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सपाइयों ने भाजपा सरकार को सत्ता से बेदखल करने का लिया संकल्प

ग़ाज़ीपुर।सोमवार को समाजवादी पार्टी के तत्वाधान में जिलाध्यक्ष गोपाल यादव की अध्यक्षता में पार्टी कार्यालय समता भवन में सम्पूर्ण क्रान्ति के पुरोधा लोक नायक जयप्रकाश नारायण जी की जयंती पर माल्यार्पण कार्यक्रम एवं विचार गोष्ठी आयोजित हुई ।गोष्ठी आरंभ होने के पूर्व पार्टी के सभी कार्यकर्ताओं ने उनके चित्र पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए लोकतंत्र की रक्षा करने और तानाशाही भाजपा सरकार को सत्ता से बेदखल करने का संकल्प लिया ।सर्वप्रथम सांस्कृतिक प्रकोष्ठ के कार्यकर्ता शिवमुनि यादव ने अपने समाजवादी गीत के माध्यम से लोकनायक जयप्रकाश जी को श्रद्धांजलि अर्पित किया।

इस गोष्ठी में अपने विचार व्यक्त करते हुए जिलाध्यक्ष गोपाल यादव ने कहा कि जय प्रकाश जी एक स्वतंत्रता सेनानी,समाज सेवी राजनीतिक संत और आधुनिक भारत के अग्रणी विचारक थे । उन्होंने कहा कि जय प्रकाश के राजनीतिक विचार कल तो प्रासंगिक थे ही बल्कि आज के राजनीतिक हालात में जयप्रकाश जी के विचार और भी ज्यादा प्रासंगिक हो गए हैं । आपात काल की तरह आज जब वर्तमान हुकूमत से इत्तेफाक न रखने वाले विरोधी नेताओं, पत्रकारों और कलाकारों के साथ बदले की भावना से उन्हें जेलों में ठूंसने का काम किया जा रहा है ऐसे बुरे वक्त में जयप्रकाश जी को पूरा मुल्क बहुत ही शिद्दत के साथ याद कर रहा है। उन्होंने कहा कि लोकनायक जयप्रकाश जी हमेशा व्यवस्था परिवर्तन की लड़ाई लड़ते रहे उन्हें सत्ता से कभी मोह नहीं रहा । वह हमेशा जुल्म और जालिम से लड़ने में विश्वास करते रहे। हमें उनके आदर्शों को अपने जीवन में आत्मसात कर उनको जीवंत रखने की जरूरत है। हम सबको उनसे प्रेरणा लेकर वर्तमान तानाशाही हुकूमत के खिलाफ संघर्ष करने की जरूरत है।

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को लखनऊ स्थित जयप्रकाश नारायण इंटरनेशनल सेंटर स्थित जयप्रकाश की प्रतिमा पर माल्यार्पण करने से रोकने‌ पर भाजपा सरकार के इस हिटलरशाही कदम की निंदा करते हुए उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार मदान्ध हो गई है। आज इस सरकार के कार्यकाल में महापुरुषों को श्रृद्धासुमन अर्पित करना भी मुश्किल हो गया है। अखिलेश जी को रोकने के लिए बैरीकेडिंग करना और लोहे की चादर लगाना इमरजेंसी और ब्रिटानी हुकूमत की याद दिला रहा है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार को जयप्रकाश जैसे महापुरुषों के सम्मान का भी ख्याल नहीं है। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी जयप्रकाश जी का अपमान कत्तई बर्दाश्त नहीं करेगी । यह अपमान की कीमत भाजपा सरकार को चुकानी पड़ेगी ।

प्रदेश कार्यसमिति के आमंत्रित सदस्य रामधारी यादव ने श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि जय प्रकाश जी को लगभग 30वर्षों तक एक छत्र शासन करने वाली और निरंकुश होती जा रही कांग्रेस पार्टी की सरकार को समाप्त कर जनता पार्टी की सरकार बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए याद किया जाता है । उन्होंने जय प्रकाश जी के राजनीतिक विचारों को साझा करते हुए कहा कि जय प्रकाश चाहते थे कि यदि हम सही अर्थों में जनता का राज स्थापित करना चाहते हैं तो इसके लिए हमें ,सम्पूर्ण क्रान्ति करके सामाजिक परिवर्तन करना पड़ेगा । जनता को राजनैतिक, सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक, आध्यात्मिक, बौद्धिक, शैक्षणिक स्वतंत्रता दिलानी होगी । हमें गरीबी, बेरोजगारी, शोषण को जड़ से समाप्त करना होगा । जब जनता खुद अपने कामों में सीधे भागीदार बनने लगेगी तभी लोकशाही को सच्चे अर्थों में जनता का राज कहा जा सकेगा । उनका सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक विचार सम्पूर्ण क्रान्ति कि विचार था ।वह सम्पूर्ण क्रान्ति करके शोषण और विषमता को जन्म देने वाली वर्तमान व्यवस्था को खत्म करके एक नये समाज की स्थापना करना चाहते थे ।

इस कार्यक्रम में मुख्य रूप से फेंकूं यादव गांधी, रविन्द्र प्रताप यादव,मो.जुम्मन, डॉ सीमा यादव, रीता विश्वकर्मा,सदानंद यादव,विभा पाल, बलिराम पटेल, निजामुद्दीन खां, गोवर्धन यादव, अमित ठाकुर,अजय यादव, मारकन्डेय यादव, आत्मा यादव,राजेश कुमार यादव,भरत यादव,कंचन रावत,विजय यादव रीना यादव,प्रभु नाथ राम, भानु यादव,दारा यादव ,सतिराम यादव, बैजू यादव,संतोष यादव, अनुराग यादव , विन्ध्याचल यादव, अरविंद यादव, शिवमुनि यादव, संतोष यादव,सुजीत कुमार , पंकज यादव आदि उपस्थित थे। इस गोष्ठी की अध्यक्षता जिलाध्यक्ष गोपाल यादव एवं संचालन जिला सचिव एवं मीडिया प्रभारी अरुण कुमार श्रीवास्तव ने किया ।

चित्र बनाकर कला गुरु डॉ. राजकुमार सिंह की मनाई गई जयंती

चित्र बनाकर कला गुरु डॉ. राजकुमार सिंह की मनाई गई जयंती

ग़ाज़ीपुर।आज शिष्यों ने गाज़ीपुर के गंगा जमुनी तहजीब को चरितार्थ कर दिया है। सम्भावना कला मंच के संस्थापक व प्रख्यात कला गुरु डॉ. राजकुमार सिंह (स्मृति शेष) के जन्म दिवस पर सम्भावना कला मंच,के तत्वाधान में कला-सूत्रम आर्ट गैलरी द्वारा “कला-लोक” एकदिवसीय चित्रकला कार्यशाला का आयोजन युवराजपुर में किया गया। उनके शिष्यों ने कैनवास पर अपनी मनोभावों को चित्र के माध्यम से उतार कर अपने कला गुरु का जन्मदिन मनाया। इस कार्यशाला का अनौपचारिक उद्धघाटन प्रख्यात वक्ता अमरनाथ तिवारी ‘अमर’ ने कला गुरु डॉ. राजकुमार सिंह के छविचित्र पर पुष्प अर्पित व दिप प्रज्वलित कर किया। इस कार्यशाला के आयोजक कला-सूत्रम आर्ट गैलरी के संयोजक सुधीर सिंह ने मुख्य अतिथि को अंगवस्त्रम व पुष्पगुच्छ प्रदान कर उनका स्वागत सम्मान किया।

इस कार्यशाला में डॉ. सूर्यनाथ पाण्डेय, सीमा सिंह, पंकज शर्मा, सुधीर सिंह, विनोद राव, डॉ. राजीव कुमार गुप्ता, सपना सिंह, आशीष गुप्ता, कृष्ण पासवान, चंदन यादव, शिवंशी शर्मा, अंजली, मनीष कुशवाहा, सत्यम मौर्य, रीति सिंह, उत्कर्ष सिंह, अंकिता, हर्ष शर्मा, सतीश यादव आदि प्रतिभागी कलाकार रहे। आयोजक सुधीर जी ने बताया कि यह कार्यक्रम पूर्वरूपित है। इस “कला-लोक” कार्यशाला का आयोजन बीते 1 जनवरी 2023 को ही होना सुनिश्चित हुआ था, जो कि कला गुरु डॉ. राजकुमार सिंह की जयंती पर बिल्कुल नहीं होना था। बल्कि यह चित्रकला कार्यशाला का आयोजन उनके लिए ही, उनके साथ ही करने का तय किया गया था। पर अचानक सब कुछ बदल गया। वह काफी दिनों से अस्वस्थ चल रहे थे। अस्वस्थ होने के बावजूद भी वो हर वक़्त अपने छात्रों और कला के ही बारे में सोचते रहते, रंग, ब्रश, चित्र, कोई आयोजन व कला के ही बारे में बातें करते पर अस्वस्थ होने की वजह से वह खुद अपनी चित्रकारी से दिन-प्रतिदिन दूर होते चले गए, जैसे जैसे दिन बीते वैसे वैसे वह अपनी सृजनता को बहुत याद करने लगे थे।

उनको बार-बार चित्रकारी करने का मन करता था। आए दिन वह रंग, ब्रश मंगवाने की जिद्द करने लगे थे। ऐसा लगता था कि चित्रकारी के बिना वह ज्यादा अस्वस्थ होते जा रहे हैं, जो बहुत चिंता का विषय था। उनके साथ हर समय उनकी पत्नी सीमा सिंह रहती थीं। मेरी बात इनके पत्नी से हुई और मैंने उनसे एक कार्यशाला का आयोजन करने के लिए कहा, उन्होंने उनके शिष्य राजीव से कार्यशाला के लिए बात की तो वो तुरन्त तैयार हो गए और 1 जनवरी को अपने गुरु जी के साथ उनके गाँव पर ही करने का तय हुआ पर होनी को ऐसा मंजूर नहीं था। कला गुरु डॉ. राजकुमार सिंह की तबियत अचानक ज्यादा बिगड़ गई और उन्हें उस कार्यशाला के एक दिन पूर्व ही बनारस हॉस्पिटल में एडमिट होना पड़ा जिससे यह कार्यशाला सम्पन्न नहीं हो पाया। जो अब उनके नहीं रहने पर उनके जन्मदिन पर आयोजित किया गया है। अमरनाथ तिवारी ‘अमर’ ने बताया कि कोई भी साहित्यकार और चित्रकार कभी मरता नहीं, वो अपने कृतियों के साथ हमेशा जीवित रहता है। इस कार्यशाला के सभी प्रतिभागी कलाकारों को मुख्य अतिथि व अन्य अतिथियों के द्वारा स्मृति चिन्ह व प्रमाणपत्र देकर सम्मानित किया गया।


इस कार्यशाला में प्रभाकर त्रिपाठी, सुजीत कुमार, जनार्दन यादव, डॉ. शम्मी सिंह, शोभा विश्वकर्मा, राजेश कुमार, पुनीत सिंह, प्रभात सिंह, कान्हा सिंह, ओमप्रकाश सिंह आदि उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन व धन्यवाद ज्ञापन सम्भावना कला मंच के सह-संयोजक डॉ. राजीव गुप्ता ने किया।

धनुष मुकुट पूजन के साथ शुरू हुआ रामलीला

धनुष मुकुट पूजन के साथ हुआ रामलीला का शुरूआत


गाजीपुर।अति प्राचीन रामलीला कमेटी हरिशंकरी के तत्वाधान में हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी 10 अक्टूबर मंगलवार को शाम 7 बजे से धनुष मुकुट पूजन के साथ रामलीला का आयोजन शुरूआत किया गया। धनुष मुकुट का पूजन मुख्य अतिथि सदर एसडीएम प्रखर उत्तम व क्षेत्राधिकारी गौरव कुमार द्वारा धनुष मुकुट का विधि विधान के साथ पूजन आरती किया गया। इसके बाद नगर पालिका अध्यक्ष सरिता अग्रवाल, पूर्व अध्यक्ष विनोद अग्रवाल, भाजपा के संतोष कुमार तथा कमेटी के मंत्री ओमप्रकाश तिवारी, संयुक्त मंत्री लक्ष्मी नारायण उपमंत्री लवकुमार त्रिवेदी प्रबन्धक, वीरेश राम वर्मा, उपप्रबन्धक मयंक तिवारी, कोषाध्यक्ष रोहित कुमार अग्रवाल, अशोक अग्रवाल ने पूजन आरती किया।

इसके बाद वंदे वाणी विनायकौ आदर्श श्री रामलीला मण्डल के द्वारा नारद मोह व श्रीराम जन्म लीला का मंचन किया गया। बताते हैं कि एक समय देवर्षि नारद एक गुफा के अंदर भगवान के तपस्या लीन हो गये। जब इन्द्र को पता चला कि देवर्षि नारद हमारे राज सिंहासन को पाने के लिए तपस्या कर रहे हेै। अतः वह डरकर अपने मित्र कामदेव को बुलवाते है तथा उन्हें आदेश देते हैं कि आप अपसराओं के साथ नारद जी का तपस्या भंग करने तपस्थली पर जाये, जिससे हमारा राजसिंहासन बच सके, देवराज इन्द्र की आज्ञा का पालन करते हुए कामदेव नारद ऋषि के तपस्या को भंग करने के लिए उनके पास पहुँच गये तथा काफी प्रयत्न किया बावजूद इसके नारद जी पर उनका कोई असर नही पड़ा। अन्त में हारकर नारद जी चरणों में गिरकर दण्डवत प्रणाम करके वापस देवराज इन्द्र के पास चले जाते है, अब नारद जी को यह आभास होता है कि मैंने कामदेव पर विजय प्राप्त कर लिया। इस बात का उन्हें मोह पैदा हो गया।

वे अहंकार में चूर हो करके ब्रम्हा और महेश के पास पहुँचकर कामदेव पर विजय प्राप्त करने की सूचना दोनो देवताओं को देते है। उनके बात को सुनकर ब्रम्हा और शिव जी ने कहा देवर्षि नारद इस बात को तो आपने हमसे कहा लेकिन विष्णु जी से इस बात को मत कहिएगा, बावजूद इसकेे देवर्षि नारद विष्णु जी के पास जाकर कामदेव पर विजय प्राप्त करनेे की सारी बाते बता देते है। भगवान विष्णु ने देवर्षि नारद जी से सारी बातों को सुनकर अपने भक्तो की रक्षा के लिए एक उपाय करते है वह उपाय यह है कि अपने माया से माया पूरी नगर का निर्माण किया, वह नगर राजा शीलनिधि के अधीनस्थ था राजा शिलनिधि अपनी पुत्री विश्व मोहिनी का स्वयम्बर रचे थे, जिसमें सभी राजाओं के साथ नारद जी भी पहुँचते है नारद जी को देखकर राजा शिलनिधि देवर्षि नारद का आदर सम्मान करते है तथा अपनी पुत्री के भाग्य के बारे में नारद जी से पूछते है देवर्षि नारद विश्व मोहिनी केे हाथ को देखते ही मोहित हो गये, वे विश्व मोहिनी से स्वयम्बर रचाना चाहते थे।

इस बात को लेकर देवर्षि नारद भगवान विष्णु के पास जाकर कहते है कि हे प्रभु आपन रूप देहू प्रभु मोहि आन भांति नहिं पावौ ओहि। नारद जी की बात सुनकर भगवान विष्णु ने उन्हें बंदर का रूप देकर अपने यहाँ से उन्हें विदा करते है, नारद जी बंदर का रूप लेकर पुनः स्वयम्बर में जातेे है तथा राजाओं के बीच में बैठ जाते है जहाँ विश्व मोहिनी वरमाला लिए स्वयम्बर में विचरण कर रही थी। इसी बीच भगवान विष्णु स्वयम्बर में आकर विश्व मोहिनी से वरमाला धारण कर उसे अपने साथ विष्णु लोक के लिए लेकर चले जाते है। उधर शिवगणों द्वारा नारद जी के रूप को देख्रकर शिवगणों द्वारा उनकी हंसी उड़ाते हुए कहा कि आप अपना मुँह शीशे में तो देख लीजिए जब उन्होंने शीशे में मुँह देखा तो बंदर का रूप दिखायी दिया, वे क्रोधित होकर भगवान विष्णु के पास जाकर श्राप दे देते है कि हे विष्णु जिस प्रकार आपने मुझसे छल किया है मैं आपको श्राप देता हूँ कि जिस विश्व मोहिनी के लिए मैं तड़प रहा हूँ एक दिन वो समय आयेगा कि आप त्रेता युग में श्रीराम के रूप मेें अवतार लेंगे और यही विश्व मोहिनी सीता के रूप में अवतार लेगी और रावण द्वारा उसका हरण होगा, उस समय यही बंदर भालू आपकी मदद करेंगे इस प्रकार का श्राप देे करके वहाँ से चले जाते है जब नारद जी का मोह भंग होता है तो पुनः भगवान विष्णु के पास जा करकेे उनके चरणों में गिर करकेे अपने दिये हुए श्राप को वापस लेना चाहते थे, नारद जी की बात सुन करके भगवान विष्णु ने कहा हे देवर्षि नारद आपने मुझे श्राप दिया कहां मैंने तो जान बूझकर ऐसा काम किया कि आप मुझे श्राप दे दे। अब मैं आपको एक युक्ति बताता हू कि आप पर्वत पर जाकर भगवान शिव की अराधना करे, इतना सुनने के बाद देवर्षि नारद भगवान विष्णु के आज्ञा को स्वीकार कर तपस्या के लिए विश्व लोक से चले जाते है। इस प्रकार नारद जी का मोह भंग होता है।


उधर, राजा दशरथ पुत्र के लिए अपने राजदरबार में बैठे थे कि उनके कुल गुरू महर्षि वशिष्ठ उनके राजदरबार में पहुँचते है राजा को दुःखी देखकर सारी बाते पूछते है दशरथ जी ने कहा कि गुरूदेव क्या मेरे बाद सूर्यवंश का दीप बुझ जायेगा, इतना सुनने के बाद महर्षि वशिष्ठ ने राजा दशरथ कोे आश्वासन देते है कि हे दशरथ आप एक पुत्र के लिए परेशान है और रो रहे है मैं तो देख रहा हूँ कि आपके घर में चार पुत्र अवतार लेंगे। आप महर्षि श्रृंगऋषि को बुलाकर पुत्र कामेष्टी यज्ञ कि तैयारी करे। इतना सुनने के बाद राजा दशरथ नंगे पांव श्रृंगीऋषि के पास जा करके अनुनय विनय करतेे है, उनके विनय को सुनकर श्रृंगऋषि ने कहा कि हे राजन आप अपने राजदरबार में जाकर यज्ञ की तैयारी कराइये थोड़ी दिनों बाद श्रृंगऋषि महाराज दशरथ के पास जाकर पुत्र कामेष्टी यज्ञ विधि विधान से करवाते है। यज्ञ से प्रसन्न हो करकेे अग्निदेव राजा दशरथ केे खीर भरा कटोर दे करकेे कहा कि हे राजन आप इस खीर कोे तीनों रानियों में वितरण कर दीजियेगा, अग्नि देव की आज्ञा पाकर महाराज दशरथ रानियों के कक्ष में पहुँचकर अग्निदेव द्वारा खीर को तीनों रानियों में बांट दिया। इसके बाद तीनों रानियों ने गर्भधारण कर लिया। खीर के प्रभाव से कौशल्या ने श्रीराम को जन्म दिया उसकेे बाद कैकेयी ने भरत को जन्म दिया और सुमित्रा ने लक्ष्मण और शत्रुघ्न को जन्म दिया। सारी अयोध्या ने खुशियोें का लहर दौड़ गया, उधर भगवान शंकर कैलाश पर्वत पर ध्यान मग्न थे। उन्होंने अंतरधान होकर देखा कि हमारे अराध्य देव श्रीराम ने महाराज दशरथ केे घर पर अवतार ले लिया है वे अपने आसन से उठ करके दोनो हाथ जोडकर स्तुति करते है कि भय प्रकट कृपाला दीन दयाला कौशल्या हितकारी हर्षित महतारी मुनिमन हारी अद्भुत रूप विचारी। उधर अयोध्यावासियों द्वारा सोहर बधइया आदि मांगलिक गीत गाती है। इस लीला को देखकर दर्शक उच्च स्वर में जय श्री राम व हर हर महादेव के नारों से गूंजाय मान कर दिया।


इस अवसर पर कमेटी के उपाध्यक्ष विनय कुमार सिंह, उपाध्यक्ष डा0 गोपाल जी पाण्डेय पूर्व प्रवक्ता, मंत्री ओमप्रकाश तिवारी उर्फ बच्चा, संयुक्त मंत्री लक्ष्मीनारायन, उपमंत्री पण्डित लवकुमार त्रिवेदी उर्फ बड़े महाराज, प्रबन्धक दिनेश राम वर्मा, उपप्रबन्धक मयंक तिवारी, कोषाध्यक्ष रोहित अग्रवाल, अजय कुमार पाठक, ओम नारायण सैनी, अनुज अग्रवाल, सरदार चरनजीत सिंह, राजेश प्रसाद, अशोक अग्रवाल, सुधीर अग्रवाल, पण्डित कृष्ण बिहारी त्रिवेदी, रामसिंह यादव, विशम्भर गुप्ता आदि रहे।

छात्र नेताओं ने की यह मांग

ग़ाज़ीपुर।मंगलवार को पीजी कॉलेज में छात्रसंघ चुनाव कराने को लेकर छात्रों कि विगत् दिनों छात्र संघ चुनाव तिथि घोषित करने की मांग को लेकर प्राचार्य द्वारा मिटिंग बुलाया गया था। जिसमें पूर्व छात्रसंघ पदाधिकारियों समेत चुनाव लडने के इच्छुक प्रत्याशी इस मिटिंग में शामिल हुए। प्राचार्य द्वारा छात्रों कि मांग पर जिलाधिकारी को एक नवंबर से सात नवम्बर के बीच छात्रसंघ चुनाव कराने की बात कही है बशर्ते यदि विश्वविद्यालय द्वारा कोई परीक्षा इस तिथि के अंदर नहीं हुई और प्रशासन कि अनुमति मिली तो चुनाव सम्पन्न करा लिए जाएंगे। बता दें कि प्राचार्य द्वारा स्वत: कहा गया है कि लिंगदोह समिति की सिफारिश के अनुसार वर्तमान सत्र में महाविद्यालय में चुनाव कराए जा सकते है ।
पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष सम्पूर्णानंद यादव ने कहा कि महाविद्यालय में प्रवेश प्रक्रिया पूर्ण हो गई है फिर भी महाविद्यालय प्रशासन चुनाव द्वारा देरी किया जा रहा है। जिसे छात्र बर्दाश्त नहीं करेंगे।पूर्व छात्रसंघ उपाध्यक्ष दीपक उपाध्याय ने कहा कि सरकार द्वारा कोई लिखित नोटिस नहीं जारी कि गई है कि चुनाव नहीं कराए जाए। फिर विश्वविद्यालय व महाविद्यालय प्रशासन द्वारा क्यू जानबूझकर चुनाव को रोके हुए हैं यदि इस बार महाविद्यालय प्रशासन द्वारा तय तिथि पर छात्रसंघ चुनाव नहीं हुआ तो छात्र आमरण अनशन पर बैठने को बाध्य होंगे जिसकी सम्पूर्ण जिम्मेदारी महाविद्यालय प्रशासन की होंगी। पूर्व अध्यक्ष अनुज कुमार ने कहा कि जिला प्रशासन द्वारा यदि महाविद्यालय प्रशासन को चुनाव कराने कि अनुमति नहीं देता है तो छात्र जिला बंद करने को बाध्य होंगे। वही पूर्व महामंत्री प्रवीण विश्वकर्मा ने कहा कि छात्रसंघ चुनाव न होने से छात्रों को अनेकों समस्या का सामना करना पड़ रहा है लेकिन छात्रों के प्रतिनिधित्व करने वाला कोई नहीं है। सभी छात्रों ने एक स्वर में छात्रसंघ चुनाव कि तिथि घोषित करने पर प्राचार्य को धन्यवाद ज्ञापित करने के साथ ही चुनाव तय तिथि पर कराये जाने की जिला प्रशासन से मांग कि है।
बैठक में शामिल निखिल राज भारती, ईश्वर चन्द्र यादव,धीरज सिंह,प्रिस प्रजापति, धन्नजय कुशवाहा, अमृतांश बिन्द, निलेश बिन्द, कृष्णा यादव, राहुल कुमार,अभिषेक वर्मा,बाबू लाल गौतम, अभिजीत कुमार, रणविजय प्रताप,अनुज यादव, कृष्णा नन्द शर्मा, विकास कुमार,प्रशान्त कुमार,संजय मौर्य आदि छात्र नेता मौजूद थे।

राजकीय महिला महाविद्यालय में चार्ट-पोस्टर प्रतियोगिता हुई आयोजित

ग़ाज़ीपुर।राजकीय महिला स्नातकोत्तर महाविद्यालय गाज़ीपुर विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के पूर्व सप्ताह में मनोविज्ञान परिषद की ओर से मंगलवार को चार्ट-पोस्टर प्रतियोगिता आयोजित हुई। इस बार विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस की थीम ‘सभी व्यक्तियों के लिए मानसिक स्वास्थ्य एक मानवाधिकार’ था। अर्थात मानवाधिकारों की तरह मानसिक स्वास्थ्य सुविधाएं सबके लिए सुलभ होनी चाहिए तथा सरकार एवं समाज का दायित्व सबका मानसिक स्वास्थ्य बेहतर करना होना चाहिए। इस बार ‘दुश्चिंता’ बीमारी के विभिन्न आयामों पर अधिक बल दिया गया हैं।

वर्तमान में दुश्चिंता विकार कई रूपों में जैसे प्रत्येक घटना को नियंत्रण करने की इच्छा, अपने और दूसरों से अत्यधिक अपेक्षाएं अत्यधिक सोचना, अत्यधिक योजनाएं बनाना आदि कई रूपों में विद्यार्थियों, युवाओं, वयस्कों, वृद्धो आदमी कई रूपों में हमेशा पायी जाती है। इसीलिए वर्तमान युग को ‘चिंता का युग’ भी कहा जाता है। यह चिंता विकार लंबे समय तक बने रहने पर मानसिक स्वास्थ्य को बुरी तरह प्रभावित करता है।


40 से अधिक छात्राओं ने दुश्चिंता, विषाद, नकारात्मक मानसिक स्वास्थ्य एवं घटनाओं से संबंधित आकर्षक और रंगारंग चित्र बनाएं। इन चित्रों का मूल्यांकन डॉ दिवाकर मिश्रा, डॉ शंभू शरण प्रसाद एवं नेहा जी द्वारा किया गया। चार्ट प्रतियोगिता में रितु यादव प्रथम, सबीना द्वितीय, महक तृतीय एवं मालती यादव तथा मंजूरी खातून प्रसंशित स्थान पर रही। जबकि पोस्टर प्रतियोगिता में दीक्षा सिंह प्रथम, बुशरा द्वितीय, मानसी अग्रवाल तृतीय तथा सोनम कुमारी एवं शिवानी वर्मा प्रशंसित स्थान पर रहीं। मनोविज्ञान विभाग में आयोजित इन चार्ट पोस्टरो का अग्रसेन पीजी कॉलेज, वाराणसी के मनोविज्ञान विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर ओम प्रकाश चौधरी, छपरा विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रोफेसर हरिकेश सिंह, महाविद्यालय की प्राचार्य प्रोफेसर सविता भारद्वाज एवं महाविद्यालय के प्राध्यापकगण एवं छात्राओं ने अवलोकन किया और शिक्षकों से संवाद किया। कार्यक्रम का संयोजन मनोविज्ञान परिषद के प्रभारी डॉ शिवकुमार द्वारा किया गया।

डीएम ने की बैठक,दिया निर्देश

गाजीपुर।निराश्रित गोवंश आश्रय स्थल की स्थापना, क्रियान्वयन तथा संचालन प्रबन्धन हेतु जिला स्तरीय समिति की समीक्षा बैठक जिलाधिकारी आर्यका अखौरी की अध्यक्षता में मंगलवार को रायफल क्लब सभागार में संपन्न हुआ। जिलाधिकारी ने उपस्थित पशु चिकित्सकों एवं खण्ड विकास अधिकारियों से अब-तक कितने पशुओ को चिन्हित कर पशुपालकों को सुपुर्द किए गए हैं एवं कितने पशुओ को आश्रय स्थल मे रखा गया है एवं कितने गोवंश आश्रय स्थल बनाए गए,की जानकारी ली। उन्होंने पशु चिकित्सा अधिकारियों को निर्देश दिया कि सहभागिता योजना में जरूरतमंद परिवारो में दुधारू पशुओ की सुपुर्दगी की जाए तथा उसका समय से भुगतान भी किया जाए।
बैठक में मुख्य पशु चकित्साधिकारी ने बताया कि अब तक 57 स्थायी/अस्थायी गोवंश आश्रय स्थल बनाए गए है। जिसमें कुल 8130 पशु संरक्षित किए गए है तथा 960 पशुओ का सहभागिता योजना में जरूरतमंद परिवारो को दिया गया है।
जिलाधिकारी ने पशु चिकित्साधिकारियों एंव खण्ड विकास अधिकारियों को निर्देश दिया कि गो-आश्रय स्थलो पर पशुओ की बराबर वेरिफिकेशन किया जाए। जहां-जहा चारागार की जमीने चिन्हित की गई है वहां पशुओ के लिए हरे चारे उगाए जाए। सभी पशु चिकित्साधिकारी एवं खण्ड विकास अधिकारी एक अभियान चलाकर छुट्टा पशुओ का संरक्षित करे किसी भी दशा मे कोई भी पशु सड़को या रास्तो में विचरण करते न पाए जाए अन्यथा आप इसके स्वयं जिम्मेदार होगे।
यदि किसी पशु के मृत्यु के बाद भी उसका भुगतान किया जाता है तो सम्बन्धित के विरूद्ध कार्यवाही तय है। उन्होने निर्देश दिया कि सहभागिता योजना के तहत पशुपालको मे दिके जाने वाले भुगतान समय से किया जाए। इसमे लापरवाही क्षम्य नही होगी। पशुओ को हरा चारा, पानी समय से टीकाकरण किया जाय साथ ही गोआश्रय स्थलो पर पानी, साफ-सफाई की व्यवस्था रखी जाए। बैठक मे मुख्य विकास अधिकारी संतोष कुमार वैश्य, परियोजना निदेशक, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी,समस्त खण्ड विकास अधिकारी, समस्त अधिशासी अधिकारी नगर पालिका परिषद/पंचायत, एवं अन्य सम्बन्धित जनपद स्तरीय अधिकारी उपस्थित थे।

हर ब्लॉक व टीबी यूनिट से स्वास्थ्यकर्मी व एडीओ पंचायत को बनाया गया मास्टर ट्रेनर

टीबी मुक्त पंचायत व फैमिली केयर गिवर मॉड्यूल पर दिया प्रशिक्षण

हर ब्लॉक व टीबी यूनिट से स्वास्थ्यकर्मी व एडीओ पंचायत को बनाया गया मास्टर ट्रेनर

  • अब मास्टर ट्रेनर्स ग्राम प्रधान, सचिव व सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी को करेंगे प्रशिक्षित
  • जनपद में मौजूद हर क्षय रोगी के लिए तैयार होगा एक फैमिली केयर गिवर

गाज़ीपुर।प्रधानमंत्री के आह्वान पर वर्ष 2025 तक टीबी मुक्त भारत के लिए जिला क्षय रोग विभाग और पंचायती राज विभाग मिलकर काम कर रहे हैं, जिससे टीबी मुक्त पंचायत व टीबी फैमिली केयर गिवर मॉड्यूल को शत-प्रतिशत सफल बनाया जा सके। इसके लिए मास्टर ट्रेनर्स का दो दिवसीय प्रशिक्षण मंगलवार को मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय सभागार में संपन्न हुआ। जिला पंचायती राज विभाग से ब्लॉक वार एक -एक प्रतिनिधि के अलावा जिला पब्लिक प्राइवेट मिक्स समन्वयक (डीपीपीएमसी), ब्लॉक कार्यक्रम प्रबन्धक (बीपीएम), ब्लॉक कम्युनिटी प्रोसेस मैनेजर (बीसीपीएम), क्षय रोग विभाग से वरिष्ठ उपचार पर्यवेक्षक (एसटीएस), वरिष्ठ प्रयोगशाला पर्यवेक्षक (एसटीएलएस), टीबीएचवी को जिला कार्यक्रम समन्वयक डॉ मिथलेश कुमार और डब्ल्यूएचओ के डॉ वीजे विनोद ने प्रशिक्षण दिया। सभी को प्रमाण पत्र भी प्रदान किये गये।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ देश दीपक पाल ने प्रशिक्षण सत्र का शुभारंभ करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री के टीबी मुक्त भारत वर्ष 2025 के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए जनपद प्रतिबद्ध है। ट्रेनिंग ले चुके मास्टर ट्रेनर्स अब टीबी मुक्त पंचायत अभियान का लक्ष्य हासिल करने के लिए ग्राम प्रधान और सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों (सीएचओ) को प्रशिक्षण देंगे, साथ ही हर क्षय रोगी के लिए एक फैमिली केयर गिवर भी तैयार करेंगे। इसके साथ पंचायत समिति, जन आरोग्य समिति और ग्राम स्वास्थ्य स्वच्छता एवं पोषण समिति (वीएचएसएनसी) का भी संवेदीकरण करना है। उन्होंने कहा कि इससे सामुदायिक स्तर पर टीबी के प्रति जागरूकता बढ़ेगी और क्षय रोगियों को सामाजिक स्तर पर मिलने वाले तिरस्कार से मुक्ति के साथ ही बेहतर स्वास्थ्य व्यवहार मिलने में मदद मिलेगी। शासन से प्राप्त निर्देशों के मुताबिक क्षय रोगी के परिवार या करीबी लोगों में से ऐसे व्यक्ति की पहचान की जाएगी जो उसे उपचार प्राप्त करने में मदद कर सके, उसकी देखभाल कर सके, रोगी के लिए जरूरी पोषण का ध्यान रख सके। ऐसे व्यक्ति को फैमिली केयर गिवर (प्राथमिक देखभाल कर्ता) कहा जाएगा।
जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ मनोज कुमार ने बताया कि फैमिली केयर गिवर को क्षय रोगी के साथ हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर जाना होगा, जहां सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (सीएचओ) उसे क्षय रोग के उपचार के बारे में विस्तार से बताएंगे। साथ ही इस बात का भी प्रशिक्षण देंगे कि रोगी की दवाओं और उनके असर का उसे किस प्रकार से ध्यान रखना है। उसे बताया जाएगा कि टीबी की दवाओं के साथ अच्छा पोषण जरूरी होता है। रोगी को भोजन में क्या-क्या देना चाहिए। फैमिली केयर गिवर समुदाय में टीबी के प्रति जागरूकता और जानकारी बढ़ाने में भी क्षय रोग विभाग की मदद करेंगे।
जिला कार्यक्रम समन्वयक डॉ मिथलेश कुमार ने बताया कि टीबी मुक्त पंचायत अभियान के तहत एक हज़ार की जनसंख्या पर कम से कम 30 संभावित मरीज की जांच की जाएगी। साथ ही उपचार की सफलता की दर 85 प्रतिशत से अधिक होनी चाहिए। उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण में 19 टीबी यूनिट/ब्लॉक के 35 स्वास्थ्यकर्मी एवं 16 ब्लॉक के एडीओ पंचायत को प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण ले चुके एडीओ पंचायत एवं स्वास्थ्य कर्मी ग्राम प्रधान एवं सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी को प्रशिक्षण देंगे। प्रशिक्षण में प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत टीबी के मरीज़ों को गोद लेने के लिए भी ग्राम प्रधानों को ग्राम स्तर पर प्रोत्साहित करना है।
प्रशिक्षण सत्र में जिला पीपीएम समन्वयक अनुराग कुमार पाण्डेय एवं टीबी विभाग के सभी कर्मचारी शामिल रहे।

हर ब्लॉक व टीबी यूनिट से स्वास्थ्यकर्मी व एडीओ पंचायत को बनाया गया मास्टर ट्रेनर

टीबी मुक्त पंचायत व फैमिली केयर गिवर मॉड्यूल पर दिया प्रशिक्षण

हर ब्लॉक व टीबी यूनिट से स्वास्थ्यकर्मी व एडीओ पंचायत को बनाया गया मास्टर ट्रेनर

  • अब मास्टर ट्रेनर्स ग्राम प्रधान, सचिव व सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी को करेंगे प्रशिक्षित
  • जनपद में मौजूद हर क्षय रोगी के लिए तैयार होगा एक फैमिली केयर गिवर

गाज़ीपुर।प्रधानमंत्री के आह्वान पर वर्ष 2025 तक टीबी मुक्त भारत के लिए जिला क्षय रोग विभाग और पंचायती राज विभाग मिलकर काम कर रहे हैं, जिससे टीबी मुक्त पंचायत व टीबी फैमिली केयर गिवर मॉड्यूल को शत-प्रतिशत सफल बनाया जा सके। इसके लिए मास्टर ट्रेनर्स का दो दिवसीय प्रशिक्षण मंगलवार को मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय सभागार में संपन्न हुआ। जिला पंचायती राज विभाग से ब्लॉक वार एक -एक प्रतिनिधि के अलावा जिला पब्लिक प्राइवेट मिक्स समन्वयक (डीपीपीएमसी), ब्लॉक कार्यक्रम प्रबन्धक (बीपीएम), ब्लॉक कम्युनिटी प्रोसेस मैनेजर (बीसीपीएम), क्षय रोग विभाग से वरिष्ठ उपचार पर्यवेक्षक (एसटीएस), वरिष्ठ प्रयोगशाला पर्यवेक्षक (एसटीएलएस), टीबीएचवी को जिला कार्यक्रम समन्वयक डॉ मिथलेश कुमार और डब्ल्यूएचओ के डॉ वीजे विनोद ने प्रशिक्षण दिया। सभी को प्रमाण पत्र भी प्रदान किये गये।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ देश दीपक पाल ने प्रशिक्षण सत्र का शुभारंभ करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री के टीबी मुक्त भारत वर्ष 2025 के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए जनपद प्रतिबद्ध है। ट्रेनिंग ले चुके मास्टर ट्रेनर्स अब टीबी मुक्त पंचायत अभियान का लक्ष्य हासिल करने के लिए ग्राम प्रधान और सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों (सीएचओ) को प्रशिक्षण देंगे, साथ ही हर क्षय रोगी के लिए एक फैमिली केयर गिवर भी तैयार करेंगे। इसके साथ पंचायत समिति, जन आरोग्य समिति और ग्राम स्वास्थ्य स्वच्छता एवं पोषण समिति (वीएचएसएनसी) का भी संवेदीकरण करना है। उन्होंने कहा कि इससे सामुदायिक स्तर पर टीबी के प्रति जागरूकता बढ़ेगी और क्षय रोगियों को सामाजिक स्तर पर मिलने वाले तिरस्कार से मुक्ति के साथ ही बेहतर स्वास्थ्य व्यवहार मिलने में मदद मिलेगी। शासन से प्राप्त निर्देशों के मुताबिक क्षय रोगी के परिवार या करीबी लोगों में से ऐसे व्यक्ति की पहचान की जाएगी जो उसे उपचार प्राप्त करने में मदद कर सके, उसकी देखभाल कर सके, रोगी के लिए जरूरी पोषण का ध्यान रख सके। ऐसे व्यक्ति को फैमिली केयर गिवर (प्राथमिक देखभाल कर्ता) कहा जाएगा।
जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ मनोज कुमार ने बताया कि फैमिली केयर गिवर को क्षय रोगी के साथ हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर जाना होगा, जहां सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (सीएचओ) उसे क्षय रोग के उपचार के बारे में विस्तार से बताएंगे। साथ ही इस बात का भी प्रशिक्षण देंगे कि रोगी की दवाओं और उनके असर का उसे किस प्रकार से ध्यान रखना है। उसे बताया जाएगा कि टीबी की दवाओं के साथ अच्छा पोषण जरूरी होता है। रोगी को भोजन में क्या-क्या देना चाहिए। फैमिली केयर गिवर समुदाय में टीबी के प्रति जागरूकता और जानकारी बढ़ाने में भी क्षय रोग विभाग की मदद करेंगे।
जिला कार्यक्रम समन्वयक डॉ मिथलेश कुमार ने बताया कि टीबी मुक्त पंचायत अभियान के तहत एक हज़ार की जनसंख्या पर कम से कम 30 संभावित मरीज की जांच की जाएगी। साथ ही उपचार की सफलता की दर 85 प्रतिशत से अधिक होनी चाहिए। उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण में 19 टीबी यूनिट/ब्लॉक के 35 स्वास्थ्यकर्मी एवं 16 ब्लॉक के एडीओ पंचायत को प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण ले चुके एडीओ पंचायत एवं स्वास्थ्य कर्मी ग्राम प्रधान एवं सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी को प्रशिक्षण देंगे। प्रशिक्षण में प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत टीबी के मरीज़ों को गोद लेने के लिए भी ग्राम प्रधानों को ग्राम स्तर पर प्रोत्साहित करना है।
प्रशिक्षण सत्र में जिला पीपीएम समन्वयक अनुराग कुमार पाण्डेय एवं टीबी विभाग के सभी कर्मचारी शामिल रहे।

हर ब्लॉक व टीबी यूनिट से स्वास्थ्यकर्मी व एडीओ पंचायत को बनाया गया मास्टर ट्रेनर

टीबी मुक्त पंचायत व फैमिली केयर गिवर मॉड्यूल पर दिया प्रशिक्षण

हर ब्लॉक व टीबी यूनिट से स्वास्थ्यकर्मी व एडीओ पंचायत को बनाया गया मास्टर ट्रेनर

  • अब मास्टर ट्रेनर्स ग्राम प्रधान, सचिव व सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी को करेंगे प्रशिक्षित
  • जनपद में मौजूद हर क्षय रोगी के लिए तैयार होगा एक फैमिली केयर गिवर

गाज़ीपुर।प्रधानमंत्री के आह्वान पर वर्ष 2025 तक टीबी मुक्त भारत के लिए जिला क्षय रोग विभाग और पंचायती राज विभाग मिलकर काम कर रहे हैं, जिससे टीबी मुक्त पंचायत व टीबी फैमिली केयर गिवर मॉड्यूल को शत-प्रतिशत सफल बनाया जा सके। इसके लिए मास्टर ट्रेनर्स का दो दिवसीय प्रशिक्षण मंगलवार को मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय सभागार में संपन्न हुआ। जिला पंचायती राज विभाग से ब्लॉक वार एक -एक प्रतिनिधि के अलावा जिला पब्लिक प्राइवेट मिक्स समन्वयक (डीपीपीएमसी), ब्लॉक कार्यक्रम प्रबन्धक (बीपीएम), ब्लॉक कम्युनिटी प्रोसेस मैनेजर (बीसीपीएम), क्षय रोग विभाग से वरिष्ठ उपचार पर्यवेक्षक (एसटीएस), वरिष्ठ प्रयोगशाला पर्यवेक्षक (एसटीएलएस), टीबीएचवी को जिला कार्यक्रम समन्वयक डॉ मिथलेश कुमार और डब्ल्यूएचओ के डॉ वीजे विनोद ने प्रशिक्षण दिया। सभी को प्रमाण पत्र भी प्रदान किये गये।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ देश दीपक पाल ने प्रशिक्षण सत्र का शुभारंभ करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री के टीबी मुक्त भारत वर्ष 2025 के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए जनपद प्रतिबद्ध है। ट्रेनिंग ले चुके मास्टर ट्रेनर्स अब टीबी मुक्त पंचायत अभियान का लक्ष्य हासिल करने के लिए ग्राम प्रधान और सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों (सीएचओ) को प्रशिक्षण देंगे, साथ ही हर क्षय रोगी के लिए एक फैमिली केयर गिवर भी तैयार करेंगे। इसके साथ पंचायत समिति, जन आरोग्य समिति और ग्राम स्वास्थ्य स्वच्छता एवं पोषण समिति (वीएचएसएनसी) का भी संवेदीकरण करना है। उन्होंने कहा कि इससे सामुदायिक स्तर पर टीबी के प्रति जागरूकता बढ़ेगी और क्षय रोगियों को सामाजिक स्तर पर मिलने वाले तिरस्कार से मुक्ति के साथ ही बेहतर स्वास्थ्य व्यवहार मिलने में मदद मिलेगी। शासन से प्राप्त निर्देशों के मुताबिक क्षय रोगी के परिवार या करीबी लोगों में से ऐसे व्यक्ति की पहचान की जाएगी जो उसे उपचार प्राप्त करने में मदद कर सके, उसकी देखभाल कर सके, रोगी के लिए जरूरी पोषण का ध्यान रख सके। ऐसे व्यक्ति को फैमिली केयर गिवर (प्राथमिक देखभाल कर्ता) कहा जाएगा।
जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ मनोज कुमार ने बताया कि फैमिली केयर गिवर को क्षय रोगी के साथ हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर जाना होगा, जहां सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (सीएचओ) उसे क्षय रोग के उपचार के बारे में विस्तार से बताएंगे। साथ ही इस बात का भी प्रशिक्षण देंगे कि रोगी की दवाओं और उनके असर का उसे किस प्रकार से ध्यान रखना है। उसे बताया जाएगा कि टीबी की दवाओं के साथ अच्छा पोषण जरूरी होता है। रोगी को भोजन में क्या-क्या देना चाहिए। फैमिली केयर गिवर समुदाय में टीबी के प्रति जागरूकता और जानकारी बढ़ाने में भी क्षय रोग विभाग की मदद करेंगे।
जिला कार्यक्रम समन्वयक डॉ मिथलेश कुमार ने बताया कि टीबी मुक्त पंचायत अभियान के तहत एक हज़ार की जनसंख्या पर कम से कम 30 संभावित मरीज की जांच की जाएगी। साथ ही उपचार की सफलता की दर 85 प्रतिशत से अधिक होनी चाहिए। उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण में 19 टीबी यूनिट/ब्लॉक के 35 स्वास्थ्यकर्मी एवं 16 ब्लॉक के एडीओ पंचायत को प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण ले चुके एडीओ पंचायत एवं स्वास्थ्य कर्मी ग्राम प्रधान एवं सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी को प्रशिक्षण देंगे। प्रशिक्षण में प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत टीबी के मरीज़ों को गोद लेने के लिए भी ग्राम प्रधानों को ग्राम स्तर पर प्रोत्साहित करना है।
प्रशिक्षण सत्र में जिला पीपीएम समन्वयक अनुराग कुमार पाण्डेय एवं टीबी विभाग के सभी कर्मचारी शामिल रहे।

मानसिक रोगियों में हुआ फल और सर्टिफिकेट वितरण,दी गई जानकारी

विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर मानसिक रोगियों में हुआ फल और सर्टिफिकेट वितरण

ग़ाज़ीपुर।विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस जो प्रत्येक वर्ष 10 अक्टूबर को पूरे देश में मनाया जाता है इसी को लेकर मंगलवार को मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय के सभागार में एक गोष्ठी का आयोजन प्रभारी सीएमओ डॉ जे एन सिंह की अध्यक्षता में किया गया। इस अवसर पर लोगों में मानसिक स्वास्थ्य के प्रति कैसे जागरूक रहना है और अन्य को करना है इस बारे में विस्तृत रूप से जानकारी दी गई। इस बार का थीम मेंटल हेल्थ इस यूनिवर्सल ह्यूमन राइट रहा। इस कार्यक्रम में गोष्ठी के अलावा हस्ताक्षर अभियान के साथ ही मानसिक विकलांग को सर्टिफिकेट और फल वितरण का भी कार्यक्रम किया गया।

प्रभारी सीएमओ डॉ जे एन सिंह ने बताया की हर साल 10 अक्टूबर को ‘विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस’ मनाया जाता है। वर्ल्ड फेडरेशन फॉर मेंटल हेल्थ और वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन ने मिलकर वर्ष 1992 में 10 अक्टूबर के दिन ‘वर्ल्ड मेंटल हेल्थ डे’ सेलिब्रेट करने की घोषणा की थी। उसके बाद से यह दिन प्रत्येक वर्ष मनाया जाने लगा। इस दिन को मनाने का उद्देश्य है मानसिक स्वास्थ्य के बेहतर बनाए रखने के प्रति लोगों के बीच जागरूकता बढ़ाना है। साथ ही लोगों को मानसिक स्वास्थ्य के बारे में शिक्षित करने और मेंटल हेल्थ के मुद्दों को लेकर समाज में मौजूद स्टिग्मा को कम करना भी है। हर साल इसे एक खास थीम के तहत सेलिब्रेट किया जाता है।

उन्होंने बताया की हमारे शारीरिक स्वास्थ्य और मानसिक स्वास्थ्य के बीच गहरा संबंध है। लेकिन अभी भी ज्यादातर लोग इसपर ध्यान नहीं देते। फिजिकल और मेंटल हेल्थ एक ही सिक्के के दो पहलू की तरह हैं। किसी भी एक पहलू को नजरअंदाज करना दूसरे पहलू को नकारात्मक तरीके से प्रभावित करता है। बड़े-बूढ़े से लेकर स्कूल जाने वाले बच्चे भी इस समस्या से जूझ रहे हैं। तो इस प्रॉब्लम को छिपाने की जगह उस पर ध्यान देने की जरूरत है। वरना आने वाले समय में स्थिति और बिगड़ सकती है।

मानसिक रोग के लक्षण

नींद ना आना या देर से नींद आना, चिंता घबराहट या उलझन, आत्महत्या का विचार आना ,बेहोशी के दौरे आना, बेवजह शक से ग्रसित रहना, शराब गाजा भांग का नशा करना, आवश्यकता से अधिक साफ सफाई ,उदास या मायूस रहना ,किसी कार्य में मन ना लगा ,गुस्सा आना, सर दर्द या भारीपन बना रहना, बुद्धि का विकास कम होना, बुढ़ापे में याददाश्त की कमी का होना, भूत प्रेत देवी देवता की छाया का भ्रम होना।

इस कार्यक्रम में जिला मलेरिया अधिकारी मनोज कुमार, एनसीडी से रवि शंकर चौरसिया ,डॉ शाहबाज, अंकित आनंद, गौरव कुमार गिरी, राघवेंद्र शेखर सिंह, अनिल चौबे, अनिल शर्मा ,वीरेंद्र पांडे, नीरज श्रीवास्तव व अन्य लोग मौजूद रहे।