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डीएम ने किया पल्स पोलियो कार्यक्रम का शुभारंभ

जिलाधिकारी ने किया पल्स पोलियो कार्यक्रम का शुभारंभ

गाजीपुर। पल्स पोलियो अभियान जो 8 दिसंबर से 13 दिसंबर तक चलाया जाना था। रविवार को कार्यक्रम का शुभारंभ नगरीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हाथीखाना पर जिलाधिकारी आर्यका अखौरी ने जिंदगी के दो बूद बच्चों को पिलाकर कार्यक्रम का विधवत शुभारंभ किया। इस अवसर पर जिलाधिकारी ने आए हुए बच्चों के अभिभावकों से शत प्रतिशत बच्चों को पल्स पोलियो की खुराक पिलाने की अपील किया। वही सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मोहम्मदाबाद पर एसडीएम मोहम्मदबाद मनोज पठाज के द्वारा पल्स पोलियो की खुराक पिलाकर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया।

मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ सुनील कुमार पांडे ने बताया कि गाजीपुर जनपद में पल्स पोलियो अभियान के तहत 5.5 लाख बच्चों को पोलियो का खुराक पिलाया जाने का लक्ष्य रखा गया है। जिसके लिए कुल 2009 बूथ बनाए गए हैं और इन्हीं बूथों पर 0 से 5 साल तक के बच्चों को पल्स पोलियो की खुराक पिलाई जाएगी।उन्होंने बताया कि कार्यक्रम के शुभारंभ हो जाने के बाद सोमवार से शुक्रवार तक घर-घर जाकर बच्चों को पोलियो की खुराक पिलाई जाएगी। वहीं छूटे हुए बच्चों को स्पेशल कार्यक्रम के तहत 16 दिसंबर को पल्स पोलियो की खुराक पिलाई जाएगी।

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मोहम्मदाबाद के अधीक्षक डॉ आशीष राय ने बताया कि उनके क्षेत्र में कुल 126 केंद्रों के माध्यम से पल्स पोलियो की खुराक बच्चों को पिलाया जाएगा। इसके लिए कुल 24 सुपरवाइजर लगाए गए हैं।

जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ सुजीत कुमार मिश्रा ने बताया पोलियो या पोलियोमेलाइटिस एक गंभीर और खतरनाक बीमारी है जो वायरस से होती है। यह वायरस एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक फैलता है। साथ ही यह वायरस जिस भी व्यक्ति में प्रवेश करता है उसके मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचाता है जिसकी वजह से लकवा भी हो सकता है। उन्होने बताया 2014 से अभी तक भारत में पोलियो के एक भी रोगी नहीं देखे गए । यह दवा पाँच वर्ष से कम उम्र के सभी बच्चों के लिये आवश्यक है। यह दवा जन्म के समय, छठे, दसवें व चौदहवें सप्ता्ह में दी जाती है इसके बाद 16 से 24 माह की आयु में बूस्टर की खुराक दी जाती है। पाँच वर्ष तक की आयु के बच्चों को बार-बार खुराक पिलाने से पूरे क्षेत्र में इस बीमारी से लड़ने की क्षमता बढ़ती है, जिससे पोलियो के विषाणु को पनपने से रोका जा सकता है।

इस चरण के लिए  जन्म से पाँच वर्ष तक के 5.5 लाख सम्भावित बच्चों को पोलियो रोधी दवा पिलाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। उन्होंने बताया कि इस चरण के लिए जिले भर में 2009 बूथ बनाए गए हैं। साथ ही 64 मोबाइल टीम भी बनाई गई है जिसके माध्यम से बूथ स्तर पर पोलियो अभियान चलाया जाएगा। इसके साथ ही अभियान के 948 टीमें बनाए गए हैं जो घर-घर जाकर बच्चों को पोलियो की दवा पिलाने का काम करेंगे। साथ ही बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन पर पोलियो की खुराक पिलाने के लिए 85 टीम ने बनाई गई हैं। पल्स पोलियो के कार्यक्रम को सकुशल निपटाने के लिए एएनएम, आशा और आंगनवाड़ी कार्यकर्ती इसमें अपना सहयोग करेंगी।

कार्यक्रम में अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ जयनाथ सिंह, डॉ मनोज कुमार सिंह, विश्व स्वास्थ्य संगठन से एसआरटील, यूनिसेफ से बलवंत सिंह और श्री प्रदीप सिंह, यूएनडीपी से प्रवीण कुमार उपाध्याय, प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर ईशानी डॉ स्वतंत्र सी, अर्बन कोऑर्डिनेटर अशोक कुमार के साथ अन्य लोग उपस्थित रहे।

बुजुर्गों को अलग से मिलेगा पांच लाख का कवर

70 वर्ष से अधिक के बुजुर्गों को अलग से मिलेगा पांच लाख का कवर

• यह टापअप उनके परिवार के अन्य सदस्यों को मिलने वाली पांच लाख रुपए तक की धनराशि के अतिरिक्त होगा

Beneficiary.nha.gov.in पर जाकर अन्य वृद्ध भी बनवाएं अपने आयुष्मान कार्ड

ग़ाज़ीपुर। आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के अन्तर्गत वर्तमान परिवारों के 70 वर्ष एवं इससे अधिक आयु के समस्त वरिष्ठ नागरिकों को पृथक से पांच लाख रूपए तक का टॉप अप कवर प्रदान किया जाएगा। यह टापअप उनके परिवार के अन्य सदस्यों को मिलने वाली पांच लाख रुपए तक की धनराशि के अतिरिक्त होगा। इसलिए 70 वर्ष से अधिक आयु के सभी बुजुर्ग जल्द से जल्द अपने आयुष्मान कार्ड बनवा लें। मुख्य चिकित्सा अधिकारी सुनील कुमार पांडे ने बताया कि अब तक जिले में 3500 से अधिक बुजुर्गों ने अपने आयुष्मान कार्ड बनवा लिए हैं।
उन्होंने बताया कि 70 वर्ष से अधिक आयु के सभी बुजुर्गों, चाहे उनकी सामाजिक एवं आर्थिक स्थिति कैसी भी हो, को इस योजना का लाभ मिलेगा। ऐसे परिवार जो वर्तमान में योजना से आच्छादित नहीं हैं, उनके 70 वर्ष एवं इससे अधिक आयु के बुजुर्गों को पांच लाख रूपए प्रति परिवार प्रति वर्ष का कवर फ्लोटर आधार पर अनुमन्य होगा।

उन्होंने ने बताया कि केन्द्र व राज्य सरकार द्वारा संचालित अन्य स्वास्थ्य बीमा योजनाओं जैसे मुख्यमंत्री जन आरोग्य अभियान एवं अन्य योजनाओं के लाभार्थियों को वर्तमान योजना में बने रहने अथवा आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जनआरोग्य योजना के अन्तर्गत सम्मिलित होने का विकल्प चयनित करने के लिए एक ही बार अवसर प्रदान किया जाएगा। 70 वर्ष एवं इससे अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिक, जिन्होंने निजी स्वास्थ्य बीमा का लाभ ले रखा है अथवा ईएसआईसी के लाभार्थी हैं, उन्हें भी इस योजना का लाभ अनुमन्य होगा।

उन्होंने बताया कि आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत जिले में 15 सरकारी व प्राइवेट अस्पताल सूचिबद्ध हैं। जिले में 3500 से अधिक आयुष्मान कार्ड बन चुके हैं। इस योजना के तहत 26 विशेषताओं से संबंधित बीमारियों के 1900 से अधिक पैकेज के अंतर्गत निःशुल्क इलाज दिया जाता है।

ऐसे बनाएं आयुष्मान कार्ड

आयुष्मान कार्ड बनवाने के लिए Beneficiary.nha.gov.in पर लॉगिन करना होगा। आधार नंबर दर्ज करने पर लिंक मोबाईल नं0 पर ओ0टी0पी0 प्राप्त होगा। ओ0टी0पी0 दर्ज करने के बाद ई-केवाईसी करना होगा और इसके बाद आयुष्मान कार्ड डाउनलोड कर सकते हैं। मोबाइल पर प्ले स्टोर से Ayushman ऐप डाउनलोड करके भी आयुष्मान कार्ड आसानी से बनाया जा सकता है। किसी भी तरह की जानकारी टोल फ्री नं0 1800 1800 4444 से प्राप्त की जा सकती है। योजना की पात्रता के लिए एक मात्र शर्त 70 वर्ष की आयु की पूर्णता होगी एवं आयु की गणना आधार कार्ड पर अंकित आयु के आधार पर की जाएगी। योजना के लिए एक मात्र दस्तावेज आधार कार्ड मान्य होगा।

बृहद मानसिक स्वास्थ्य शिविर में 220 मरीज का हुआ स्वास्थ्य परीक्षण

बृहद मानसिक स्वास्थ्य शिविर में 220 मरीज का हुआ स्वास्थ्य परीक्षण जो मरीज को किया गया जिला चिकित्सालय रेफर

गाज़ीपुर।सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र देवकली पर वृहद मानसिक स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया गया। जिसका उद्घाटन जिला पंचायत सदस्य अभय सिंह एवम मंडल अध्यक्ष प्रवीण त्रिपाठी तथा डॉ एस के सरोज (अधीक्षक ) ने किए। मानसिक रोग से ग्रसित बच्चों एवं अन्य व्यक्तियों को फल वितरित किया गया।शिविर में डॉ संजू लता, डॉ सादिया परवीन एवं डॉ सत्यकाम सिंह, डॉ शैलेंद्र कुमार मौर्य सहायक शोध अधिकारी उदयभान सिंह उपस्थित रहे। शिविर में 220 मरीजों का स्वास्थ्य परीक्षण किया। जिसमें 15 मानसिक रोगियों को उपचार किया गया। जिसमें से उच्च जोखिम के 9 मरीजों को जिला चिकित्सालय रेफर किया गया।

मनोचिकित्सक सामाजिक कार्यकर्ता गौरव कुमार गिरि ने लोगों को मानसिक बीमारी के लक्षण तथा उसके उपचार के बारे तथा नशे से उत्पन्न होने वाली मानसिक बीमारी उसके उपचार के बारे में जागरूक किया। मंदबुद्धि के माता-पिता के बच्चों का परीक्षण तथा उसके उपचार के साथ काउंसिलों के माध्यम से इलाज़ हो सकता है महताब आलम ने लोगों के कान का परीक्षण कर लोगो जागरूक किए। रवि चौरसिया द्वारा फ्लोरोसिस के बारे में विस्तृत जानकारी दिए ।आशीष श्रीवास्तव ने लोगों को दिनचर्या के बारे में तथा खानपान के बारे में जागरूक किया।स्टाफ नर्स सरिता तथा लैब टेक्नीशियन अभिषेक भारती,पूजा सी. एच ओ द्वारा वीपी शुगर की जांच की गई फार्मासिस्ट दिलीप कुमार सिंह द्वारा दवा वितरण किया गया।

ब्लाक कार्यक्रम प्रबंधक प्रदीप कुमार सिंह द्वारा लोगों को स्वास्थ्य के बारे में भी जागरूक किए। कुल 220 मरीजों का स्वास्थ्य परीक्षण किया जिसमें 15 मानसिक रोगियों को उपचार किया गया जिसमें से उच्च जोखिम के 9 मरीजों को जिला चिकित्सालय रेफर किया गया।

मिनी स्ट्रोक (फालिज)के मरीज को 108 एंबुलेंस ने पहुंचाया बीएचयू वाराणसी

मिनी स्ट्रोक (फालिज)के मरीज को 108 एंबुलेंस ने पहुंचाया बीएचयू वाराणसी

ग़ाज़ीपुर।स्वास्थ्य विभाग के द्वारा चलाई गई 102 और 108 एम्बुलेंस लगातार लोगों के जीवन बचाने का कार्य कर रही है और यह काम सिर्फ जिले के अंदर ही नहीं बल्कि हायर सेंटर तक पहुंच कर मरीज की जान बचाई जा रही है। इसी क्रम में बुद्धवार को जिला अस्पताल से मिनी स्ट्रोक (फालिज)के एक मरीज को 108 एंबुलेंस से बीएचयू वाराणसी पहुंचाया गया जहां पर उसका इलाज चल रहा है।

108 एंबुलेंस के प्रभारी दीपक राय ने बताया कि सदर ब्लाक के सैदाबाद के रहने वाले सलाउद्दीन खान उम्र 60 वर्ष जिन्हें मिनी स्टॉक आया हुआ था। वह जिला अस्पताल में एडमिट थे जिला अस्पताल के द्वारा उन्हें बीएचयू वाराणसी के लिए रेफर किया गया था । जिसके लिए 108 एंबुलेंस को कॉल किया गया और उसके बाद पायलट दीपक और इमरजेंसी मेडिकल टेक्नीशियन रामनाथ के द्वारा मरीज को जिला अस्पताल से लेकर डॉक्टर के निर्देश पर रास्ते में ट्रीटमेंट देते हुए बीएचयू वाराणसी तक पहुंचाया गया और उन्हें इमरजेंसी में एडमिट करा गया जहां पर उनका इलाज शुरू हुआ।

एनपी एनसीडी कार्यक्रम में शामिल होने के लिए टीम हुई लखनऊ रवाना

एनपी एनसीडी कार्यक्रम में शामिल होने के लिए चार सदस्य टीम हुई लखनऊ रवाना

ग़ाज़ीपुर। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की तरफ से प्रदेश के कई जनपदों के चिकित्सकों का कार्यशाला एनपी एमसीडी कार्यक्रम के अंतर्गत एमसीडी टीओटी कार्यशाला लखनऊ में आयोजित किया गया है। जिसके लिए गाजीपुर से अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर मनोज सिंह, डॉ स्वतंत्र सिंह,एक मेडिकल ऑफिसर गए हैं। जहां पर कार्यशाला में इन लोगों को नॉन डिजीज रोगों के बेहतर इलाज और प्रबंधन के बारे में जानकारी दी जाएगी।

डॉ स्वतंत्र सिंह ने बताया कि मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल और मुख्य चिकित्सा अधिकारी के निर्देश पर गाजीपुर से चार लोगों की टीम लखनऊ में आयोजित एनपी एमसीडी के कार्यक्रम के लिए जा रहे हैं। जहां पर नान कम्यूनिकेबल डिज़ीज़ जैसे ब्लड प्रेशर, सुगर ,अस्थमा, सीओपीडी , कैंसर जैसे रोगों का सफल ईलाज़ के बेहतर प्रबंधन के बारे में जानकारी दी जाएगी।

यह कार्यशाला 19 नवंबर से 21 नवंबर तक आयोजित है ।और इस कार्यशाला में प्रशिक्षण लेकर आने के पश्चात यह लोग गाजीपुर के अन्य स्वास्थ्य अधिकारियों और कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित करने का कार्य करेंगे।

231 लोगों का किया गया सफल परीक्षण

बृहद मानसिक स्वास्थ्य शरीर में 231 लोगों का किया गया सफल परीक्षण

ग़ाज़ीपुर। बृहद मानसिक स्वास्थ्य शिविर का आयोजन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मोहम्मदाबाद पर आयोजित किया गया जिसका उद्घाटन मोहम्मदाबाद ब्लॉक प्रमुख प्रतिनिधि एवं अधीक्षक डॉ आशीष राय के द्वारा किया गया। इस दौरान मानसिक रोग से ग्रसित बच्चों एवं अन्य व्यक्तियों फल वितरित भी किया गया। इस शिविर में कुल 231 मरीज का परीक्षण किया गया।

अधीक्षक डॉ आशीष राय ने बताया कि वर्तमान परिवेश को देखते हुए मानसिक स्वास्थ्य के प्रति समाज में जागरूकता जरूरी है। ऐसे रोगियों के साथ अच्छा व्यवहार करना चाहिए। दवा के साथ नियमित खयाल रखने की जरूरत होती है। मानसिक रोग के प्रति जागरुकता के साथ ही उचित परामर्श व बेहतर उपचार के लिए यह शिविर आयोजित है। यदि हम थोड़ा सा संवेदनशील होकर मानसिक रोगी का सही समय से उपचार कराएं तो रोग पूरी तरह ठीक हो सकता है। कुछ मामलों में यह भावनाएं मानसिक बीमारी का कारण बन सकती है। यह 14 साल की उम्र से शुरू होता है  लेकिन ज्यादातर मामलों का पता नहीं चल पाता और इलाज नहीं होता है। किशोरों व नौजवानों में मानसिक बीमारी का एक प्रमुख कारण अवसाद (डिप्रेशन) है। मानसिक बीमारी के लक्षण, पहचान और जानकारी न होने के कारण यह समस्या बढ़ जाती है।

स्वास्थ कार्यकर्ता गौरव कुमार गिरि ने लोगों को मानसिक बीमारी के लक्षण के बारे तथा नशे से उत्पन्न होने वाली मानसिक बीमारी उसके उपचार के बारे में जागरूक किया। क्लिनिकल साइकोलॉजी अंकित आनंद ने मंदबुद्धि के बच्चों का परीक्षण तथा उसके उपचार के साथ काउंसिलों के माध्यम से इलाज़ हो सकता है। महताब आलम ने लोगों के कान का परीक्षण कर लोगो जागरूक किए। इस कैम्प में बीपी शुगर की जांच के साथ आरबीएस के टिम तथा फार्मासिस्ट द्वारा दवा वितरण किया गया, एच आई वी काउंसलिंग एवं क्षय रोग के लक्षणों से अवगत कराया गया।

ब्लाक कार्यक्रम प्रबंधक संजीव कुमार ने बताया कि कैम्प में 231 मरीजों का स्वास्थ्य परीक्षण किया जिसमें 17 मानसिक रोगियों को उपचार किया गया। उच्च जोखिम के 8 मरीजों को जिला चिकित्सालय रेफर किया गया। शिविर में डॉ वीरेंद्र कुमार, डॉ आरके वर्मा एवं डॉक्टर डीपी सिंह, डॉ नीरज कुमारी ,डेजी, सोनम यादव, रंजना , जितेन्द्र, नीरा राय ,अंकित आनंद,आशा सिंह इत्यादि रही। रवि शंकर चौरसिया जिला परामर्श दाता एवं सतीश यादव स्टाफ नर्स द्वारा फलोरोसिस , लक्षण एवं बचाव के बारे में विस्तार पूर्वक बताया।

मिला डीजल के लिए बजट

शव वाहन पर लगा ब्रेक हटा विभाग को फिर से मिला ₹60000 डीजल के लिए बजट


गाजीपुर। जिला अस्पताल में गरीब और असहाय लोगों की मौत के बाद उनके शव को उनके घरों तक शव वाहन से पहचाने के साथ ही लावारिस शव को मर्चरी हाउस से पोस्टमार्टम हाउस और उसके पश्चात शमशान घाट तक पहुंच कर उसका अंतिम संस्कार कराया जाता था। लेकिन पिछले दिनों इसके बजट की कमी के कारण शव वाहन को कई दिनों तक खड़ा कर दिया गया था। जिसके कारण लावारिस शव को निजी संसाधन से श्मशान घाट तक लाकर उसका अंतिम संस्कार किया जा रहा था। लेकिन अब एक बार फिर मुख्य चिकित्सा अधिकारी के प्रयास से शव वाहन चलाने के लिए बजट विभाग को प्राप्त हो गया है। इसके बाद शव वाहन पर लगा ब्रेक अब हट जाएगा और लावारिश शव का अंतिम संस्कार निर्वाध गति से चलता रहेगा।

मुख्य चिकित्सा अधिकारी सुनील कुमार पांडे ने बताया कि शव वाहन चलाने के लिए शासन से ₹60000 का बजट मिलता है। और उसके खत्म हो जाने के बाद दोबारा डिमांड करने पर पैसा प्राप्त होता है। जब उन्होंने मुख्य चिकित्सा अधिकारी का पद संभाला उसके कुछ ही दिनों बाद शव वाहन के बजट में कमी आ गई थी। इसके बाद उन्होंने विभाग के प्रशासनिक अधिकारी और अकाउंटेंट से इस संबंध में नोटिस देकर स्पष्टीकरण मांगा था। इसके बाद पता चला कि शव वाहन चलाने के लिए शासन के तरफ से ₹60000 मिलता है और ड्राइवर के वेतन के लिए प्रतिमाह ₹10000 और 10 से 15 हजार रूपए शव वाहन के मेंटेनेंस के लिए आता है। ऐसे में डीजल के मद में आए हुए 60000 रुपया खत्म हो गया था। जिसके चलते शव वाहन को ब्रेक लगा दिया गया था और अगला बजट के लिए विभाग को पत्र भेजा गया था और शासन ने इसे संज्ञान लेते हुए ₹60000 के अगला बजट भेज दिया है।

उन्होंने यह भी बताया कि इस बार अप्रैल से नवंबर के महीने में ही ₹60000 का बजट जो विभाग से मिला था वह खत्म हो गया और इसलिए विभाग ने इसके मद में दोबारा बजट भेजा है। जबकि पिछले साल मात्र ₹24000 का बजट ही खर्च हो पाया था शेष बजट विभाग को वापस करना पड़ा था।

एम्बुलेंस ने मरीज को निशुल्क पहुंचाया बीएचयू

108 एम्बुलेंस ने मरीज को निशुल्क पहुंचाया बीएचयू वाराणसी

ग़ाज़ीपुर। 108 एम्बुलेंस उत्तर प्रदेश सरकार के द्वारा गरीब और असहाय लोगों को दी गई एक नया तोहफा है जिसकी मदद से आमजन निशुल्क हायर सेंटर तक पहुंच कर अपने मरीज की इलाज करा रहे हैं। ऐसा ही एक दिन पूर्व हुआ जब जिला अस्पताल में एडमिट मरीज जिसे साइटिका की प्रॉब्लम थी और वह पैरों से चल पाने में अक्षम था जिसे डॉक्टर के द्वारा बीएचयू वाराणसी के लिए रेफर किया गया था जिसकी जानकारी पर 108 एंबुलेंस ने मरीज को वाराणसी तक पहुंचाया।

108 एंबुलेंस के प्रभारी अखंड प्रताप सिंह ने बताया कि गाजीपुर के जिला अस्पताल में भर्ती मरीज अरुण कुमार पुत्र गोवर्धन राम निवासी मिश्रावलिया रौज़ा जिसे पैरों में साइटिका की प्रॉब्लम थी। और वह पैरों से चल पाने में अक्षम था। जिसका कई दिनों से जिला अस्पताल में इलाज चल रहा था। लेकिन बेहतर इलाज के लिए डॉक्टर के द्वारा उसे बीएचयू वाराणसी के लिए रेफर किया गया था। इसके बाद परिजनों ने 108 एंबुलेंस पर कॉल किया और अपनी समस्या बताएं। जिसके बाद 108 एंबुलेंस के पायलट दीनानाथ और इमरजेंसी मेडिकल टेक्नीशियन लाल बहादुर शर्मा जिला अस्पताल पहुंचे। और मरीज को लेकर बीएचयू वाराणसी के लिए रवाना हुए। वाराणसी में उसे इमरजेंसी में एडमिट कराया जहां पर उसका इलाज शुरू हो पाया।

डीएम ने हरी झंडी दिखाकर संचारी रोग नियंत्रण अभियान का किया शुभारंभ

गाजीपुर।संचारी व मच्छर जनित रोगों की रोकथाम व नियंत्रण के लिए जिलाधिकारी आर्यका अखौरी ने मंगलवार को बेसिक शिक्षा विभाग के नगर संसाधन केंद्र से विशेष संचारी रोग नियंत्रण अभियान का शुभारंभ हरी झंडी दिखाकर किया।

इस दौरान जन जागरूकता रैली का भी आयोजन किया गया। जिसमें स्वास्थ्य समेत सभी विभिन्न विभागों के अधिकारियों, स्वास्थ्यकर्मियों, आशा-आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, स्कूली छात्र-छात्राओं ने बढ़-चढ़ कर प्रतिभाग किया।

जिलाधिकारी आर्यका अखौरी ने कहा की संचारी व मच्छर जनित रोगों जैसे डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया, फाइलेरिया, कालाजार आदि बीमारियों की रोकथाम व नियंत्रण के लिए प्रदेश सरकार निरंतर प्रयास कर रही है। इन्हीं बीमारियों की रोकथाम के लिए विशेष संचारी रोग नियंत्रण अभियान की शुरुआत की गई है। यह अभियान 31 अक्टूबर तक चलेगा। इसी बीच 11 से 31 अक्टूबर दस्तक अभियान चलाया जाएगा। अभियान के सफल संचालन के लिए स्वास्थ्य विभाग,शिक्षा विभाग,नगर विकास, पंचायती राज विभाग समेत 11 विभागों की टीम तैनात की गईं हैं,जो घर-घर जाकर बीमारियों की रोकथाम और समुदाय को जागरूक करेंगी। ऐसे में जन समुदाय का भी दायित्व है कि अभियान में सहयोग करे, सतर्क और जागरूक रहें। जिलाधिकारी ने अपील की कि डेंगू का मच्छर दिन में ही काटता है तथा इससे बचाव के लिए पूरे शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनें। मच्छर रोधी क्रीम का इस्तेमाल करें। सोते समय मच्छरदानी का प्रयोग करें। घरों के अंदर और आसपास किसी भी पात्र में पानी इकट्ठा नही होने दे।

प्रशासन व विभिन्न विभागों के साथ ही जन प्रतिनिधि भी इस अभियान को सफल बनाने में सहयोग करेंगे। इन बीमारियों की रोकथाम के लिए एंटी लार्वा छिड़काव, फोगिंग, स्वच्छता, साफ-सफाई आदि का कार्य किया जाएगा। जांच व उपचार के साथ आवश्यक दवा भी प्रदान की जाएगी। इस अभियान में स्वास्थ्य विभाग, नोडल विभाग रहेगा। नगर विकास, पंचायती राज, पशुपालन विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग, शिक्षा विभाग, दिव्यांग जन कल्याण विभाग, कृषि एवं सिंचाई विभाग सहित 11 विभाग आपसी समन्वय बनाकर अभियान को सफल बनाएंगे।

सीएमओ डा. देश दीपक पाल ने कहा कि विशेष संचारी रोग नियंत्रण व दस्तक अभियान उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री का बेहद महत्वाकांक्षी कार्यक्रम है। डेंगू, मलेरिया, फाइलेरिया, कालाजार आदि रोगों को विशेष अभियान चलाकर काबू कर लिया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग के आपसी समन्वय से नगर पालिका व नगर पंचायत की टीमें शहरी क्षेत्र तथा पंचायती राज विभाग की टीमें ग्रामीण क्षेत्रों में बीमारियों की रोकथाम व नियंत्रण कार्य के साथ ही समुदाय को जागरूक करेंगी। सीएमओ ने कहा कि अभियान में अधिक से अधिक प्रचार-प्रसार किया जाएगा। इसमें जन प्रतिनिधियों, प्रभावशाली व्यक्तियों, विभिन्न संस्थाओं के साथ ही जनमानस का भी सहयोग लिया जाएगा।

इस मौके पर बेसिक शिक्षा अधिकारी हेमंत राव,मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डा०ए०के०शाही,डिप्टी सीएमओ, एसीएमओ, चिकित्सा अधीक्षक, जिला मलेरिया अधिकारी, नगर पालिका/नगर पंचायत, पंचायती राज, आईसीडीएस, बेसिक व माध्यमिक शिक्षा विभाग समेत सभी विभागों के प्रमुख अधिकारी व सहकर्मी, सहायक मलेरिया अधिकारी, मलेरिया निरीक्षक एवं अन्य स्वास्थ्यकर्मी उपस्थित रहे।

जिला जेल में बंद सैकड़ो बन्दियों की हुई जांच

जिला जेल के बंदियों की हुई सक्रिय टी बी खोज अभियान (ए सी एफ) के अन्तर्गत टीबी व एचआईवी जांच

सात सौ पन्द्रह बन्दियों का हुआ जांच।

18 से 20 सितम्बर 2024 तक चलेगा बन्दियों के स्वास्थ्य परिक्षण का अभियान।

ग़ाज़ीपुर। बेहतर स्वास्थ्य हर इंसान की पहली जरूरत है और उसे पूरा करना हम सभी की जिम्मेदारी है। ऐसे ही बहुत सारे लोग जो विभिन्न मामलों में गाजीपुर के जिला जेल में निरुद्ध हैं, उनके स्वास्थ्य का ध्यान रखने के लिए प्रमुख सचिव चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण लखनऊ, जिलाधिकारी गाजीपुर, अपर निदेशक, राज्य क्षयरोग नियन्त्रण कार्यक्रम अधिकारी स्वास्थ्य भवन, लखनऊ के निर्देश व मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ देश दीपक पाल के निर्देशन पर स्वास्थ्य विभाग (क्षयरोग विभाग) की टीम जिला जेल पहुंचकर 715 बंदियों की जांच की। इसके साथ ही नि:शुल्क दवाएं भी दी गईं।


जेल अधीक्षक अरुण प्रताप सिंह, जेलर राकेश कुमार वर्मा और जेल चिकित्सा अधिकारी डॉ जितेंद्र कुमार के नेतृत्व में जिला जेल की 32 महिलाओं और 674पुरुष बंदियों की टीबी और एचआईवी की जांच की गई। जेल अधीक्षक ने बताया कि जेल में बंदियों के स्वास्थ्य पर ध्यान देने के लिए शासन स्तर से निर्देश आए थे। इस क्रम में बुधवार से डॉक्टरों और पैरा मेडिकल स्टाफ की टीम जिला जेल भेजा गया ।जिसमें वह स्वयं शामिल थे और वहां पर जेल में बंद करीब 715 बंदियों की जांच की गई। जांच के अनुसार उन्हें तत्काल दवा भी दी गई।


जिला क्षयरोग अधिकारी डाक्टर संजय कुमार ने बताया कि सक्रिय टी बी खोज अभियान (ए सी एफ) जनपद गाजीपुर के 20 प्रतिशत आबादी पर किया जा रहा है जिस में मलिन बस्ती,स्लम एरिया, सब्जी मंडी, वृद्धाश्रम,बाल सुधार गृह, जिला जेल, मदरसा, नवोदय विद्यालय इत्यादि में किया जा रहा है यह कार्यक्रम दिनांक -09/09/2024 से दिनांक – 20/09/2024 तक चलेगा।अब तक इस अभियान के अन्तर्गत कुल मरीजों कि संख्या 86 है दिनांक – 20 तक अभी और मिलने कि सम्भावना है। सभी मिले मरीजों को इलाज पर रख दिया गया है। अभी तक 01जनवरी 2024 से अब तक कुल टी बी मरीजों कि संख्या 3531 है राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम (एनटीईपी) के जिला कार्यक्रम समन्वयक डॉ मिथलेश कुमार ने बताया कि यह कार्यक्रम शासन के निर्देश के क्रम में किया जा रहा है।जिला क्षयरोग विभाग की की टीम ने अपना पूर्ण सहयोग दिया।

इलाज में जेलर और जेल अस्पताल के चिकित्सक के द्वारा संपूर्ण सहयोग किया गया। इस मौके पर डिप्टी जेलर रविन्द्र सिंह मौजूद रहे। स्वास्थ्य टीम में फार्मासिस्ट भुनेश्वर कुमार, डी पी पी एम सी अनुराग कुमार पाण्डेय,एसटीएस सुनील कुमार वर्मा,टी बी एच बी नरेन्द्र कुमार राय, राधेश्याम यादव,काउंसलर आई सी टी सी, सेन्टर, मुहम्मदाबाद से निरा राय, एलटी महेश, राम विलास , आई सी टी सी एल टी गौरव विशाल, अमित कुमार गुप्ता शामिल रहे।