गाजीपुर में 1 नवंबर से शुरू होगी धान खरीद, किसानों को फार्मर आईडी और पंजीकरण कराना अनिवार्य
डीएम अनुपम शुक्ला ने धान खरीद की तैयारियों की समीक्षा कर केंद्र प्रभारियों को दिए सख्त निर्देश, लापरवाही पर होगी कार्रवाई
गाजीपुर। जिले में आगामी धान खरीद को पारदर्शी, सुगम और व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने के लिए जिलाधिकारी अनुपम शुक्ला की अध्यक्षता में बुधवार देर शाम कलेक्ट्रेट सभागार में कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें सभी क्रय संस्थाओं के प्रभारी और केंद्र प्रभारियों को खरीद से संबंधित आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि किसानों को धान बेचने में किसी प्रकार की परेशानी नहीं होनी चाहिए। केंद्रों पर अव्यवस्था, बोरे की कमी, किसानों से दुर्व्यवहार या अनावश्यक रूप से वापस करने की शिकायत मिलने पर संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। जिले में 1 नवंबर 2026 से धान क्रय केंद्र संचालित होंगे। खाद्य विभाग के ई-उपार्जन पोर्टल पर किसानों का पंजीकरण शुरू हो चुका है। प्रशासन ने किसानों से समय रहते पंजीकरण कराने और आवश्यक दस्तावेज तैयार रखने की अपील की है।
केंद्रों पर उपकरण, कांटे और बोरों की व्यवस्था अनिवार्य
कार्यशाला में निर्देश दिया गया कि मंडी समिति सभी धान क्रय केंद्रों पर आवश्यक उपकरणों की व्यवस्था तत्काल पूरी कराए। क्रय संस्थाएं केंद्रों पर खरीद से संबंधित अभिलेख समय से उपलब्ध कराएं। बाट-माप विभाग द्वारा सभी केंद्रों के तौल कांटों का सत्यापन कराया जाएगा।
संबंधित एजेंसियों को पर्याप्त संख्या में बोरों की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। किसी भी केंद्र पर बोरे के अभाव में खरीद बाधित होने पर संबंधित के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी। सभी क्रय संस्थाओं को अपने अनुमोदित केंद्रों पर खरीद संबंधी व्यवस्थाएं पूरी कर जिला खाद्य विपणन अधिकारी को रिपोर्ट देने को कहा गया है।
जंगीपुर कृषि उत्पादन मंडी समिति के सचिव द्वारा धान खरीद के लिए तौल कांटों की उपलब्धता और आवश्यकता के संबंध में संतोषजनक जवाब नहीं दिए जाने पर जिलाधिकारी ने स्पष्टीकरण जारी किया।
ई-पॉप मशीन से होगी उपस्थिति, आधार से पहचान
धान खरीद के दौरान केंद्र प्रभारियों को प्रतिदिन पूर्वाह्न नौ से दस बजे के बीच ई-पॉप मशीन के माध्यम से अपनी उपस्थिति दर्ज करनी होगी। केंद्रों पर श्रमिकों की उपस्थिति भी इसी मशीन से दर्ज की जाएगी। किसानों की बायोमेट्रिक पुष्टि के बाद ही धान की खरीद की जाएगी।
केंद्र पर धान बेचने आने वाले किसान की पहचान आधार कार्ड से होगी। यदि किसान के स्थान पर उसका कोई सदस्य धान बेचने आता है, तो केंद्र प्रभारी को मूल किसान और संबंधित सदस्य, दोनों के आधार कार्ड की छायाप्रति सुरक्षित रखनी होगी।
धान की उतराई और सफाई के लिए किसान से श्रमिकों को अधिकतम 20 रुपये देने का प्रावधान बताया गया है।
गीले या गंदे धान को तुरंत नहीं किया जाएगा अस्वीकृत
प्रशासन ने केंद्र प्रभारियों को निर्देश दिया कि गीला या गंदा धान लाने वाले किसानों की उपज तत्काल अस्वीकृत न की जाए। पहले किसान को केंद्र पर धान की सफाई और सुखाने का अवसर दिया जाए। इसके बाद भी धान निर्धारित मानकों पर खरा नहीं उतरता है, तो नियमानुसार उसे अस्वीकृत किया जा सकता है।
अस्वीकृति की स्थिति में रिजेक्शन रजिस्टर में किसान का नाम, पता, पंजीकरण संख्या, मोबाइल नंबर, धान की मात्रा और अस्वीकृति का कारण दर्ज करना अनिवार्य होगा। साथ ही किसान को अपीलीय अधिकारी का नाम और मोबाइल नंबर उपलब्ध कराया जाएगा, ताकि वह अपनी शिकायत या अपील दर्ज करा सके। अपीलीय समिति में क्षेत्रीय विपणन अधिकारी, मंडी सचिव, केंद्र प्रभारी और दो प्रगतिशील किसान शामिल होंगे।
किसानों से दुर्व्यवहार पर होगी कार्रवाई
जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि किसी भी किसान को अनावश्यक रूप से क्रय केंद्र से वापस नहीं किया जाएगा। सभी केंद्र प्रभारी किसानों के साथ शिष्टाचारपूर्वक व्यवहार करेंगे। शिकायत मिलने पर संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
केंद्र प्रभारियों को निर्देश दिया गया कि खरीद अवधि के दौरान बैनर पर अंकित अपना मोबाइल नंबर चालू रखें। जिला और तहसील मुख्यालय से रैंडम आधार पर मोबाइल नंबरों का सत्यापन कराया जाएगा। नंबर बंद मिलने पर संबंधित के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।
सहकारिता विभाग के अंतर्गत संचालित क्रय केंद्रों के लिए संबंधित तहसील के अपर जिला सहकारी अधिकारी (एडीसीओ) को नोडल अधिकारी बनाया गया है। उन्हें नियमित निरीक्षण कर केंद्रों का संचालन सुनिश्चित कराने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। किसी अप्रिय स्थिति में केंद्र प्रभारी और एजेंसी प्रभारी के साथ संबंधित एडीसीओ की जवाबदेही भी तय की जाएगी।
किसानों को 48 घंटे में भुगतान का निर्देश
सभी क्रय एजेंसियों को किसानों से खरीदे गए धान का भुगतान यथासंभव 48 घंटे के भीतर सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए गए। भुगतान भारत सरकार के पीएफएमएस पोर्टल के माध्यम से बैंक खाते के सत्यापन के बाद किसान के आधार से लिंक बैंक खाते में किया जाएगा।
फार्मर आईडी के बिना भी पुराने तरीके से होगा सत्यापन
इस सत्र में खाद्य विभाग के पोर्टल पर किसानों का पंजीकरण दो तरीकों से किया जा रहा है। जिन किसानों के पास कृषि विभाग द्वारा जारी फार्मर आईडी है, उनका विवरण आधार नंबर दर्ज करने पर पोर्टल पर स्वतः उपलब्ध हो जाएगा। किसानों को प्राप्त विवरण में अपनी श्रेणी एससी, एसटी, ओबीसी या सामान्य दर्ज कर उसे सुरक्षित करना होगा।
यदि फार्मर आईडी में दर्ज किसी विवरण को लेकर आपत्ति है, तो किसान एग्रीस्टैक पोर्टल, डीसीएस पोर्टल या संबंधित सर्वेयर से संपर्क कर सकते हैं। पंजीकरण पोर्टल पर शिकायत दर्ज करने की सुविधा भी उपलब्ध है। फार्मर आईडी से प्राप्त विवरण का दोबारा सत्यापन नहीं किया जाएगा।
जिन किसानों के पास फार्मर आईडी नहीं है, उनका पंजीकरण पूर्व वर्षों की भांति सत्यापन प्रक्रिया के तहत किया जाएगा। धान, मक्का, ज्वार और बाजरा के लिए एक ही पंजीकरण व्यवस्था लागू है। किसान पंजीकरण के दौरान इन फसलों से संबंधित अपनी भूमि का विवरण जोड़ सकेंगे।
ऐसे प्राप्त करें फार्मर आईडी और कराएं पंजीकरण
प्रशासन ने किसानों से अपील की है कि वे धान बेचने से पहले किसान पहचान-पत्र यानी फार्मर आईडी की छायाप्रति सहित सभी आवश्यक दस्तावेज केंद्र प्रभारी को उपलब्ध कराएं।
यदि किसी किसान के पास फार्मर आईडी नहीं है, तो वह अपने मोबाइल फोन या साइबर कैफे के माध्यम से नीचे दिए गए पोर्टल पर पंजीकरण कर सकता है।