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राष्ट्रीय प्रदूषण नियंत्रण दिवस पर जागरूकता का हुआ आयोजन

राष्ट्रीय प्रदूषण नियंत्रण दिवस पर जागरूकता गोष्ठी का हुआ आयोजन

गाजीपुर। हर साल सर्दियों में वायु प्रदूषण चिंताजनक स्थिति में होता है। इसी मौसम में राष्ट्रीय प्रदूषण नियंत्रण दिवस हर साल 2 दिसंबर को मनाया जाता है। इसे मनाने की वजह 1984 में हुए एक औद्योगिक हादसा है। जिससे 2-3 दिसंबर की रात को भोपाल में एक जहरीली गैस का रिसाव हुआ था। इसी को लेकर आज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मोहनदाबाद के अंतर्गत आने वाले हेल्थ एंड वैलनेस सेंटर एवं ग्रामों में एक जागरूकता गोष्ठी का आयोजन चिकित्सा अधीक्षक डॉ आशीष राय की अध्यक्षता में किया गया।

चिकित्सा अधीक्षक डॉ आशीष राय ने बताया कि वर्तमान समय में मानवीय अस्तित्व के लिए सबसे बड़े संकट की बात की जाए तो निःसंदेह ही पर्यावरण प्रदूषण धरती के लिए सबसे बड़ा खतरा है। आज विश्व का प्रत्येक भाग मानव द्वारा निर्मित प्रदूषण से जूझ रहा है जिसके कारण विभिन पर्यावरणीय समस्याएँ उत्पन हो गयी है। जल, स्थल, वायुमंडल सहित जीवमंडल का सम्पूर्ण पारिस्थितिक तंत्र प्रदूषण के कारण संकट में है। मानवीय प्रदूषण के कारण उत्पन संकट को दूर करने के लिए सरकार द्वारा प्रतिवर्ष राष्ट्रीय प्रदूषण नियंत्रण दिवस के माध्यम से देश के नागरिको को जागरूक किया जाता है। प्रदूषण का पारिस्थितिक तंत्र सहित मानवीय जीवन पर घातक प्रभाव होता है। प्रदूषण के कारण पारिस्थितिक तंत्र में असंतुलन उत्पन हो जाता है। जिसके कारण विभिन जीवों का अस्तित्व खतरे में पड़ जाता है। प्रदूषण का पारिस्थितिक तंत्र सहित मानव जीवन पर घातक प्रभाव पड़ता है। इसके कारण विभिन जीवों के खाद्यान एवं आवास पर संकट उत्पन होता है। साथ ही विभिन वैज्ञानिक अनुसंधानो में भी यह बात साबित हो चुकी है की प्रदूषण ना सिर्फ हृदय, श्वसन एवं तंत्रिका तंत्र सम्बंधित बीमारियों के लिए जिम्मेदार है। अपितु यह कैंसर जैसे बीमारियों का भी प्रमुख कारक है। प्रदूषण के कारण लोगो की उम्र में 10 वर्ष तक की कमी सम्बंधित शोध भी प्रकाशित हो चुके है।

ब्लाक कार्यक्रम प्रबंधक संजीव कुमार ने बताया कि राष्ट्रीय प्रदूषण नियंत्रण दिवस क्या है प्रदूषण दिवस 2 दिसंबर को क्यों मनाया जाता है इसका मुख्य उद्देश्य नागरिको को पर्यावरण प्रदूषण के बारे में जागरूक करना है। राष्ट्रीय प्रदूषण नियंत्रण दिवस के माध्यम से सरकार एवं विभिन गैर-सरकारी संस्थानों के द्वारा विभिन कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है जिसके माध्यम से पर्यावरण प्रदूषण का कारकों, इसके नियंत्रण एवं निस्तारण में लोगों की सहभागिता के माध्यम से पर्यावरण प्रदूषण पर नियंत्रण हेतु प्रभावी कार्ययोजना को लागू किया जाता है। साथ ही जन-सहभागिता के अतिरिक्त राष्ट्रीय प्रदूषण नियंत्रण दिवस के अवसर पर विभिन नियमों एवं कानूनो के बारे में भी लोगों को जागरूक किया जाता है। पर्यावरण प्रदूषण हेतु प्रभावी उपायों के बारे में भी इस दिवस के अवसर पर विभिन प्रकार की जानकारी साझा की जाती है। प्रदूषण के कारकों के आधार पर इसे विभिन प्रकार से विभाजित किया गया है जिन्हे मुख्यत निम्न प्रकार से बाँटा गया है :- जल-प्रदूषण, वायु-प्रदूषण, मृदा प्रदूषण, ध्वनि प्रदूषण, प्रदूषण के प्रमुख कारक है। मानव निर्मित औद्योगिक गतिविधियों, रसायनों के प्रयोग, खनिज तेल का उपयोग एवं प्राकृतिक संसाधनों के अंधाधुन दोहन के कारण प्रदूषण पैदा होता है।

महिला पीजी कॉलेज में पोस्टर प्रतियोगिता का हुआ आयोजन

गाजीपुर। राजकीय महिला स्नातकोत्तर महाविद्यालय में गुरूवार को राष्ट्रीय सेवा योजना की तरफ से एक विचार गोष्ठी और पोस्टर प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। संगोष्ठी के प्रारंभ में डॉ. मनीष ने कहा कि प्रारंभ में विश्व एड्स दिवस को बच्चों और युवाओं से जोड़कर देखा जाता था लेकिन एचआईवी केवल बच्चों और युवाओं को ही संक्रमित नहीं करता बल्कि यह हर उम्र के लोगों को अपनी गिरफ्त में ले सकता है। अमेरिकन जीन टेक्नोलॉजी का दावा है कि जीन थेरेपी के माध्यम से इसका ईलाज संभव है लेकिन अभी यह जन सामान्य की पहुँच से बाहर है। वरिष्ठ कार्यक्रम अधिकारी डॉ. अमित यादव ने कहा कि एचआईवी संक्रमण एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या है। यह सबसे पहले जीवन प्रतिरक्षा प्रणाली को लक्ष्य करता है। जैसे ही लोगों की प्रतिरोधक क्षमता कम होने लगती है यह बीमारी अपने प्रभाव में ले लेती है। डॉ. संगीता ने कहा कि अभी तक इसके लिए कोई टीका नहीं बना है इस लिए बचाव ही इसका सही उपाय है। डॉ. गजनफर सईद ने कहा कि इसके लक्षण में तेजी से वजन का कम होना, दस्त, खासी बुखार जैसे शरीरिक लक्षण दिखने प्रारंभ हो जाते हैं। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्राचार्य प्रो. सविता भारद्वाज ने कहा कि हर वर्ष आज के ही दिन विश्व एड्स दिवस इसी उद्देश्य के साथ मनाया जाता है कि एचआईवी संक्रमण की वजह से फैली महामारी के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। सरकार इसके लिए प्रयास कर रही है। सरकार अपने मकसद में कामयाब तभी होगी जब देश के नागरिकों का सहयोग प्राप्त हो। इस कार्यक्रम में स्वयं सेवियों ने पोस्टर प्रदर्शनी लगाकर लोगों को जागरूक करने का प्रयास किया। इन स्वयं सेवियों के पोस्टर का मूल्यांकन किया गया जिसमें विशाखा चौहान प्रथम, तनवीर फात्मा द्वितीय तथा तीसरे स्थान पर हिना खातून और सत्या कुमारी रहीं साथ ही कृष्णा कुशवाहा सांत्वना पुरस्कार प्राप्त कीं। यह समस्त सूचनाएँ मीडिया प्रभारी डॉ शिवकुमार ने साझा करते हुए कहा कि अभी 2020 की ताजा रिपोर्ट यह है कि इस बीमारी के कारण सात लाख के करीब लोगों की मौत हो गयी है। इसका अर्थ यह है कि हम अभी तक इस मामले में जागरूक नहीं हो पाए हैं। इस अवसर पर महाविद्यालय के प्राध्यापक डॉ. राजेश यादव, डॉ. हरेंद्र यादव के साथ ही समस्त छात्राएं उपस्थित रहीं।

निकाली गई जागरूकता रैली, चलाया गया हस्ताक्षर अभियान

एड्स जागरूकता एवं बचाव के लिए निकाली गई रैली चलाया गया हस्ताक्षर अभियान

गाजीपुर। हर साल 1 दिसंबर को दुनिया भर में विश्व एड्स दिवस मनाया जाता है। यह एचआईवी से संक्रमित लोगों के लिए समर्थन दिखाने और इस बीमारी से जान गंवाने वाले रोगियों को श्रद्धांजलि देने के लिए मनाया जाता है। इसी को लेकर गुरुवार को मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय से एड्स जागरूकता एवं बचाव के उद्देश्य को लेकर एक रैली निकाली गई। जो गोरा बाजार के विभिन्न इलाकों से होते हुए मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय पहुंचा। जहां पर रैली में शामिल लोगों ने हस्ताक्षर अभियान में शामिल हुए और इसके पश्चात मुख्य चिकित्सा अधिकारी के सभागार में एक गोष्ठी का भी आयोजन किया गया। जिसमें एड्स की भयावहता और बचाव के बारे में जानकारी दी गई।

मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ हरगोविंद सिंह ने बताया कि साल 1988 में विश्व एड्स दिवस को पहले इंटरनेशनल हेल्थ डे के रूप में मनाना शुरू किया गया। यह दिन एचआईवी टेस्टिंग, रोकथाम और देखभाल लोगों को विश्व स्तर पर खुद को एक साथ जोड़ने के लिए प्रोत्साहित करने के बारे में है।
यह दुनिया भर के लोगों के लिए एचआईवी के खिलाफ लड़ाई में एक साथ आने, एचआईवी के साथ जी रहे लोगों को सपोर्ट करने और इससे जान गंवाने वालों को याद करने का एक दिन है। इस दिन को मनाने का उद्देश्य राष्ट्रीय और स्थानीय सरकारों, अंतर्राष्ट्रीय संगठनों और व्यक्तियों के बीच एड्स और एचआईवी के बारे में जानकारी के आदान-प्रदान को सुविधाजनक बनाना है।

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मोहमदाबाद के अधीक्षक डॉ आशीष राय ने बताया कि विश्व एड्स दिवस को लेकर कई स्वास्थ्य केंद्रों पर पोस्टर के माध्यम से आने वाले मरीजों उनके परिजनों को जागरूक करने का काम किया गया।

एड्स का खतरा एक से अधिक लोगों से यौन संबंध रखने वाला व्‍यक्ति।वेश्‍यावृति करने वालों से यौन सम्‍पर्क रखने वाला व्‍यक्ति।नशीली दवाईयां इन्‍जेकशन के द्वारा लेने वाला व्‍यक्ति।यौन रोगों से पीडित व्‍यक्ति।पिता/माता के एच.आई.वी. संक्रमण के पश्‍चात पैदा होने वाले बच्‍चें।बिना जांच किया हुआ रक्‍त ग्रहण करने वाला व्‍यक्ति

एड्स से बचाव ,जीवन-साथी के अलावा किसी अन्‍य से यौन संबंध नही रखे।यौन सम्‍पर्क के समय निरोध(कण्‍डोम) का प्रयोग करें।मादक औषधियों के आदी व्‍यक्ति के द्वारा उपयोग में ली गई सिरिंज व सूई का प्रयोग न करें।एड्स पीडित महिलाएं गर्भधारण न करें, क्‍योंकि उनसे पैदा होने वाले‍ शिशु को यह रोग लग सकता है।रक्‍त की आवश्‍यकता होने पर अनजान व्‍यक्ति का रक्‍त न लें, और सुरक्षित रक्‍त के लिए एच.आई.वी. जांच किया रक्‍त ही ग्रहण करें।डिस्‍पोजेबल सिरिन्‍ज एवं सूई तथा अन्‍य चिकित्‍सीय उपकरणों का 20 मिनट पानी में उबालकर जीवाणुरहित करके ही उपयोग में लेवें, तथा दूसरे व्‍यक्ति का प्रयोग में लिया हुआ ब्‍लेड/पत्‍ती काम में ना लेंवें।एड्स-लाइलाज है- बचाव ही उपचार है।

कार्यक्रम में एचआईवी टीबी प्रोग्राम के चार पार्टनर संस्था, ज्योति ग्रामीण संस्था, सेंटर ऑफ़ टेक्नोलॉजी एंड एंटरप्रेन्योर ,अहाना के साथ ही सुभेछा परियोजना के लोग शामिल रहे। साथ ही जनपद में चलने वाले 9 आईसीटीसी सेंटर के कर्मचारी और एआरटी सेंटर के कर्मचारी के साथ ही एसीएमओ डॉ मनोज सिंह ,डॉ जे एन सिंह, डॉ एसडी वर्मा, डॉ सुजीत मिश्रा, डॉ मिथिलेश सिंह ,अनुराग पांडे , संजय सिंह यादव, श्वेताभ गौतम, रविप्रकाश, सुनिल वर्मा, अंजु सिंह स्वर्ण लता सिंह, श्वेता, संगीता और अन्य लोग शामिल रहे।

प्लेटलेट्स की कमी होना डेंगू होना नहीं है

गाजीपुर। मुख्य चिकित्साधिकारी ने बताया कि जनपद के समस्त निजी नर्सिंग होम, निजी चिकित्सक एवं प्राइवेट पैथोलॉजी को मिलाकर किट के द्वारा जॉचे गए संदिग्ध डेंगू मरीजों की संख्या 4412, किट द्वारा किसी भी मरीज को डेंगू धनात्मक पाए गए मरीजों की संख्या 224 एवं अब तक पुष्टि हेतु आईएमएस बीएचयू भेजे गए संदिग्ध डेंगू के सैंपल 224, परिणाम प्राप्त 218, परिणाम प्रतिक्षित 6, डेंगू पॉजिटिव की संख्या 127 अन्य जनपद के 5, नेगेटिव 63, एवं जनपद के डेंगू धनात्मक मरीजों की संख्या 153 है। उन्होने बताया कि जनपद में डेंगू तथा अन्य मच्छर जनित बीमारियां पूरी तरह नियंत्रण में है। डेंगू के उपचार हेतु जिला अस्पताल में 25 बेड है जिसमें भर्ती मरीजो की संख्या 1 है तथा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर 60 बेड आरक्षित किए गए जिसमे भर्ती संदिग्ध डेंगू मरीजों की संख्या शून्य है। निजी अस्पतालों में डेंगू हेतु आरक्षित बेड की संख्या 32 है। उन्होंने बताया कि डेंगू के उपचार हेतु सभी आवश्यक दवाइयां पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं। ऐसे में किसी भी बुखार पीड़ित को घबराने की कतई आवश्यकता नहीं है। डेंगू से प्रभावित ग्रामो में मोबाईल मेडिकल यूनिट के द्वारा भ्रमण कर मौके पर ही बुखार पीड़ितों का उपचार किया जा रहा है। ऐसे में किसी भी बुखार पीड़ित को घबराने की कतई आवश्यकता नही है। अन्य वायरल बीमारियों में भी प्लेटलेट्स की कमी हो सकती है, अतः प्लेटलेट्स की कमी होना डेंगू होना नहीं है। बुखार के मरीज अपने नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर संपर्क करें। बुखार के उपचार हेतु अनाधिकृत चिकित्सक अथवा स्वयं उपचार नहीं करें। अब तक प्राप्त 153 डेंगू धनात्मक मरीज उपचार के उपरान्त स्वस्थ होकर स्वास्थ्य लाभ कर रहे है। इन 153 मरीजों में से 43 मरीज अन्य प्रदेशों अथवा जनपदों से बीमारी के उपरान्त जनपद में आए थे जो जॉच में डेंगू धनात्मक पाए गए। इसमें से अधिकांश मरीज उपचार के उपरांत स्वस्थ होकर अपने कार्यस्थल के प्रदेशों तथा जनपदों में वापस जा चुके हैं। सभी मरीजों का नियमित फॉलोअप लिया जा रहा है तथा प्रभावित ग्राम/मोहल्ले में तत्काल निरोधात्मक कार्यवाही स्वास्थ्य विभाग की टीम द्वारा की जा रही है। इन ग्रामो/मोहल्लो में साफ-सफाई तथा कीटनाशकों हेतु जिला पंचायती राज अधिकारी एवं नगर निकायों के अधिशाषी अधिकारियों को निर्देशित किया गया है।

हार्ट अटैक को रोकने के लिए करें ये काम…..

बढ़ रहे हार्ट अटैक के मामले ऐसे रहे सतर्क

गाजीपुर। पिछले 2 से 3 माह के अंदर कई ऐसे मामले और वीडियो भी सामने आए जिसमें व्यक्ति काम करते-करते या फिर खुशी में शामिल होकर डांस करते-करते जमीन पर गिरता है और फिर उसकी मौत हो जाती है। इसके साथ ही साथ ठंड का मौसम शुरू हो चुका है। ऐसे में कई तरह की बीमारियों के साथ ही साथ हार्ट अटैक के मामले भी सामने आ रहे हैं। ऐसे में आमजन को हार्ड अटैक से कैसे बचाव करें इसके बारे में राजकीय मेडिकल कॉलेज के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ स्वतंत्र सिंह ने इस मामले में कई तरह के टिप्स दिए। जिसको अपनाकर हम इससे बच सकते हैं।

उन्होंने बताया कि ठंड का मौसम आते ही इंफेक्शन, सर्दी-खांसी, बुखार समेत कई तरह की बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। इनमें सबसे खतरनाक है हार्ट अटैक। सर्दियों में हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए दिल की सेहत का ख्याल रखने की सबसे ज्यादा जरूरत होती है। हार्ट अटैक से बचने का वो उपाय जिनसे आप अपने दिल को मजबूत बना सकते हैं और हार्ट अटैक के खतरे के भी बच रह सकते हैं।

सर्दी के मौसम में हमारे खून की नसें सिकुड़ने की वजह से दबाव बढ़ जाता है। ब्लड प्रेशर भी बढ़ने लगता है। बीपी बढ़ते ही हार्ट अटैक के मामले सामने आने लगते हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, सर्दी में लोगों के शरीर में खून के थक्के बनने लगते हैं।जिसकी वजह से हार्ट अटैक आने की संभावना भी बढ़ जाती है। उन्होंने बताया कि सीने में बाए साइड हल्की दर्द होने पर तत्काल उसका इसीजी कराएं और किसी विशेषज्ञ डॉक्टर से सलाह ले

ठंड के मौसम में लोगों को हार्ट अटैक ज्यादातर मामलों में सुबह के वक्त आता है। सर्दी में सुबह तापमान गिरने से शरीर का तापमान भी कम हो जाता है। इस वजह से शरीर का तापमान बराबर करते हुए ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है जो कि हार्ट अटैक का कारण बन जाता है।

उन्होंने बताया कि कोविड-19 के प्रथम एवं सेकंड फेज के दौरान जो लोग कोविड़ 19 से प्रभावित हुए थे। उन लोगों को इससे ज्यादा बचने की जरूरत है। क्योंकि कोविड ने प्रभावित लोगों के लन्स को प्रभावित किया है। और इसमें सबसे ज्यादा बुजुर्ग और युवाओं को प्रभावित किया है।

उन्होंने हार्ट अटक आने के कारणों के बारे में बताया कि यह अनुवांशिक के साथ ही खानपान में तेलीय चीजों का सेवन, अधिकाधिक वजन, दैनिक दिनचर्या में रुचि न रखना, इसके अलावा जीम में जरूरत से अधिक एक्सरसाइज, तनाव का बढ़ना, ब्लड प्रेशर मधुमेह आदि हो सकता है।

हार्ट अटैक से बचाव के लिए उन्होंने बताया कि लोगों को फाइबर डाइट जिसमें जौ बाजरा और गेहूं की रोटी शामिल है। के साथ ही हरी सब्जी खाने में एक फल जरूर ले, वसीय पदार्थों का प्रयोग न करें, समय से रूटीन जांच के साथ ही जिम में ट्रेनर के बताए अनुसार ही एक्सरसाइज करें। साथ ही साथ ठंड में 2 दिन रेस्ट अवश्य करें।

डेंगू मरीजों के लिए बेड

डेंगू मरीजों के लिए आरक्षित हुआ बेड

गाजीपुर। डेंगू का कहर इन दिनों पूरे प्रदेश में चल रहा है। जिसको लेकर स्वास्थ विभाग के द्वारा जनपद के सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर डेंगू पीड़ित मरीजों के लिए बेड को आरक्षित कर दिया गया है। इसी के मद्देनजर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मोहमदाबाद पर भी डेंगू पीड़ित मरीजों के लिए पांच बेड को आरक्षित कर दिया गया है। हालांकि मौजूदा समय में मोहम्मदबाद तहसील के अंतर्गत डेंगू मरीज मिलने की कोई सूचना नहीं है।

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के चिकित्सा अधीक्षक डॉ आशीष राय ने बताया कि डेंगू के मद्देनजर सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र मुहम्मदाबाद पर 5 बेड डेंगू मरीजों के लिए आरक्षित किया गया है। जो कभी भी आपतकालीन स्थिति में पीड़ित मरीजों को आवश्यक चिकित्सीय परामर्श पर रखा जा सकता है। अभी तक क्षेत्र के अंतर्गत जो डेंगू मरीज हैं उन पर ब्लाक रैपिड रिस्पांस टिम द्वारा लगातार निगरानी रखी जा रही है। किसी इमरजेंसी सेवा के लिए तैयार हैं।

उन्होंने बताया की आम जन सोते समय मच्छरदानी का प्रयोग करें, पुरे बाहर के पैंट एवं शर्ट पहने, छतों या घरों में कबाड़ की समान को हटा दें, कुलर, गाड़ी के टायर, बंद गमलों इत्यादि को देख ले के उसमें पानी इकट्ठा न हो, यदि हो तो उसकी विधिवत सफाई करें। पानी की टंकियों की सफाई अवश्य करा लें, गाय एवं गौशालो की सफाई नियमित रूप से करते रहे। क्योंकि यहां मच्छरों को पनपने के लिए स्थान मिलते हैं। नालियों की सफाई एवं घर के पास कूड़ा कचरा न रहने दें। गांव के तालाबों, कुओं की सफाई भी इन दिनों आवश्यक है। क्योंकि ऐसे स्थानों पर मच्छरों को पनपने का स्थान मिलता है।

खिड़कियां एवं दरवाजों को बंद रखें सम्भव हो तो खिड़कियों एवं दरवाजों में जाली लगा लें जिससे बाहरी मच्छरों का प्रवेश न हो पाए। इन सभी आवश्यक सावधानियां को यदि हम अपने नियमित दिनचर्या में रखते हैं तो हमारे आस पास मच्छरों को पनपने का स्थान नहीं मिलेगा। और हम पूर्णतः सुरक्षित रहेंगे। इसी क्रम में सर्दी, जुकाम, बुखार इत्यादि किसी भी तरह की समय पर तत्काल स्थानीय प्राथमिक/ सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र के चिकित्साधिकारी से अवश्य सम्पर्क करें जिससे समय से आपको उचित परामर्श मिल सके।

गर्भवती महिलाओं का हुआ जांच

प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व दिवस पर 109 गर्भवती महिलाओं का हुआ जांच, 11 एचआरपी महिलाएं हुए चिन्हित

गाजीपुर। सुरक्षित मातृत्व दिवस भारत सरकार और स्वास्थ्य विभाग के एक महत्वाकांक्षी योजना है। जिसके माध्यम से गर्भवती महिलाओं का प्रसव पूर्व जांच एवं उचित प्रबंधन को लेकर प्रत्येक माह के 9 एवम 24 तारीख को आयोजन किया जाता है। जिसके तहत गुरुवार को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मोहमबाद पर प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व दिवस का आयोजन किया गया। जिसमें 109 महिलाओं का जांच एवं 11 एचआरपी महिलाओं को चिन्हित कर उन्हें उचित प्रबंधन की जानकारी दी गई।

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मोहम्मबाद के अधीक्षक डॉ आशीष राय ने बताया कि प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व दिवस का आयोजन प्रत्येक माह के 9 एवम 24 तारीख को जनपद के सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर आयोजित किया जाता है। उसी के क्रम में मोहमदाबाद पर भी आयोजित किया गया है। इस अवसर पर स्वास्थ्य केंद्र पर आने वाली गर्भवती महिलाओं को उनके स्वास्थ्य को बेहतर रखरखाव और सुरक्षित प्रसव को लेकर स्वास्थ्य केंद्रों पर महिला डॉक्टर के द्वारा जांच एवं परामर्श किया गया। जिसके तहत महिला चिकित्साधिकारी डॉ नीरज कुमार मौर्य के द्वारा109 गर्भवती महिलाओं की जांच की गई जांच में कुल 11 एचआरपी महिलाएं भी चिन्हित की गई हैं। जिन्हें उचित प्रबंधन के लिए दिशा निर्देश दिए गए हैं।

ब्लॉक कार्यक्रम प्रबंधक संजीव कुमार ने बताया की स्वास्थ्य केंद्र पर आईसीटीसी कक्ष में एलटी इकराम के द्वारा महिलाओं की एचआईवी, सिफलिश जांच की गई तथा काउंसलर निरा राय के द्वारा सभी को सुरक्षित प्रसव को लेकर काउंसलिंग किया गया। एलए ओमप्रकाश के द्वारा हीमोग्लोबिन जांच, ब्लड गुप , एल्बुमिन, प्रोटीन इत्यादि जांच की गई। स्टाफ नर्स वंदना मसीह द्वारा सभी को प्रसव से पूर्व उन्हें किन बातों की सावधानी बरतनी चाहिए इस बारे में विस्तृत रूप से बताया गया।

चिन्हित महिलाओं को क्षेत्रीय आशा तथा आशा संगीनी एवं एएनएम के माध्यम से इन महिलाओं की नियमित ट्रैकिंग किया जाता है। जिससे इनका सुरक्षित प्रसव कराया जा सके।इस सेवा हेतु नियमित रूप से 102 नेशनल ऐम्बुलेंस सेवा के माध्यम से घर से संस्था एवं चिकित्सा इकाई से सुरक्षित घर तक ले जाना मुख्य कार्य है। जो सभी एच आर पी चिन्हित महिलाओं के लिए किया जाता है। सभी एएनसी हेतु महिलाऐ अपना एमसीपी कार्ड साथ लेकर आती है जिसपे एचआरपी चिन्हित की दशा में एचआरपी मोहर लगाकर प्रसव पूर्व सभी दि जाने वाली समस्त सेवाओं का अंकन उसी एमसीपी कार्ड पर किया गया। जिससे क्षेत्र या अन्य किसी संस्था पर जाने पर सेवाओं को देने में आसानी एवं सुलभ हो।

आयुष और योगा से विश्व भर में भारत की पहचान: आयुष मंत्री

गाजीपुर। राज्य आयुष मिशन के तत्वाधान में औषधीय पौध उत्पादन एवं निर्यात के सम्बन्ध में एक दिवसीय वायर सेलर मीट कार्यक्रम का आयोजन जिलाधिकारी आर्यका अखौरी की अध्यक्षता में और मुख्य अतिथि आयुष मंत्री दयाशंकर मिश्र दयालु द्वारा एक होटल में दीप प्रज्जलित कर शुभारम्भ किया गया। आयुष मंत्री दयाशंकर मिश्र ‘दयालु ‘ ने  कहा  कि आयुष एवं योगा से विश्वभर में भारत की पहचान हुई है तथा औषधीय फसलों के उत्पादन करने से किसान अपनी आय में अनन्त सीमा तक वृद्धि कर सकते है। मंत्री द्वारा एकीकृत बागवानी विकास मिशन योजनान्तर्गत प्याज बीज का वितरण कृषकों के मध्य किया गया। अन्त में कार्यक्रम का धन्यवाद ज्ञापन एस०के० सुमन सचिव, हाफेड द्वारा किया गया। जिलाधिकारी आर्यका अखौरी ने  औषधीय पौधों की उपयोगिता एवं मूल्य संवर्धन के बारे में जानकारी दी तथा कहा कि औषधीय फसलों को क्रियान्वयन कर विभाग की योजना का लाभ लेकर कृषक अपनी आय में दो से तीन गुनी वृद्धि कर सकते हैं।डा० आर०सी० वर्मा कृषि विज्ञान केन्द्र, आंकुशपुर द्वारा औषधीय फसलों यथा-सतावर, अश्वगंधा, सर्पगन्धा, तुलसी, ऐलोवेरा, कालमेघ आदि फसलों के वैज्ञानिक उत्पादन तकनीकी के विषय में विस्तारपूर्वक चर्चा की गई। संजय सिंह, सदस्य निदेशक संचालक मण्डल, हाफेड के द्वारा हाफेड का परिचय एवं महत्व के बारे में प्रकाश डाला। मीना शुक्ला, औषधीय उत्पादक एवं क्रय विक्रय महिला कृषक की सफलता की कहानी प्रस्तुत की। जिला उद्यान अधिकारी द्वारा आये हुए अतिथियों का स्वागत एवं राष्ट्रीय आयुष मिशन योजना के बारे में विस्तारपूर्वक से अवगत कराया गया। रंगबहादुर सिंह, प्रगतिशील औषधीय कृषक ने औषधीय फसलों के उत्पादन एवं उसकी उपयोगिता तथा राष्ट्रपति डा० ए०पी०जे० अब्दुल कलाम द्वारा सम्मानित किये जाने के बारे में अवगत कराया । उप कृषि निदेशक द्वारा आयुष मिशन योजना के बारे में विस्तारपूर्वक एवं निर्यात के सम्बन्ध चर्चा की गई। उप निदेशक विपणन द्वारा अवगत कराया गया कि एपीडा के माध्यम से औषधीय फसलों के निर्यात विदेश में किये जाने पर चर्चा की गई। मुख्य विकास अधिकारी द्वारा निर्देश दिया गया कि एफ०पी०ओ० के माध्यम से औषधीय फसलों के उत्पादन एवं निर्यात कृषकों के मध्य कराई जाए।

260 छात्राओं की हुई जांच

किशोर स्वास्थ्य मंच 2022 के तहत 260 छात्राओं की गई जांच

गाजीपुर। राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम के अन्तर्गत किशोर स्वास्थ मंच 2022 का आयोजन सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र मुहम्मदाबाद के अन्तर्गत राजकीय बालिका इंटर कालेज मुहम्मदाबाद पर बुद्धवार को वृहद रूप से आयोजित किया गया। जहां पर 260 छात्राओं का जांच किया गया और जांच के उपरांत उन्हें सलाह और एनीमिया ,आयरन और आईएफए की गोली दी गई।

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के चिकित्सा अधीक्षक डॉ आशीष राय ने बताया कि मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय की तरफ से कॉलेजों में इस कार्यक्रम के आयोजन के लिए निर्देश दिया गया था। उसी के क्रम में राजकीय बालिका इंटर कॉलेज मोहम्मदाबाद में किशोर स्वास्थ्य मंच 2022 का आयोजन किया गया। जिसमें सभी छात्रों का हीमोग्लोबिन जांच कर एनिमिया व अन्य बीमारियों की पहचान एवं संदरभन साथ एनीमिया, आयरन और आई एफ ए की गोलियों के साप्ताहिक सेवन की जानकारी दिया गया। इस दौरान उन्हें पोषण के महत्व के बारे में और प्रतिभागियों को किशोरी सूरक्षा योजना, विशेषकर मेन्स्टूअल हाईजीन, लिंग हिंसा , तम्बाकू एवं अन्य मादक पदार्थों का सेवन व उनके दुष्परिणामों से अवगत कराया गया।

छात्रों को एनीमिया यौन एवं प्रजनन स्वास्थ्य तथा मानसिक स्वास्थ्य से सम्बंधित पेंटिंग प्रतियोगिता, वाद विवाद तथा भाषण प्रतियोगिताओ का भी आयोजन किया गया। जिसमें प्रथम स्थान पर सरिता यादव, द्वितीय स्थान प्राप्त पार्वती कुमारी तथा तृतीय स्थान पर सुहानी कक्षा 9 की रही। सभी को अधीक्षक डॉ आशीष राय के द्वारा पुरस्कृत किया गया।

इस कार्यक्रम में 260 छात्राओं की जांच किया गया जिसमें आरबीएसके की टीम डा आर के वर्मा, आशा सिंह स्टाफ नर्स, रंजना देवी एएनएम , मोहित एल टी , कालीचरण के साथ साथ विद्यालय से प्रमीला चौहान एवं श्रीमती ममता सिंह रही। कार्यक्रम का संचालन ब्लॉक कार्यक्रम प्रबंधक संजीव कुमार ने किया एवं विद्यालय प्रबंध समिति का कार्यक्रम के आयोजन को लेकर सभी को धन्यवाद ज्ञापित किया गया।

जनपद में चलेगा पुरुष नसबंदी पखवाड़ा

23 नवंबर से 4 दिसंबर तक चलेगा जनपद में पुरुष नसबंदी पखवाड़ा

गाजीपुर। बढ़ती हुई जनसंख्या को लेकर भारत सरकार बेहद ही गंभीर है। जिसको लेकर लगातार जनसंख्या नियंत्रण करने के लिए कई तरह के प्रोग्राम चलाती है। जिसमें कुछ स्थाई कार्यक्रम होते हैं और कुछ अस्थाई कार्यक्रम होते हैं। स्थाई कार्यक्रमों के तहत महिला एवं पुरुष नसबंदी पर लगातार कार्यक्रम चलाए जाते हैं। जिसको लेकर परिवार कल्याण कार्यक्रम के अंतर्गत पुरुष नसबंदी पखवाड़ा 21 नवंबर से 4 दिसंबर तक मनाया जाना है। जिसको लेकर विभाग ने माइक्रो प्लान तैयार कर लिया है।

मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ हरगोविंद सिंह ने बताया कि परिवार कल्याण कार्यक्रम के अंतर्गत पुरुषों की सहभागिता बढ़ाने हेतु पुरुष नसबंदी पखवाड़ा 23 नवंबर से 4 दिसंबर तक शासन से निर्देश प्राप्त हुआ है। जिसके लिए विगत वर्ष की भांति भी इस वर्ष अब पुरुष निभाएंगे जिम्मेदारी परिवार नियोजन अपनाकर दिखाएंगे अपनी भागीदारी थीम पर पुरुष नसबंदी पखवाड़ा चलाया जाएगा।

उन्होंने बताया कि थीम का मुख्य उद्देश जनसाधारण को सीमित परिवार के बारे में जागरूक बनाने के साथ-साथ परिवार नियोजन कार्यक्रम में पुरुषों की भागीदारी को बढ़ाते हुए कार्यक्रम को गति प्रदान करना है। साथ ही पुरुष नसबंदी पखवाड़ा के अवसर पर जनसाधारण को संबोधित करते हुए विभिन्न स्तरों पर व्यापक सघन प्रचार प्रसार किया जाना है। भारत सरकार से प्राप्त निर्देश अनुसार पुरुष नसबंदी पखवाड़ा जनपद एवं ब्लाक स्तर पर दो चरणों में मनाया जाएगा।

प्रथम चरण मोबिलाइजेशन 28 नवंबर से 27 नवंबर तक द्वितीय चरण सेवाप्रदायगी 28 नवंबर से 4 दिसंबर तक। इस पखवाड़े के दौरान प्रगति हासिल करने के लिए सभी कर्मियों को प्रस्तावित कार्यभार लक्षित दंपत्ति का चुनाव का जन समुदाय में व्याप्त भ्रांतियों को दूर कर पुरुष नसबंदी की स्वीकार्यता में वृद्धि किए जाने का निर्देश दिया गया है। इसको लेकर प्रत्येक ब्लॉक में प्रत्येक एएनएम को एक पुरुष नसबंदी एवं एक आशा संगिनी को एक पुरुष नसबंदी कराए जाने का लक्ष्य दिया गया है।

परिवार नियोजन विशेषज्ञ तबरेज अंसारी ने बताया कि 28 नवंबर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र रेवतीपुर और जखनिया, 29 नवंबर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मोहमदाबाद और सैदपुर, 30 नवंबर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मनिहारी और अंधऊ, 2 दिसंबर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बिरनो, 3 दिसंबर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मोहम्मदाबाद और रेवतीपर में पुरुष नसबंदी पखवाड़े के अंतर्गत कैंप का आयोजन किया जाएगा।