महिला पीजी कॉलेज में ‘प्री पीएचडी कोर्स वर्क’ का हुआ औपचारिक शुभारंभ

गाजीपुर। राजकीय महिला महाविद्यालय महुआबाग में शुक्रवार को महाविद्यालय के सत्र 2024 के नवीन शोधार्थियों हेतु ‘प्री पीएचडी कोर्स वर्क’ का औपचारिक शुभारंभ किया गया। महाविद्यालय पीएचडी कोर्सवर्क कार्यक्रम के संयोजक डॉ निरन्जन कुमार यादव ने शोधार्थियों को शोध काल में होने वाली प्रक्रियाओं के बारे में अवगत करते हुए उनका संक्षिप्त परिचय कराया। डॉ निरन्जन के अनुसार, एक शोधार्थी को प्रवेश के छह महीने बाद अपने विषय के बारे में अपने शोध निर्देशक से अधिक पता होना चाहिए अर्थात् उसे पर्याप्त मात्रा में तथ्य एकत्रित कर लेना चाहिए। उन्होंने शोधार्थियों को नियमित रूप से अध्ययन करते रहने तथा अपने साथी शोधार्थियों व शोध निर्देशक से जुड़े रहने की सलाह दी।


कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रही, महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ अनीता कुमारी ने नवीन शोधार्थियों का स्वागत करते हुए उन्हें महाविद्यालय के संसाधनों व व्यवस्थाओं से परिचित कराया तथा उनका समुचित उपयोग करने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि शोध का अर्थ ही है कुछ नया खोजना और इसके लिए अध्ययन अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने शोधार्थियों को महाविद्यालय में एक अच्छा पर्यावरण मिलने के प्रति आश्वस्त दिया।


कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि कटरा विश्वविद्यालय, जम्मू के हिंदी के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ गौरव त्रिपाठी ने शोधार्थियों को दो मुख्य सुझाव दिया। प्रथम यह कि शोध विषय अपनी रुचि का होना चाहिए। क्योंकि जब कार्य अपने मन का होता है तो संतोषजनक एवं आनंददायी होता है। दूसरा उन्हें आगाह करते हुए दिया कि पीएचडी रोजगार का कोई लाइसेंस नहीं है। किन्तु यदि शोध कार्य मन से किया जाय तो कोई लाभ हो या न हो, कोई हानि नहीं होगी। इसके लिए उन्होंने अपने क्षेत्र से जुड़े लोगों से निरंतर मिलते रहने व नया जानते रहने की सलाह दिया। उन्होंने डॉ यशपाल के एक कथन को उद्धृत करते हुए कहा कि कुछ भी कार्य करो,मज़ा ज़रूर आना चाहिए। तत्पश्चात् उन्होंने ‘अंधा युग’ नाटक की कुछ पंक्तियों का मंचन करते हुए अपने अभिनय कौशल का परिचय कराया।


कार्यक्रम के मुख्य सारस्वत वक्ता वरिष्ठ साहित्यकार और चिंतक प्रोफेसर डॉ आनंद सिंह ने सर्वप्रथम शोधार्थियों को उनकी नयी यात्रा और उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाए दिया। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में विद्यार्थियों व शोधार्थियों में आगे बढ़ने की प्रबल इच्छा होती है परन्तु साथ ही उन्हें बाधाएँ भी मिलती हैं। संसाधनों की कमी उनमें प्रमुख है। राजकीय महिला महाविद्यालय के संबंध में उन्होंने कहा कि इस महाविद्यालय का जनपद में शीर्षस्थ स्थान है। यहाँ के विद्वान प्राध्यापक को में अद्भुत समन्वय है, तथा उनकी दिली इच्छा है कि यहाँ के विद्यार्थियों को श्रेष्ठ ज्ञान प्राप्त हो। शोधार्थियों में धैर्य को आवश्यक बताते हुए उन्होंने कहा कि शोधार्थी एक रोमैंटिक प्राणी होता है जिसे अपने विषय से संबंधित प्रत्येक भाग से प्रेम होता है। शोध के अर्थ को स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा कि शोध विकास की श्रृंखला है।

यह चेतना के विकास में सहायक है तथा एक अच्छा शोधार्थी नियमित रूप से अपने व्यक्तित्व को निखारना चाहता है। डॉ आनंद ने गुरु मंत्र देते हुए कहा कि यदि कुछ नया करना है तो इसके लिए पुराने को जानना आवश्यक है तथा इसके लिए अध्ययन अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने बताया कि शोध उच्च शिक्षा का मानक नहीं अपितु ज्ञान संस्कृति का अभिन्न हिस्सा है, ज्ञात से अज्ञात की ओर बढ़ना है। शोधार्थियों का उत्साहवर्द्धन करते हुए उन्होंने कहा कि एक शोधार्थी सारे रहस्य, धुंध को छाँट देता है व अज्ञात का एक हिस्सा खोल देता है तथा आनंद तो अज्ञात में ही है, अस्पष्ट को स्पष्ट करने की प्रक्रिया में ही है।

उन्होंने शोधार्थियों को उनके शोध निर्देशकों व पुस्तकालय की सहायता लेने के लिए प्रेरित किया तथा ए आई के पक्ष-विपक्ष से उन्हें अवगत कराया। अपने वक्तव्य के अन्त में उन्होंने कहा कि आपके पंखों में जितनी ताक़त होगी, आप उतनी ही दूर जाएंगे, विश्वास करिए तो सारा आकाश आपका है, माँ सरस्वती को प्रणाम करिए, ज्ञान को प्रणाम करिए‌। कार्यक्रम का संचालन डॉ निरन्जन कुमार यादव व डॉ शिव कुमार ने संयुक्त रूप से किया। इसके पूर्व सभी शोधार्थियों ने अपना विस्तृत परिचय दिया तथा कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं विशिष्ट अतिथि का प्राचार्य प्रोफेसर अनिता कुमारी ने पुष्प गुच्छ एवं अंग वस्त्र देकर सम्मानित किया। धन्यवाद ज्ञापन डॉ शशिकला ने किया।


कार्यक्रम में महाविद्यालय के डॉ शंभू शरण प्रसाद, डॉ सारिका सिंह, डॉ संगीता मौर्य, डॉ गजनफर सईद, डॉ रामनाथ केसरवानी,डॉ आनंद कुमार चौधरी, डॉ मनीष कुमार सोनकर, डॉ शिखा सिंह आदि शोध पर्यवेक्षक एवं हिंदी, जंतु विज्ञान, अंग्रेजी, उर्दू, मनोविज्ञान, गृहविज्ञान, इतिहास आदि विषयों के नवीन शोधार्थी उपस्थित रहे।

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