एमएसपी की कानूनी गारंटी समेत 14 मांगों पर किसान सभा का विधानसभा मार्च

14 सूत्री मांगों को लेकर 7 अक्टूबर को लखनऊ विधानसभा मार्च करेगी किसान सभा

एमएसपी की कानूनी गारंटी, कर्ज-बिजली बिल माफी और बंद चीनी मिलों को चालू कराने की मांग

गाजीपुर। किसानों की विभिन्न समस्याओं और 14 सूत्री मांगों को लेकर उत्तर प्रदेश किसान सभा (सम्बद्ध अखिल भारतीय किसान सभा) आगामी 7 अक्टूबर 2026, बुधवार को लखनऊ में विधानसभा मार्च करेगी। मार्च सुबह 11 बजे प्रस्तावित है। मंगलवार को नगर के मिश्रबाजार में आयोजित प्रेसवार्ता में किसान सभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं पूर्व विधायक राजेंद्र यादव ने इसकी जानकारी देते हुए किसानों, मजदूरों और आमजन से बड़ी संख्या में लखनऊ पहुंचने की अपील की। राजेंद्र यादव ने कहा कि किसान सभा किसानों को उनकी उपज का लाभकारी मूल्य दिलाने, कृषि लागत कम करने, कर्ज और बिजली बिल से राहत देने तथा किसान-मजदूरों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने की मांग को लेकर आंदोलन करेगी। उन्होंने कहा कि स्वामी सहजानंद सरस्वती भारत में संगठित किसान आंदोलन के जनक रहे हैं और उनकी किसान हितों की संघर्षशील परंपरा को आगे बढ़ाते हुए विधानसभा मार्च किया जा रहा है।

किसान सभा की प्रमुख मांगों में C2+50 प्रतिशत के आधार पर गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 4,762 रुपये, धान 4,508 रुपये, गन्ना 736 रुपये और आलू 1,700 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित करने तथा इसकी कानूनी गारंटी देने की मांग शामिल है। इसके साथ ही किसान, मजदूर, छात्र एवं युवाओं के बकाया बिजली बिल और कर्ज माफ करने की मांग भी उठाई जाएगी। संगठन ने किसान, मजदूर, बुनकर और दस्तकारों को 60 वर्ष की आयु के बाद महिला और पुरुष दोनों के लिए केंद्र एवं प्रदेश सरकार से 10 हजार रुपये मासिक पेंशन की गारंटी देने की मांग की है। इसके अलावा भारत-अमेरिका ट्रेड डील तथा बिजली संशोधन बिल 2022 वापस लेने की मांग भी की गई है। किसान सभा ने उत्तर प्रदेश में वर्षों से बंद पड़ी चीनी मिलों को पुनः चालू करने की मांग उठाई है। इसमें गाजीपुर की नंदगंज और मथुरा की छाता चीनी मिल को विशेष रूप से चालू कराने की मांग शामिल है। संगठन ने तालाबों के आवंटन में मल्लाह समुदाय के अधिकार सुनिश्चित करने तथा संबंधित ग्राम पंचायत में पात्र मल्लाह उपलब्ध नहीं होने पर अन्य गरीब पात्र लोगों को आवंटन करने की मांग की है। वहीं, 132 लैण्ड की जमीन पर वर्षों से बसे गरीब मजदूरों को मालिकाना हक देने, भूमि अधिग्रहण कानून-2013 को दरकिनार कर जमीन लेने की प्रक्रिया पर रोक लगाने तथा चंदौली, वाराणसी, मथुरा, नोएडा और गौतमबुद्ध नगर में चल रही भूमि अधिग्रहण की कार्यवाही निरस्त करने की मांग भी उठाई जाएगी। किसान सभा ने गाजीपुर की अफीम फैक्ट्री का उल्लेख करते हुए किसानों के लिए पोस्त की खेती का लाइसेंस पुनः शुरू करने तथा मथुरा में दुग्ध उद्योग स्थापित करने की मांग की है। निजी विद्यालयों और स्वास्थ्य केंद्रों में अधिक शुल्क का मुद्दा उठाते हुए गरीब किसान-मजदूर परिवारों को सस्ती एवं बेहतर शिक्षा और चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए सरकार से प्रभावी हस्तक्षेप की मांग की गई है। संगठन ने प्रदेश के सभी पंप कैनालों को पूरी क्षमता से संचालित कर खेतों तक पानी पहुंचाने तथा मथुरा के गोवर्धन और छाता क्षेत्र में नहरों में पर्याप्त पानी और शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने की मांग भी रखी है। किसान सभा ने दैवीय आपदा और ओलावृष्टि से फसलों को हुए नुकसान पर मिलने वाली सरकारी सहायता का लाभ बटाईदार और पेशगी किसानों को भी देने की मांग की है। इसके अलावा रसोई गैस, यूरिया और डीएपी की कीमतों को कम करने तथा किसानों के लिए कृषि एवं घरेलू जरूरतों की लागत घटाने की मांग की गई है। संगठन ने देश में भ्रष्टाचार और कथित रूप से अर्जित अवैध संपत्तियों की उच्चस्तरीय जांच कराकर ऐसी संपत्तियों का उपयोग गरीब एवं कमजोर वर्ग के युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने में किए जाने की मांग भी 14 सूत्री मांगपत्र में शामिल की है। विधानसभा मार्च में अखिल भारतीय किसान सभा के अध्यक्ष राजन क्षीर सागर, महासचिव आर. वेंकैया, डॉ. गिरीश शर्मा, अरविंद राज स्वरूप, बलदेव सिंह, के.डी. सिंह, पूर्व विधायक एवं उत्तर प्रदेश किसान सभा के प्रांतीय महासचिव राजेंद्र यादव, राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष एडवोकेट छीतर सिंह, इम्तियाज बेग, डॉ. रामचंद्र सरस और बलराम पटेल समेत कई किसान नेता वक्ता के रूप में शामिल होंगे। कार्यक्रम का नेतृत्व राजेंद्र यादव (पूर्व विधायक एवं महासचिव, उत्तर प्रदेश किसान सभा) तथा एडवोकेट छीतर सिंह (राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष, अखिल भारतीय किसान सभा) करेंगे। आयोजक मंत्री परिषद में देवेंद्र मिश्रा, रामकुमार भारती, राधेश्याम यादव, दीनानाथ त्रिपाठी, जनार्दन राम, अशोक मिश्रा, ओमप्रकाश प्रधान, अजय सिंह, जयशंकर सिंह, रामबरन सिंह, रणधीर सुमन एडवोकेट, आनंद चौरसिया, अशोक तिवारी, सुभाष पटेल, बुफरान अहमद, शारदा पांडेय और शशिकांत कुशवाहा सहित अन्य पदाधिकारी शामिल हैं।

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