हिंदी हमारी पहचान और स्वाभिमान: जनपद न्यायाधीश

हिंदी हमारी पहचान और स्वाभिमान : जनपद न्यायाधीश

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से हिंदी दिवस पर संगोष्ठी आयोजित, न्यायिक अधिकारियों ने रखे विचार

गाजीपुर। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के तत्वावधान में जनपद न्यायाधीश एवं अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण जय प्रकाश यादव के निर्देशन में सोमवार को जनपद न्यायालय के दसकक्षीय सभागार में हिंदी दिवस के अवसर पर संगोष्ठी आयोजित की गई। कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। संगोष्ठी को संबोधित करते हुए जनपद न्यायाधीश जय प्रकाश यादव ने कहा कि भारत विविध भाषाओं, जातियों और धर्मों वाला विशाल देश है। व्यापार, संस्कृति और सामाजिक संबंधों के कारण देश के विभिन्न राज्यों के लोग एक-दूसरे से जुड़े हैं। ऐसे में आपसी संवाद और व्यवहारिक संबंधों को मजबूत बनाए रखने के लिए ऐसी भाषा की आवश्यकता है, जिसे अधिक से अधिक लोग आसानी से समझ और बोल सकें। उन्होंने कहा कि हिंदी लिखने, बोलने और समझने में सरल भाषा है। हिंदी दिवस मनाने का उद्देश्य हिंदी का अधिकाधिक प्रचार-प्रसार एवं सम्मान सुनिश्चित करना है, क्योंकि हिंदी हमारी पहचान और स्वाभिमान से जुड़ी है। उन्होंने कहा कि हिंदी देश की संस्कृति और संस्कारों का प्रतिबिंब है। राष्ट्र की एकता, अखंडता और बंधुत्व को मजबूत करने में हिंदी की महत्वपूर्ण भूमिका है। भाषा और संस्कृति को संरक्षित रखना हम सभी का दायित्व है। पीठासीन अधिकारी, मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण संजय हरी शुक्ला ने कहा कि हिंदी दिवस मनाने का उद्देश्य लोगों को हिंदी के प्रति जागरूक करना है। जब तक हिंदी का व्यवहारिक रूप से अधिकाधिक प्रयोग नहीं होगा, तब तक इसके विकास को अपेक्षित गति नहीं मिल सकती। उन्होंने सरकारी कार्यालयों में भी हिंदी के अधिकाधिक प्रयोग पर जोर दिया। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश/नोडल अधिकारी लोक अदालत शक्ति सिंह ने कहा कि भाषा विचारों और भावनाओं की अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम है। व्यक्ति अपने विचार, भाव-भंगिमा और अनुभव भाषा के माध्यम से ही दूसरों तक पहुंचाता है। हिंदी इस अभिव्यक्ति को सहज और प्रभावी बनाने वाली महत्वपूर्ण भाषा है। सचिव पूर्णकालिक, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण नीरज गोंड ने कहा कि हिंदी विश्व में सर्वाधिक बोली जाने वाली प्रमुख भाषाओं में शामिल है। भारत में बड़ी संख्या में लोग हिंदी का प्रयोग करते हैं। भाषा विचारों के आदान-प्रदान का माध्यम है और देश के अलग-अलग क्षेत्रों में भाषाई विविधता के बावजूद हिंदी राष्ट्रीय एकता और आपसी संवाद को मजबूत करने में सहायक है ।संगोष्ठी में अपर सिविल जज (जू.डि.) हार्दिक सिंह, अपर सिविल जज (जू.डि.) मोनी वर्मा, जिला शासकीय अधिवक्ता कृपाशंकर राय, बृजभूषण श्रीवास्तव, गौतम द्विवेदी एवं राजन पाण्डेय ने भी हिंदी के महत्व पर अपने विचार व्यक्त किए। इस अवसर पर श्वेता वर्मा, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश कक्ष संख्या-03, संजय के लाल, स्पेशल जज (ईसी एक्ट), राम अवतार प्रसाद, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश पॉक्सो कक्ष संख्या-01, विजय कुमार-चतुर्थ, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश/त्वरित न्यायालय कक्ष संख्या-01 सहित अन्य न्यायिक अधिकारी, विद्वान अधिवक्ता एवं न्यायालय कर्मचारी उपस्थित रहे।

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