देश में अराजकता फैलाने की कोशिश कर रहा मुद्दाविहीन विपक्ष: पूर्व मंत्री विजय मिश्र
- मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पद्मश्री और पद्मविभूषण के योग्य, SIR से सामने आई मतदाताओं की वास्तविक संख्याआंदोलन के नाम पर उपद्रव कर रहे राहुल गांधी और विपक्ष, 90 से अधिक चुनाव हारने के बाद उपजी हताशा का परिणाम
- आंदोलन के नाम पर उपद्रव कर रहे राहुल गांधी और विपक्ष, 90 से अधिक चुनाव हारने के बाद उपजी हताशा का परिणाम
गाजीपुर। उत्तर प्रदेश सरकार के पूर्व मंत्री व भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नेता विजय मिश्र ने स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) और चुनाव आयोग के विरोध में विपक्ष द्वारा किए जा रहे प्रदर्शनों पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि देश में विपक्ष द्वारा जानबूझकर अराजकता का माहौल बनाने का कुत्सित प्रयास किया जा रहा है।
चुनाव आयोग और ज्ञानेश कुमार के कार्य की सराहना
पूर्व मंत्री विजय मिश्र ने कहा कि उनकी दृष्टि में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पद्मश्री और पद्मविभूषण सम्मान पाने के योग्य हैं। उन्होंने ऐसा ऐतिहासिक कार्य किया है जो अब तक किसी चुनाव आयोग ने नहीं किया था। एसआईआर (SIR) के माध्यम से देश में पहली बार मतदाताओं की वास्तविक संख्या सामने आई है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि पहले एक ही व्यक्ति का नाम गांव, शहर और नौकरी करने वाले जनपद यानी दो-दो, तीन-तीन जगहों की मतदाता सूचियों में दर्ज होता था। इसके अलावा विदेशी नाम, रोहिंग्या और बांग्लादेशियों के फर्जी नाम भी शामिल थे। अब यह सभी दोहरे व अवैध नाम कटकर एक जगह आ गए हैं।
मतदान प्रतिशत में ऐतिहासिक वृद्धि का विश्वास
विजय मिश्र ने कहा कि पहले सपा, बसपा, कांग्रेस और भाजपा सहित सभी राजनीतिक दल और चुनाव आयोग बूथों पर शत-प्रतिशत मतदान कराने का भरपूर प्रयास करते थे, फिर भी 60, 65 या 70 प्रतिशत से अधिक वोटिंग नहीं हो पाती थी। इसका मुख्य कारण मतदाता सूची में नामों का दोहराव था, जबकि वास्तविक मतदाता एक ही जगह मौजूद होता था। अब वास्तविक मतदाता संख्या सामने आने से उन्हें पूरा विश्वास है कि आने वाले समय में 90 से 95 प्रतिशत से अधिक मतदान दर्ज होगा।
विपक्ष पर तीखा प्रहार: ‘मुद्दाविहीन लोग फैला रहे उपद्रव’
भाजपा नेता ने कहा कि वास्तव में यह कोई मुद्दा ही नहीं है, लेकिन मुद्दाविहीन और विचारविहीन विपक्ष जबरन इसे तूल देकर देश में अशांति फैलाना चाहता है। उन्होंने कहा कि यह कोई ‘आंदोलन’ नहीं, बल्कि सरासर ‘उपद्रव’ है।
उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि लोकतंत्र में आंदोलन अपनी बात रखने का माध्यम होता है और सरकार ने हमेशा लोकतांत्रिक अधिकारों का सम्मान किया है—चाहे किसानों का आंदोलन रहा हो या सीएए (CAA) और नीट (NEET) का विषय, सभी को शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अवसर दिया गया। लेकिन जब विपक्ष को संसद या जंतर-मंतर पर समय मिला, तो उन्होंने केवल उपद्रव करने का काम किया।
राहुल गांधी के आचरण पर सवाल
राहुल गांधी पर सीधा निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि राहुल गांधी का आचरण, व्यवहार और भाषा यह दर्शाती है कि वे कांग्रेस को पूरी तरह समाप्त करने पर आमादा हैं। उन्होंने संसद में जबरन घुसने का प्रयास किया, आकाशवाणी और सर्वोच्च न्यायालय में घुसने की कोशिशें कीं। जब मुख्य न्यायाधीश ने स्पष्ट कहा था कि याचिका विचाराधीन है और उस पर सुनवाई होगी, इसके बावजूद उन्होंने न्यायपालिका की मर्यादा का ध्यान नहीं रखा। उन्होंने कहा कि देश में 90 से अधिक चुनाव हार चुकी कांग्रेस की यह हताशा और निराशा अब उपद्रव के रूप में बाहर आ रही है।
प्रशासनिक व न्यायिक व्यवस्था का उदाहरण
पूर्व मंत्री ने शासन व्यवस्था की कार्यप्रणाली का उदाहरण देते हुए कहा कि सरकारी फाइलों पर क्लर्क से लेकर सेक्शन अफसर, जॉइंट सेक्रेटरी और प्रमुख सचिव तक भिन्न-भिन्न राय दर्ज करते हैं, जिसके बाद उच्च स्तर पर अंतिम निर्णय लिया जाता है। इसी प्रकार मीडिया में संपादक या अदालतों में जजों की संयुक्त पीठ (बेंच) में विभिन्न मत होते हैं, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं होता कि पूरी व्यवस्था पर ही सवाल खड़े कर दिए जाएं या इस्तीफे मांग लिए जाएं। यह पूरी दुनिया में कार्य करने की सामान्य व पारदर्शी पद्धति है।
अंत में उन्होंने दोहराया कि विपक्ष पूरी तरह दिशाहीन हो चुका है और अपनी राजनीतिक जमीन खिसकती देख केवल उपद्रव और अराजकता की राजनीति कर रहा है।