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पोस्टमार्टम हाउस तक शव वाहन पहुंचने में बाधा, समाजसेवी ने डीएम से की मांग

14 साल से लावारिस शवों का अंतिम संस्कार कर रहे समाजसेवी की गुहार, पोस्टमार्टम हाउस तक शव वाहन का रास्ता सुगम कराने की मांग

पोस्टमार्टम हाउस तक शव वाहन पहुंचने में बाधा, समाजसेवी ने डीएम से मिट्टी भरवाने की मांग की

गाजीपुर। जिले में लावारिस शवों का अंतिम संस्कार कराने की मानवीय सेवा में पिछले 14 वर्षों से जुटे समाजसेवी कुँवर वीरेन्द्र सिंह ने जिलाधिकारी को पत्र देकर पोस्टमार्टम हाउस तक शव वाहन पहुंचने में आ रही समस्या के समाधान की मांग की है। कुँवर वीरेन्द्र सिंह ने बताया कि वह पिछले 14 वर्षों से जिले में मिलने वाले लावारिस शवों को अपना मानकर, बिना किसी एनजीओ, ट्रस्ट अथवा सरकारी सहायता के पुलिस के सहयोग से उनका पोस्टमार्टम कराने के बाद अंतिम संस्कार करते आ रहे हैं। हिंदू धर्म के अज्ञात शवों का हिंदू रीति-रिवाज से दाह संस्कार तथा मुस्लिम अज्ञात शवों को मुस्लिम विधि के अनुसार सुपुर्द-ए-खाक कराया जाता है। उन्होंने बताया कि इस मानवीय सेवा के लिए उन्हें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत द्वारा सम्मानित भी किया जा चुका है। जिलाधिकारी को दिए पत्र में उन्होंने कहा कि पोस्टमार्टम हाउस के बगल में पुलिस आवास की बाउंड्रीवाल बनने के कारण शव वाहन पोस्टमार्टम हाउस के गेट तक आसानी से नहीं पहुंच पा रहा है। काफी मशक्कत के बाद वाहन गेट तक पहुंच भी जाता है तो वहां से बैक करना संभव नहीं हो पाता। लावारिस शव को कंधा देने वाला कोई व्यक्ति नहीं होने के कारण उन्हें पुलिस के सहयोग से काफी दूर से स्ट्रेचर के माध्यम से शव को पोस्टमार्टम हाउस के अंदर ले जाना पड़ता है। समाजसेवी ने जिलाधिकारी से अनुरोध किया है कि पोस्टमार्टम हाउस के बगल में टिन शेड के पास खाली पड़ी जमीन पर मिट्टी भरवा दी जाए, ताकि शव वाहन को आने-जाने में सुविधा हो सके और इस मानवीय समस्या का स्थायी समाधान हो जाए। उन्होंने जिलाधिकारी से मानवता के नाते मामले में शीघ्र आदेश जारी कर आवश्यक कार्रवाई कराने की अपील की है।

12 सितंबर को राष्ट्रीय लोक अदालत, जागरूकता रैली को जनपद न्यायाधीश ने दिखाई हरी झंडी

12 सितंबर को राष्ट्रीय लोक अदालत, जागरूकता रैली को जनपद न्यायाधीश ने दिखाई हरी झंडी


गाजीपुर। उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ के निर्देशानुसार आगामी 12 सितंबर 2026 को जनपद न्यायालय गाजीपुर, वाह्य न्यायालय सैदपुर एवं मुहम्मदाबाद तथा ग्राम न्यायालय जखनियां व जमानियां सहित अन्य सरकारी प्रतिष्ठानों में राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया जाएगा। लोक अदालत में विभिन्न प्रकार के वादों का सुलह-समझौते के आधार पर अधिक से अधिक निस्तारण कर आमजन को त्वरित एवं सुलभ न्याय दिलाने का प्रयास किया जाएगा। राष्ट्रीय लोक अदालत में उत्तराधिकार प्रमाण पत्र, छोटे एवं लघु दाण्डिक वाद, पारिवारिक वाद, धारा 138 एनआई एक्ट, स्टाम्प एवं पंजीयन वाद, मोटर दुर्घटना दावा, चकबंदी, श्रम, उपभोक्ता फोरम, बाट-माप, कराधान तथा बिजली चोरी से संबंधित मामलों सहित सुलह-समझौते एवं मध्यस्थता के माध्यम से वैवाहिक विवादों का निस्तारण किया जाएगा। राष्ट्रीय लोक अदालत के सफल आयोजन एवं आमजन को विधिक सेवाओं की जानकारी देने के उद्देश्य से 2 सितंबर 2026 को जनपद न्यायालय गाजीपुर से जागरूकता रैली निकाली गई। रैली को जनपद न्यायाधीश/अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण जय प्रकाश यादव ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस अवसर पर जनपद न्यायाधीश ने आमजन से 12 सितंबर को आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत में अधिक से अधिक संख्या में भाग लेकर अपने लंबित मामलों का सुलह-समझौते के माध्यम से निस्तारण कराने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि लोक अदालत आमजन को सरल, त्वरित एवं कम खर्च में न्याय उपलब्ध कराने का प्रभावी माध्यम है। जागरूकता रैली में संजय हरी शुक्ला, पीठासीन अधिकारी, मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण गाजीपुर, शैलोज चन्द्र, प्रधान न्यायाधीश कुटुम्ब न्यायालय गाजीपुर, शक्ति सिंह, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश/नोडल अधिकारी लोक अदालत, विजय कुमार-IV, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश/त्वरित न्यायालय, नीरज गोंड, सचिव, पूर्णकालिक जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, राजेन्द्र विक्रम सिंह, अध्यक्ष सिविल बार एसोसिएशन गाजीपुर सहित अन्य न्यायिक अधिकारी, बैंक पदाधिकारी, कर्मचारी एवं पराविधिक स्वयंसेवक उपस्थित रहे।

जखनिया में 6 सितंबर को लगेगा निःशुल्क नेत्र परीक्षण शिविर, मरीजों का होगा मुफ्त ऑपरेशन

जखनिया में 6 सितंबर को लगेगा निःशुल्क नेत्र परीक्षण शिविर, मोतियाबिंद मरीजों का होगा मुफ्त ऑपरेशन

डालिम्स सनबीम स्कूल में सुबह 10 से दोपहर 2 बजे तक होगा शिविर, जांच के बाद मरीजों को ऑपरेशन के लिए किया जाएगा रेफर

जखनिया, गाजीपुर। क्षेत्रवासियों को बेहतर नेत्र चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से आर. जे. शंकरा आई हॉस्पिटल की ओर से 6 सितंबर 2026, रविवार को निःशुल्क नेत्र परीक्षण एवं मोतियाबिंद ऑपरेशन शिविर का आयोजन किया जाएगा। शिविर डालिम्स सनबीम स्कूल, जखनिया, गाजीपुर में आयोजित होगा।शिविर में सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक मरीजों की आंखों की जांच की जाएगी। जांच के दौरान मोतियाबिंद से पीड़ित पाए जाने वाले मरीजों को ऑपरेशन के लिए रेफर किया जाएगा। मोतियाबिंद का ऑपरेशन लेंस प्रत्यारोपण विधि से किया जाएगा। आयोजकों के अनुसार, ऑपरेशन के लिए रेफर किए गए मरीजों को निःशुल्क नेत्र शल्य चिकित्सा, पौष्टिक भोजन, ठहरने की सुविधा, आवश्यक दवाइयां और परिवहन व्यवस्था उपलब्ध कराई जाएगी।

यह शिविर साबिर अली एजुकेशनल एंड चैरिटेबल ट्रस्ट के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है। शिविर के लिए पंजीकरण शुरू हो चुका है। इच्छुक मरीज अपना नाम, मोबाइल नंबर और आधार कार्ड की फोटो कॉपी उपलब्ध कराकर पंजीकरण करा सकते हैं।

गंगा के बढ़ते जलस्तर को लेकर डीएम की अपील…..

गंगा के बढ़ते जलस्तर पर डीएम अलर्ट, बोले- घबराएं नहीं, प्रशासन आपके साथ; सुरक्षित स्थानों पर जाएं

बच्चों को बाढ़ के पानी से दूर रखने की अपील, नाव में क्षमता से अधिक सवारी और तेज बहाव में सेल्फी लेने पर रोक


बच्चों को बाढ़ के पानी से दूर रखने की अपील, नाव में क्षमता से अधिक सवारी और तेज बहाव में सेल्फी लेने पर रोक

गाजीपुर। गंगा नदी के बढ़ते जलस्तर और संभावित बाढ़ के मद्देनजर जिलाधिकारी अनुपम शुक्ला ने जनपदवासियों से सतर्कता बरतने की अपील की है। उन्होंने कहा कि प्रशासन पूरी तरह अलर्ट है और किसी भी आपात स्थिति में आमजन के साथ खड़ा है। उन्होंने लोगों से सुरक्षित रहने तथा केवल प्रशासन द्वारा जारी सूचनाओं पर ही भरोसा करने की अपील की। जिलाधिकारी ने कहा कि बाढ़ की स्थिति को देखते हुए लोग आवश्यकता पड़ने पर तत्काल ऊंचे और सुरक्षित स्थानों पर चले जाएं। बच्चों को बाढ़ के पानी से दूर रखें तथा उन्हें पानी में नहाने या जाने की अनुमति न दें। उन्होंने नाव संचालकों को निर्देशित किया कि नाव में निर्धारित क्षमता से अधिक यात्रियों को न बैठाएं और प्रतिबंधित क्षेत्रों में किसी भी दशा में नाव का संचालन न करें। उन्होंने आमजन से तेजी से बहते पानी के पास जाकर सेल्फी न लेने और तैरने का प्रयास न करने की भी अपील की। जिलाधिकारी ने कहा कि सावधानी और सतर्कता ही बाढ़ के दौरान सबसे बड़ा बचाव है।

जनपदवासी आपात स्थिति में इन नंबरों पर संपर्क कर सकते हैं।

  • पुलिस कंट्रोल रूम: 112
  • जिला बाढ़ नियंत्रण कक्ष: 0548-2224041
  • तहसील सदर: 0548-2221334
  • तहसील सैदपुर: 05495-222050
  • तहसील जमानिया: 05497-252074
  • तहसील जखनियां: 9454417089, 8739057296
  • तहसील मुहम्मदाबाद: 05493-242006
  • तहसील कासिमाबाद: 05493-252015
  • तहसील सेवराई: 05497-297597

जिलाधिकारी ने जनपदवासियों से अपील की किया कि किसी भी अफवाह पर ध्यान न दें और बाढ़ से संबंधित जानकारी के लिए प्रशासनिक सूचनाओं पर ही विश्वास करे।

रामावतार शर्मा की लेखनी में दिखता था प्रेमचंद का भाव और जैनेंद्र की वैचारिक दृढ़ता

जयंती पर ‘स्मृतियों के झरोखे से मूर्धन्य साहित्यकार रामावतार’ पुस्तक का विमोचन, साहित्यकारों ने याद किया योगदान

गाजीपुर। प्रख्यात कथाकार जैनेंद्र कुमार की साहित्यिक अभिरक्षा में साहित्य के संस्कार प्राप्त करने वाले प्रसिद्ध पत्रकार, कथाकार, उपन्यासकार एवं गाजीपुर टाइम्स के संपादक रहे रामावतार शर्मा की जयंती पर मंगलवार को उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर केंद्रित पुस्तक ‘स्मृतियों के झरोखे से मूर्धन्य साहित्यकार रामावतार’ का विमोचन किया गया। तथागत कैलाश जानकी इंटर कॉलेज, सुखदेवपुर में आयोजित समारोह में उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री हंसराज विश्वकर्मा एवं राज्य सभा सांसद डॉ. संगीता बलवंत ने संयुक्त रूप से पुस्तक का विमोचन किया। पुस्तक का संपादन डॉ. गजाधर शर्मा ‘गंगेश’ ने किया है, जबकि लाल बिहारी शर्मा ‘अनन्त’ ने रामावतार शर्मा से जुड़ी स्मृतियों एवं संस्मरणों को संकलित कर इसे पुस्तक का स्वरूप प्रदान किया है। पुस्तक में रामावतार शर्मा के साहित्यिक जीवन, पत्रकारिता, व्यक्तित्व तथा रचनात्मक योगदान को स्मृतियों के माध्यम से सामने लाने का प्रयास किया गया है। समारोह को संबोधित करते हुए मंत्री हंसराज विश्वकर्मा ने कहा कि रामावतार शर्मा की पहचान केवल पत्रकार या कथाकार के रूप में नहीं, बल्कि ऐसे साहित्यकार के रूप में रही, जिन्होंने अपनी लेखनी को समाज और मानवीय संवेदनाओं से जोड़े रखा। साहित्य एवं पत्रकारिता के क्षेत्र में उनका योगदान गाजीपुर की साहित्यिक विरासत का महत्वपूर्ण अध्याय है। उन्होंने कहा कि किसी साहित्यकार की स्मृतियों को पुस्तक के रूप में संरक्षित करना आने वाली पीढ़ियों को अपनी साहित्यिक विरासत से जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य है।

सांसद डॉ. संगीता बलवंत ने कहा कि रामावतार शर्मा ने अपनी लेखनी के माध्यम से समाज के विभिन्न पक्षों को प्रभावशाली ढंग से अभिव्यक्ति दी। साहित्य और पत्रकारिता दोनों क्षेत्रों में उनका योगदान उल्लेखनीय रहा। उन्होंने कहा कि ऐसे साहित्यकारों के जीवन और रचनात्मक यात्रा को नई पीढ़ी तक पहुंचाना समय की आवश्यकता है। ‘स्मृतियों के झरोखे से मूर्धन्य साहित्यकार रामावतार’ पुस्तक उनके व्यक्तित्व और साहित्यिक अवदान को समझने का महत्वपूर्ण माध्यम बनेगी। प्रसिद्ध साहित्यकार ऋचा राय ने रामावतार शर्मा के जीवन और रचनाओं पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि उनकी लेखनी में मुंशी प्रेमचंद का भाव और जैनेंद्र कुमार की वैचारिक दृढ़ता स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। उनके लेखन में जीवन का यथार्थ, मानवीय संवेदना और सामाजिक सरोकार एक साथ दिखाई देते हैं। उनकी भाषा सहज होने के बावजूद पाठक के मन पर गहरा प्रभाव छोड़ती है। रामावतार शर्मा की रचनाएं अपने समय के समाज और मनुष्य की आंतरिक संवेदनाओं का दस्तावेज हैं।

समकालीन सोच के संपादक एवं पत्रकार राम नगीना कुशवाहा ने कहा कि रामावतार शर्मा का व्यक्तित्व साहित्य और पत्रकारिता के बीच एक मजबूत सेतु के समान था। उन्होंने अपनी लेखनी के माध्यम से सामाजिक समस्याओं और मानवीय भावनाओं को स्वर दिया। उनकी रचनात्मक दृष्टि व्यापक और संवेदनशील थी। उनके साहित्यिक योगदान का मूल्यांकन करने तथा उनकी रचनाओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की आवश्यकता है। कार्यक्रम का शुभारंभ रामावतार शर्मा के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया। इसके बाद मुख्य अतिथियों ने दीप प्रज्वलित कर समारोह का विधिवत शुभारंभ किया। वक्ताओं ने रामावतार शर्मा के जीवन से जुड़े संस्मरण साझा करते हुए उनके साहित्यिक योगदान को स्मरण किया और उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। समारोह के अंत में रामावतार शर्मा के पौत्र सत्यम शर्मा ने अतिथियों, साहित्यकारों, पत्रकारों एवं उपस्थित गणमान्य लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर पूर्व सांसद जगदीश कुशवाहा, श्रीकांत पांडेय, प्रो. संतोष कुमार सिंह, प्राचार्य राम अवतार शर्मा, शशिकांत शर्मा, डॉ. वी.के. शर्मा, संतोष कुमार, जनार्दन शर्मा, विजय कुमार राय, संतोष जायसवाल, हरिशंकर शर्मा, विजय कुमार, मदन मोहन शर्मा, विनोद सोनकर, मोती लाल शर्मा, प्रवीण विश्वकर्मा, किशन शर्मा, भरत, चंदन सहित अनेक साहित्यकार, पत्रकार, शिक्षाविद एवं साहित्यप्रेमी उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रो. रामबदन राय ने तथा संचालन सुदामा राम विश्वकर्मा ने किया।

गंगा में नहाते समय दो किशोरियां डूबीं, तलाश जारी

चोचकपुर घाट पर बड़ा हादसा: गंगा में नहाते समय दो किशोरियां डूबीं, तलाश जारी

करंडा। थाना क्षेत्र के चोचकपुर घाट पर मंगलवार को गंगा नदी में नहाते समय दो किशोरियां गहरे पानी में डूब गईं। हादसे की खबर मिलते ही घाट पर अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय लोगों ने तत्काल दोनों की तलाश शुरू करते हुए पुलिस को सूचना दी।

जानकारी के अनुसार, बसंतपट्टी निवासी माही सिंह (16) और महिमा सिंह (14) गंगा में स्नान कर रही थीं। इसी दौरान दोनों अचानक गहरे पानी में चली गईं और देखते ही देखते लापता हो गईं। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और स्थानीय गोताखोरों की मदद से दोनों की तलाश शुरू कराई।

घाट पर परिजनों और ग्रामीणों की भारी भीड़ जुट गई है। पुलिस प्रशासन की निगरानी में गोताखोर लगातार गंगा नदी में खोजबीन कर रहे हैं। परिजन दोनों किशोरियों के सकुशल मिलने की उम्मीद लगाए हुए हैं। समाचार लिखे जाने तक दोनों किशोरियों का कोई पता नहीं चल सका था। घटना के बाद गांव में मातम पसरा है, जबकि परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।

“गंगा के बढ़ते जलस्तर से प्रशासन सतर्क, डीएम ने संभाली कमान; राहत-बचाव के लिए अधिकारी अलर्ट”

बढ़ते गंगा जलस्तर पर प्रशासन अलर्ट, डीएम ने दिए राहत-बचाव के पुख्ता इंतजाम के निर्देश

बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में लगातार निगरानी, एनडीआरएफ व बचाव दल सक्रिय; डीएम ने लोगों से सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की

गाजीपुर। गंगा नदी समेत जनपद की अन्य नदियों के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में आ गया है। संभावित बाढ़ की स्थिति को देखते हुए जिलाधिकारी अनुपम शुक्ला ने सभी संबंधित अधिकारियों को बाढ़ प्रभावित एवं संवेदनशील क्षेत्रों में लगातार निगरानी रखने तथा राहत एवं बचाव कार्यों को प्रभावी ढंग से संचालित करने के निर्देश दिए हैं। जिलाधिकारी ने जनपदवासियों से अपील की है कि बढ़ते जलस्तर को देखते हुए किसी भी प्रकार का जोखिम न लें और बाढ़ प्रभावित अथवा संभावित बाढ़ वाले क्षेत्रों से सुरक्षित स्थानों पर चले जाएं। उन्होंने कहा कि नागरिकों की सुरक्षा प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। किसी को घबराने की आवश्यकता नहीं है, जिला प्रशासन द्वारा आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जा रही हैं।

जिलाधिकारी ने सभी उप जिलाधिकारियों एवं तहसील स्तरीय अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में लगातार भ्रमण कर बाढ़ की स्थिति का स्थलीय निरीक्षण करने के निर्देश दिए। अधिकारियों को जलस्तर, प्रभावित गांवों, आवागमन की स्थिति और राहत कार्यों की निरंतर निगरानी करने तथा किसी भी सूचना पर तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया है। उन्होंने एनडीआरएफ एवं अन्य बचाव दलों को सक्रिय और चक्रमणशील रखने के निर्देश दिए, ताकि आवश्यकता पड़ने पर तत्काल रेस्क्यू एवं राहत कार्य शुरू किया जा सके। उन्होंने स्पष्ट किया कि बाढ़ के कारण किसी भी प्रकार की जनहानि रोकने के लिए सभी आवश्यक सुरक्षा उपाय पहले से सुनिश्चित किए जाएं।

बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए खाद्य सामग्री एवं अन्य आवश्यक राहत सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है। जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि जरूरतमंद परिवारों तक राहत सामग्री प्राथमिकता के आधार पर लगातार पहुंचाई जाए। इसके साथ ही प्रभावित क्षेत्रों में पेयजल, भोजन और अन्य जरूरी सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने तथा किसी भी समस्या का तत्काल समाधान कराने के निर्देश दिए गए हैं।

बाढ़ की स्थिति में पशुओं की सुरक्षा को लेकर भी प्रशासन ने विशेष तैयारी की है। संबंधित अधिकारियों को पशुपालकों को सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए जागरूक करने तथा पशुओं के लिए चारा, पानी और अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

संवेदनशील एवं बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पुलिस तथा प्रशासनिक टीमों को लगातार भ्रमण कर स्थिति पर नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं। खतरनाक स्थानों पर पर्याप्त पुलिस बल तैनात करने तथा लोगों को नदी और बाढ़ के पानी के नजदीक जाने से रोकने को कहा गया है।जिलाधिकारी ने विशेष रूप से बच्चों एवं युवाओं द्वारा बाढ़ के पानी अथवा नदी में नहाने के प्रयास पर चिंता जताई। उन्होंने ऐसे स्थानों पर तत्काल बैरिकेडिंग/वेरीकेटिंग कराने और पुलिस व स्थानीय प्रशासन के माध्यम से लोगों को नदी एवं बाढ़ के पानी से दूर रखने के निर्देश दिए। उन्होंने अभिभावकों से भी अपील की कि बढ़ते जलस्तर के दौरान बच्चों को नदी, नहर, तालाब अथवा बाढ़ के पानी के आसपास न जाने दें। थोड़ी सी लापरवाही गंभीर दुर्घटना का कारण बन सकती है।

जिलाधिकारी अनुपम शुक्ला ने जनपदवासियों से अपील की कि बाढ़ के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए पूरी सावधानी बरतें और प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें। किसी भी अफवाह पर ध्यान न दें। यदि किसी क्षेत्र में पानी तेजी से बढ़ रहा है तो तत्काल सुरक्षित स्थान पर चले जाएं तथा प्रशासन द्वारा उपलब्ध कराए जा रहे राहत एवं सुरक्षित आश्रय स्थलों का उपयोग करें। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन, पुलिस विभाग, एनडीआरएफ एवं संबंधित विभागों की टीमें पूरी तत्परता से कार्य कर रही हैं और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्यों की लगातार निगरानी की जा रही है। जिलाधिकारी ने सभी अधिकारियों को बाढ़ की स्थिति सामान्य होने तक अपने-अपने क्षेत्रों में पूरी सतर्कता बरतने, नियमित भ्रमण करने और किसी भी आकस्मिक स्थिति में तत्काल राहत एवं बचाव कार्य शुरू करने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि राहत एवं बचाव कार्यों में किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।

जर्जर विद्यालय भवनों पर चला प्रशासन का बुलडोजर, 87 भवन ध्वस्त

गाजीपुर में जर्जर विद्यालय भवनों पर चला प्रशासन का बुलडोजर, 87 भवन ध्वस्त

196 जर्जर भवन किए गए थे चिन्हित, शेष भवनों के ध्वस्तीकरण की कार्रवाई युद्धस्तर पर जारी

गाजीपुर। जनपद में जर्जर एवं असुरक्षित परिषदीय विद्यालय भवनों के खिलाफ प्रशासन ने कार्रवाई तेज कर दी है। जिलाधिकारी अनुपम शुक्ला के निर्देश पर चिन्हित जर्जर विद्यालय भवनों के ध्वस्तीकरण का कार्य तेजी से कराया जा रहा है। जनपद में कुल 196 जर्जर विद्यालय भवन चिन्हित किए गए हैं, जिनमें से 30 अगस्त 2026 तक 87 भवनों का ध्वस्तीकरण कार्य पूर्ण कराया जा चुका है। शेष जर्जर भवनों को भी जल्द से जल्द ध्वस्त कराने की कार्रवाई युद्धस्तर पर जारी है। प्रशासन का मुख्य उद्देश्य विद्यालय परिसरों को सुरक्षित बनाना और जर्जर भवनों के कारण छात्र-छात्राओं पर मंडरा रहे खतरे को समाप्त करना है। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी उपासना रानी वर्मा ने बताया कि ध्वस्तीकरण की कार्रवाई के दौरान छात्र-छात्राओं की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। कार्य के दौरान सभी आवश्यक सुरक्षा सावधानियां बरतने के साथ ही संबंधित अधिकारियों को मौके पर निरंतर निगरानी रखने और निर्धारित समयसीमा में कार्रवाई पूरी कराने के निर्देश दिए गए हैं। जर्जर भवनों के हटने से विद्यालय परिसरों को सुरक्षित बनाने के साथ-साथ कायाकल्प, मरम्मत एवं अवस्थापना विकास के कार्यों को भी गति मिलेगी। प्रशासन द्वारा विद्यालयों को सुरक्षित और बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराने की दिशा में इस कार्रवाई को महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

सीएम योगी के दरबार में गाजीपुर की आवाज, विजय मिश्र ने उठाए विकास के अहम मुद्दे

मुख्यमंत्री योगी से मिले पूर्व मंत्री विजय मिश्र, गाजीपुर के विकास से जुड़े मुद्दों पर हुई सार्थक चर्चा

गाजीपुर। भाजपा नेता एवं पूर्व मंत्री विजय मिश्र ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भेंट कर जनपद की विकास के आवश्यकताओं और जनहित से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। इस दौरान जिले में बेहतर जनसुविधाओं, चिकित्सा व्यवस्था को मजबूत करने, क्षतिग्रस्त सड़कों एवं नालियों के निर्माण तथा आवास से वंचित गरीब एवं पात्र परिवारों को मुख्यमंत्री आवास योजना का लाभ दिलाने सहित कई विषयों पर मुख्यमंत्री से सार्थक एवं सकारात्मक चर्चा हुई। श्री मिश्र ने मुख्यमंत्री का आशीर्वाद एवं मार्गदर्शन भी प्राप्त किया। भेंट के दौरान विजय मिश्र ने गाजीपुर ट्रामा सेंटर को पूर्ण क्षमता के साथ संचालित करने का मुद्दा प्रमुखता से रखा। इसके साथ ही नगर की क्षतिग्रस्त सड़कों के निर्माण, नालियों एवं फुटपाथों के सुधार तथा पात्र गरीब परिवारों को आवास उपलब्ध कराने की आवश्यकता से मुख्यमंत्री को अवगत कराया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जनपद से आवश्यक प्रस्ताव मंगाकर गाजीपुर की प्रमुख आवश्यकताओं को पूरा कराने का आश्वासन दिया।

ट्रामा सेंटर के उच्चीकरण का प्रस्ताव शासन को भेजा

पूर्व मंत्री विजय मिश्र ने बताया कि जिलाधिकारी अनुपम शुक्ला से हुई वार्ता के अनुसार गाजीपुर में निर्मित ट्रामा सेंटर को लेवल-3 से लेवल-2 में उच्चीकृत कर पूर्ण क्षमता से संचालित करने के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया है। ट्रामा सेंटर को आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं और आवश्यक संसाधनों से सुसज्जित किया जाएगा।उन्होंने कहा कि ट्रामा सेंटर के पूरी क्षमता से संचालित होने से गाजीपुर के साथ आसपास के जनपदों के गंभीर मरीजों को भी बेहतर और त्वरित उपचार मिल सकेगा। इससे गंभीर मरीजों को उपचार के लिए वाराणसी अथवा अन्य जनपदों में रेफर किए जाने की आवश्यकता में कमी आएगी।

आवास से वंचित पात्र परिवारों की तैयार होगी सूची

गरीब एवं पात्र परिवारों को आवास उपलब्ध कराने के संबंध में श्री मिश्र ने बताया कि जिलाधिकारी श्री अनुपम शुक्ला ने संबंधित अधिकारियों को ऐसे परिवारों की सूची तैयार करने के निर्देश दिए हैं, जो पात्र होने के बावजूद अभी तक आवास योजना के लाभ से वंचित रह गए हैं। पात्रता सूची तैयार होने के बाद नियमानुसार पात्र परिवारों को मुख्यमंत्री आवास योजना का लाभ दिलाकर आवास उपलब्ध कराने की दिशा में कार्रवाई की जाएगी। इससे आवास से वंचित गरीब परिवारों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।

सड़कों, नालियों और फुटपाथों के सुधार को लेकर भी पहल

विजय मिश्र ने बताया कि नगर की प्रमुख सड़कों, नालियों एवं फुटपाथों के निर्माण और सुधार के लिए संबंधित अधिकारियों को आगणन तैयार कराने के निर्देश दिए गए हैं। कुछ प्रस्ताव स्वीकृत भी हो चुके हैं, जिन पर बरसात समाप्त होने के बाद निर्माण कार्य शुरू कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि शेष सड़कों, नालियों एवं फुटपाथों के लिए भी आगणन तैयार कर शासन को भेजा जा चुका है। उद्देश्य है कि नगर की प्रमुख सड़कों और जनसुविधाओं से जुड़े आवश्यक कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र पूरा कराया जाए। पूर्व मंत्री विजय मिश्र ने कहा कि गाजीपुर का समग्र विकास, गरीब एवं जरूरतमंद परिवारों का कल्याण तथा नागरिकों को बेहतर मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना उनकी प्राथमिकता है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन और प्रदेश सरकार की जनकल्याणकारी नीतियों के माध्यम से जनपद के विकास को और गति देने के लिए निरंतर प्रभावी प्रयास किए जाएंगे।

मेजर ध्यानचंद की जयंती पर खेल दिवस का आयोजन, छात्राओं ने दिखाया उत्साह

गाजीपुर। राजकीय महिला स्नातकोत्तर महाविद्यालय, गाजीपुर में हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद की जयंती के उपलक्ष्य में खेल दिवस का आयोजन उत्साहपूर्वक किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. शंभू शरण प्रसाद ने दीप प्रज्ज्वलित कर एवं मेजर ध्यानचंद के चित्र पर माल्यार्पण कर किया।

इस अवसर पर मेजर ध्यानचंद के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए डॉ. रामनाथ केसरवानी ने कहा कि मेजर ध्यानचंद खेल जगत के ऐसे सितारे थे, जिन्होंने देश को गौरवान्वित किया और हॉकी को विश्व स्तर पर नई पहचान दिलाई। लगातार तीन ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतकर उन्होंने औपनिवेशिक भारत को विश्व पटल पर विशिष्ट पहचान दिलाई।

डॉ. शिवकुमार ने मेजर ध्यानचंद के जीवन के प्रेरणादायी प्रसंगों को छात्राओं के समक्ष रखा। उन्होंने कहा कि बचपन में मेजर ध्यानचंद की खेलों में विशेष रुचि नहीं थी, लेकिन सतत अभ्यास, लगन और अनुशासन के बल पर उन्होंने खेल जगत में अद्वितीय प्रतिमान स्थापित किया। सेना में नौकरी के दौरान भी वह रात में समय निकालकर हॉकी का अभ्यास करते थे। उन्होंने कहा कि मेजर ध्यानचंद का जीवन यह संदेश देता है कि निरंतर परिश्रम और दृढ़ संकल्प से असंभव लक्ष्य को भी हासिल किया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि खेल को जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाना चाहिए। खेल व्यक्ति के शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य के साथ-साथ सामाजिक, संज्ञानात्मक और भावनात्मक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। खेल आत्मनियंत्रण, अनुशासन और धैर्य की भावना विकसित करता है। विद्यार्थियों को अपने टाइम टेबल में पढ़ाई और अन्य गतिविधियों के साथ खेल के लिए भी पर्याप्त समय निर्धारित करना चाहिए।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे प्राचार्य एवं शारीरिक शिक्षा विभाग के प्रभारी डॉ. शंभू शरण प्रसाद ने कहा कि मेजर ध्यानचंद को उनके जीवनकाल में वह सम्मान और पुरस्कार नहीं मिला, जिसके वे वास्तविक हकदार थे। हालांकि, यह गौरव की बात है कि उनके नाम पर प्रत्येक वर्ष मेजर ध्यानचंद पुरस्कार प्रदान किया जाता है।

उन्होंने अपने संस्मरण साझा करते हुए बताया कि झांसी में रहने के दौरान उन्हें मेजर ध्यानचंद के परिवार के लोगों से मिलने का अवसर मिला। उन्होंने कहा कि महानता के शिखर पर पहुंचने के बाद भी मेजर ध्यानचंद अहंकार से दूर और पूरी तरह जमीन से जुड़े रहे। अपनी उदारता के कारण वे झांसी में ‘दद्दा’ के नाम से लोकप्रिय थे। गली-मोहल्लों में आयोजित होने वाले खेल आयोजनों को प्रोत्साहित करने के लिए वे सहर्ष अपनी अनुमति दिया करते थे।

डॉ. प्रसाद ने कहा कि खेल मनुष्य को अनुशासित, धैर्यवान और आत्मविश्वासी बनाता है, जिसका जीवंत उदाहरण मेजर ध्यानचंद की जीवन यात्रा है। कार्यक्रम के दौरान खेल विभाग की छात्राओं ने समूह प्रदर्शन के माध्यम से योग मुद्राओं के विभिन्न रूपों की मनोहारी एवं आकर्षक प्रस्तुति दी। वैचारिक सत्र का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ। कार्यक्रम का संचालन एवं धन्यवाद ज्ञापन डॉ. निरंजन कुमार यादव ने किया। द्वितीय सत्र में कैरम, शतरंज सहित विभिन्न इनडोर खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया, जिसमें छात्राओं ने उत्साहपूर्वक प्रतिभाग किया।