े में ताजिया को दफन करने का काम किया।

नगर क्षेत्र के विशेश्वरगंज स्थित इमामबाड़े में भी ताजिया दफन करने का कार्य किया गया लेकिन इस ताजिया में भी अनोखापन देखने को मिला कि जहां ताजिया की लंबाई काफी कम रही वहीं ताजिया के आगे घोड़ा भी चलते हुए नजर आया। इसको लेकर ताजियादार कमेटी के सदस्य डॉक्टर आजम कादरी ने बताया कि जंग में इमाम हुसैन के साथ ही उनके घोड़े की भी शहादत हुई थी इसलिए हम लोग इमाम हुसैन की याद में ताजिया निकालने के साथ ही दुलदुल का घोड़ा भी निकालते हैं।

जानकार बताते हैं कि ताजिया के दफन करने के बाद जहां मोहर्रम का पर्व खत्म हो जाता है वही शिया समाज में गमों का यह त्यौहार अगले 40 दिनों तक चलता रहता है।

Leave a comment

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.