गाजीपुर। उत्तर प्रदेश सरकार ने जिला पंचायत अध्यक्षों को भी प्रशासक पद पर बैठा दिया है। इससे पहले सरकार की ओर से प्रधानों को ग्राम पंचायतों में प्रशासक की भूमिका में तैनात किया गया था। हालांकि, मामले को कोर्ट में चुनौती दे दी गई। कानूनी पेंच प्रक्रिया में फंसा हुआ है। इस बीच सरकार ने प्रदेश में पहली बार जिला पंचायत अध्यक्षों को भी प्रशासक बना दिया। पंचायती राज विभाग की ओर से शुक्रवार शाम इस संबंध में शासनादेश जारी कर दिया गया। दरअसल, प्रदेश की 75 में से 68 जिला पंचायतों में भाजपा समर्थित अध्यक्ष विराजमान हैं। ऐसे में सरकार के इस निर्णय से उनकी कुर्सी बची रहेगी। क्षेत्र में धाक भी बनी रहेगी। इस फैसले से हो सकता है कि पार्टी को विधानसभा चुनाव में इसका लाभ मिल सकता है। इसी क्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष सपना सिंह ने जिला पंचायत के प्रशासक के रुप में कार्यभार ग्रहण किया। जिला पंचायत के अपर मुख्य अधिकारी ने सपना सिंह को जिलाधिकारी का आदेश सौंपा जिसमे उन्हे जिला पंचायत के प्रशासक के रुप में नियुक्ति का आदेश था। इस अवसर पर भाजपा के जिलाध्यक्ष ओमप्रकाश राय, महामंत्री विष्णु सिंह, पंकज सिंह चंचल एवं कार्यालय के अधिकारी और कर्मचारी मौजूद थे। जिला पंचायत का प्रशासक बनने पर सपना सिंह को भाजपा नेताओं सहित अन्य लोगों ने बधाई दी।
उत्तर प्रदेश सरकार के पंचायती राज विभाग द्वारा जारी शासनादेश में प्रशासकों की शक्तियों और कार्यप्रणाली को लेकर कुछ विशेष दिशा-निर्देश दिए गए हैं:
- कार्यकाल: यह व्यवस्था 12 जुलाई से लागू हो गई है。त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव होने और नई पंचायतों के गठन तक वर्तमान अध्यक्ष ही प्रशासक की भूमिका में रहेंगे।
- सीमित अधिकार: प्रशासक केवल सामान्य, नियमित प्रशासनिक कार्यों और पहले से स्वीकृत विकास योजनाओं की निगरानी करेंगे।
- नीतिगत फैसले नहीं: इन्हें कोई भी नया नीतिगत फैसला लेने या नई योजनाओं को स्वीकृत करने का अधिकार नहीं होगा。विशेष परिस्थितियों में शासन से अनुमति लेने के बाद ही नीतिगत निर्णय लिए जा सकेंगे।