आत्महत्या से जुड़े मिथकों को तोड़कर संवाद का माहौल बनाना जरूरी : विशेषज्ञ
गाजीपुर। राजकीय महिला स्नातकोत्तर महाविद्यालय, महुआबाग के मनोविज्ञान विभाग की ओर से गुरुवार को विश्व आत्महत्या निवारण दिवस के अवसर पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में आत्महत्या की बढ़ती प्रवृत्ति, उसके संकेतों, कारणों तथा बचाव के उपायों पर विस्तार से चर्चा की गई। वक्ताओं ने छात्राओं से मानसिक परेशानियों को छिपाने के बजाय परिवार, मित्रों और विशेषज्ञों से खुलकर बातचीत करने की अपील की।

कार्यक्रम का शुभारंभ महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. शंभू शरण प्रसाद द्वारा अतिथियों का पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत करने के साथ हुआ। विषय प्रवर्तन करते हुए मनोविज्ञान विभाग प्रभारी एवं मनोविज्ञान परिषद के अध्यक्ष डॉ. शिवकुमार ने बताया कि विश्व स्वास्थ्य संगठन एवं अंतर्राष्ट्रीय आत्महत्या निवारण संघ की पहल पर प्रत्येक वर्ष 10 सितंबर को विश्व आत्महत्या निवारण दिवस मनाया जाता है। उन्होंने कहा कि आत्महत्या गंभीर जनस्वास्थ्य चुनौती है और इसके निवारण के लिए जागरूकता के साथ-साथ संवेदनशील संवाद का वातावरण तैयार करना आवश्यक है।

उन्होंने बताया कि वर्ष 2024 से 2026 तक की थीम ‘आत्महत्या से जुड़े आख्यानों को बदलना’ है, जिसका उद्देश्य लोगों को आत्महत्या से जुड़े विचारों और मानसिक परेशानियों के बारे में बिना झिझक बात करने के लिए प्रोत्साहित करना है।

मुख्य वक्ता जिला चिकित्सालय गाजीपुर के नैदानिक मनोवैज्ञानिक अंकित आनंद ने आत्महत्या से जुड़े विभिन्न संकेतों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि अत्यधिक अवसाद, व्यवहार में अचानक बदलाव, अत्यधिक शांत या अलग-थलग रहना, स्वयं को दूसरों पर बोझ समझना, जीवन में लक्ष्य का अभाव तथा अपने प्रियजनों को बार-बार अलविदा कहने जैसे व्यवहार चेतावनी के संकेत हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे व्यक्ति को नजरअंदाज करने के बजाय उसकी बात ध्यानपूर्वक सुनना, सहानुभूतिपूर्वक व्यवहार करना और समस्या के समाधान की दिशा में सहयोग देना जरूरी है।

जिला चिकित्सालय के मनोरोग विभाग के स्टाफ नर्स सतीश कुमार ने राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत संचालित टेली-मानस हेल्पलाइन 14416 के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मानसिक तनाव, अवसाद सहित विभिन्न मानसिक परेशानियों में इस हेल्पलाइन के माध्यम से निःशुल्क मनोवैज्ञानिक परामर्श प्राप्त किया जा सकता है तथा आवश्यकता पड़ने पर विशेषज्ञ सेवाओं के लिए रेफरल की सुविधा भी उपलब्ध है।

महिला वन स्टॉप सेंटर गाजीपुर की मैनेजर प्रियंका प्रजापति ने छात्राओं को महिला हेल्पलाइन एवं वन स्टॉप सेंटर की सेवाओं के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि किसी भी आयु वर्ग की महिलाएं अपनी समस्याओं के समाधान और आवश्यक सहायता के लिए वन स्टॉप सेंटर से संपर्क कर सकती हैं। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्राचार्य डॉ. शंभू शरण प्रसाद ने कहा कि आत्महत्या की रोकथाम में जागरूकता और समय पर सहायता बेहद महत्वपूर्ण है। विद्यार्थियों को शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत बनने के साथ अपनी समस्याओं को साझा करने की आदत विकसित करनी चाहिए। कार्यक्रम का संचालन डॉ. शिवकुमार ने तथा आभार ज्ञापन महाविद्यालय की मुख्य शास्ता डॉ. सारिका सिंह ने किया। कार्यक्रम के अंत में अतिथियों को अंगवस्त्रम एवं स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम के आयोजन में मनोविज्ञान परिषद की छात्राओं माही प्रजापति, संजना पांडेय, इल्मा सिद्दीकी, हुमैरा परवीन, आनंदी गुप्ता, श्रेया वर्मा, श्रेया कुमारी, स्वधा गुप्ता, गुनगुन जायसवाल, ममता बिंद, शमा तरन्नुम, अलीशा फातिमा, रिया सैनी आदि की महत्वपूर्ण भूमिका रही। इस अवसर पर डॉ. संगीता मौर्य, डॉ. निरंजन कुमार, डॉ. राजेश कुमार यादव, डॉ. हरेंद्र यादव, डॉ. गजनफर सईद, डॉ. मनीष सोनकर, डॉ. नेहा कुमारी सहित अन्य प्राध्यापक एवं छात्राएं उपस्थित रहीं।