5-दिवसीय बैंकिंग व्यवस्था की मांग पर गाजीपुर में बैंक हड़ताल, 300 शाखाओं पर असर
5-दिवसीय बैंकिंग व्यवस्था की मांग को लेकर गाजीपुर में बैंक कर्मचारियों की राष्ट्रव्यापी हड़ताल
300 के करीब बैंक शाखाओं पर पड़ा असर, 1000 से अधिक अधिकारी-कर्मचारी रहे हड़ताल में शामिल; 150 करोड़ से अधिक का कारोबार प्रभावित होने का दावा
गाजीपुर। औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 के तहत भारतीय बैंक संघ (IBA) एवं यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन्स (UFBU) के बीच हुए समझौतों के पूर्ण अनुपालन और 5-दिवसीय बैंकिंग व्यवस्था लागू करने की मांग को लेकर शुक्रवार को आहूत राष्ट्रव्यापी बैंक हड़ताल का गाजीपुर जनपद में व्यापक असर देखने को मिला। हड़ताल के चलते विभिन्न बैंकों की करीब 300 शाखाओं में बैंकिंग सेवाएं प्रभावित रहीं। UFBU के अनुसार, जिले में 1000 से अधिक अधिकारी एवं कर्मचारी हड़ताल में शामिल हुए और इससे 150 करोड़ रुपये से अधिक का बैंकिंग कारोबार प्रभावित हुआ।

हड़ताल के दौरान बैंक कर्मचारियों ने धरना-प्रदर्शन कर अपनी मांगों के समर्थन में आवाज बुलंद की। प्रदर्शन को संबोधित करते हुए UFBU गाजीपुर इकाई के जिला संयोजक एवं UPBEU के जिला मंत्री सत्येन्द्र गुप्ता ने कहा कि 7 दिसंबर 2023 को हस्ताक्षरित एमओयू तथा 8 मार्च 2024 को जारी संयुक्त सेटलमेंट/जॉइंट नोट में शेष सभी शनिवारों को बैंक अवकाश घोषित किए जाने पर स्पष्ट सहमति बनी थी। इसके बावजूद 5-दिवसीय बैंकिंग व्यवस्था लागू नहीं किया जाना बैंक कर्मचारियों के हितों के साथ न्याय नहीं है। उन्होंने कहा कि बैंक कर्मचारी लंबे समय से इस मांग को लेकर लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक तरीके से संघर्ष कर रहे हैं। बैंकिंग क्षेत्र में लगातार बढ़ते कार्यदबाव, कर्मचारियों की कमी और कार्य-जीवन संतुलन की आवश्यकता को देखते हुए अब 5-दिवसीय बैंकिंग व्यवस्था समय की मांग बन चुकी है।

सत्येन्द्र गुप्ता ने चेतावनी दी कि यदि 11 सितंबर की एक दिवसीय राष्ट्रव्यापी हड़ताल के बाद भी सरकार की ओर से 5-दिवसीय बैंकिंग व्यवस्था लागू करने के संबंध में कोई ठोस एवं सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को अगले चरण में ले जाया जाएगा। उन्होंने बताया कि 28, 29 और 30 सितंबर 2026 को तीन दिवसीय राष्ट्रव्यापी बैंक हड़ताल प्रस्तावित है। इसके बाद भी मांगों का समाधान नहीं हुआ तो 26 अक्टूबर 2026 से देशभर के बैंक कर्मचारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने के लिए बाध्य होंगे। उन्होंने कहा कि बैंक कर्मचारी संघर्ष नहीं चाहते, बल्कि अपनी जायज मांगों का सम्मानजनक और समयबद्ध समाधान चाहते हैं। सरकार के पास अभी भी वार्ता के माध्यम से समस्या का समाधान करने का अवसर है। अनिश्चितकालीन हड़ताल की स्थिति उत्पन्न होने से पहले 5-दिवसीय बैंकिंग व्यवस्था लागू करने की प्रक्रिया को शीघ्र पूरा किया जाना चाहिए।
अन्य बैंक नेताओं ने भी उठाई आवाज
ऑल इंडिया पीएनबी ऑफिसर्स फेडरेशन के अध्यक्ष राकेश यादव ने कहा कि बैंक कर्मचारियों पर लगातार बढ़ते कार्यदबाव, स्टाफ की कमी और कार्य-जीवन संतुलन के अभाव को देखते हुए 5-दिवसीय बैंकिंग व्यवस्था अब आवश्यक हो गई है। सरकार को इस दिशा में जल्द सकारात्मक निर्णय लेना चाहिए।
संतोष राय, AIPNBOA ने कहा कि पूर्व में हुए समझौतों और सहमतियों का प्रभावी क्रियान्वयन औद्योगिक संबंधों की विश्वसनीयता के लिए जरूरी है। मांगों के समाधान में अनावश्यक विलंब से कर्मचारियों में असंतोष बढ़ रहा है।
रामजी, बैंक ऑफ इंडिया ने कहा कि बैंक कर्मचारी लंबे समय से समाधान की प्रतीक्षा कर रहे हैं। बार-बार मांग उठाए जाने के बावजूद 5-दिवसीय बैंकिंग व्यवस्था लागू करने में हो रही देरी दुर्भाग्यपूर्ण है।
सुनील यादव, केनरा बैंक, आलोक प्रकाश, पंजाब नेशनल बैंक तथा जितेन्द्र शर्मा, जिला मंत्री BEFI ने भी अपने विचार रखे। नेताओं ने कहा कि बैंक कर्मचारियों की जायज मांगों को लेकर UFBU के सभी घटक संगठन एकजुट हैं और मांगों के समाधान तक लोकतांत्रिक एवं संगठित संघर्ष जारी रहेगा।
राष्ट्रव्यापी हड़ताल में UFBU के सभी सात घटक संगठनों—AIBEA, BEFI, NCBE, AIBOC, AIBOA, INBEF एवं INBOC—ने सहभागिता की।
गाजीपुर में पंजाब नेशनल बैंक, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ इंडिया, केनरा बैंक, बैंक ऑफ महाराष्ट्र, इंडियन ओवरसीज बैंक, यूको बैंक, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ बड़ौदा और इंडियन बैंक समेत विभिन्न बैंकों के अधिकारी एवं कर्मचारी बड़ी संख्या में हड़ताल में शामिल रहे। UFBU गाजीपुर इकाई ने केंद्र सरकार एवं संबंधित प्राधिकरणों से 5-दिवसीय बैंकिंग व्यवस्था लागू करने तथा लंबित मांगों के समाधान के लिए शीघ्र ठोस एवं समयबद्ध निर्णय लेने की मांग की।