पीजी कॉलेज में छात्रवृत्ति के नाम पर वसूली का आरोप, 270 छात्रों ने खोला मोर्चा; राज्यपाल तक पहुंचेगी शिकायत!
बायोमेट्रिक के नाम पर 70 से 100 रुपये वसूली का आरोप, निजी दुकान से हो रहा प्रमाणीकरण; दो दिवसीय हस्ताक्षर अभियान के पहले दिन छात्रों का जोरदार विरोध
गाजीपुर। स्नातकोत्तर महाविद्यालय (पीजी कॉलेज), गाजीपुर में छात्रवृत्ति के लिए होने वाले बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। बिना रसीद विद्यार्थियों से पैसे वसूलने के आरोपों ने अब तूल पकड़ लिया है। इसके विरोध में बुधवार को कॉलेज के मुख्य द्वार पर दो दिवसीय हस्ताक्षर अभियान की शुरुआत की गई। अभियान के पहले ही दिन 270 छात्र-छात्राओं ने हस्ताक्षर कर कथित अवैध वसूली के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद की। छात्रों का आरोप है कि पिछले सत्र में बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण के नाम पर 40 रुपये और वर्तमान सत्र में 70 से 100 रुपये तक बिना किसी रसीद के वसूले जा रहे हैं। आरोप यह भी है कि एडेड कॉलेज होने के बावजूद पिछले दो वर्षों से विद्यार्थियों पर लगातार आर्थिक बोझ डाला जा रहा है। इस वर्ष कॉलेज परिसर के बजाय बाहर एक निजी दुकान से बायोमेट्रिक कराने की व्यवस्था किए जाने पर भी छात्रों ने सवाल खड़े किए हैं।

इस मामले को लेकर महामहिम राज्यपाल एवं उत्तर प्रदेश की कुलाधिपति को ज्ञापन भेजने की तैयारी की जा रही है। छात्रों की मांग है कि शासन की मंशा के अनुरूप बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण की व्यवस्था महाविद्यालय परिसर में पूरी तरह निःशुल्क, पारदर्शी और सुगम होनी चाहिए। विद्यार्थियों से किसी भी प्रकार की धनराशि वसूलना बंद किया जाए और पूर्व में ली गई रकम वापस कराई जाए।पूर्व छात्रसंघ उपाध्यक्ष दीपक उपाध्याय ने कहा कि छात्रवृत्ति विद्यार्थियों का अधिकार है, किसी के लिए कमाई का माध्यम नहीं। बायोमेट्रिक के नाम पर बिना रसीद 70 से 100 रुपये लेना गंभीर मामला है। महाविद्यालय प्रशासन और प्रबंध तंत्र को स्पष्ट करना चाहिए कि आखिर यह धनराशि किसके आदेश पर वसूली जा रही है।

पूर्व छात्रसंघ महामंत्री सुधांशु तिवारी ने कहा कि यदि छात्रवृत्ति के लिए बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण अनिवार्य है तो इसकी व्यवस्था कॉलेज परिसर में निःशुल्क होनी चाहिए। विद्यार्थियों को निजी दुकानों पर भेजकर आर्थिक बोझ डालना किसी भी स्थिति में उचित नहीं है। वहीं, छात्र नेता प्रद्युम्न सिंह यादव ने प्रबंध तंत्र की भूमिका पर सवाल उठाते हुए पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि महाविद्यालय की जिम्मेदारी छात्रों को सुविधाएं उपलब्ध कराने की है, न कि ऐसी व्यवस्था को बढ़ावा देने की जिसमें विद्यार्थियों को अपनी जेब से पैसे खर्च करने पड़ें।

छात्रों की पांच प्रमुख मांगें
पिछले सत्र के 40 रुपये और वर्तमान सत्र के 70 से 100 रुपये तक की कथित अवैध वसूली पर तत्काल रोक लगे।
निजी दुकान से बायोमेट्रिक कराने की व्यवस्था बंद कर कॉलेज परिसर में निःशुल्क सुविधा उपलब्ध कराई जाए।
बिना रसीद वसूली गई धनराशि विद्यार्थियों को वापस कराई जाए।
रसीद मांगने पर कथित उत्पीड़न, धमकी और मानसिक प्रताड़ना की निष्पक्ष जांच हो।
यदि जांच में वित्तीय अनियमितता या मिलीभगत सामने आती है तो जिम्मेदार प्रशासनिक एवं प्रबंधकीय अधिकारियों पर कठोर कार्रवाई की जाए।
छात्रों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि जब तक उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं होती, तब तक विरोध जारी रहेगा। हस्ताक्षर अभियान गुरुवार, 5 नवंबर 2026 को भी सुबह 10 बजे से दोपहर 3 बजे तक पीजी कॉलेज के मुख्य द्वार पर चलेगा। अभियान के माध्यम से जुटाए गए हस्ताक्षरों के साथ राज्यपाल को ज्ञापन भेजा जाएगा। इस दौरान आकाश चौधरी, निलेश बिन्द, विकास यादव, अभिषेक, शशांक उपाध्याय, शिवम, रिशु, सुप्रिया, निशा, मनीषा, सुमन, प्रीती, शिखा, ब्यूटी, गुड़िया, रविकांत यादव, अंकित यादव, आदित्य जायसवाल, सतीश चौधरी, मोहित यादव, मनोज राजभर, पुष्कर राजपूत, प्रशांत सिंह, शहजाद अली, दिवाकर पांडे सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।

अब बड़ा सवाल यह है कि छात्रवृत्ति के लिए जरूरी बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण के नाम पर आखिर विद्यार्थियों से पैसे कौन और किसके आदेश पर वसूल रहा है? छात्रों ने जांच और जवाबदेही की मांग उठाकर महाविद्यालय प्रशासन के सामने बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।