गाजीपुर। प्राकृतिक खेती कोई नई अवधारणा नहीं बल्कि हमारी अटूट ऋषि परम्परा की ही ध्वजवाहक है। बीते दिनों इस भूली हुई कृषि पद्धति को अब पुनर्जीवित करने का वक्त आ गया है। यदि हमें स्वस्थ्य एंव निरोगी रहना है तो इसे हर किसी को अपनाना ही होगा। शुक्रवार को कृषि विभाग द्वारा कृषि विज्ञान केन्द्र पी०जी० कॉलेज में आयोजित प्राकृतिक खेती की दो दिवसीय कार्यशाला को सम्बोधित करते हुए जिला अध्यक्ष भाजपा ओम प्रकाश राय ने किसानों से कहा कि काल चक्र बदलने के कारण जहां 50 वर्ष पहले आपको रासायनिक उर्वरकों के प्रयोग के लिए प्रेरित किया जाता था वही अब स्वस्थ रहने के लिए रासायनिक उर्वरकों से दूरी बनाने की अपील की जा रही है।

कार्यक्रम की मुख्य अतिथि अध्यक्ष नगर पालिका परिषद गाजीपुर सरीता अग्रवाल ने कहा कि प्राकृतिक खेती से किसानों को लगता है कि उनका उत्पादन घटेगा किन्तु प्राकृतिक खेती को तीन-चार वर्ष लगातार करने बाद मृदा उर्वरता बढ़ने पर पैदावार उतनी ही मिलेगीं जितनी की रासायनिक उर्वरकों के प्रयोग से मिलती है। उप कृषि निदेशक विजय कुमार ने प्राकृतिक खेती के किसानों, कृषि सखियों एंव कृषि उत्पादक संगठन के सदस्यो से अपील किया की वह राष्ट्रीय ग्रामीण आजिविका मिशन द्वारा विकास भवन एंव सभी विकास खण्डो में स्थापित प्रेरणा कैंटीन से जुड़ कर अपने प्राकृतिक एंव श्री अन्न से निर्मित उत्पादों का विक्रय कर सकते हैं इसके अतिरिक्त कृषि विभाग द्वारा मिलेट्स पुनरोद्वार कार्यक्रम के अंतर्गत मिलेट्स आउटलेट स्थापना हेतु 10 लाख रूपय अनुदान हेतु लक्ष्य प्राप्त हुआ है, इच्छुक व्यक्ति इसमें आवेदन कर सकते हैं।

इस अवसर पर कृषि विज्ञान केन्द्र पी०जी० कॉलेज के वैज्ञानिक डॉ० एस०के० सिंह ने प्राकृतिक खेती के विभिन्न प्रकार के अवयवों जीवामृत, घनजीवामृत, बीजामृत, बृहास्त,नीमास्त्र, अग्निस्त्र इत्यादि को क्रमबध्द ढंग से लाइव डेमो द्वारा किसानों को कर के दिखाया। उपस्थित जनप्रतिनिधियों ने श्री अन्न से बने व्यंजनों को चखा और उनकी भूरी भूरि प्रशसा भी की । इस अवसर पर अन्जू चतुर्वेदी (लहुरी काशी वुमेन फार्मर प्रोडयूशर कम्पनी की अध्यक्ष) द्वारा रागी से बनाय गये श्री अन्न के केक काटा और उनकी प्रशंसा की। इस अवसर पर विभिन्न विभागों एंव फार्मर प्रोडयूशर कम्पनी द्वारा अपने स्टाल लगाकर विभिन्न उत्पादो का प्रदर्शन भी किया गया।
