कम मानदेय और नौकरी जाने की धमकी से परेशान मीटर रीडर, आउटसोर्स निगम में शामिल करने की उठाई आवाज
सुभासपा के राष्ट्रीय सचिव अरविंद राजभर को सौंपा पत्रक, बोले- वर्षों से काम कर रहे, अब परिवार चलाना हुआ मुश्किल
गाजीपुर। वर्षों से आउटसोर्स के माध्यम से विद्युत विभाग के लिए काम कर रहे मीटर रीडरों का आक्रोश अब खुलकर सामने आने लगा है। आउटसोर्स निगम में शामिल किए जाने और न्यूनतम मजदूरी दिए जाने की मांग को लेकर जिले के मीटर रीडरों ने कासिमाबाद क्षेत्र में सुभासपा के राष्ट्रीय सचिव अरविंद राजभर से मुलाकात कर अपनी पीड़ा सुनाई और मांगों से संबंधित पत्रक सौंपा। मीटर रीडरों का कहना है कि वे लंबे समय से विद्युत उपभोक्ताओं के घर-घर जाकर मीटर रीडिंग लेने और बिल उपलब्ध कराने का काम कर रहे हैं, लेकिन वर्षों की सेवा के बावजूद उनके भविष्य को लेकर कोई ठोस व्यवस्था नहीं की गई है। रीडरों का आरोप है कि विभागीय स्तर पर उन्हें आउटसोर्स निगम में शामिल करने की दिशा में अब तक कोई प्रभावी पहल नहीं हुई है, जिससे उनमें नाराजगी बढ़ती जा रही है।
गाजीपुर जिले में करीब 300 मीटर रीडर विद्युत उपभोक्ताओं के घर पहुंचकर मीटर रीडिंग और बिलिंग का कार्य करते हैं। यह कार्य *मेसर्स *टीडीएस कंपनी* के माध्यम से कराया जा रहा है। रीडरों के मुताबिक उनसे प्रोब, ओसीआर, बिलिंग टारगेट सहित कई जिम्मेदारियां पूरी कराई जाती हैं और निर्धारित लक्ष्य हासिल करने के लिए लगातार फील्ड में काम कराया जाता है।

काम का दबाव, मानदेय बेहद कम होने का आरोप
मीटर रीडरों का आरोप है कि उनकी जिम्मेदारियों और कार्य के दबाव के अनुरूप उन्हें मानदेय नहीं दिया जा रहा है। उनके अनुसार कई रीडरों के खाते में करीब दो से तीन हजार रुपये प्रतिमाह ही भुगतान किया जाता है। रीडरों का कहना है कि जब वे कंपनी से न्यूनतम मजदूरी और उचित भुगतान की मांग करते हैं तो कथित तौर पर उन्हें काम से हटाने की धमकी दी जाती है।
रीडरों का कहना है कि एक तरफ उनसे लगातार बिलिंग लक्ष्य पूरा करने और फील्ड में जाकर काम करने की अपेक्षा की जाती है, वहीं दूसरी तरफ कम मानदेय के कारण उनके सामने परिवार के भरण-पोषण का संकट खड़ा हो गया है। इससे वे आर्थिक और मानसिक परेशानी का सामना कर रहे हैं।
सरकार से निगम में शामिल करने की मांग
मीटर रीडरों ने कहा कि वे वर्षों से विभाग के लिए पूरी जिम्मेदारी के साथ काम कर रहे हैं। ऐसे में उन्हें भी आउटसोर्सिंग निगम में शामिल किया जाना चाहिए, ताकि उनकी नौकरी और परिवार के भविष्य को लेकर सुरक्षा मिल सके। साथ ही उन्होंने न्यूनतम मजदूरी के अनुसार मानदेय दिए जाने की मांग उठाई।
कासिमाबाद क्षेत्र में अरविंद राजभर से मुलाकात के दौरान मीटर रीडरों ने अपनी समस्याओं और कार्य परिस्थितियों की जानकारी देते हुए पत्रक सौंपा। अरविंद राजभर ने रीडरों की समस्याओं को गंभीरता से सुना और उनकी मांगों पर संबंधित विभागीय मंत्री से वार्ता करने का आश्वासन दिया। उन्होंने कुछ समय मांगा और कहा कि मामले को संबंधित स्तर पर उठाकर समाधान की दिशा में प्रयास किया जाएगा।
मीटर रीडरों का कहना है कि अब उनकी निगाह सरकार और विभागीय अधिकारियों की ओर है। वर्षों से सेवा देने के बावजूद यदि उनके मानदेय और रोजगार की सुरक्षा का समाधान नहीं होता है तो वे अपनी मांगों को लेकर आगे भी आवाज उठाने को मजबूर होंगे।