विश्व पर्यावरण दिवस पर गंगा संरक्षण से जुड़े महत्वपूर्ण शोध प्रबंध का जमा होना बना विशेष उपलब्धि



गाजीपुर।विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर, जब पूरे विश्व में पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता संवर्धन एवं प्राकृतिक संसाधनों के सतत उपयोग का संदेश दिया जा रहा है, उसी दिन राजकीय महिला स्नातकोत्तर महाविद्यालय के शोधार्थी अरुण कुमार द्वारा पर्यावरणीय महत्व के एक महत्वपूर्ण शोध प्रबंध का सफलतापूर्वक जमा किया जाना महाविद्यालय के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धि रहा।
शोध का विषय “Effect of Municipal Sewage on Riparian System of River Ganga of Ghazipur District” है। यह अध्ययन गाजीपुर जनपद में गंगा नदी के तटीय पारिस्थितिक तंत्र (Riparian System) पर नगर निकायों से निकलने वाले सीवेज के प्रभावों का वैज्ञानिक मूल्यांकन प्रस्तुत करता है। वर्तमान समय में जल प्रदूषण, नदियों के पारिस्थितिकीय क्षरण तथा जैव विविधता पर बढ़ते खतरे वैश्विक चिंता के विषय हैं। ऐसे में यह शोध विश्व पर्यावरण दिवस की मूल भावना—“पर्यावरण संरक्षण हेतु वैज्ञानिक समाधान”—को सार्थक रूप से प्रतिबिंबित करता है।
यह शोध कार्य वनस्पति विज्ञान विभाग में डाॅ. आनन्द कुमार चौधरी के निर्देशन में संपन्न हुआ। अध्ययन में गंगा नदी के तटीय क्षेत्रों की वनस्पतियों, पर्यावरणीय गुणवत्ता तथा सीवेज प्रदूषण के कारण उत्पन्न होने वाले पारिस्थितिकीय परिवर्तनों का विस्तृत विश्लेषण किया गया है। शोध के निष्कर्ष भविष्य में गंगा संरक्षण, नदी तटीय पारिस्थितिकी के संवर्धन तथा पर्यावरणीय नीतियों के निर्माण में उपयोगी सिद्ध हो सकते हैं।
महाविद्यालय की प्राचार्य डाॅ. अनीता कुमारी ने कहा कि विश्व पर्यावरण दिवस पर पर्यावरण संरक्षण से सीधे जुड़े विषय पर शोध प्रबंध का जमा होना अत्यंत सुखद एवं प्रेरणादायी है। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षण संस्थानों की भूमिका केवल शिक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज एवं पर्यावरण की ज्वलंत समस्याओं के समाधान हेतु शोध और नवाचार को बढ़ावा देना भी उनकी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
मीडिया प्रभारी डाॅ. शिव कुमार ने बताया कि महाविद्यालय में पर्यावरणीय जागरूकता, सतत विकास एवं शोध संस्कृति को निरंतर प्रोत्साहित किया जा रहा है। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर यह उपलब्धि विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों को पर्यावरण संरक्षण से जुड़े विषयों पर गंभीर अनुसंधान के लिए प्रेरित करेगी। महाविद्यालय परिवार के डॉ सारिका सिंह, डॉ निरंजन कुमार, डॉ शिल्पी राय, डॉ रामनाथ केसरवानी, डॉ मनीष सोनकर, ओम शिवानी आदि ने शोधार्थी अरुण कुमार तथा उनके शोध निर्देशक डाॅ. आनन्द कुमार चौधरी को बधाई देते हुए विश्व पर्यावरण दिवस पर पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छ नदियों एवं सतत विकास के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की। यह उपलब्धि इस तथ्य को भी रेखांकित करती है कि वैज्ञानिक अनुसंधान ही पर्यावरणीय चुनौतियों के स्थायी समाधान का आधार बन सकता है।