Category Archives: Health

शीतलहर में रहें सतर्क, लें जानकारी और करें यह काम

गाजीपुर। अपर जिलाधिकारी (वि0/रा) ने जनपदवासियों से अपील किया है कि शीतलहर एव घने कोहरे से बचाव हेतु अत्यधिक ठण्ड/ शीतलहर होने पर छोटे बच्चों, बुजुर्गा एवं गर्भवती महिलाओं को घर के अन्दर ही रखें। अति आवश्यक हो तभी घर से बाहर जाये, स्थानीय रेडियों, दैनिक समाचार पत्र टी०वी० मोबाईल फोन एवं वाटसअप के माध्यम से मौसम की जानकारी प्राप्त करते रहें। स्वयं सर्तक रहे और अन्य व्यक्तियों को भी सर्तक करें। शरीर को सूखा रखें, गीले कपड़े कदापि न पहने, यह शरीर के लिए नुकसानदायक हो सकता है, गीले कपड़े से ठण्ड लगने की प्रबल सम्भावना बनी रहती है, मिटटी का तेलं, कोयले की अंगीठी, हीटर इत्यादि का प्रयोग करते समय सावधानियाँ बरते, कमरे में शुद्ध हवा का आवागमन बेन्टिलेशन, वायु- संचार बनाये रखें ताकि कमरे में विषाक्त, जहरीला धुआं इकट्ठा न हो, सोने से पहले हीटर, ब्लॉवर, कोयले की अगीठी आदि को अवश्य बंद कर दें, कई स्तरों वाल गर्म कपड़े जैसे-ऊनी कपड़े, स्वेटर, टोपी, मफलर इत्यादि का प्रयोग आपको शीतदंश/ठण्ड के प्रभाव से बचा सकता है। शरीर में ऊष्मा के प्रवाह को बनाये रखने के लिए पोषक आहार एवं गर्म पेय पदार्थाे का नियमित सेवन किया जाना लाभकारी होगा, हाइपोथर्मिया के लक्षणों जैसे-असामान्य शरीर का तापमान, भ्रम या स्मृति हानि, बेहोशी, विचलन, असीमित ठिठुरना सुस्ती, थकान, तुतलाना, थकावट इत्यादि की स्थिति उत्पन्न होने पर अपने नजदीकी सामुदायिक एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों पर सम्पर्क करें। शीतदंश/ठण्ड के लक्षणों जैसे- शरीर के अंगो का सुन्न पडना, हाथों-पैरों की उँगलियों, कान नाक आदि पर सफेद या पीले रंग के दाग उभर आने पर अपने नजदीकी चिकित्सक से परामर्श के बाद ही दवाइओ का प्रयोग करें, अपने आस-पास अकेले रहने वाले पड़ोत्तियों की जानकारी रखें, विशेषकर बुजुर्गों व्यक्तियो का पूर्ण विवरण एवं मोबाईल नम्बर अवश्य रखे, किसी भी आपात कालीन स्थिति से निपटने के लिए एक आपातकालीन डायरी बनाये जिसमें पुलिस, चिकित्सा, अग्निशमन एवं अन्य महत्त्वपूर्ण विभागों के नम्बर दर्ज रखें और इसकी जानकारी परिवार के प्रत्येक सदस्यों को होनी चाहिए, बाहर निकलते समय सिर, चेहरे, हाथ एवं पैर को गर्म कपड़े से ढके,  शीतलहर में गाड़ियों में फॉग लाईट का इस्तेमाल करें, ठंड के मौसम में पशुओं को थनैला मिल्क फीवर नेमोटाइटिस आदि रोग होने का खतरा रहता है इसलिए पशुओं को समय-समय पर चिकित्सक को दिखाते रहें, पशुओं को रात में खुले पेड़ के नीचे अथवा घर से बाहर ना निकालें, पशुओं को ठंड के समय में गुड़ व कैल्शियम टॉनिक पिलाएं, पशुओं को ठंड के मौसम में जूट की बोरी अथवा घर में पड़ा पुराना कंबल उढाएं।

टीबी के नए मरीज को 500 रुपये प्रति माह:-सीएमओ

सीएमओ की अध्यक्षता में आयोजित हुई राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम की प्रेस कान्फ्रेंस

सक्रिय टीबी रोगी खोज अभियान व निक्षय पोषण योजना की प्रगति के बारे में दी जानकारी

जनपद के सभी सरकारी चिकित्सालयों में टीबी की जांच, उपचार, दवा आदि की सुविधा मौजूद

सरकार के द्वारा टीबी के नए मरीज को 500 रुपये प्रति माह अच्छे पोषण के लिए – सीएमओ



गाज़ीपुर। जिलाधिकारी आर्यका अखौरी के निर्देश पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ देश दीपक पाल की अध्यक्षता में बुधवार को सीएमओ कार्यालय सभागार में राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम के अंतर्गत प्रेस कान्फ्रेंस आयोजित की गई। इस दौरान सीएमओ ने 23 नवंबर से पाँच दिसंबर तक संचालित किए गए विशेष सक्रिय क्षय रोगी खोज अभियान की समीक्षा की। साथ ही जनपद में राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम और निक्षय पोषण योजना की जानकारी दी। सीएमओ ने बताया कि गाजीपुर की आबादी लगभग 43.55 लाख के सापेक्ष सक्रिय क्षय रोगी खोज अभियान में लक्षित 20 प्रतिशत आबादी को कवर किया गया। इस दौरान करीब लक्षित 8.66 लाख लोगों की स्वास्थ्य टीम के द्वारा घर-घर जाकर स्क्रीनिंग की गई। इस दौरान 267 टीम तैनात की गई थीं। दस दिवसीय अभियान में टीम के द्वारा लक्ष्य के सापेक्ष करीब 7.81 लाख लोगों की स्क्रीनिंग की गई। इसमें 2948 व्यक्तियों में टीबी के संभावित लक्षण पाये गए, जिन्हें जांच के लिए भेजा गया। इसमें सिर्फ 31 व्यक्ति पॉज़िटिव पाये गए। 66 व्यक्तियों की पहचान क्लीनिकली और रेडियोलोजी द्वारा निदान किया गया। इस तरह कुल 101 टीबी रोगियों की पहचान सक्रिय टीबी रोगी खोज अभियान में की गई। इन सभी मरीजों का तत्काल नोटिफिकेशन करते हुये उपचार शुरू किया गया। इसके साथ ही इस वर्ष जनपद में जनवरी से अबतक 5711 लक्ष्य के सापेक्ष 4206 रोगियों (सरकार व निजी क्षेत्र) को नोटिफ़ाई किया गया। इसमें ड्रग सेंसेटिव टीबी मरीजों की संख्या 4108 और ड्रग रजिस्टेंट टीबी रोगियों की संख्या 98 है। इन सभी रोगियों का उपचार चल रहा है। इसके साथ ही उन्हें निक्षय पोषण योजना के तहत उपचार के दौरान हर माह 500 रुपये की आर्थिक मदद भी दी जा रही है।

इस वर्ष अब तक जनपद की नोटिफिकेशन को लेकर उपलब्धि 74 फीसदी है। उन्होंने बताया कि जनपद में पिछले वर्ष जनवरी से नवंबर तक कुल 4299 टीबी रोगियों को नोटिफ़ाइ किया गया था। इसमें से 3776 टीबी रोगी का उपचार पूरा हो चुका है, जिसकी उपलब्धि 88 प्रतिशत है। शेष रोगी उपचार पर हैं। सीएमओ ने जिला क्षय रोग इकाई के कर्मचारियों को निर्देश दिया कि वह जल्द से जल्द सभी उपचारधीन टीबी रोगियों की बैंक डीटैल को प्राप्त करे, जिससे उन्हें निक्षय पोषण योजना का लाभ मिल सके। नोटिफिकेशन के लक्ष्य को समसी रहते प्राप्त करें। निजी चिकित्सकों को ज्यादा से ज्यादा टीबी मरीजों के नोटिफिकेशन के लिए प्रेरित करें। उन्होंने बताया कि क्षय रोग से संबन्धित सभी प्रकार की जांच, दवाइयाँ सभी सरकारी चिकित्सालयों में निःशुल्क मौजूद हैं। टीबी के नए मरीज को 500 रुपये प्रति माह अच्छे पोषण के लिए सरकार द्वारा दिये जा रहे हैं। निजी चिकित्सालयों में भी जिन टीबी मरीजों का इलाज चल रहा है, उन टीबी मरीजों को भी 500 रुपये सरकार द्वारा प्रदान किया जाना है। यदि कोई व्यक्ति नए क्षय रोगी की प्रथम सुचन देता है तो उसे भी सरकार द्वारा 500 रुपये प्रदान किए जाते हैं। जिला कार्यक्रम समन्वयक (डीपीसी) डॉ मिथलेश कुमार ने बताया कि जनपद में टीबी की जांच व उपचार की सुविधाएं मौजूद हैं। इसमें टीबी यूनिट की संख्या 19, समस्त 16 ब्लॉक सीएचसी व पीएचसी में बलगम परीक्षण केंद्र (डीएमसी) की संख्या 37, सीबी नाट की सुविधा जिला क्षय रोग केंद्र (डीटीसी) एवं सीएचसी मुहम्मदाबाद और ट्रू नाट की सुविधा डीटीसी, सीएचसी जखनिया, भदौरा और सैदपुर में मौजूद है।

उन्होंने बताया कि निक्षय पोषण योजना के तहत वर्तमान में 4734 पंजीकृत हुये हैं। इसमें से 4177 रोगियों की बैंक डीटैल प्राप्त हुईं हैं, जिसमें से 3865 (82%) रोगियों की जानकारी वैरिफ़ाई हुई हैं। वर्तमान में 3473 टीबी रोगियों के खाते में लगभग 88.21 लाख रुपये का भुगतान किया जा चुका है। इस मौके पर जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ मनोज कुमार सिंह, जिला पीपीएम समन्वयक एके पाण्डेय समेत अन्य अधिकारी व स्वास्थ्यकर्मी मौजदु रहे।

महिला हॉस्पिटल में मनाया गया कन्या जन्म उत्सव

गाजीपुर। शासन के निर्देशानुसार बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना अंतर्गत प्रत्येक माह के प्रथम एवम तृतीय सोमवार को कन्या जन्म उत्सव मनाए जाने के निर्देश प्राप्त हुए है जिसके क्रम में जिला प्रोबेशन अधिकारी संजय कुमार सोनी के निर्देशन के क्रम में सोमवार को कन्या जन्म उत्सव का आयोजन महिला चिकित्सालय मे किया गया, जिसमें 12 बच्चियों के जन्म पर केक काटकर हर्षाेल्लास के साथ कन्या जन्म उत्सव मनाया गया। कार्यक्रम में बालिकाओं की माताओं को हिमालया बेबी किट, तोलिया एवं मिष्ठान देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में महिला कल्याण विभाग द्वारा संचालित समस्त विभागीय योजनाओं के बारे में विस्तृत जानकारी दिया गया। कार्यक्रम में मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, महिला शक्ति केंद्र से जिला समन्वयक, शिखा सिंह गौतम जिला समन्वयक, लक्ष्मी मौर्य व आशा बहने मौजूद रही।

घर-घर खोजें जाएंगे कुष्ठ रोगी

पल्स पोलियो की तर्ज पर घर-घर खोजे जाएंगे कुष्ठ रोगी



गाजीपुर। कुष्ठ रोगी खोजी अभियान जो 21 दिसंबर से 4 जनवरी तक चलाया जाना है। इस अभियान में पल्स पोलियो अभियान की तर्ज पर घर-घर कुष्ठ रोगियों की खोज की जाएगी। जिसको लेकर शनिवार को मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय के सभागार में सीएमओ डॉ देश दीपक पाल की अध्यक्षता में एक वर्कशॉप का आयोजन किया गया। जिला कुष्ठ रोग अधिकारी डॉ रामकुमार यादव ने बताया कि 21 दिसंबर से 4 जनवरी तक कुष्ठ रोगी खोजी अभियान चलाया जाना है। जो पल्स पोलियो अभियान की तरह चलाया जाएगा। अभियान के तहत घर-घर कुष्ठ रोगियों की खोज की जाएगी। उन्होंने बताया कि इस तरह का अभियान साल 2018 में विभाग के द्वारा जनपद में चलाया गया था। वहीं अब 5 साल के बाद इस अभियान को एक बार फिर से चलाया जाएगा। जिसको लेकर वर्कशॉप का आयोजन किया गया है। वर्कशॉप में शामिल लोगों को कुष्ठ रोगियों की कैसे पहचान और पहचान करने के बाद उनका किस तरह से इलाज किया जाएगा इसके बारे में विस्तृत रूप से जानकारी दी जा रही है।



उन्होंने बताया कि अभी पिछले दिनों 1 सितंबर से 30 सितंबर तक कुष्ठ रोगी खोजी अभियान चलाया गया था। जिसमें कुल 42 नए मरीज मिले थे। जिन्हें एमडीटी उपचार दिया गया। साथ ही उन्होंने बताया कि पूरे जनपद में 181 कुष्ठ रोगी व आठ अन्य कुष्ठ रोगी मरीज है । जिनकी कुल संख्या 189 होती है। उन्होंने बताया कि अप्रैल 2023 से अब तक कुष्ठ रोग विभाग के द्वारा किए गए इलाज से कुल 180 कुष्ठ रोगी स्वस्थ भी हुए हैं। इस वर्कशॉप में सभी ब्लॉकों के चिकित्सा अधिकारी बीसीपीएम, एनएमए, एनएमएस ,एचईओ के साथ ही विभाग से जुड़े जयप्रकाश ,श्याम बिहारी, आरके मिश्रा, अभय कुमार, अखिलेश व अन्य मौजूद रहे।

स्वास्थ्य विभाग ने किया एड्स के प्रति जागरूक

रैली निकाल कर स्वास्थ्य विभाग ने किया एड्स के प्रति जागरूक

सीएमओ कार्यालय में हस्ताक्षर अभियान व संगोष्ठी का हुआ आयोजन

संक्रमित व्यक्ति के छूने, साथ बैठने व खाने से नहीं फैलता एचआईवी/एड्स – डॉ. देश दीपक पाल

रोकथाम के लिए बचाव व जागरूकता ही एकमात्र उपाय – डॉ मनोज कुमार सिंह

गाज़ीपुर। ‘ह्यूमन इम्यूनोडेफिशिएंसी वायरस – एक्वायर्ड इम्यूनोडेफिशिएंसी सिंड्रोम’ यानि एचआईवी/एड्स के प्रति जन जागरूकता के लिए शुक्रवार को विश्व एड्स दिवस मनाया गया। इस मौके पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ देश दीपक पाल ने गोरा बाजार स्थित जिला चिकित्सालय से रैली को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह रैली जिला अस्पताल से पीजी कॉलेज चौराहा से होते हुए विकास भवन, रिवर बैंक कॉलोनी से होकर मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय पर आकर समाप्त हुई। इसके बाद सीएमओ ने हस्ताक्षर अभियान का शुभारंभ किया। इस अवसर पर जन जागरूकता गोष्ठी भी का आयोजन किया गया।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने कहा कि जन जागरूकता के उद्देश्य से हर साल एक दिसंबर को विश्व एड्स दिवस मनाया जाता है। इस वर्ष की थीम ‘लेट कम्यूनिटीज़ लीड’ निर्धारित की गई है। यह थीम इस बात पर ज़ोर देती है कि एड्स से प्रभावित लोग अपने जीवन को बेहतर बनाने के लिए अपनी आवाज उठाने में सक्षम बनें। बीमारी को रोकने के लिए समाज की अहम भूमिका के बारे में जागरूक करने के लिए इस थीम को चुना गया है।


सीएमओ ने कहा कि संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से एड्स की बीमारी नहीं होती है। इसके साथ ही संक्रमित व्यक्ति के छूने, साथ बैठने और खाने से भी यह बीमारी नहीं फैलती है। संक्रमित व्यक्ति के साथ असुरक्षित यौन सम्बन्ध बनाने से यह बीमारी फैलती है।इससे बचाव के लिए सावधानी बरतने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि समाज में एड्स से बचने के लिए जागरूकता अत्यन्त जरूरी है। एचआईवी/एड्स रोगी से समानता का व्यवहार किया जाए और कोई दुर्व्यवहार न हो।
जिला एड्स नियंत्रण अधिकारी डॉ. मनोज कुमार ने कहा कि एचआईवी-एड्स लाइलाज बीमारी है। इसकी रोकथाम के लिए बचाव व जागरूकता ही एकमात्र उपाय है। इसके लिए लोगों को जागरूक होना जरूरी है। एड्स के प्रति सामाजिक मिथकों को दूर करना, आहार, पोषण, स्वच्छता और स्वस्थ जीवन शैली के लिए युवाओं को प्रेरित होने की ज़रूरत है। एचआईवी-एड्स के मरीजों से सार्वजनिक स्थलों जैसे दफ्तर, स्कूल आदि जगहों पर भेदभाव न किया जाए। यह छूने या बात करने से नहीं फैलता है। उन्होंने बताया कि जिला चिकित्सालय सहित सभी सरकारी स्वास्थ्य इकाइयों पर जांच व उपचार की सुविधा उपलब्ध है।


इस मौके पर जिला मलेरिया अधिकारी मनोज कुमार, जिला कार्यक्रम समन्वयक डॉ. मिथिलेश कुमार सिंह, सुनील वर्मा, संजय यादव, फिरोज बाबू, अंजू सिंह, श्वेता, स्वर्ण लता, संगीता, अजय क्षयरोग विभाग, एआरटी सेन्टर, आईसीटीसी सेन्टर, एसटीआई सेन्टर, पीपीसीटीसी सेन्टर, टीआई सेन्टर के सम्बन्ध अधिकारी एवं कर्मचारी मौजूद रहे।
इन्सेट —
एचआईवी/एड्स के कारण – संक्रमित व्यक्ति के शरीर से निकलने वाले द्रव या पदार्थ के संपर्क में आने से कोई भी स्वस्थ व्यक्ति संक्रमित हो सकता है। इसके अलावा रक्त संचरण, असुरक्षित यौन संबंध, असुरक्षित इंजेक्शन साझा करना, संक्रमित गर्भावस्था, प्रसव या स्तनपान द्वारा बच्चे को हो सकता है। इसलिए समय पर जांच करवाना बेहद जरूरी है।
लक्षण – बुखार, ठंड लगना, गले में खराश, मांसपेशियों में दर्द, शरीर पर चकत्ते होना, रात को पसीना आना, थकान होना, जोड़ों में दर्द और ग्रंथियों में सूजन, पेट में समस्या बने रहना, वजन कम होना और भूख न लगना आदि।
बचाव – किसी दूसरे की इस्तेमाल की हुई सिरिंज या इंजेक्शन का इस्तेमाल न करें। इसका इस्तेमाल करने के बाद नष्ट कर दें। यौन संबंध बनाते समय कंडोम का प्रयोग करें और सही से निपटान करें। यदि कोई गर्भवती महिला संक्रमित है तो बच्चे को संक्रमण से बचाने के लिए उसका इलाज कराएं, जिससे बच्चे को एचआईवी/एड्स से बचाया जाए।

शुरू हुआ सक्रिय टीबी रोगी खोज अभियान

जननपद में शुरू हुआ सक्रिय टीबी रोगी खोज अभियान

विशेष अभियान चलाकर 20 प्रतिशत आबादी की होगी स्क्रीनिंग

अभियान के सफल संचालन के लिए 221 टीम और 43 सुपरवाइज़र तैनात

आवासीय परिसरों और संवेदनशील क्षेत्रों में भी स्क्रीनिंग पर होगा ज़ोर

गाज़ीपुर। प्रधानमंत्री के वर्ष 2025 तक टीबी मुक्त भारत बनाने के संकल्प को लेकर विभाग हर संभव प्रयास कर रहा है। इसी क्रम में बृहस्पतिवार को राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम (एनटीईपी) व प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत जनपद में सक्रिय टीबी रोगी खोज (टीबी एसीएफ़) अभियान का शुभारंभ किया गया। नगर सहित समस्त 16 ब्लॉक में टीम ने स्क्रीनिंग का कार्य भी शुरू किया गया। इसके साथ ही समस्त सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों (सीएचओ) को भी अभियान को सफल बनाने के लिए निर्देशित किया गया।


सीएमओ डॉ देश दीपक पाल ने जिला क्षय रोग अधिकारी, सरकारी चिकित्सालयों के अधीक्षक एवं जिला कार्यक्रम समन्वयक के साथ बैठक कर तैयारियों के बारे में जाना। सीएमओ ने बताया कि अभियान को सफल बनाने के लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। यह अभियान पाँच दिसंबर तक चलेगा। जनपद की आबादी करीब 44.55 लाख है लेकिन विशेष अभियान के तहत 20 प्रतिशत आबादी की स्क्रीनिंग की जाएगी। उन्होंने कहा कि टीबी के जीवाणु रोगी के खाँसने, छींकने और थूकने से हवा में फैल जाते हैं और साँस लेने से स्वस्थ व्यक्ति के फेफड़े में पहुँचकर रोग उत्पन्न करते हैं। टीबी का रोगी एक वर्ष में 10 से 15 स्वस्थ व्यक्तियों को संक्रमित कर सकता है। इसलिए इस अभियान में टीबी के लक्षण युक्त (संभावित रोगियों) व्यक्तियों की जांच की जाएगी और जांच में टीबी की पुष्टि होने पर तत्काल उपचार शुरू किया जाएगा। इसके साथ ही निक्षय पोषण योजना के तहत टीबी रोगियों को उनके उपचार के दौरान हर माह 500 रुपये की आर्थिक सहायता डीबीटी के माध्यम से बैंक खाते में प्रदान की जाती है।


जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ मनोज कुमार सिंह ने बताया कि अभियान के लिए 221 टीम और 43 सुपरवाइजर तैनात किए गए हैं। स्वास्थ्यकर्मी संभावित क्षय रोगियों की जांच करेंगे और टीबी की पुष्टि होने पर 48 घंटे के अंदर उपचार शुरू किया जाएगा। उन्होंने बताया कि अभियान के दौरान आवासीय परिसरों, जैसे अनाथालयों, वृद्धाश्रमों, नारी निकेतन, बाल संरक्षण गृह, मदरसों और छात्रावासों में कैंप आयोजित कर टीबी के प्रति संवेदीकरण किया जाएगा और लक्षण युक्त व्यक्ति के स्पुटम (बलगम) के नमूने एकत्र किए जाएंगे।


संवेदनशील क्षेत्रों पर होगा ज़ोर – जिला कार्यक्रम समन्वयक (डीपीसी) डॉ मिथलेश कुमार ने बताया कि अभियान के दौरान माइक्रोप्लान के मुताबिक संवेदनशील क्षेत्रों (घनी बस्ती और स्लम एरिया) को कवर करते हुए जनपद की 20 प्रतिशत आबादी की स्क्रीनिंग की जाएगी। रोगी के बलगम की जांच करवाने पर फेफड़ों की टीबी का पता लग सकता है। बलगम के दो नमूनों की जांच माइक्रोस्कोपी एवं सीबीनॉट मशीन द्वारा की जाती है, जिससे टीबी की पुष्टि होती है। इसके साथ ही सभी रोगियों की शुगर और एचआईवी जांच भी की जाएगी। अभियान की समस्त रिपोर्ट को निक्षय पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा।


इन्सेट–
टीबी का इलाज – टीबी रोगी के इलाज के लिए जिले में टीबी की दवा स्वास्थ्य कार्यकर्ता के सीधी देखरेख में खिलाई जाती हैं जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि मरीज सही दवा निश्चित समय पर पूरी अवधि तक खाकर शीघ्र रोग मुक्त हो जाए।
इन बातों का रखें ध्यान –

  • दो हफ्ते या उससे अधिक खाँसी, खाँसी के साथ बलगम आना, रात में पसीना आना, भूख न लगना और वजन में लगातार गिरावट टीबी हो सकती है। ऐसे लक्षण देने पर तुरन्त नजदीकी स्वास्थ्य केन्द्र पर सम्पर्क करें।
  • टीबी की समस्त आधुनिक जाँच एवं सम्पूर्ण उपचार समस्त सरकारी स्वास्थ्य केन्द्रों पर निःशुल्क उपलब्ध है।
  • अधिक जानकारी के लिए टोल फ्री नम्बर 1800-11-6666 पर संपर्क कर सकते हैं और टीबी आरोग्य सेतु एप को भी डाउनलोड करें।

अब सीएचओ, स्वास्थ्यकर्मियों और आशा कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित करेंगे प्रशिक्षक

फाइलेरिया उन्मूलन व दिव्यांगता रोकथाम पर स्वास्थ्यकर्मियों को मिला प्रशिक्षण

प्रशिक्षण में फाइलेरिया प्रभावित अंगों की समुचित देखभाल के प्रति किया जागरूक

अब सीएचओ, स्वास्थ्यकर्मियों और आशा कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित करेंगे प्रशिक्षक

गाज़ीपुर।मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) कार्यालय सभागार में मंगलवार को सीएमओ डॉ देश दीपक पाल की अध्यक्षता में समस्त ब्लॉक के एक-एक चिकित्सा अधिकारी, ब्लॉक सामुदायिक प्रक्रिया प्रबंधक (बीसीपीएम) और लैब टैक्नीशियन (एलटी) को फाइलेरिया उन्मूलन जागरूकता रुग्णता प्रबंधन एवं दिव्यांगता रोकथाम (एमएमडीपी) के लिए प्रशिक्षकों का प्रशिक्षण संपन्न हुआ। प्रशिक्षण जिला मलेरिया अधिकारी (डीएमओ) मनोज कुमार एवं पाथ संस्था के आरएनटीडीओ डॉ. अबू कलीम ने दिया।
प्रशिक्षण का उद्देश्य – सीएमओ ने बताया कि फाइलेरिया मरीजों की दृष्टि से एक अति संवेदनशील जनपद है। लिम्फोडिमा मरीजों को लिम्फोडिमा प्रबंधन का प्रशिक्षण अति आवश्यक होता है जिसमें मरीजों को एक्सरसाइज, सूजन प्रबंधन, चोट प्रबंधन, संक्रमण प्रबंधन, मच्छरों से बचाव आदि के बारे में विधिवत प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण प्राप्त कर प्रशिक्षक ब्लॉक स्तरीय कर्मचारियों जैसे आशा, सामुदायिक स्वास्थ्य कर्मियों (सीएचओ), एएनएम आदि को एमएमडीपी का प्रशिक्षण देंगे। इसके साथ ही मरीजों के बीच ब्लॉक स्तर पर लगाए जाने वाले एमएमडीपी कैंप में मरीजों को भी जानकारी उपलब्ध कराएंगे।
फाइलेरिया को जानें – प्रशिक्षण में डीएमओ मनोज कुमार ने बताया कि फाइलेरिया मच्छर जनित रोग है। यह मादा क्यूलेक्स मच्छर के काटने से होता है। इसे लिम्फोडिमा (हाथी पांव) भी कहा जाता है। इसके प्रभाव से पैरों व हाथों में सूजन, पुरुषों में हाइड्रोसील (अंडकोष में सूजन) और महिलाओं में स्तन में सूजन की समस्या आती है। यह बीमारी न सिर्फ व्यक्ति को दिव्यांग बना देती है बल्कि इस वजह से मरीज की मानसिक स्थिति पर भी बुरा प्रभाव पड़ता है। शुरू में डॉक्टर की सलाह पर दवा का सेवन किया जाए तो बीमारी को बढ़ने से रोक सकते हैं।
इसके अलावा प्रशिक्षण के दौरान स्वास्थ्यकर्मियों को फाइलेरिया प्रभावित अंगों के रुग्णता प्रबंधन का अभ्यास कराया। फाइलेरिया के मरीजों को प्रभावित अंग की अच्छी तरह से साफ-सफाई करनी चाहिए, जिससे किसी प्रकार के संक्रमण से मरीज न प्रभावित हो। इसके लिए उन्हें साफ-सफाई और दवा का सेवन नियमित रूप से करना जरूरी है।
प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके कासिमाबाद ब्लॉक के बीसीपीएम शमा परवीन ने बताया कि फाइलेरिया के बारे में मिली विस्तार से जानकारी को अब ब्लॉक के अन्य सीएचओ, स्वास्थ्यकर्मियों और आशा कार्यकार्यताओं को दी जाएगी जिससे वह भी फाइलेरिया संभावित रोगियों की स्पष्ट पहचान कर सकें। प्रशिक्षण में फाइलेरिया रोगी सहायता समूह (पीएसजी) के सदस्य भी शामिल रहे। सिधानगर कासिमाबाद ब्लॉक की पीएसजी सदस्य गुड्डी देवी ने बताया कि प्रशिक्षण में आकर फाइलेरिया (हाथीपांव) रोग के प्रबंधन, साफ- सफाई, पैर की धुलाई, उचित आकार के चप्पल, चोट लगने, कटने, जलने से बचाव के बारे में बहुत अच्छी जानकारी मिली। सुखदेहरा भांवरकोल ब्लॉक की पीएसजी सदस्य लछिया देवी ने बताया कि प्रशिक्षण में आकर उन्हें विस्तार से फाइलेरिया के लक्षण, बचाव, उपचार, व्यायाम के बारे में जानकारी मिली, जिसका वह नियमित रूप से पालन कर रही हैं।
प्रशिक्षण में एसीएमओ डॉ रामकुमार सिंह, एसीएमओ डॉ मनोज कुमार सिंह, पाथ संस्था के आरएनटीडीओ डॉ. अबू कलीम, जिला समन्वयक रामकृष्ण, सीफार संस्था के प्रतिनिधि आदि उपस्थित रहे।

“जानें क्यों” हॉटस्पॉट एरिया है शहर का कई इलाका

गाजीपुर। उत्तर प्रदेश में डेंगू के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। बात जिले कि करें तो पिछले 24 घंटों में 7 नए पॉजिटिव मामले सामने आए हैं। ये मामले शहर के कई हिस्सों से जिला अस्पताल में दर्ज किए गए। जिले में अबतक कुल 276 मामले डेंगू के जिला अस्पताल में आए हैं। जिसमें से 238 मरीज आज मंगलवार तक स्वस्थ होकर घर जा चुके हैं। शेष मरीजों का अभी जिला अस्पताल में इलाज चल रहा है। बता दें कि डेंगू मरीजों के ज्यादा मामले नगर पालिका परिषद गाजीपुर क्षेत्र के सकलेनाबाद, तुलसीसागर, तिलकनगर कालोनी, कलेक्टर घाट, पुलिस लाइन और आमघाट से आए हैं। इसीलिए इन सब इलाकों को हॉटस्पॉट एरिया घोषित कर दिया गया है।

डिटॉल बनेगा स्वस्थ इंडिया के तहत मनाया गया विश्व शौचालय दिवस

गाजीपुर। डिटॉल बनेगा स्वस्थ इंडिया के बैनर तले चल रहे कार्यक्रम डिटॉल डायरिया नेट जीरो के साथ विश्व शौचालय दिवस का आयोजन सैदपुर ब्लाक के ग्रामीण क्षेत्र की महिला लीड गुलाबी दीदी के द्वारा सोमवार को विश्व शौचालय दिवस को उत्सव के रूप में मनाया गया। पूजा प्रिया पांडेय ने बताया कि विश्व शौचालय दिवस’ मनाने का उद्देश्य लोगों को विश्व स्तर पर स्वच्छता के संकट से निपटने के लिए प्रेरित करता है। खुले में शौच करना मतलब बीमारियों को न्योता देना है। खुले में शौच करने का सबसे अधिक दुष्प्रभाव महिलाओं एवं बच्चों के स्वास्थ्य पर पड़ता है। ऐसे में इन सारी चीजों का बेहद खास ध्यान देना चाहिए। खुले में शौच करने से बीमारी होने की सम्भावना बढ़ जाती है।

गुलाबी दीदी ने प्रभात भेरी निकाला और जनसभा का आयोजन करते हुए लोगों को संदेश दिया कि खुले में शौच करने से पर्यावरण प्रदूषित होता है और साफ-सफाई में भी बड़ा रोड़ा आता है। इसलिए भारत सरकार और राज्य की सरकारे विभिन्न कार्यक्रमों के द्वारा उन लोगो को मदद करती है। जिन के घर मे शौचालय नही है। विश्व शौचालय दिवस 2022 का अभियान, “अदृश्य को दृश्य बनाना ‘ कहा जाता है। इस अभियान में महिलाओं ने रंगोली का आयोजन स्वच्छता का संदेश दिया। इस कार्यक्रम में ग्राम प्रधान, प्राथमिक विद्यालय, ब्लॉक कम्युनिटी मोबिलाइजर, अंजली कुमारी, लक्षमीना देवी, गीता गौतम आदि उपस्थित रहे।

23 नवम्बर से शुरू होगा सक्रिय टीबी रोगी खोज अभियान

जनपद में 23 नवम्बर से शुरू होगा सक्रिय टीबी रोगी खोज अभियान

स्वास्थ्यकर्मी घर-घर जाकर खोजेंगे टीबी रोगी, 221 टीम तैयार

अभियान में 20 प्रतिशत आबादी की होगी स्क्रीनिंग

संवेदनशील क्षेत्रों को चिन्हित कर लक्षणयुक्त लोगों की भी होगी जांच

गाज़ीपुर।टीबी मुक्त भारत अभियान को सफल बनाने के लिए क्षय रोग विभाग निरंतर प्रयासरत है। इसके लिए टीबी की शीघ्र जाँच और इलाज पर पूरा जोर है। इसी के तहत विभाग एक बार फिर टीबी रोगियों को खोजने के लिए एक्टिव केस फाइंडिंग (एसीएफ) यानि सक्रिय टीबी रोगी खोज अभियान शुरू करने जा रहा है। इस बारे में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन-उत्तर प्रदेश की मिशन निदेशक डॉ पिंकी जोवल ने सभी जिलाधिकारियों और मुख्य चिकित्सा अधिकारियों को पत्र भेजा है। अभियान की तैयारियों को लेकर शुक्रवार को सीएमओ कार्यालय में बैठक आयोजित हुई।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ देश दीपक पाल ने बताया – मिशन निदेशक के पत्र में माइक्रोप्लान तैयार कर संवेदनशील क्षेत्रों में 23 नवंबर से पांच दिसंबर तक एसीएफ अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं। जनपद की आबादी करीब 44.55 लाख है लेकिन विशेष अभियान के तहत 20 प्रतिशत आबादी की स्क्रीनिंग की जाएगी। टीबी के लक्षण युक्त (संभावित रोगियों) व्यक्तियों की जांच की जाएगी और जांच में टीबी की पुष्टि होने पर तत्काल उपचार शुरू किया जाएगा।


जिला क्षय रोग अधिकारी (डीटीओ) डॉ मनोज कुमार सिंह ने बताया – राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम (एनटीईपी) के अन्तर्गत 23 नवंबर से पांच दिसंबर तक यह अभियान चलेगा। स्वास्थ्य कर्मी घर-घर जाकर टीबी रोगियों को खोजेंगे। माइक्रोप्लान तैयार किया जा चुका है। अभियान के लिए कुल 221 टीम और 43 सुपरवाइजार तैयार की गईं हैं। समस्त स्वास्थ्यकर्मियों को प्रशिक्षित किया जा रहा है। स्वास्थ्यकर्मी संभावित क्षय रोगियों की जांच करेंगे और टीबी की पुष्टि होने पर 48 घंटे के अंदर उपचार शुरू किया जाएगा। उन्होंने बताया- अभियान के दौरान आवासीय परिसरों, जैसे अनाथालयों, वृद्धाश्रमों, नारी निकेतन, बाल संरक्षण गृह, मदरसों और छात्रावासों में कैंप आयोजित कर टीबी के प्रति संवेदीकरण किया जाएगा और लक्षण युक्त व्यक्ति के स्पुटम (बलगम) के नमूने एकत्र किए जाएंगे ।
जिला कार्यक्रम समन्वयक डॉ मिथलेश कुमार ने बताया – अभियान के दौरान माइक्रोप्लान के मुताबिक संवेदनशील क्षेत्रों (घनी बस्ती और स्लम एरिया) को कवर करते हुए जनपद की 20 प्रतिशत आबादी की स्क्रीनिंग की जाएगी। स्क्रीनिंग में मिलने वाले लक्षण युक्त व्यक्तियों की जांच की जाएगी। जांच में टीबी की पुष्टि होने पर हर रोगी की सीबीनॉट जांच कराई जाएगी ताकि उसके लिए सटीक दवा का निर्धारण करने में आसानी हो। इसके साथ ही सभी रोगियों की शुगर और एचआईवी जांच भी की जाएगी और पूरा डेटा निक्षय पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा ।
जनपद में क्षय रोग के मरीज – डॉ मिथलेश ने बताया कि वर्तमान में जनपद में करीब 3700 टीबी रोगी नोटिफ़ाइ हैं, जिनका स्वास्थ्य विभाग द्वारा निरंतर उपचार किया जा रहा है। साथ ही गोद लिए गए सभी क्षय रोगियों को हर माह पोषण पोटली भी प्रदान की जा रही है। निक्षय पोषण योजना में क्षय रोगियों को उपचार के दौरान हर माह 500 रुपये भी डीबीटी के द्वारा भेजे जा रहे हैं।
क्षय रोग के बारे में जानें – दो सप्ताह या अधिक समय तक खांसी आना, खांसी के साथ बलगम आना, बलगम में कभी-कभी खून आना, सीने में दर्द होना, शाम को हल्का बुखार आना, वजन कम होना और भूख न लगना टीबी के सामान्य लक्षण हैं।