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त्योहारों को लेकर डीएम-एसपी ने की बैठक, दिए निर्देश

गाजीपुर। आगामी त्यौहार नवरात्रि, दशहरा, दिपावली एवं छठ पूजा के मद्दे नजर रखते हुए जनपद में साम्प्रदायिक सौहार्द एवं शान्ति व्यवस्था बनाये रखने हेतु सेन्ट्रल पीस कमेटी की बैठक शनिवार को जिलाधिकारी अविनाश कुमार एवं पुलिस अधीक्षक डा0 ईरज राजा की उपस्थिति में पुलिस लाईन सभागार में सभी धर्मगुरूयो एवं नागरिको के साथ बैठक सम्पन्न हुई। जिलाधिकारी अविनाश कुमार ने बैठक में आये सभी धर्मों के नागरिकों को साधुवाद देते हुए कहा कि आप सभी लोग अपने-अपने समाजिक दायित्वों का निर्वाहन करने के लिए इस बैठक में उपस्थित हुए इसके लिए आप सभी का बहुत-बहुत धन्यवाद। उन्होने सभी उपस्थित सम्भ्रान्त नागरिकों का आह्वाहन करते हुए अपील की है कि जिस प्रकार विगत वर्षों में सभी धर्मों के लोग आपसी भाई चारे से सभी त्यौहार मे मिल जुल कर मनाते रहे है, आगे भी उसी तरह से गंगा जमुनी तहजीब को कायम रखते हुए इसका अक्षरशः पालन करेंगे।

जिलाधिकारी ने कहा कि सभी धर्मों के त्यौहारों का एक ही मकसद होता है कि दूसरों की भावनाओं को आहत किये बिना हर्षोंल्लास के साथ त्यौहार मनायें। उन्होने जनपद वासियों का आह्वाहन करते हुए अपील की कि किसी भी प्रकार की भ्रामक खबरों को प्रसारित करने से बचे और कोई भी इस प्रकार भ्रामक सूचना यदि उन्हे प्राप्त होती है तो उसकी सूचना तत्काल जिला प्रशासन को दे, ताकि उस सूचना की जॉच करते हुए उसका निस्तारण समयान्तर्गत कराया जा  सके। पण्डाल समिति अपने-अपने आंतरिक व्यवस्थाएॅ पूर्व मे सुनिश्चित करे ले तथा जिन्होने परमीशन न लिया हो वे लिखित रूप से सम्बन्धित अधिकारी से परमीशन लेकर दिये गये शर्ताे का पालन अवश्य करेगे। पण्डाल के सजावट के दौरान अत्यन्त ज्वलनशील वस्तुओ का प्रयोग न किया जाये। पण्डाल मे प्रवेश व निकास द्वारा मे उचित स्थान रहे।

सड़क के किनारे पण्डाल न लगाया जाये तथा पण्डाल में रेत, पानी, सी सी टी वी कैमरा की व्यवस्था अवश्य रहे।  इस हेतु उन्होने सम्बन्धित अधिकारी को पूर्व में निरीक्षण कर आश्वस्त होने निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि दुर्गा पूजा पण्डाल के नाम पर कोई भी अन्य नया कार्य न हो, पण्डाल मे अश्लील गाने कदापि न बजे न ही आरकेस्ट्रा का आयोजन हो। पण्डाल स्थल पर महिला एव पुरूषो के लिए अलग-अलग लाईने लगायी जाये। उन्होने बताया कि शासन द्वारा स्पष्ट निर्देश दिये गये है कि त्यौहारों को पारम्परिक ढंग से मनाया जाये और किसी भी प्रकार की नई परम्परा का आरम्भ न की जाये। उन्होने सभी नगर पालिका एवं नगर पंचायत के अधिशासी अधिकारियों को निर्देशित करते हुए कहा कि त्यौहार के समय अपने- अपने क्षेत्रों में पानी, बिजली और साफ सफाई की व्यवस्था मुकम्मल रखें। विद्युत विभाग को जर्जर तार, खम्भे, विद्युत आपूर्ति को सही कराने तथा विसर्जन के दौरान रास्तो पर विशेष रूप से मौके का निरीक्षण कर ढीले एव लटके हुए जर्जर तारो को प्राथमिकता के तौर पर सही कराने का निर्देश दिया।

जिलाधिकारी ने लोक निर्माण विभाग, आर ई डी एवं जिला पंचायत द्वारा अपनी अपनी सड़कों को गडढ़ा मुक्त करें जिससे कि आने-जाने में किसी भी प्रकार की समस्या उत्पन्न न हों। जिलाधिकारी ने सभी पंडाल समितियों को निर्देश दिया कि वालेंटियर बनाते हुए उनका नाम पता मोबाइल नम्बर प्रशासन को उपलब्ध करायें। जिलाधिकारी ने समस्त जनपदवासीयों को शारदीय नवरात्रि की शुभकामनाएं दी।
पुलिस अधीक्षक डा0 ईरज राजा ने बैठक को सम्बोधित करते हुए बताया कि जनपद में सभी स्थानों पर पुलिस की व्यवस्था चाक चौबन्द रहेगी और सभी चौराहों पर पिकेट के माध्यम से निगरानी रखी जा रही है। पुलिस की टीम जनपद में भाई चारा, साम्प्रदायिक सौहार्द एवं शान्ति व्यवस्था बनाये रखने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होने अपील करते हुए कहा किसी भी भ्रामक खबरो पर ध्यान न दे नही किसी भी सोशल साईट पर आने वाले भ्रामक खबरो व फोटो को पोस्ट न करे अन्यथा सम्बन्धित के खिलाफ ही कार्यवाही सुनिश्चित की जायेगी।

जनपद में महिला के सम्मान एव सुरक्षा हेतु एण्टी रोमियो स्क्वायर्ड टीम सक्रिय रहेगी एवं विभिन्न पण्डालो पर महिला सुरक्षा कर्मियो की भी तैनाती की जायेगी। पण्डालो एवं अन्य स्थानो पर शस्त्रो का प्रदर्शन पूर्णतया वर्जित रहेगा।  उन्होने कहा कि पुलिस  अराजक तत्वो पर पैनी नजर रहेगी तथा इस तरह के शोहदो पर कठोर कार्यवाही की जायेगी।  उन्होने समस्त सम्बन्धित क्षेत्राधिकारियों एवं थाना/चौकी प्रभारियों को निर्देशित करते हुए कहा कि अपने अपने क्षेत्र के सम्भ्रान्त नागरिकों एवं पीस कमेटी के सदस्यों से समन्वय स्थापित करते हुए जनपद में भाई चारा, साम्प्रदायिक सौहार्द एवं शान्ति व्यवस्था बनाये रखें।


बैठक में अपर जिलाधिकारी वि0/रा0 दिनेश कुमार सिंह, अपर जिलाधिकारी भू/रा0 आयुष चौधरी, अपर पुलिस अधीक्षक ग्रामीण/शहरी, जिला विकास अधिकारी सुभाष चन्द्र सरोज, समस्त उपजिलाधिकारी, समस्त क्षेत्राधिकारी, समस्त सम्बन्धित अधिकारीगण,  समस्त अधिशासी अधिकारी नगर पालिका/नगर पंचायत सहित गणमान्य नगारिक  एवं धर्म गुरू उपस्थित थे।

प्राचार्य परिषद की कार्यकारिणी ने कुलपति से की शिष्टाचार मुलाकात

वीर बहादुर सिंह प्राचार्य परिषद की कुलपति से की शिष्टाचार मुलाकात

गाजीपुर। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय, जौनपुर से संबद्ध महाविद्यालयों की नवगठित प्राचार्य परिषद की कार्यकारिणी ने शनिवार को विश्वविद्यालय की कुलपति प्रोफेसर वन्दना सिंह से शिष्टाचार भेंट की। इस दौरान प्राचार्य परिषद के अध्यक्ष प्रो. राघवेन्द्र कुमार पाण्डेय, महामंत्री प्रो. सुरेश कुमार पाठक एवं कोषाध्यक्ष प्रो. बृजेश कुमार जायसवाल ने कुलपति को परिषद के विधिवत गठन की जानकारी दी। प्राचार्य परिषद ने कुलपति को आश्वस्त किया कि परिषद विश्वविद्यालय के सतत विकास में सहयोगी की भूमिका निभाएगी और शैक्षिक गुणवत्ता को बेहतर बनाने में हर संभव योगदान देगी।


कुलपति ने परिषद के गठन का स्वागत करते हुए कहा कि महाविद्यालयों के प्राचार्य विश्वविद्यालय की रीढ़ होते हैं और उनके सक्रिय सहयोग से शिक्षा व्यवस्था को और भी सुदृढ़ बनाया जा सकता है। इस अवसर पर परिषद की कार्यकारिणी ने विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. विनोद कुमार सिंह से भी मुलाकात की। कुलसचिव ने नवगठित कार्यकारिणी को शुभकामनाएं देते हुए विश्वास व्यक्त किया कि परिषद प्रशासन और महाविद्यालयों के बीच एक मजबूत समन्वय सेतु का कार्य करेगी।

साहित्य में स्त्री अस्मिता की तलाश विषय पर हुआ शोध प्रबंध

गाजीपुर। राज‌कीय महिला स्नातकोत्तर महाविद्यालय महुआबाग में शनिवार को हिन्दी विभाग के शोधार्थी नागेन्द्र ने अपने शोध प्रबंध का आज जमा पूर्व प्रस्तुतीकरण किया। नागेन्द्र ने ‘नासिरा शर्मा के कथा साहित्य में स्त्री अस्मिता की तलाश ” विषय पर अपना शोध प्रबंध पूर्ण किया है। ये डॉ. निरंजन कुमार यादव के निर्देशन में शोध कार्य कर रहे थे । इन्होंने प्री. सबमिशन के अवसर पर अपने शोध प्रबंध के विषय पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह शोध प्रबंध छ: अध्यायों में विभक्त है। जिसमें नासिरा शर्मा के कथा साहित्य और उस कथा साहित्य में उपस्थित स्त्री जीवन एवं अस्मिता की आलोचनात्मक पडताल है। जैसा कि हम जानते है कि भारत बहुलतावादी संस्कृति का देश है। इसे एक रेखीय रूप में नहीं जाना जा सकता। ठीक वैसे ही ‘स्त्री जीवन’ एक पद है लेकिन इस पद के साथ यह भी प्रश्न उठता है कि कौन सी स्त्री का जीवन ? हिन्दू स्त्री या मुस्लिम स्त्री का जीवन? या संवैधानिक भाषा में कहे तो सामान्य, ओबीसी, अनुसूचित या अनुसूचित जनजाति की स्त्री का जीवन?


तब यह सवाल थोड़ा जटिल हो जाता है। इस मामले में नासिरा शर्मा का लेखन स्त्री जीवन को पूरेपन में देखने की कोशिश की करता हैं। जहाँ हिन्दू और मुस्लिम दोनों समाज की स्त्रियाँ अपने वजूद और संघर्ष के साथ उपस्थित हैं। यह नासिरा शर्मा का हिन्दी साहित्य को दिया गया वह अवदान है जिससे हिन्दी साहित्य कुछ हद तक भारतीय समाज में स्त्री जीवन को पूरेपन के साथ उपस्थित करने का एक सुन्दर प्रयास करता है. वह भी बिना किसी वैचारिक आग्रह और विभाजन के। प्राचार्य प्रो. अनीता कुमारी कहा कहा कि कि हिन्दू समाज को स्त्रियों के दुःख-दर्द तो सार्वजनिक है लेकिन मुस्लिम जीवन की स्त्रियों के दुःख और संघर्ष को चित्रित करना साहस का काम है। इस अवसर पर हिन्दी विभागाध्यक्ष डा. संगीता, डॉ शशिकला जायसवाल, डॉ निरंजन कुमार यादव, पीयूष सिंह, नेहा कुमारी, अनुश्री एवं महाविद्यालय की छात्राएं उपस्थित रहीं। शोधार्थी ने अपने शोध की एक प्रति प्राचार्य को पुस्तकालय हेतु प्रदान किया ।इस आयोजन का धन्यवाद ज्ञापन मीडिया प्रभारी डॉ शिव कुमार ने किया।

विधान परिषद सदस्यों के चुनाव हेतु मतदाता सूची का पुनरीक्षण 30 सितम्बर से

विधान परिषद सदस्यों के चुनाव हेतु मतदाता सूची का पुनरीक्षण 30 सितम्बर से होगा
मतदाता सूची का 30 दिसम्बर को अंतिम प्रकाशन
                                             
गाजीपुर। भारत निर्वाचन आयोग के निर्देश पर उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी  नवदीप रिणवा द्वारा प्रदेश की विधान परिषद के पांच स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों तथा छह शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के सदस्यों का कार्यकाल आगामी वर्ष 06 दिसंबर, 2026 को समाप्त होने के कारण इन निर्वाचन क्षेत्रों की निर्वाचक नामावलियों का पुनरीक्षण कराया जा रहा है। अर्हता तिथि 01 नवम्बर, 2025 के आधार पर यह पुनरीक्षण कार्यक्रम संबंधित निर्वाचन क्षेत्रों में 30 सितंबर, 2025 से प्रारंभ होगा। इस निर्वाचक नामावलियों का अंतिम प्रकाशन 30 दिसंबर, 2025 को किया जाएगा। मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि अगले वर्ष 06 दिसम्बर को विधान परिषद में स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की जो 05 सीटें रिक्त हो रही है, उसमें लखनऊ, वाराणसी, आगरा, मेरठ एवं इलाहाबाद-झांसी है। इसी प्रकार शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की जो 06 सीटें रिक्त हो रही है, उसमें लखनऊ, वाराणसी, आगरा, मेरठ, बरेली-मुरादाबाद एवं गोरखपुर-फैजाबाद है। इन सभी निर्वाचन क्षेत्रों में मतदाता सूची के पुनरीक्षण के लिए 30 सितंबर को सार्वजनिक नोटिस जारी होगा। 15 अक्टूबर को समाचार पत्रों में नोटिस का प्रथम पुनर्प्रकाशन तथा 25 अक्टूबर को इसका द्वितीय पुनर्प्रकाशन होगा। फार्म 18 या 19 में आवेदन प्राप्त करने की अंतिम तिथि 06 नवंबर तथा 20 नवंबर को पांडुलिपियों की तैयारी व निर्वाचन नामावलियों का मुद्रण होगा। निर्वाचक नामावलियों का आलेख्य प्रकाशन 25 नवंबर को होगा। दावंे-आपत्तियां दाखिल करने की अवधि 25 नवंबर से 10 दिसंबर तक है। 25 दिसम्बर तक दावें-आपत्तियों का निस्तारण होगा और अनुपूरक सूची तैयार कर मुद्रित की जाएगी। निर्वाचक नामावलियों का अंतिम प्रकाशन 30 दिसंबर, 2025 को होगा।
उन्होंने बताया कि स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों की निर्वाचक नामावली में नाम शामिल कराने के लिए आवेदक को अर्हता तिथि से कम से कम 03 वर्ष पूर्व स्नातक हो या इसके समकक्ष अर्हता रखता हो। इसी प्रकार शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की निर्वाचक नामावली में नाम सम्मिलित कराने हेतु आवेदक को एक नवम्बर अर्हता तिथि से पहले राज्य के माध्यमिक स्तर के शैक्षिक संस्थानों में विगत 06 वर्षों में 03 वर्ष से शिक्षण कार्य किया हो। मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में लखनऊ स्नातक निर्वाचन क्षेत्र का विस्तार लखनऊ, हरदोई, खीरी, सीतापुर, बाराबंकी, रायबरेली एवं प्रतापगढ़ जनपद तक। वाराणसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र का विस्तार बलिया, गाजीपुर, जौनपुर, वाराणसी, चंदौली, भदोही, मिर्जापुर एवं सोनभद्र जनपद तक। आगरा स्नातक निर्वाचन क्षेत्र का विस्तार आगरा, फिरोजाबाद, मथुरा, अलीगढ़, हाथरस, एटा, मैनपुरी, इटावा, कन्नौज, औरैया, फर्रुखाबाद एवं कासगंज जनपद तक। मेरठ स्नातक निर्वाचन क्षेत्र का विस्तार बुलंदशहर, गाजियाबाद, गौतमबुद्धनगर, मेरठ, बागपत, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, शामली एवं हापुड़ जनपद तक। इलाहाबाद झांसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र का विस्तार प्रयागराज, कौशांबी, फतेहपुर, बांदा, चित्रकूट, हमीरपुर, महोबा, जालौन, झांसी एवं ललितपुर जनपद तक होगा। इसी प्रकार शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में लखनऊ शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र का विस्तार लखनऊ, हरदोई, खीरी, सीतापुर, बाराबंकी, रायबरेली एवं प्रतापगढ़ जनपद तक। वाराणसी शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र का विस्तार बलिया, गाजीपुर, जौनपुर, वाराणसी, चंदौली, भदोही, मिर्जापुर, एवं सोनभद्र जनपद तक। आगरा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र का विस्तार आगरा, फिरोजाबाद, मथुरा, अलीगढ़, हाथरस, एटा, मैनपुरी, इटावा, कन्नौज, औरैया, फर्रुखाबाद एवं कासगंज जनपद तक। मेरठ शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र का विस्तार बुलंदशहर, गाजियाबाद, गौतमबुद्धनगर, मेरठ, बागपत, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, शामली एवं हापुड़ जनपद तक। बरेली-मुरादाबाद शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र का विस्तार बरेली, पीलीभीत, शाहजहांपुर, बदायूं, रामपुर, मुरादाबाद, अमरोहा, बिजनौर एवं संभल जनपद तक। गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र का विस्तार बहराइच, श्रावस्ती, गोंडा, बलरामपुर, बस्ती, सिद्धार्थनगर, संतकबीरनगर, गोरखपुर, महाराजगंज, देवरिया, कुशीनगर, आजमगढ़, मऊ, सुल्तानपुर, अयोध्या, अमेठी एवं अंबेडकर नगर जनपद शामिल है।
स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी में लखनऊ के लिए मंडलायुक्त लखनऊ, मेरठ के लिए मंडलायुक्त मेरठ, आगरा के लिए मंडलायुक्त आगरा, वाराणसी के लिए मंडलायुक्त वाराणसी तथा इलाहाबाद-झांसी के लिए मंडलायुक्त झांसी एवं लखनऊ होंगे। इसी प्रकार शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी में लखनऊ के लिए मंडलायुक्त लखनऊ, मेरठ के लिए मंडलायुक्त मेरठ, आगरा के लिए मंडलायुक्त आगरा, वाराणसी के लिए मंडलायुक्त वाराणसी, बरेली-मुरादाबाद के लिए मंडलायुक्त बरेली एवं गोरखपुर-फैजाबाद के लिए मंडलायुक्त गोरखपुर है। इन निर्वाचन क्षेत्रों में सम्मिलित समस्त जनपदों के जिलाधिकारी अपने निर्वाचन क्षेत्र के सहायक निर्वाचन रजिस्ट्रीकरण अधिकारी तथा इन निर्वाचन क्षेत्रों के अंतर्गत आने वाली समस्त विधानसभा क्षेत्रों के निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी भी अपने निर्वाचन क्षेत्र के सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी होंगे।

अधिवक्ता परिषद का स्थापना दिवस धूमधाम से मनाया गया

अधिवक्ता परिषद का स्थापना दिवस धूमधाम से मनाया गया
गाजीपुर। जन जन तक व गरीब तक न्याय पहुचाने के लिए गठित अधिवक्ता परिषद उत्तर प्रदेश की स्थापना दिवस मनाया जा रहा है। जिसमे क्रम में गाजीपुर इकाई ने शुक्रवार को जिला शासकीय अधिवक्ता सिविल अजय पाठक के कचहरी स्थित चेम्बर में अधिवक्ता परिषद का स्थापना दिवस मनाया गया। कार्यक्रम में सर्वप्रथम मां सरस्वती के चित्र पर जिला प्रचारक प्रभात, जिलाध्यक्ष सुधाकर राय व महामंत्री शशिज्याोति पाण्डेय ने संयुक्त रूप से माल्यापर्ण कर दीप प्रज्जवलित किया। कार्यक्रम का उदबोधन अपर जिला शासकीय अधिवक्ता अभय नरायन तिवारी, अजय पाठक, जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी कृपाशंकर राय, जिला शासकीय अधिवक्ता राजस्व बंशीधर कुशवाहा, सिविल बार की महासचिव ज्योत्सना श्रीवास्तव ने अपने अपने विचार व्यक्ति किये।

कार्यक्रम के अन्त में जिला प्रचारक प्रभात ने बताया कि न्यायमं धर्मः के उददेश्य से जन जन तक गरीब व असहायो को न्याय पहुच सके इस परिकल्पना के साथ अधिवक्ता परिषद का गठन किया गया। अधिवक्ता परिषद का गठन सन 1992 में दन्तोपंथ ठेगड़ी ने किया था। जो सभी जनपदो में अपने अधिवक्ता साथियो के माध्यम से जन जन तक न्याय पहुंचा सके। मातृ संगठन को मजबूत व स्वावलंबी बनाने व मातृ शक्ति को त्वरित न्याय मिल सके इसके लिए मातृ अधिवक्ताओ को संगठित किया जा रहा है। इसके साथ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी समारोह की चर्चाा करते हुए पंच प्रण की विस्तार से बताते हुए कहा कि विजय दशमी के दिन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अपना 100 वर्ष पूर्ण कर शताब्दी समारोह मनायेगा और अपने कार्यक्रम में समरसता, कुटुम्भ प्रबोधन, पर्यावरण, स्वदेशी जागरण, स्वः का निर्माण व सभी के योगदान से राष्ट्र निर्माण के भागीदार बने और संघ समाज में विलीन हो जायेगा।

इस कार्यक्रम की अध्यक्षता सुधाकर राय व संचालन महामंत्री शशिज्योति पाण्डेय ने किया। अवसर पर अपर जिला शासकीय अधिवक्ता अखिलेश ंिसंह, जयप्रकाश सिंह, सोनी सिंह, क्षमा त्रिपाठी, रीना त्रिपाठी, अनुज राय, राजेश श्रीवास्तव, अजय तिवारी, वरिष्ठ अधिवक्ता सीताराम राय, अश्वनी पाण्डेय, शशिकान्त सिंह, अजित सिंह, राजेश पाण्डेय, कैलाश, अभिमन्यू उपाध्याय, अमित बिन्द आदि अधिवक्ता उपस्थित रहे।

श्री मुनि आगमन, ताड़का वध, लीला सीताराम मिलन का हुआ लीला मंचन


श्री मुनि आगमन, ताड़का वध, लीला सीताराम मिलन

गाजीपुर। अति प्राचीन श्रीरामलीला कमेटी हरिशंकरी की ओर से लीला के दूसरे दिन 18 सितम्बर दिन गुरूवार के शाम 7:00 बजे से वन्दे वाणी विनायकौ आदर्श श्रीरामलीला मण्डल के कलाकारो द्वारा हरिशंकरी स्थित श्रीराम चबूतरा पर मुनि आगमन, ताड़का वध अहिल्या उद्धार तथा सीताराम मिलन लीला का मंचन किया गया। लीला के क्रम में दर्शाया गया कि महामुनि विश्वामित्र अपने आश्रम पर शिष्यों सहित धार्मिक अनुष्ठान कर रहे थे कि अचानक राक्षसो का समूह उनके अनुष्ठान (यज्ञ) को विध्वंस करना शुरू कर दिया।

इससे महामुनि विश्वामित्र चिन्तित हो गये थोड़ी देर बार उन्होंने विचारा कि धरती पर असुरों के समूह का नाश करने के लिए नारायन ने संकल्प लिया था कि अयोध्या के चक्रवर्ती महाराज दशरथ के घर असन्ह सहित अवतार लिया था। यही सोचकर महामुनि विश्वामित्र अपनी यज्ञ की रक्षा हेतु अयोध्या केे लिए चल देते है, वहाँ द्वार पर पहुँचे। दूतों ने महामुनि विश्वामित्र के आगमन की सूचना महाराज दशरथ को देते है, महाराज दशरथ महामुनि के आने पर दरवाजे पर आकर उनका स्वागत करते है और आदर पूर्वक उन्हें अपने राज दरबार में ले जाते है और उन्हें सिंहासन पर विराजमन करके निवेदन करते है कि हे मुनि आपका आगमन का कारण बतावे।

इतना बात सुनकर महामुनि विश्वामित्र ने कि महाराज असुरों द्वारा हमारे यज्ञ में विघ्न पहुँचा रहे है, यज्ञ सफल नही होने दे रहे है। अतः मै आपके पास आपकेे पुत्र श्रीराम लक्ष्मण को लेने आया हूँ, इतना सुनकर महाराज दशरथ ने दोनो पुत्रों को देने से इंकार कर देते है इतने में विश्वामित्र ने क्रोधित में होते है। उनके क्रोध को देखकर महाराज दशरथ के कुल गुरू महर्षि वशिष्ठ महाराज दशरथ महाराज दशरथ को समझाते है कि महाराज दशरथ अपने पुत्रों को महामुनि विश्वामित्र के साथ भेज दे। इसी में सबका कल्याण है इतना सुनने के बाद महाराज दशरथ अपने दोनों पुत्रों रामलक्ष्मण को बुलाकर महामुनि विश्वामित्र को सौंप देते है।

महामुनि विश्वामित्र श्रीराम लक्ष्मण को लेकर अपने आश्रम के लिए प्रस्थान कर देते है, थोड़ी देर बाद घने जंगल में पहुँचकर श्रीराम लक्ष्मण ने एक पद चिन्ह देखा उसके बारे में महामुनि विश्वामित्र से जानकारी लेते है कि हे महामुनि यह पद चिन्ह किसका है। श्रीराम के प्रश्न का उत्तर देते हुए महामुनि विश्वामित्र ने कहा कि हे राम यह पद चिन्ह राक्षसी ताड़का का है वह इसी जंगल में कही छिपी हुई है। इतना सुनने के बाद श्रीराम ने अपने धनुष की टंकार से ताड़का को क्रोधित कर देते है वह क्रोधित होकर महामुनि विश्वामित्र के ऊपर झपटना चाही।

इतने में महामुनि विश्वामित्र के आदेशानुसार श्रीराम ने ताड़का का वध कर दिया लीला के क्रम में महामुनि विश्वामित्र के साथ रामलक्ष्मण आगे चले तो उन्होंने आगे जाने पर एक शिला देखी उसके बारे में महामुनि विश्वामित्र से राम ने पूछा कि हे मुनि यह शिला किसका है, महामुनि विश्वामित्र ने कहा कि हे राम ये गौतम ऋषि की पत्नी अहिल्या का है जो गौतम ऋषि ने श्राप दे करके पत्थर बना दिया है। वह आपके चरण रज को चाहती है इतना सुनने के बाद श्रीराम अपने चरण स्पर्श से उस पत्थर को छू दिया जिससे वह पुनः नारी केे रूप में परिवर्तित हो गयी।

श्रीराम लक्ष्मण महामुनि विश्वामित्र के आश्रम में पहुंचकर उनके यज्ञ की रक्षा किया और दूसरे दिन महामुनि विश्वामित्र से नगर भ्रमण के लिए निवेदन किया महामुनि विश्वामित्र ने कहा कि हे राम जनकपुर नगर भ्रमण करने के साथ ही आप मेरे पूजा के लिए थोड़ा फूल लेते आना, मुनि के आज्ञा अनुसार वे नगर भ्रमण करने चल देते है, उसी दौरान वे एक फुलवारी में जा करके माली से आदेश ले कर फूल तोड़ते है, इसी बीच गौरी पूजा के लिए सीता जी भी उसी बगीचे में जाती है। दोनों एक दूसरे को देखते है वही सीता और राम का मिलन होता है।


इस अवसर पर कमेटी के उपाध्यक्ष डा0 गोपाल जी पाण्डेय पूर्व प्रवक्ता, मंत्री ओमप्रकाश तिवारी उर्फ बच्चा, उपमंत्री पण्डित लवकुमार त्रिवेदी उर्फ बड़े महाराज, प्रबन्धक मनोज कुमार तिवारी, उपप्रबन्धक मयंक तिवारी, कोषाध्यक्ष रोहित अग्रवाल, अशोक अग्रवाल, सुधीर अग्रवाल, पण्डित कृष्ण बिहारी त्रिवेदी, रामसिंह यादव, प्रमोद कुमार गुप्ता, आदि रहे।

सतपाल महाराज के जन्मोत्सव पर भव्य झाँकी का प्रदर्शन

सतपाल महाराज के जन्मोत्सव पर भव्य झाँकी का प्रदर्शन


गाजीपुर। सदगुरुदेव व सतपाल महाराज के जन्मोत्सव गुरुवार को मानव उत्थान सेवा समिति के तत्वाधान मे विभिन्न कार्यक्रम का आयोजन किया गया। नगर मे श्रध्दालुओं के माध्यम से भव्य झाँकी एवं शोभायात्रा का प्रदर्शन किया गया। इस अवसर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के जिला प्रचारक प्रभात, महात्मा सुखियानंद ने संयुक्त रूप से हरी झंडी दिखाकर शोभायात्रा का शुभारम्भ किया। शोभायात्रा मे महिलाओ व पुरुषो ने इस पावन जन्मोत्सव के अवसर पर नगर के रेलवे प्रशिक्षण केंद्र स्थित हंसयोग आश्रम से प्रारंभ होकर ओपियम फैक्ट्री, महुआबाग, मिश्रबाजार, लालदरवाजा, पावरहाउस, झुन्नूलाल चौराहा होते हुए कारगिल मार्केट होते हुए पुनः आश्रम पर आकर समापन हुआ।

इस शोभायात्रा मे सतपाल महाराज के साथ साथ देश की महान विभूतियो स्वामी विवेकानंद, रामकृष्ण परमहंस, चंद्रशेखर आजाद, भगत सिंह, अहिल्याबाई जैसे विदुषियो के बडे बडे कटआफ से सुसज्जित शोभायात्रा निकाला गया। शोभायात्रा के अवसर पर महात्मा सुखियानन्द ने बताया की यह शोभायात्रा 1 सितंबर से 21 सितंबर तक सद्भावना यात्रा, निःशुल्क चिकित्सा शिविर, रक्तदान शिविर, स्वच्छता अभियान के साथ ही सनातन धर्म एवं संस्कृति के प्रचार-प्रसार एवं समाज में राष्ट्रीय एकता सद्भावना भाईचारा की स्थापना के लिए सद्भावना सत्संग समारोह आयोजित किया जा रहा है।

आश्रम में निःशुल्क नेत्र चिकित्सा शिविर तथा सामान्य स्वास्थ्य चिकित्सा शिविर , दिव्यांग जनों को निःशुल्क कृत्रिम अंग वितरण किया गया। इस अवसर पर स्वामी सारथानन्द, दयावती बाई, गोपालजी लाल श्रीवास्तव, जिला शासकीय अधिवक्ता कृपाशंकर राय, विधान परिषद सदस्य विशाल सिंह चंचल, जिला पंचायत अध्यक्ष सपना सिंह, भाजपा जिलाध्यक्ष ओमप्रकाश राय, नगरपालिका अध्यक्ष सरिता अग्रवाल, विनोद अग्रवाल, ब्लाक प्रमुख संतोष यादव, जिला प्रधान उमेश, एडवोकेट रामयश यादव, एडवोकेट सुधाकर राय, सहित विभिन्न सामाजिक एवं राजनीतिक क्षेत्रों के सैकड़ों लोग उपस्थित रहे।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए आश्रम के प्रभारी सुखिया आनंद ने बताया कि जब जब धरा पर अत्याचारियों का बोल बाला होता है, मानव दिशाहीन होकर भटकने लगता है तब मानव का मार्गदर्शन करने के लिए सत्पुरुष सदगुरू रुप धारणकर आते हैं। मानव को अध्यात्मिक ज्ञान देकर उसकी सोई हुई चेतना को जगाते हैं। उन्होंने कहा कि जो सदगुरू के बताए मार्ग पर चलता है उसका उद्धार हो जाता है। सतपाल महाराज का सम्पूर्ण जीवन मानवता के सेवा के लिए समर्पित है।हमें उनके जीवन दर्शन से प्रेरणा लेनी चाहिए। महात्मा दयावंती बाई जी ने बताया कि सत्संग ही वह माध्यम है जिससे परमात्मा से प्रीति होती है और बिना परमात्मा के प्रेम के यह जीवन शून्य है। परमात्मा का ज्ञान गुरु के ही माध्यम से होता है।

इस अवसर पर तरुणदीप सिंह, ब्लाक प्रमुख राजन सिंह, राजदेव यादव, किशोर यादव, संजीव गुप्ता, उमेश सिंह, संतोष कुमार गुप्ता,विपिन बिहारी, अमरनाथ तिवारी, छोटे लाल सिंह, अमरनाथ पाल,
डा.कुशुमलता, माधुरी सिंह सहित सैकड़ों भक्तगण उपस्थित रहे।

शिक्षकों ने डीएम को सौंपा अपना मांग पत्र, कहा…….

गाजीपुर। 1 सितंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने एक याचिका पर अपना आदेश सुनाते हुए सभी शिक्षकों को टीईटी की परीक्षा पास करना अनिवार्य कर दिया है। ऐसे में अब उन शिक्षकों के सामने समस्या आ गई है जो साल 2011 से पहले सभी अहर्ता पूरा करते हुए आए थे। लेकिन उस वक़्त टेट लागू नहीं था। ऐसे में अब वह शिक्षक 50 के पार हो चुके हैं। यानी कि अब उनकी उम्र परीक्षा देने के लायक नहीं रही बावजूद इनके यदि वह टेट की परीक्षा देकर पास नहीं होते हैं तो उन्हें अपने नौकरी से भी हाथ धोना पड़ेगा जिसको लेकर अब शिक्षक सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बावजूद आर पार की लड़ाई लड़ने को मजबूर हो गए हैं।

इसी कड़ी में आज प्राथमिक शिक्षक संघ सैकड़ो की संख्या में जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे और यहां पर इन लोगों ने नारेबाजी करते हुए अपना पत्र कार्यालय पर आए हुए अधिकारी को सौपा। इस दौरान इन सभी लोगों ने जो सुप्रीम कोर्ट को अंधकार में रखकर इस नियम को लागू कराया गया है उसे तत्काल प्रभाव से खत्म करने की मांग किया है। इनका कहना है कि साल 2017 में ही इस कानून को पास कर दिया गया था लेकिन इसे इंप्लीमेंट नहीं किया गया था और उसे अब इंप्लीमेंट किया गया है जिसको लेकर अब लाखों शिक्षकों के सामने एक बड़ी समस्या आ गई है कि वह विद्यालय में छात्रों को पढ़ाया या फिर परीक्षा देने के लिए खुद पढ़ें।

इस दौरान आज मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के द्वारा सुप्रीम कोर्ट में इस मामले को लेकर रिवीजन दाखिल करने का विभाग को निर्देश दिया है इस मामले पर शिक्षकों ने योगी सरकार के इस कदम की सराहना किया लेकिन इसके पहले इन लोगों ने कहा कि इस आदेश में जो भी खामियां हैं उसे दुरुस्त करते हुए आगे के करवाई किया जाए।

महिला पीजी कॉलेज में प्रवेश की अंतिम तिथि 22 सितंबर

गाजीपुर। उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय, प्रयागराज द्वारा संचालित विभिन्न डिग्री, डिप्लोमा एवं प्रमाण पत्र कार्यक्रमों में प्रवेश की अंतिम तिथि 22 सितंबर तक बढ़ा दी गई है। मुक्त विश्वविद्यालय प्रयागराज के प्रवेश प्रभारी प्रोफेसर जय प्रकाश यादव द्वारा बताया गया है कि शैक्षिक सत्र जुलाई 2025- 26 में सभी कक्षाओं एवं पाठ्यक्रमों में प्रवेश का यह अंतिम अवसर है। विश्वविद्यालय द्वारा संचालित 15 से अधिक विषयों में एम ए , राजनीति विज्ञान, शिक्षाशास्त्र, समाजशास्त्र, समाज कार्य, उर्दू , संस्कृत विषयों तथा एकल विषय संस्कृत, इतिहास, राजनीति विज्ञान, अर्थशास्त्र, भूगोल, संस्कृत, उर्दू, अंग्रेजी आदि सामाजिक विज्ञान तथा विभिन्न प्रकार के रोजगार परक डिप्लोमा-प्रमाण पत्र पाठ्यक्रमों में ऑनलाइन प्रवेश जारी है। वर्तमान शैक्षिक सत्र से एकल विषय स्नातक का पाठ्यक्रम 2 वर्ष की बजाय 1 वर्ष का हो गया है तथा इसका शुल्क चार हजार की जगह अब मात्र ₹2800 ही होगा। मुक्त विश्वविद्यालय द्वारा इस महत्वपूर्ण बदलाव से एक विषय से स्नातक करने वाले शिक्षार्थियों के समय, श्रम और धन की बचत होगी। राजकीय महिला पीजी कॉलेज गाजीपुर स्थित अध्ययन केंद्र (088) में हिंदी, अंग्रेजी, राजनीति विज्ञान, इतिहास, अर्थशास्त्र, भूगोल, समाजशास्त्र, संस्कृत, उर्दू, शिक्षा शास्त्र समेत 16 से अधिक विषयों में एकल विषय स्नातक की सुविधा उपलब्ध है। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुसार छात्र नियमित पाठ्यक्रमों में अध्ययन करते हुए मुक्त विश्वविद्यालय से डिग्री या डिप्लोमा पाठ्यक्रम एक साथ कर सकते हैं। अर्थात भी किसी नियमित कोर्स को पढ़ते हुए मुक्त विश्वविद्यालय से कोई दूसरा डिग्री या डिप्लोमा कोर्स एक साथ कर सकते हैं। विश्वविद्यालय द्वारा संचालित विभिन्न पाठ्यक्रम कामकाजी, सरकारी सेवारत एवं शिक्षा से वंचित लोगों के लिए अत्यंत उपयोगी हैं। इच्छुक शिक्षार्थी विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर अपना ऑनलाइन प्रवेश लेकर विश्वविद्यालय अध्ययन केंद्र (088) राजकीय महिला स्नातकोत्तर महाविद्यालय, गाजीपुर के कार्यालय में अपराहन 1:00 से 4:00 के मध्य जमा कर सकते हैं। किसी भी जानकारी के लिए शिक्षार्थी अध्ययन केंद्र समन्वयक डॉ शिव कुमार से संपर्क कर सकते हैं।

निजी विद्यालयों के छात्रों ने किया बेहतर प्रदर्शन तो वहीं सरकारी विद्यालयों के छात्र रहे औसत से नीचे: पूजा मिश्रा

वर्तनी प्रदर्शन में लखनऊ नगर के निजी सीबीएसई विद्यालयों के छात्रों ने किया बेहतर प्रदर्शन वहीं सरकारी विद्यालयों के छात्र रहे औसत से नीचे : पूजा मिश्रा

गाजीपुर। स्नातकोत्तर महाविद्यालय गोराबाजार में पूर्व शोध प्रबन्ध प्रस्तुत संगोष्ठी का आयोजन मंगलवार को किया गया। यह संगोष्ठी महाविद्यालय के अनुसंधान एवं विकास प्रकोष्ठ तथा विभागीय शोध समिति के तत्वावधान में महाविद्यालय के सेमिनार हाल में सम्पन्न हुई, जिसमें महाविद्यालय के प्राध्यापक, शोधार्थी व छात्र- छात्राएं उपस्थित रहे। उक्त संगोष्ठी में अध्यापक शिक्षा विभाग (शिक्षा संकाय) की शोधार्थिनी पूजा मिश्रा ने अपने शोध प्रबंध शीर्षक “द कम्पेरेटिव स्टडी ऑफ स्पेलिंग परफॉर्मेंस अमंग स्टूडेंट्स ऑफ प्राइवेट एंड गवर्नमेंट स्कूल इन लखनऊ” नामक विषय पर शोध प्रबन्ध एवं उसकी विषय वस्तु को प्रस्तुत करते हुए कहा कि प्रस्तुत शोध अध्ययन में लखनऊ नगर के सरकारी एवं निजी सीबीएसई विद्यालयों के प्राथमिक स्तर के विद्यार्थियों के बीच वर्तनी प्रदर्शन का तुलनात्मक अध्ययन किया है। इस अध्ययन हेतु कक्षा 3 और कक्षा 4 के 486 छात्रों का सरल यादृच्छिक चयन विधि द्वारा चयन किया गया है, जिनमे 237 सरकारी और 249 निजी विद्यालयों के छात्र शामिल है। अध्ययन के निष्कर्ष से यह पता चलता है कि निजी स्कूलों के छात्र सरकारी स्कूलों की अपेक्षा वर्तनी में बेहतर प्रदर्शन करते हैं। निजी स्कूलों के 43.55 प्रतिशत छात्रों ने औसत से अधिक अंक प्राप्त किए और 19.76 प्रतिशत छात्रों ने उच्च स्तर का प्रदर्शन किया। वहीं सरकारी स्कूलों के मात्र 6.33 प्रतिशत छात्रों ने ही औसत से अधिक प्रदर्शन किया तथा 51.47 प्रतिशत छात्र औसत से नीचे रह गए । अध्ययन के अनुसार सरकारी या निजी स्कूलों में लिंग के आधार पर वर्तनी प्रदर्शन में कोई महत्वपूर्ण अंतर नहीं पाया गया अर्थात लड़के व लड़कियाँ वर्तनी प्रदर्शन में समान रूप से सफल रहे। यह भी पाया गया कि निजी स्कूल के छात्र हर स्थिति में बेहतर रहे। सरकारी और निजी स्कूल के छात्रों के प्रदर्शन में अंतर के मुख्य कारण शिक्षकों और परिवार द्वारा उचित प्रोत्साहन की कमी एवं स्कूलों में पर्याप्त और नियमित शैक्षिक सुविधाओं के अभाव रहे है। शैक्षिक दृष्टिकोण से यह अध्ययन दर्शाता है कि वर्तनी शिक्षण को पाठ्यक्रम में बेहतर स्थान देना चाहिए। नीति-निर्माताओं को नियमित आंकड़े संग्रह और विश्लेषण में ध्यान देना चाहिए। सरकारी स्कूलों के प्रशासकों को शिक्षकों के लिए उचित संसाधन और प्रशिक्षण प्रदान करना चाहिए। शिक्षकों को प्रभावी शैक्षिक रणनीतियाँ अपनानी चाहिए और बच्चों के लिए समृद्ध माहौल बनाना चाहिए। छात्रों को उनकी विकासात्मक स्तर के अनुसार दिशा निर्देश और अवसर दिए जाने चाहिए। भविष्य के अध्ययन सीबीएसई के अलावा अन्य बोर्ड, अन्य क्षेत्रों व उच्च स्तरों पर भी किए जा सकते हैं। नतीजन, इस शोध से यह स्पष्ट होता है कि विद्यालय के प्रकार का वर्तनी प्रदर्शन पर सीधा प्रभाव पड़ता है, लिंग का नहीं। सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता, प्रशिक्षण और संसाधनों में सुधार करने से प्रदर्शन में अंतर को कम किया जा सकता है तथा साक्षरता को बेहतर बनाया जा सकता है। प्रस्तुतिकरण के बाद विभागीय शोध समिति, अनुसंधान एवं विकास प्रकोष्ठ व प्राध्यापकों तथा शोध छात्र-छात्राओं द्वारा शोध पर विभिन्न प्रकार के प्रश्न पूछे गए जिनका शोधार्थिनी पूजा मिश्रा ने संतोषपूर्ण एवं उचित उत्तर दिया। तत्पश्चात समिति एवं महाविद्यालय के प्राचार्य प्रोफे० (डॉ०) राघवेन्द्र कुमार पाण्डेय ने शोध प्रबंध को विश्वविद्यालय में जमा करने की संस्तुति प्रदान किया। इस संगोष्ठी में महाविद्यालय के प्राचार्य प्रोफे० (डॉ०) राघवेन्द्र कुमार पाण्डेय, अनुसंधान एवं विकास प्रकोष्ठ के संयोजक प्रोफे० (डॉ०) जी० सिंह, शोध निर्देशक डॉ0 शैलेन्द्र सिंह, डीएसडब्ल्यू प्रोफे०(डॉ०) संजय चतुर्वेदी, डॉ0 अरविंद कुमार उपाध्याय, प्रोफे0 विनय कुमार डुबे, डॉ0 लवजी सिंह, प्रोफे0 सुजीत कुमार सिंह, प्रोफे0 वी0के0 सिंह, डॉ0 इंदीवर रत्न पाठक, डॉ0 अरुण कुमार सिंह, डॉ० रामदुलारे, डॉ० अशोक कुमार, डॉ० योगेश कुमार, प्रदीप सिंह एवं महाविद्यालय के प्राध्यापकगण तथा शोध छात्र छात्राएं आदि उपस्थित रहे। अंत में डॉ० अरविंद कुमार उपाध्याय ने सभी का आभार व्यक्त किया तथा संचालन अनुसंधान एवं विकास प्रकोष्ठ के संयोजक प्रोफे०(डॉ०) जी० सिंह ने किया।