गाजीपुर। राजकीय महिला महाविद्यालय महुआबाग में बुधवार को विद्यार्थियों व शोधार्थियों हेतु कृत्रिम मेधा संबंधित व्याख्यान का आयोजन किया गया। व्याख्यान का विषय था: कृत्रिम मेधा-शोध की संभावनाएँ एवं चुनौतियाँ व मुख्य वक्ता के रूप में गोविंद बल्लभ पंत सामाजिक विज्ञान संस्थान, झूसी, प्रयागराज के निदेशक प्रो योगेंद्र प्रताप सिंह ने इस विषय पर अपना वक्तव्य रखा। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ शंभू शरण प्रसाद ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि शोध को गहन होना चाहिए। कृत्रिम मेधा की महत्ता को स्वीकार करते हुए उन्होंने बुद्धिमत्ता से इसका उपयोग करने का सुझाव दिया।

मुख्य वक्ता योगेंद्र प्रताप सिंह ने इसके उपयोग के सही तरीके से विद्यार्थियों व शोधार्थियों को परिचित कराया। उन्होंने कहा कि किसी भी नवाचार के साथ अच्छाई व बुराई दोनों आते हैं किन्तु उस नवाचार को स्वीकृति तभी मिलती है, जब उसका सदुपयोग अधिक हो। इसी क्रम में उन्होंने कहा कि कृत्रिम मेधा हमारी प्रतिच्छाया की तरह उपस्थित है, यही कारण है कि यह सृजन कर सकता है और यदि सृजन कर सकता है तो संहार भी कर सकता है। उन्होंने नवीन पीढ़ी को सतर्क होने का सुझाव देते हुए कहा कि पहला विश्वास अपने विद्यालय -महाविद्यालय व गुरु पर ही करें।

मुख्य वक्ता ने शोध के लिए परप्लेक्सिटी AI टूल के बारे में बताते हुए कहा कि AI का प्रयोग मात्र एक टूल की तरह ही करें, उससे मात्र सहायता लें। अपने व्याख्यान के अन्त में उन्होंने शोधार्थियों के कुछ प्रश्नों का उत्तर देते हुए उनकी समस्याओं का निवारण किया। कार्यक्रम का संचालन कर रही डॉ शशिकला जायसवाल ने इसको अपना गुरु न बनाने की सलाह दी।

कार्यक्रम में महाविद्यालय के डॉ शिव कुमार, डॉ संगीता मौर्य, डॉ सारिका सिंह, डॉ रामनाथ केसरवानी, डॉ शिखा सिंह आदि शोध पर्यवेक्षक एवं हिंदी, जंतु विज्ञान, अंग्रेजी, उर्दू, मनोविज्ञान, गृहविज्ञान, इतिहास आदि विषयों के विद्यार्थी व शोधार्थी उपस्थित रहे। धन्यवाद ज्ञापन शोध प्रभारी डॉ निरंजन यादव ने किया।

