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एक दिवसीय डीबीटी एवं रिफ्रेशर प्रशिक्षण कार्यशाला का हुआ आयोजन

एक दिवसीय डीबीटी एवं रिफ्रेशर प्रशिक्षण कार्यशाला का हुआ आयोजन

टीबी रोगियों के उपचार व डीबीटी योजना के सुदृढ़ीकरण को स्वास्थ्य विभाग निरंतर प्रयासरत

सीएमओ कार्यालय में आयोजित हुई एक दिवसीय डीबीटी एवं रिफ्रेशर प्रशिक्षण कार्यशाला

टीबी रोगियों को डीबीटी के जरिये निक्षय पोषण योजना की राशि अब दो किस्तों में मिलेगी

डीबीटी से जुड़ी योजनाओं के बारे में लेखाकार, एसटीएस व एसटीएलएस को दी विस्तृत जानकारी

गाजीपुर। राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम (एनटीईपी) के अंतर्गत टीबी रोगियों के उपचार और उसके अंतर्गत प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) योजना को सुदृढ़ीकरण करने के लिए स्वास्थ्य विभाग निरंतर प्रयासरत है। इसी क्रम में बृहस्पतिवार को मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) कार्यालय के सभागार में एक दिवसीय डीबीटी एवं रिफ्रेशर प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन सीएमओ डॉ देश दीपक पाल की अध्यक्षता में किया गया। कार्यशाला में एनटीईपी के समस्त लेखाकर, सीनियर ट्रीटमेंट सुपरवाइज़र (एसटीएस) एवं सीनियर टीबी लैब सुपरवाइज़र (एसटीएलएस) को डीबीटी की समस्त योजनाओं जैसे इनफारमेंट इन्सेन्टिव स्कीम, ट्रीटमेंट सपोर्टर फार टीबी प्रिवेंटिव थेरेपी (टीपीटी),सैम्पल ट्रान्सपोर्टर और रिफ्रेशर प्रशिक्षण के अंतर्गत निक्षय पोषण योजना, ट्रीटमेंट सपोर्टर, प्राइवेट नोटीफिकेशन एवं आउटकम के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई। समस्त प्रतिभागियों को जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ संजय कुमार के नेतृत्व में जिला कार्यक्रम समन्वयक डॉ मिथलेश कुमार और विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) से डॉ वीजी विनोद के द्वारा प्रशिक्षण प्रदान किया गया।
सीएमओ डॉ देश दीपक पाल ने कहा कि क्षय मुक्त भारत को लेकर देश के प्रधानमंत्री का विजन तभी पूरा हो सकता है जब किसी भी टीबी रोगी का नोटिफिकेशन न छूटे और उन्हें निक्षय पोषण योजना के तहत मिलने वाली धनराशि समय से प्रदान की जाए। साथ ही क्षय रोगी नियमित दवा और प्रोटीन युक्त पौष्टिक आहार का सेवन करें। टीबी के सम्पूर्ण उपचार के लिए उसका कोर्स का पूरा होना बहुत जरूरी है। कई टीबी रोगी बीच में ही इलाज छोड़ देते हैं या फिर बदल-बदल कर इलाज करते हैं जिससे उनकी स्थिति बिगड़ जाती और कई बार बीमारी बहुत गंभीर स्थिति में पहुँच जाती है। टीबी मरीजों की एचआईवी और डायबिटीज की भी नियमित जांच की जानी चाहिए। सीएमओ ने समस्त निजी चिकित्सकों से अपील की है कि क्षय उन्मूलन कार्यक्रम को सफल बनाने में अधिक से अधिक टीबी रोगियों को नोटिफ़ाई कर उनका तत्काल प्रभाव से उपचार पूरा करने में सहयोग करें। जिला कार्यक्रम समन्वयक डॉ मिथलेश कुमार ने बताया कि टीबी मरीजों को निक्षय पोषण योजना के तहत पौष्टिक आहार के लिए उपचार के दौरान (छह माह) हर महीने मिलने वाली राशि अब पांच की जगह दो किस्तों में मिलेगी। टीबी से पीड़ित व्यक्ति को उपचार शुरू होने पर दी जाने वाली पहली लाभ राशि को 1500 रुपये करने का निर्णय लिया गया है। इसके बाद दूसरा लाभ उपचार शुरू होने की तारीख से 84 दिन (उपचार के तीन महीने) पूरे होने पर (1500 रुपये) मिलेगा। यह व्यवस्था जनवरी 2024 से लागू कर दी गई है। उन्होंने बताया कि इस वित्तीय वर्ष (2023-24) में अब तक कुल 5572 टीबी मरीज चिन्हित हुए, जिसमें 4924 (88%) रोगियों का उपचार पूरा हो चुका है। वर्तमान में 2914 रोगियों का उपचार चल रहा है। साथ ही निक्षय पोषण योजना के तहत 6407 टीबी रोगियों का डीबीटी के जरिये भुगतान किया जा रहा है। कार्यशाला में बताया गया कि इनफार्मेंट इन्सेन्टिव स्कीम के अंतर्गत किसी के द्वारा टीबी मरीज की सूचना दिये जाने पर उस व्यक्ति को 500 रुपये डीबीटी के माध्यम से सीधे बैंक खाते में भेजे जाते हैं। ट्रीटमेंट सपोर्टर के रूप में कार्य कर रहीं आशा कार्यकर्ताओं को डीएसटीबी के मरीज का उपचार पूरा कराने में 1000 रुपये और डीआरटीबी मरीज का उपचार पूरा कराने में 5000 रुपये डीबीटी के जरिये भेजे जाते हैं। इसके साथ सैंपल ट्रांसपोर्टर के रूप में कार्यरत स्वास्थ्य कर्मी को हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर से टीबी सैंपल के अनुसार भुगतान डीबीटी के जरिये किया जाता है। इसके साथ ही निजी चिकित्सकों द्वारा एक टीबी मरीज के नोटिफिकेशन पर 500 रुपये और उसका उपचार पूरा कराने पर 500 रुपये डीबीटी के जरिये भेजे जाते हैं। कार्यशाला में जिला पीपीएम समन्वयक अनुराग कुमार पाण्डेय एवं एनटीईपी के समस्त लेखाकार, एसटीएस एवं एसटीएलएस मौजूद रहे।

108 एंबुलेंस ने मरीज को पहुंचा बीएचयू

108 एंबुलेंस ने मरीज को पहुंचा बीएचयू वाराणसी

गाजीपुर। उत्तर प्रदेश सरकार के द्वारा स्वास्थ्य विभाग के माध्यम से आमजन को उपलब्ध कराई गई निशुल्क एंबुलेंस सेवा लगातार अपनी सेवा के माध्यम से लोगों को जिंदगी देने का कार्य कर रही है। इसी क्रम में गाजीपुर के जिला अस्पताल में भर्ती एक मरिज जो बीएचयू वाराणसी के लिए रेफर किया गया था। उसे बीती रात क्विक रिस्पांस करते हुए बीएचयू वाराणसी पहुंचाया जहां उसका इलाज चल रहा है। 108 एंबुलेंस के प्रभारी दीपक राय ने बताया कि रविवार की रात 108 एंबुलेंस के लिए जिला अस्पताल से एक कॉल आया था। और बताया गया  कि एक महिला मैना देवी उम्र 65 निवासी करवानिया मोहम्मदाबाद की निवासी है। जिसे लकवा मार दिया था। उसे जिला अस्पताल की तरफ से बेहतर इलाज के लिए बीएचयू वाराणसी के लिए रेफर किया गया था। इसके बाद इमरजेंसी मेडिकल टेक्नीशियन राकेश और पायलट संतोष कुमार बताए गए लोकेशन से मरीज को लेकर बीएचयू वाराणसी के लिए रात करीब 12:30 बजे वाराणसी के लिए लेकर चले। इस दौरान रास्ते में इमरजेंसी मेडिकल टेक्नीशियन राकेश के द्वारा उनकी देखभाल करते हुए वाराणसी तक पहुंचाया गया । और वहां पर एडमिट कराया गया जहां पर उनका इलाज चल रहा है।

टीबी के मरीज न करें लापरवाही, वरना होंगी अन्य बीमारी

“टीबी मरीज अपना कोर्स पूरा करने में न करें लापरवाही, वरना होंगी अन्य बीमारी”

एक भी दिन दवा छूटने से गंभीर रूप ले सकती है टीबी – डीटीओ

सीएमओ कार्यालय में डिफरेंशिएटेड टीबी केयर विषय पर हुई प्रशिक्षण कार्यशाला



गाज़ीपुर। ऐसा देखा जाता है कि टीबी (क्षय रोग) की बीमारी किसी व्यक्ति को हो जाने पर उसे अन्य बीमारियाँ – डायबिटीज़, एचआईवी/एड्स, कैंसर आदि भी घेरने लगती हैं। टीबी के साथ – साथ इन्हीं बीमारियों की रोकथाम के लिए स्वास्थ्य विभाग तैयारी कर रहा है। इसी क्रम में राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम (एनटीईपी) के अंतर्गत बृहस्पतिवार को मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय सभागार में आयोजित डिफरेंशिएटेड टीबी केयर विषय पर तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला का समापन हुआ। मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ देश दीपक पाल के निर्देशन में हुए इस प्रशिक्षण कार्यशाला के उद्देश्य के बारे में जिला क्षय रोग अधिकारी (डीटीओ) डॉ मनोज कुमार सिंह ने बताया कि प्रधानमंत्री के टीबी मुक्त भारत वर्ष 2025 के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए जनपद प्रतिबद्ध है। इस प्रशिक्षण में एनटीईपी के सीनियर ट्रीटमेंट सुपरवाइज़र (एसटीएस), सीनियर टीबी लैब सुपरवाइज़र (एसटीएलएस) एवं आयुष्मान भारत – हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर के सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (सीएचओ) को टीबी रोगियों में होने वाली अन्य बीमारियों जैसे मधुमेह, मुंह का कैंसर, उच्च रक्तचाप, एचआईवी/एड्स आदि के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। उन्होंने बताया कि टीबी से ग्रसित मरीज यदि अपना सम्पूर्ण उपचार (छह माह या उससे अधिक का कोर्स) पूरा करता है, साथ ही प्रोटीन युक्त पौष्टिक आहार का सेवन करता है, धूम्रपान, तंबाकू, शराब आदि के सेवन से दूर रहता है, तो वह पूरी तरह ठीक हो जाता है, बशर्ते वह एक भी दवा खाना न छोड़े। एक भी दिन दवा छूटने से टीबी बीमारी गंभीर रूप से ले सकती है। यदि कोर्स पूरा न किया गया और खानपान में लापरवाही की गई तो टीबी के अलावा अन्य बीमारियाँ भी हो सकती हैं।

इसके लिए टीबी मरीज और उसके परिजन को बहुत अधिक ध्यान रखने की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि निक्षय पोषण योजना के तहत सरकार की ओर से टीबी मरीज को उपचार के दौरान हर माह 500 रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है। एनटीईपी के जिला कार्यक्रम समन्वयक डॉ मिथलेश कुमार ने बताया कि प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके सभी सीएचओ अपने हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर पर टीबी मरीज की अन्य बीमारियों की जांच करेंगे। ऐसे में कोई अन्य बीमारी टीबी मरीज में पायी जाती है तो इसकी जानकारी निक्षय आईडी पर फीड करेंगे, जिससे उन बीमारियों का भी सम्पूर्ण उपचार किया जा सके। इस कार्य की मॉनिटरिंग एसटीएस व एसटीएलएस के द्वारा की जाएगी। साथ ही नियमित समीक्षा भी की जाएगी। डब्ल्यूएचओ के कंसल्टेंट डॉ वीजे विनोद ने समस्त प्रतिभागियों को प्रस्तुतीकरण के माध्यम से टीबी व अन्य बीमारियों की बेहतर देखभाल को लेकर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि टीबी मरीजों को तभी स्वस्थ किया जा सकता है, जब उनका उपचार का कोर्स पूरा हो और एक भी दिन दवा खाना न छोड़ें। साथ ही उन्हें बेहतर पोषण आहार व देखभाल प्रदान की जा सके। जिला कार्यक्रम समन्वयक (डीपीसी) डॉ मिथलेश कुमार ने बताया कि जनपद में पिछले वर्ष कुल 4868 और इस वर्ष जनवरी से अब तक 445 टीबी रोगी नोटिफ़ाइ किए गए। वर्तमान में 2930 टीबी रोगियों का उपचार चल रहा है। शेष मरीज स्वस्थ हो चुके हैं।

स्वास्थ्य विभाग व मेडिकल कॉलेज ने कार्यशाला का किया आयोजन

स्वास्थ्य विभाग और मेडिकल कॉलेज ने कार्यशाला का किया आयोजन

सतत चिकित्सा शिक्षा (सीएमई) के जरिए चिकित्सकों में टीबी को लेकर जिज्ञासा बढ़ाना जरूरी

स्वास्थ्य विभाग व महर्षि विश्वामित्र मेडिकल कॉलेज के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित हुई कार्यशाला

• कॉलेज के हर विभाग से टीबी मरीजों का ज्यादा से ज्यादा नोटिफिकेशन पर दिया ज़ोर
• ज्यादा से ज्यादा लोगों की हो टीबी की स्क्रीनिंग, किसी भी रोगी का न छूटे नोटिफिकेशन – डॉ मनोज
• टीबी के उपचार में सहायक नई दवाओं के लाभ के बारे में दी जानकारी
• उपचार के दौरान एक भी दिन दवा खाना न छोड़ें, सभी दवाएं सुरक्षित व लाभकारी – डॉ मिथलेश

गाज़ीपुर। राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम (एनटीईपी) के तहत मंगलवार को स्वास्थ्य विभाग और महर्षि विश्वामित्र स्वशासी राजकीय मेडिकल कॉलेज के संयुक्त तत्वावधान में ‘सतत चिकित्सा शिक्षा’ (सीएमई) पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। जिलाधिकारी आर्यका अखौरी के निर्देशन व मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ देश दीपक पाल एवं मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य प्रो डॉ आनंद मिश्रा के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यशाला में अधिकारियों के द्वारा टीबी के कारण, लक्षण, स्क्रीनिंग, निदान, नोटिफिकेशन एवं सम्पूर्ण उपचार के साथ जागरूकता पर विस्तार से चर्चा की गई। सभी वक्ताओं ने एकमत से कहा कि टीबी को लेकर चिकित्सकों में जिज्ञासा बढ़ाना जरूरी है। प्राचार्य प्रो डॉ आनंद मिश्रा ने बताया कि कार्यशाला का उद्देश्य राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम को लेकर सतत चिकित्सा शिक्षा के माध्यम से चिकित्सकों के ज्ञान और कौशल को बढ़ाना था, जिससे टीबी रोगियों व जनमानस को बेहतर सेवाएं मिल सकें। साथ ही चिकित्सक सहित अन्य पेशेवरों को बेहतर सेवाएं प्रदान करने के लिए प्रोत्साहन मिल सके। जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ मनोज कुमार सिंह ने बताया कि बैठक में टीबी के उपचार में सहायक नई दवाओं के बारे में विस्तार से चर्चा की गई। कॉलेज के हर विभाग से टीबी मरीजों को नोटिफ़ाई करने का निर्देश दिया गया। साथ ही मेडिकल कॉलेज में मौजूद सीबी नाट व ट्रू नाट जांच को सुदृढ़ करने पर ज़ोर दिया गया। कल्चर जांच (कौन सी दवा चलानी है और कौन सी बंद करनी है) पर भी जानकारी दी गई। कॉलेज के चिकित्सकों के सवालों की जिज्ञासा का समाधान भी किया गया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2025 तक क्षय मुक्त भारत को लेकर देश के प्रधानमंत्री का विजन तभी पूरा हो सकता है जब ज्यादा से ज्यादा लोगों की स्क्रीनिंग हो और किसी भी टीबी रोगी का नोटिफिकेशन न छूटे।
डब्ल्यूएचओ के ज़ोनल ऑफिसर डॉ वीजी विनोद ने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से टीबी के निदान, उपचार, नई दवाओं आदि के बारे में चर्चा की। उन्होंने कहा कि टीबी के सम्पूर्ण उपचार के लिए प्रतिदिन दवा खाना बेहद जरूरी है। सभी दवाएं पूर्ण रूप से सुरक्षित और बेहद फायदेमंद हैं। कई दवाएं बहुत महंगी हैं लेकिन सरकार की ओर से दी जा रही हैं जिसका टीबी रोगियों को लाभ उठाना चाहिए। एनटीईपी के जिला कार्यक्रम समन्वयक (डीपीसी) डॉ मिथलेश कुमार ने कहा कि टीबी रोगी सम्पूर्ण उपचार के दौरान एक भी दिन दवा खाना न छोड़ने के लिए प्रेरित करें। टीबी के सम्पूर्ण उपचार के लिए उसका कोर्स का पूरा होना बहुत जरूरी है। कई टीबी रोगी बीच में ही इलाज छोड़ देते हैं या फिर बदल-बदल कर इलाज करते हैं जिससे उनकी स्थिति बिगड़ जाती और कई बार बीमारी बहुत गंभीर स्थिति में पहुँच जाती है। ऐसे में मरीजों का सरकार द्वारा निर्देशित दवाओं से उपचार करने पर जोर दिया जाना चाहिए। साथ ही एचआईवी, डायबिटीज मरीजों की टीबी की नियमित जांच की जाए। बैठक में सह आचार्या डॉ भानु प्रताप पाण्डेय, डॉ चंद्रमौली मिश्रा, डॉ धनंजय, पीपीएम समन्वयक अनुराग पाण्डेय, एसटीएस सुनील कुमार वर्मा, एसटीएलएस वैंकटेश्वर प्रसाद शर्मा, कमलेश कुमार, संजय सिंह यादव, समस्त प्रोफेसर, सहायक प्रोफेसर, सीनियर व जूनियर रिसर्च फैलोशिप, सभी छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।

आयुष्मान योजना का लाभ मिलने पर पीएम मोदी का किया धन्यवाद

आयुष्मान योजना का लाभ मिलने पर पीएम मोदी का किया धन्यवाद

आयुष्मान योजना का लाभ मिलने पर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने पीएम मोदी को दिया धन्यवाद

गाजीपुर। आयुष्मान भारत योजना जो भारत सरकार की एक महत्वपूर्ण योजना है। इस योजना के लाभार्थी को ₹5 लाख तक का निशुल्क इलाज मिलता है। अभी तक इस योजना में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और आशा कार्यकर्ता शामिल नहीं थे। लेकिन पिछले दिनों वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में जब बजट पेश किया तब उन्होंने इस योजना में आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को भी इसका लाभ देने का ऐलान किया। इसके बाद से ही आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं में खुशी का माहौल है। क्योंकि जो उनका मानदेय है उसे मानदेय में उनका परिवार चलाना ही काफी कष्टकारी होता है। ऐसे में परिवार के किसी सदस्य की बीमारी पर उनका इलाज करना एक बड़ी समस्या के रूप में आ जाती थी। लेकिन अब इस योजना का लाभ मिलने से गाजीपुर में चलने वाले 4127 आंगनबाड़ी केदो के आंगनवाड़ी कार्यकर्ता काफी खुश नजर आ रहे हैं।

सदर ब्लाक के आंगनबाड़ी कार्यकर्ता तारा कुशवाहा ने बताया कि इस योजना का लाभ देने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बहुत-बहुत धन्यवाद। क्योंकि हमारे जैसे सामान्य लोगों के बारे में उन्होंने सोचा। क्योंकि हम जैसे लोगों के लिए सबसे बड़ी समस्या इलाज के लिए पैसा जुटाना होता है। लेकिन अब इस योजना का लाभ मिलने से हमारे परिवार को काफी राहत मिलेगी।

सदर ब्लॉक की आंगनवाड़ी कार्यकर्ता बीना राय ने बताया कि प्रधानमंत्री ने हमारे जैसे सामान्य परिवार के लोगों के बारे में विचार किया। क्योंकि हम जैसे लोगों के लिए सबसे बड़ी समस्या इलाज के लिए पैसे का इंतजाम करना होता है। क्योंकि आज का इलाज काफी महंगा हो चुका है। जो हम लोगों के बजट के बाहर का होता था। लेकिन अब इस योजना का लाभ मिलने से हमें काफी राहत मिलेगी।

पचोखर गांव की रहने वाली राजमती गुप्ता जो आंगनवाड़ी कार्यकर्ता है उन्होंने कहा कि इस योजना का लाभ देने के लिए मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को प्रणाम करती हूं। क्योंकि उन्होंने इस योजना का लाभ देकर हमारे परिवार के ऊपर एक बहुत बड़ी कृपा की है। हम लोग बहुत परेशान होते थे जब हमारे परिवार में कोई बीमार होता था। क्योंकि जिस हिसाब से मानदेय है उसे हिसाब से हम लोगों को परिवार चलाना ही काफी कष्टकारी होता है।

सीएमओ ने बच्चों को खिलाई एल्बेण्डाज़ोल की गोली

सीएमओ ने बच्चों को खिलाई एल्बेण्डाज़ोल की गोली

‘राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस’ का हुआ शुभारंभ

• जवाहर नवोदय विद्यालय में मनाया गया राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस

• एक से 19 वर्ष तक के सभी बच्चों व किशोर-किशोरियों को कृमि से बचाव की दवा अवश्य खिलाएं – सीएमओ

• दिवस पर 1 से 19 वर्ष बच्चों को खिलाई जा रही पेट के कीड़ों (कृमि) से बचाव की दवा

• दवा की खुराक न ले पाने वाले बच्चों के लिए पाँच फरवरी को मनेगा मॉप अप दिवस

गाजीपुर। 1 फरवरी से एक से 19 वर्ष तक के बच्चों, किशोर किशोरियों के पेट के कृमि (कीड़े) निकालने के लिए बृहस्पतिवार को राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस मनाया गया। इस अवसर पर पुलिस लाइन के पास जवाहर नवोदय विद्यालय में मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ देश दीपक पाल ने बच्चों को एल्बेण्डाजोल की गोली खिलाकर अभियान का शुभारंभ किया। बच्चों ने उत्साहपूर्वक गोली को चबाकर सेवन किया। इस मौके पर कार्यक्रम के सीएमओ और प्रधानाचार्य ने बच्चों को गोली का सेवन कराकर उनका उत्साहवर्धन किया।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने बच्चों को स्वस्थ आदतें जैसे नाखून साफ और छोटे रखने, खाने से पहले और शौचालय के उपयोग करने बाद साबुन से हाथ धोने, हमेशा साफ पानी पीने, खुले में शौच न करने, हमेशा शौचालय का उपयोग करने, घर में खाना ढककर रखने, जूते पहनने, फल सब्जी आदि को साफ पानी से धोने, अपने आसपास साफ-सफाई रखने के बारे में बताया। सीएमओ ने अभिभावकों से अपील की कि इस अभियान में अपने एक से 19 वर्ष तक के सभी बच्चों एवं किशोर-किशोरियों को कृमि (पेट में कीड़ों) से बचाव के लिए एल्बेण्डाजोल की गोली अवश्य खिलाएं। इसके सेवन न करने से बच्चों की सेहत पर दुष्प्रभाव पड़ता है। ऐसी स्थिति में खून की कमी (एनीमिया), कुपोषण, थकावट व बीमारी एवं कमजोरी का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने बताया कि बृहस्पतिवार को दवा की खुराक न ले पाने वाले बच्चों के लिए पाँच फरवरी (सोमवार) को मॉप अप दिवस पर गोली खिलाई जाएगी।
अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी (एनएचएम) डॉ मनोज कुमार सिंह ने बताया कि जनपद के 1 से 19 वर्ष तक के बच्चों को सभी सरकारी व निजी स्कूलों में एल्बेण्डाजोल की गोली खिलाई जा रही है। किसी कारण वश छूटे हुये शेष बच्चों को मॉप अप दिवस पर दवा खिलाई जाएगी। स्कूलों, मदरसों, बाल सुधार गृह, किशोर सम्प्रेक्षा गृह व आंगनबाड़ी केन्द्रों पर सभी छात्र-छात्राओं एवं बच्चों को एल्बेण्डाजोल की गोली उम्र के हिसाब से खिलाई जाएगी। इन केंद्रों पर जो बच्चे पंजीकृत नही हैं उन्हे आशा उनके घरों पर जाकर दवा खिलाई जाएगी। इसमें एक से दो वर्ष के बच्चों को आधी गोली को चूरकर साफ पानी में मिलाकर चम्मच से खिलाना है। दो से तीन वर्ष तक के बच्चों को एक पूरी गोली चूरकर पानी के साथ देना है। तीन से 19 वर्ष तक के बच्चों को पूरी एक गोली चबाकर पानी के साथ खिलानी है। इसके बाद ही पानी का सेवन करना है। इस मौके पर अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी (एनएचएम) डॉ मनोज कुमार सिंह, डॉ जे०एन०सिंह, अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी (वीबीडी) डॉ संजय सिंह, जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ एसके सिंह, जिला मलेरिया अधिकारी मनोज कुमार, जिला कार्यक्रम प्रबन्धक प्रभुनाथ, न्यूट्रीशन इंटरनेशनल इंडिया की मंडलीय सलाहकार श्रीमती सुनीता सिंह और विद्यालय परिवार के शिक्षक तथा स्टाफ नर्स सुशीला आदि उपस्थित रहे।
दवा खाने का तरीका-
• एक से दो साल के बच्चों को आधी गोली अच्छी तरह से पीस कर पानी में मिलाकर खिलाएं।
• दो से तीन साल के बच्चों को एक पूरी गोली पीस कर पानी के साथ खिलाएं।
• तीन से 19 साल के बालक-बालिकाओं को एक पूरी गोली चबाकर खानी होगी।
कृमि मुक्ति के फायदे-
• स्वास्थ्य और पोषण में सुधार
• रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि
• एनीमिया नियंत्रण
• सीखने की क्षमता में सुधार

निकाली गई कुष्ठ जन जागरूकता रैली

महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर निकाली गई कुष्ठ जन जागरूकता रैली

गाजीपुर।महात्मा गांधी की पुण्यतिथि 30 जनवरी को एंटी लैप्रोसी-डे के रूप में मनाया जाता है। इसके तहत जनपद में 30 से 13 फरवरी तक स्पर्श कुष्ठ जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। इसको लेकर मंगलवार को एक जागरूकता रैली विकास भवन से होते हुए मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय तक गया। इस रैली को मुख्य विकास अधिकारी संतोष कुमार वैश्य ने हरी झंडी दिखलाकर रवाना किया। इस रैली के माध्यम से आमजन में कुष्ठ रोग के प्रति जन जागरूकता फैलाने का कार्य किया गया। कुष्ठ रोग व उससे ग्रसित मरीजों के बारे में भ्रांतियों को दूर किया जाएगा। इसके साथ ही कुष्ठ रोग के सामाजिक कलंक को मिटाने का भी प्रयास करने पर बल दिया गया।

मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ देश दीपक पाल ने बताया
की यह अभियान पिछले 7 सालों से लगातार चलाए जा रहा है। ताकि कुष्ठ रोग के प्रति लोग जागरुक हो सके और कुष्ठ रोगियों के प्रति जो भ्रांतियां फैली है। उसके बारे में लोगों को जानकारी मिल सके। उन्होंने बताया कि रैली जो विकास भवन से निकाली गई थी उसमें स्कूली छात्र-छात्राओं के साथ ही टीचर और विभागीय कर्मचारी शामिल रहे। जिन्हें मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय पहुंचने पर कुष्ठ रोग के बारे में जानकारी दी गई। साथ ही उन्हें जिला अधिकारी के द्वारा दिए गए संदेश के बारे में भी बताया गया। सभी से यह अपील किया गया कि वह अपने आसपास यदि कुष्ठ संभावित रोगी देखते हैं तो उसकी जानकारी स्वास्थ्य विभाग को दे ताकि उनका समय से इलाज हो सके।
अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी और नोडल कुष्ठ रोग डॉ रामकुमार ने बताया कि इस दौरान सहयोगी पुरुषों व आशा कार्यकर्ता महिलाओं में देखते हैं कि किसी के चमड़ी में दाग के साथ शून्यता तो नहीं है, जिसमें ऐसा दिखता है उसे नजदीकी प्राथमिक, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर भेजते हैं। जहां कुष्ठ रोग की पुष्टि होने के बाद मल्टी ड्रग ट्रीटमेंट (एमडीटी) दिया जाएगा। अभियान का उद्देश्य जल्द से जल्द कुष्ठ रोग की शुरुआत में ही उसकी पुष्टि कराकर मरीज को दवा खिलाने की शुरुआत कर देना है जिससे मरीज को विकलांगता से बचाया जा सके।

इस अभियान के तहत जनपद में घर-घर जाकर स्वास्थ्य विभाग की टीम कुष्ठ रोगियों की पहचान करेंगी। लक्षणों के आधार पर रोगियों की पहचान कर उनकी लाइन लिस्टिंग की जाएगी। जो कुष्ठ रोगी पहले से अपना उपचार करा रहे हैं उनका फॉलोअप किया जाएगा। उन्होंने बताया कि कुष्ठ रोग से डरने की आवश्यकता नहीं है। शरीर का कोई भी दाग धब्बा जिस पर सुन्नपन हो, उसमें खुजली ना हो, पसीना ना आता हो, कुष्ठ रोग हो सकता है । कान पर गांठे होना, हथेली और तलवों पर सुन्नपन होना कुष्ठ रोग के लक्षण हो सकते हैं। उन्होंने बताया कि कुष्ठ रोग की दवा सभी सरकारी अस्पतालों में नि:शुल्क उपलब्ध है।

102/108 एंबुलेंस के पायलट हुए सम्मानित

102/108 एंबुलेंस के पायलट हुए सम्मानित

गाजीपुर। गणतंत्र दिवस के पावन अवसर पर पूरे देश में सरकारी और गैर सरकारी संस्थाएं इसे राष्ट्रीय पर्व के रूप में मनाया। इसी क्रम में गाजीपुर के स्वास्थ्य विभाग में चलने वाले 102 और 108 एम्बुलेंस जो मरीज को क्विक रिस्पांस करते हुए उनके मौजूदा स्थल से पास के स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंच कर उन्हें जीवन दान देने का काम करती है। उनके अधिकारी और कर्मचारियों ने भी इस पर्व को हर्षोल्लाष के साथ मनाया। इस मौके पर बेस्ट पायलट का अवार्ड भी दिया गया। जिला प्रभारी संदीप चौबे ने बताया कि 26 जनवरी के पावन पर्व को हम सभी लोगों ने काफी खुशी के साथ मनाया। इस दौरान मरीज को क्विक रिस्पांस कर स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचा कर उनकी जान बचाने के साथ ही साथ गर्भवती महिलाओं को स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचाने में प्रथम रहे पायलट राम प्रवेश को बेस्ट पायलट का पुरस्कार देखकर उनका हौसला अफजाई किया गया। ताकि अन्य पायलट भी मरीज को कम से कम समय में स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचाएं। इस अवसर पर ब्लॉक प्रभारी दीपक कुमार राय, अखंड प्रताप ,अरविंद कुमार सहित अन्य कर्मचारी ,एंबुलेंस के पायलट और इमरजेंसी मेडिकल टेक्नीशियन मौजूद रहे।

रोगियों को दी गई योजनाओं की जानकारी

रोगियों को दी गई योजनाओं की जानकारी

एचआईवी एड्स के रोगियों को दी गई सामाजिक सुरक्षा एवं सरकारी योजनाओं की जानकारी

समय से दवा का सेवन करने, पौष्टिक आहार लेने व स्वच्छता बनाए रखने को लेकर दिया गया परामर्श

मेडिकल कॉलेज से संबद्ध जिला पुरुष चिकित्सालय में हुआ दो दिवसीय जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन

गाज़ीपुर। ह्यूमन इम्यूनो डेफिशियेंसी वायरस (एचआईवी) – एक्वायर्ड इम्यून डेफिशियेंसी सिंड्रोम (एड्स) के रोगियों को उपचार व पोषण के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से गोरा बाजार स्थित महर्षि विश्वामित्र स्वशासी राजकीय मेडिकल कालेज से संबद्ध जिला पुरुष चिकित्सालय सभागार में मंगलवार व बुधवार को दो दिवसीय जन जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। जिलाधिकारी आर्यका अखौरी के निर्देशन व मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. देश दीपक पाल, मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य प्रो. डॉ. आनंद मिश्रा तथा मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राजेश कुमार सिंह के नेतृत्व में आयोजित शिविर में एचआईवी रोगियों को सामाजिक सुरक्षा एवं सरकारी योजनाओं से सम्बन्धित जानकारी दी गई।
इस दौरान जिला एचआईवी एड्स नियंत्रण अधिकारी डॉ. मनोज कुमार सिंह ने रोगियों को समय से दवा का सेवन करने और पौष्टिक आहार लेने के बारे में विस्तृत परामर्श दिया। उन्होंने कहा कि अपने आस पास का वातावरण स्वच्छ रखें, साफ सफाई बनाए रखें, बार-बार हाथ धोएं और बीमार लोगों से दूरी बनाकर रखें। एचआईवी का निदान होने के बाद डॉक्टर के पास नियमित रूप से चेकअप कराने जाएं। कोई भी दवा लेने से पहले डॉक्टर से परामर्श लें , क्योंकि अपने आप किसी दवा के सेवन से साइड इफेक्ट का खतरा हो सकता है। प्रधानाचार्य प्रो डॉ आनंद मिश्रा ने कहा कि हम सभी लोगों की जिम्मेदारी है कि अपनी सुरक्षा के साथ अपने परिवार, समाज व देश में रह रहे सभी लोगों की सुरक्षा करें और नैतिक जिम्मेदारी के कारण एड्स को समाज में फैलने से रोकें। सुरक्षित तरीकों के प्रयोग से हम इसके प्रसार को बहुत आसानी से रोक सकते हैं। एचआईवी एड्स के रोगियों से किसी भी प्रकार का भेदभाव नहीं करना चाहिए, उन्हें भी समानता का अधिकार मिलना चाहिए। जिला पुरुष चिकित्सालय स्थित एंटी रेट्रोवायरल थेरेपी (एoआरoटीo) सेन्टर की काउंसलर अंजू सिंह ने एचआईवी एड्स अधिनियम के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि एचआईवी ग्रसित रोगियों की सुरक्षा के लिए गोपनीयता बनाये रखना हम सभी की जिम्मेदारी है। अगर इसका कोई उल्लंघन करता है तो उसे तीन महीने से लेकर दो वर्ष की सजा हो सकती है या अधिकतम एक लाख रुपए तक का जुर्माना या दोनों सजा हो सकती हैं। इसके साथ ही उन्होंने डायल 1097 के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अगर किसी भी रोगी को ए०आर०टी० सेन्टर पर किसी भी तरह की समस्या हो तो तुरन्त 1097 पर कॉल करके अवगत कराएं ताकि जल्द से जल्द उनकी समस्या का निराकरण किया जा सके। इस मौके पर स्वयं सेवी संस्थाओं – अहाना, ज्योति ग्रामीण संस्था, केयर एंड सपोर्टर एवं सुभिक्षा के सभी कर्मचारियों को प्रशस्ति पत्र व स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में जिला प्रोबेशन अधिकारी, एसीएमओ डॉ. रामकुमार, एनटीईपी के डीपीसी डॉ. मिथिलेश कुमार सिंह, पीपीएम समन्वयक अनुराग कुमार पाण्डेय, एआरटी सेन्टर की काउंसलर संगीता सिंह एवं एआरटी के सर्वेश कुमार, राहुल पांडेय, सौरभ कुमार, राहुल मौर्या, वैभव विशाल, एसटीआई काउंसलर, आईसीटीसी, पीपीसीटीसी काउंसलर, अहाना, सीएससी तथा सुभिक्षा के सभी कर्मचारी उपस्थित थे।

100 से ज्यादा बच्चों का हो चुका है क्लब फुट का इलाज और ऑपरेशन

3 सालों में 100 से ऊपर बच्चों का हो चुका है क्लब फुट का इलाज और ऑपरेशन (टेनोटोमी)

गाजीपुर। अनुष्का फाउंडेशन फॉर एलिमिनेटिंग क्लबफुट (एएफईसी) एक गैर-लाभकारी संगठन है जो भारत में क्लबफुट को खत्म करने के लिए समर्पित है। बुधवार को मेडिकल कॉलेज स्थित जिला अस्पताल में अनुष्का फाउंडेशन, कोटक एसेट मैनेजमेंट के सीएसआर इनिशिएटिव के सहयोग से 4 बच्चों का क्लब फुट के तहत सफल ऑपरेशन (टेनोटोमी) एवं इलाज किया गया। जनपद में चल रहे इस तरह के ऑपरेशन (टेनोटोमी)का अवलोकन करने के लिए डॉ शुभलाल देवरिया से गाजीपुर जिला अस्पताल पहुंचे जहां पर पिछले कई बुधवार से क्लब फुट के तहत चल रहे इलाज एवं ऑपरेशन के तहत 25 बच्चों का अवलोकन किया। मेडिकल कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ केके यादव ने बताया कि इस तरह के क्लब फुट का ऑपरेशन एवं इलाज पिछले 3 सालों से चल रहा है। अब तक करीब इस कार्यक्रम के तहत करीब 100 से ऊपर बच्चों का क्लब फुट के तहत ऑपरेशन एवं इलाज किया गया। उन्होंने बताया कि दो बच्चो का टेनोटोमी तथा दो बच्चो का प्लास्टर एवम् 21 बच्चो का इलाज का अवलोकन करने के लिए देवरिया के डॉ शुभलाल आज गाजीपुर आए हुए थे जो की पॉन्सेटी मेथड के ट्रेनर है उन्होंने सभी बच्चों का अवलोकन किया जो कि जूते (ब्रेस) पहन रहे है अब तक गाजीपुर क्लब्फ़ूट क्लिनिक पर 100 से ऊपर बच्चो का इलाज किया जा चुका हैं। मेडिकल कॉलेज गाजीपुर के डॉ सतीश सिंह ने बताया की क्लबफुट, एक जन्म दोष जिसमें एक या दोनों पैर अंदर की ओर मुड़े होते हैं, बच्चों में विकलांगता का एक प्रचलित कारण है, जो भारत में सालाना 800 नवजात शिशुओं में से 1 को प्रभावित करता है। हमारे देश में हर साल 33,000 बच्चे क्लबफुट के साथ पैदा होते हैं। उचित उपचार के बिना, क्लबफुट वाले बच्चों को स्थायी विकलांगता का सामना करना पड़ता है। अनुपचारित क्लबफुट बेहद दर्दनाक हो सकता है, और प्रभावित बच्चों में भेदभाव, उपेक्षा, मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं, अशिक्षा और शारीरिक और यौन शोषण का खतरा अधिक होता है। सौभाग्य से, पोन्सेटी विधि, एक न्यूनतम लागत की स्वर्ण मानक प्रक्रिया है जो एक प्रभावी समाधान प्रदान करती है। कार्यक्रम का उद्देश्य जिला अस्पतालों / मेडिकल कॉलेज में आर्थोपेडिक डॉक्टरों की क्षमता बढ़ाकर स्थानीय उपचार प्रदान करना है। अनुष्का फाउंडेशन देश के हर जिले में क्लबफुट कार्यक्रम लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है ताकि हर बच्चे को इलाज तक पहुंच मिल सके। एएफईसी पूरे भारत में 10 राज्यों और 137 जिलों में क्लबफुट कार्यक्रम संचालित करता है, इसकी स्थापना के बाद से इसमें 12,000 से अधिक बच्चे नामांकित हैं। क्लबफुट क्लिनिक पर सपोर्टिव सुपरविज़न के दौरान ब्रांच मैनेजर अनुष्का फ़ाउंडेशन भूपेश सिंह तथा आनन्द विश्वकर्मा ज़िला समन्वयक ग़ाज़ीपुर क्लब्फूट कार्यक्रम आदी लोग उपस्थित रहे।