80वें स्वतंत्रता दिवस पर उर्दू अदब की शाम, मरहूम सैफुर्रहमान अब्बाद गाजीपुरी की याद में सजा भव्य मुशायरा
रेल प्रशिक्षण केंद्र में सजा कवि सम्मेलन, एसपी सिटी डॉ. राकेश मिश्र ‘तूफान’ के शेरों पर खूब बजी तालियां
गाजीपुर। 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति एवं डाक मनोरंजन क्लब के संयुक्त तत्वावधान में रविवार की देर शाम रेल प्रशिक्षण केंद्र के सभागार में उर्दू अदब के मशहूर शायर मरहूम सैफुर्रहमान अब्बाद गाजीपुरी की याद में भव्य मुशायरा एवं कवि सम्मेलन आयोजित किया गया। देशभक्ति और साहित्यिक भावनाओं से ओतप्रोत इस अदबी महफिल में नामचीन शायरों और कवियों ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं को देर रात तक बांधे रखा।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रसिद्ध साहित्यकार डॉ. कलीम कैसर रहे। युवा शायर मासूम रजा राशदी ने शानदार अंदाज में मंच संचालन करते हुए पूरी महफिल को एक सूत्र में बांधे रखा। विशिष्ट अतिथियों में एसपी सिटी गाजीपुर डॉ. राकेश मिश्र ‘तूफान’, वाराणसी के पूर्व प्रधानाचार्य जनाब आबिद सलेमपुरी तथा एम.ए.एच. इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य जनाब खालिद अमीर मौजूद रहे।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि एवं विशिष्ट अतिथियों द्वारा मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। इसके बाद मुशायरे में गाजीपुर सहित प्रदेश के विभिन्न जनपदों से आए शायरों ने अपने कलाम प्रस्तुत कर श्रोताओं की खूब वाहवाही लूटी।

एसपी सिटी डॉ. राकेश मिश्र ‘तूफान’ ने अपनी नज्म और शेरों से महफिल में विशेष रंग भर दिया। उन्होंने कहा—
“साहिल पर ही बैठे-बैठे सोचो चाहे जो लेकिन,
सागर में मिलने की खातिर दरिया होना पड़ता है।”
वहीं उनके इस शेर—
“शोहरत की बढ़ती राहों से तुम भी घर आ जाओगे,
दिन ढलते ही सूरज को भी जाकर सोना पड़ता है।”
पर सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।
मुशायरे में शमशाद अंबर आफाकी, दर्द देहलवी, डॉ. साजिद गाजीपुरी, डॉ. सैयद जफर असलम, डॉ. अमरनाथ तिवारी, सोज जुमानवी, खालिद गाजीपुरी, अहकम गाजीपुरी, दीप मुहम्मदाबादी, सैफी सलेमपुरी, आसी यूसुफपुरी, बादशाह राही, हण्टर गाजीपुरी, मिथिलेश गहमरी और माहताब माहिर सहित अन्य शायरों ने एक से बढ़कर एक कलाम पेश कर महफिल में चार चांद लगा दिए।

देर रात तक चले इस अदबी सफर में श्रोताओं ने देशभक्ति, सामाजिक सरोकार और उर्दू साहित्य की विविध रंगों से सजी प्रस्तुतियों का आनंद लिया। कार्यक्रम मरहूम सैफुर्रहमान अब्बाद गाजीपुरी की साहित्यिक स्मृतियों को समर्पित रहा और स्वतंत्रता दिवस की भावना के साथ उर्दू अदब की खूबसूरत विरासत का संदेश भी देता रहा।