नई एंबुलेंस मिलने से जिले की स्वास्थ्य सुविधा पकड़ेगी रफ्तार
गाजीपुर। उत्तर प्रदेश सरकार के द्वारा स्वास्थ्य सुविधा को बेहतर बनाने के लिए लगातार कवायद किया जा रहा हैं। इसी क्रम में जनपद को शासन की तरफ से 8 नए 102 एम्बुलेंस की सौगात मिली है। जिसको मंगलवार को मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ देश दीपक पाल ने हरी झंडी दिखाकर विभिन्न ब्लॉकों के लिए रवाना किया।
102 और 108 एंबुलेंस के प्रभारी दीपक राय ने बताया कि जनपद में कुल 102 के 42 एंबुलेंस और 108 के 33 एम्बुलेंस चल रहे हैं। जिसमें से बहुत सारे एम्बुलेंस पुराने होने की वजह से बार-बार खराब होने की शिकायतें आ रही थी। जिसको देखते हुए शासन की तरफ से गाजीपुर जनपद को कुल 25 नई एंबुलेंस दिए गए। जिसमें से 8 एम्बुलेंस मंगलवार को गाजीपुर भेजे गए। जिसे मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ देश दीपक पाल ने हरी झंडी दिखाकर विभिन्न ब्लॉकों के लिए रवाना किया।
उन्होंने बताया कि नए एंबुलेंस के आ जाने से स्वास्थ्य सुविधा में गति पकड़ेगी। वहीं अब पुराने व कंडम हो चुके एंबुलेंस को वापस भेजा जाएगा। उन्होंने बताया कि नई मिले एंबुलेंस में 4 मनिहारी ब्लॉक, 2 जखनिया ,2 देवकली, 1 मिर्जापुर ,2 मोहम्दाबाद, 2 कासिमाबाद ,2 बाराचवर के साथ ही अन्य ब्लाकों के साथ ही जिला मुख्यालय पर भी एंबुलेंस दिया गया है।
एनसीसी के अधिकारियों को टीबी मुक्त भारत के लिए किया जागरूक
राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम के तहत संवेदीकरण कार्यशाला आयोजित
हम टीबी के खिलाफ जंग में जनपद प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग के साथ – कर्नल अजय
गाज़ीपुर। क्षय रोग (टीबी) के उन्मूलन के लिए समुदाय को लगातार जागरूक किया जा रहा है। इसी क्रम में सोमवार को मियांपुर स्थित नेशनल कैडेट कोर (एनसीसी) कार्यालय पर स्वास्थ्य विभाग ने टीबी पर एक संवेदीकरण कार्यशाला का आयोजन किया। इसका आयोजन जिलाधिकारी आर्यका अखौरी के निर्देशन व मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ देश दीपक पाल के नेतृत्व में किया गया। इस दौरान जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ मनोज कुमार, जिला कार्यक्रम समन्वयक (डीपीसी) डॉ मिथलेश कुमार सिंह, जिला पब्लिक प्राइवेट मिक्स समन्वयक (डीपीपीएमसी) अनुराग कुमार पाण्डेय और एसटीएस सुनील कुमार यादव ने एनसीसी के अधिकारियों और छात्रों को टीबी मुक्त भारत अभियान में सहयोग करने का आग्रह किया।
एनसीसी के कर्नल सीओ अजय उनियाल ने आश्वस्त किया कि वह टीबी के खिलाफ जंग में जनपद प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के साथ हैं। एनसीसी के समस्त कैडेट समुदाय में लोगों को टीबी रोग के प्रति जागरूक करेंगे। प्रिंट व इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के जरिये हमने टीबी मुक्त भारत अभियान के बारे में बहुत कुछ सुना है। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भी विजन है कि वर्ष 2025 तक देश टीबी मुक्त हो जाए। इसके लिए हम सबको एक साथ टीबी के खिलाफ आवाज उठानी होगी। स्वास्थ्य अधिकारियों के द्वारा बताया गया कि लगातार दो हफ्ते या उससे अधिक खांसी आना, खांसी के साथ बलगम व कभी कभी खून आना, रात में पसीना आना, भूख न लगना और वजन में लगातार गिरावट टीबी हो सकती है। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर तुरन्त नजदीकी स्वास्थ्य केन्द्र पर सम्पर्क करें।
डीपीसी डॉ मिथलेश कुमार सिंह ने बताया कि वर्ष 2025 तक टीबी मुक्त भारत बनाने के लिए सरकार की ओर से हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। इसके लिए विशेष अभियान चलाये जा रहे हैं। विभागीय अधिकारी व कर्मचारी के साथ ही अन्य स्टेकहोल्डर्स, निजी चिकित्सक, मेडिकल स्टोर आदि इसकी रोकथाम के लिए जुटे हुये हैं। ऐसे में आम जनमानस की भी ज़िम्मेदारी बनती है कि वह इन बीमारियों से बचाव के लिए सतर्क व जागरूक रहें। इस दौरान एनसीसी के अधिकारियों को ‘टीबी हारेगा देश जीतेगा’, ‘जन जन को जगाना है टीबी को भागना है’, ‘टीबी से बचाव करें और अपनों का ख्याल करें’ एवं ‘अपने बच्चों को बीमारियों से बचाएंगे, सब काम छोड़ पहले टीकाकरण कराएंगे’ आदि जन जागरूकता के संदेश दिये गए।
डॉ मिथलेश ने बताया कि क्षय रोग से संबन्धित सभी प्रकार की जांच, दवाएं सभी सरकारी चिकित्सालयों में मौजूद हैं। निक्षय पोषण योजना के तहत टीबी के नए मरीज को उपचार के दौरान 500 रुपये प्रति माह अच्छे पोषण के लिए सरकार द्वारा दिये जा रहे हैं। निजी चिकित्सालयों में भी जिन टीबी मरीजों का इलाज चल रहा है, उन को भी 500 रुपये सरकार द्वारा प्रदान किया जाता है। यदि कोई व्यक्ति नए क्षय रोगी की प्रथम सूचना देता है तो उसे भी सरकार द्वारा 500 रुपये प्रदान किए जाते हैं। इस मौके पर सूबेदार रतन बहादुर घाले, डीपीसी डॉ मिथलेश कुमार सिंह, डीपीपीएमसी अनुराग कुमार पाण्डेय, एसटीएस सुनील, नरेंद्र राय, रामचरन गौड़ एवं अन्य लोग उपस्थित रहे।
जनपद के सभी निजी मेडिकल स्टोर शत-प्रतिशत क्षय रोगियों का करें नोटिफिकेशन।
टीबी प्रतिरोधी औषधियों पर निजी विक्रेताओं के संवेदीकरण को लेकर आयोजित हुई कार्यशाला।
मरीजों के नोटिफिकेशन व सम्पूर्ण उपचार में सहयोग करने की सीएमओ ने की अपील।
गाजीपुर। राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम(एनटीईपी) के शुक्रवार को मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय सभागार में एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन कर टीबी प्रतिरोधी (एंटी) औषधियों पर निजी औषधि विक्रेताओं का संवेदीकरण किया गया। मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ. देश दीपक पाल के निर्देशन पर आयोजित कार्यशाला में जनपद के करीब 1896 निजी औषधि विक्रेताओं ने प्रतिभाग किया। कार्यशाला में जिला क्षय रोग अधिकारी (डीटीओ) डॉ. मनोज कुमार सिंह, जिला कार्यक्रम समन्वयक (डीपीसी) डॉ मिथलेश कुमार सिंह, जिला पब्लिक प्राइवेट मिक्स समन्वयक (डीपीपीएमसी) अनुराग कुमार पाण्डेय, जिला औषधि निरीक्षक बृजेश कुमार मौर्य, सीनियर टीबी सुपरवाइज़र (एसटीएस) सुनील कुमार वर्मा व केमिस्ट एसोसिएशन के जिला अध्यक्ष नागमणि मिश्रा ने विक्रेताओं को टीबी उन्मूलन, नोटिफिकेशन व सम्पूर्ण उपचार पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कहा कि निक्षय पोर्टल पर समस्त निजी औषधि विक्रेता स्वयं क्षय रोगियों का पंजीकरण कर शत-प्रतिशत नोटिफिकेशन करें। इसके लिए सभी को लगातार सूचित किया जा रहा है ,जिससे निजी क्षेत्र में लक्ष्य के सापेक्ष टीबी मरीजों को शत-प्रतिशत उपलब्धि हासिल की जा सके। जिला कार्यक्रम समन्वयक डॉ. मिथलेश कुमार ने बताया कि निजी क्षेत्र में नोटिफिकेशन बढ़ाने के लिए निजी औषधि विक्रेताओं को लगातार सूचित किया जा रहा है। यह अभियान 14 दिसंबर तक संचालित किया जा रहा है। इन विक्रेताओं को प्रति क्षय रोगी के नोटिफिकेशन करने के लिए 500 रुपए और उपचार पूरा होने पर आउटकम देने के लिए 500 रुपए सरकार की ओर से दिये जाते हैं।
उन्होंने कहा कि जिन निजी चिकित्सालयों, चिकित्सकों, नर्सिंग होम, मेडिकल स्टोर या पैथोलॉजी लैब के अंतर्गत क्षय रोगियों का उपचार चल रहा है, उस चिकित्सालय, चिकित्सक या अन्य से नामित व्यक्ति ही निक्षय पोर्टल पर क्षय रोगियों के नोटिफिकेशन व पंजीकरण का कार्य करें। साथ ही उनके नमूनों की जांच के लिए बलगम परीक्षण केन्द्रों व अन्य जांच के लिए सैम्पल भेजना सुनिश्चित करें। इन नंबरों पर किया जा सकता है निक्षय पोर्टल से संबन्धित किसी भी प्रकार की आवश्यकता होने पर डीपीपीएमसी अनुराग कुमार पाण्डेय (9305887379) और डीपीसी डॉ मिथलेश (9415861884) से प्रातः 10 बजे से सायं पाँच बजे तक कार्य दिवस पर सम्पर्क किया जा सकता है। डीपीसी ने बताया कि इस साल अब तक जनपद में लक्ष्य 5711 के सापेक्ष 4211 टीबी मरीज नोटिफ़ाई किए जा चुके हैं, जिसमें पब्लिक सेक्टर में लक्ष्य 4886 के सापेक्ष 3672 और प्राइवेट सेक्टर में 826 के सापेक्ष 539 मरीज नोटिफ़ाई किए गए। मुख्य चिकित्साधिकारी ने सभी निजी चिकित्सकों व औषधि विक्रेताओं से राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम में पूर्ण सहयोग प्रदान करने की अपील की है। उनका कहना है कि शासन के निर्देश के क्रम में नये टीबी मरीजों का नोटिफिकेशन कराना हमारी जिम्मेदारी है। अतः सभी लोग शत-प्रतिशत क्षय रोगियों का नोटिफिकेशन करना सुनिश्चित करें।
गाजीपुर। अपर जिलाधिकारी (वि0/रा) ने जनपदवासियों से अपील किया है कि शीतलहर एव घने कोहरे से बचाव हेतु अत्यधिक ठण्ड/ शीतलहर होने पर छोटे बच्चों, बुजुर्गा एवं गर्भवती महिलाओं को घर के अन्दर ही रखें। अति आवश्यक हो तभी घर से बाहर जाये, स्थानीय रेडियों, दैनिक समाचार पत्र टी०वी० मोबाईल फोन एवं वाटसअप के माध्यम से मौसम की जानकारी प्राप्त करते रहें। स्वयं सर्तक रहे और अन्य व्यक्तियों को भी सर्तक करें। शरीर को सूखा रखें, गीले कपड़े कदापि न पहने, यह शरीर के लिए नुकसानदायक हो सकता है, गीले कपड़े से ठण्ड लगने की प्रबल सम्भावना बनी रहती है, मिटटी का तेलं, कोयले की अंगीठी, हीटर इत्यादि का प्रयोग करते समय सावधानियाँ बरते, कमरे में शुद्ध हवा का आवागमन बेन्टिलेशन, वायु- संचार बनाये रखें ताकि कमरे में विषाक्त, जहरीला धुआं इकट्ठा न हो, सोने से पहले हीटर, ब्लॉवर, कोयले की अगीठी आदि को अवश्य बंद कर दें, कई स्तरों वाल गर्म कपड़े जैसे-ऊनी कपड़े, स्वेटर, टोपी, मफलर इत्यादि का प्रयोग आपको शीतदंश/ठण्ड के प्रभाव से बचा सकता है। शरीर में ऊष्मा के प्रवाह को बनाये रखने के लिए पोषक आहार एवं गर्म पेय पदार्थाे का नियमित सेवन किया जाना लाभकारी होगा, हाइपोथर्मिया के लक्षणों जैसे-असामान्य शरीर का तापमान, भ्रम या स्मृति हानि, बेहोशी, विचलन, असीमित ठिठुरना सुस्ती, थकान, तुतलाना, थकावट इत्यादि की स्थिति उत्पन्न होने पर अपने नजदीकी सामुदायिक एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों पर सम्पर्क करें। शीतदंश/ठण्ड के लक्षणों जैसे- शरीर के अंगो का सुन्न पडना, हाथों-पैरों की उँगलियों, कान नाक आदि पर सफेद या पीले रंग के दाग उभर आने पर अपने नजदीकी चिकित्सक से परामर्श के बाद ही दवाइओ का प्रयोग करें, अपने आस-पास अकेले रहने वाले पड़ोत्तियों की जानकारी रखें, विशेषकर बुजुर्गों व्यक्तियो का पूर्ण विवरण एवं मोबाईल नम्बर अवश्य रखे, किसी भी आपात कालीन स्थिति से निपटने के लिए एक आपातकालीन डायरी बनाये जिसमें पुलिस, चिकित्सा, अग्निशमन एवं अन्य महत्त्वपूर्ण विभागों के नम्बर दर्ज रखें और इसकी जानकारी परिवार के प्रत्येक सदस्यों को होनी चाहिए, बाहर निकलते समय सिर, चेहरे, हाथ एवं पैर को गर्म कपड़े से ढके, शीतलहर में गाड़ियों में फॉग लाईट का इस्तेमाल करें, ठंड के मौसम में पशुओं को थनैला मिल्क फीवर नेमोटाइटिस आदि रोग होने का खतरा रहता है इसलिए पशुओं को समय-समय पर चिकित्सक को दिखाते रहें, पशुओं को रात में खुले पेड़ के नीचे अथवा घर से बाहर ना निकालें, पशुओं को ठंड के समय में गुड़ व कैल्शियम टॉनिक पिलाएं, पशुओं को ठंड के मौसम में जूट की बोरी अथवा घर में पड़ा पुराना कंबल उढाएं।
सीएमओ की अध्यक्षता में आयोजित हुई राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम की प्रेस कान्फ्रेंस
सक्रिय टीबी रोगी खोज अभियान व निक्षय पोषण योजना की प्रगति के बारे में दी जानकारी
जनपद के सभी सरकारी चिकित्सालयों में टीबी की जांच, उपचार, दवा आदि की सुविधा मौजूद
सरकार के द्वारा टीबी के नए मरीज को 500 रुपये प्रति माह अच्छे पोषण के लिए – सीएमओ
गाज़ीपुर। जिलाधिकारी आर्यका अखौरी के निर्देश पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ देश दीपक पाल की अध्यक्षता में बुधवार को सीएमओ कार्यालय सभागार में राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम के अंतर्गत प्रेस कान्फ्रेंस आयोजित की गई। इस दौरान सीएमओ ने 23 नवंबर से पाँच दिसंबर तक संचालित किए गए विशेष सक्रिय क्षय रोगी खोज अभियान की समीक्षा की। साथ ही जनपद में राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम और निक्षय पोषण योजना की जानकारी दी। सीएमओ ने बताया कि गाजीपुर की आबादी लगभग 43.55 लाख के सापेक्ष सक्रिय क्षय रोगी खोज अभियान में लक्षित 20 प्रतिशत आबादी को कवर किया गया। इस दौरान करीब लक्षित 8.66 लाख लोगों की स्वास्थ्य टीम के द्वारा घर-घर जाकर स्क्रीनिंग की गई। इस दौरान 267 टीम तैनात की गई थीं। दस दिवसीय अभियान में टीम के द्वारा लक्ष्य के सापेक्ष करीब 7.81 लाख लोगों की स्क्रीनिंग की गई। इसमें 2948 व्यक्तियों में टीबी के संभावित लक्षण पाये गए, जिन्हें जांच के लिए भेजा गया। इसमें सिर्फ 31 व्यक्ति पॉज़िटिव पाये गए। 66 व्यक्तियों की पहचान क्लीनिकली और रेडियोलोजी द्वारा निदान किया गया। इस तरह कुल 101 टीबी रोगियों की पहचान सक्रिय टीबी रोगी खोज अभियान में की गई। इन सभी मरीजों का तत्काल नोटिफिकेशन करते हुये उपचार शुरू किया गया। इसके साथ ही इस वर्ष जनपद में जनवरी से अबतक 5711 लक्ष्य के सापेक्ष 4206 रोगियों (सरकार व निजी क्षेत्र) को नोटिफ़ाई किया गया। इसमें ड्रग सेंसेटिव टीबी मरीजों की संख्या 4108 और ड्रग रजिस्टेंट टीबी रोगियों की संख्या 98 है। इन सभी रोगियों का उपचार चल रहा है। इसके साथ ही उन्हें निक्षय पोषण योजना के तहत उपचार के दौरान हर माह 500 रुपये की आर्थिक मदद भी दी जा रही है।
इस वर्ष अब तक जनपद की नोटिफिकेशन को लेकर उपलब्धि 74 फीसदी है। उन्होंने बताया कि जनपद में पिछले वर्ष जनवरी से नवंबर तक कुल 4299 टीबी रोगियों को नोटिफ़ाइ किया गया था। इसमें से 3776 टीबी रोगी का उपचार पूरा हो चुका है, जिसकी उपलब्धि 88 प्रतिशत है। शेष रोगी उपचार पर हैं। सीएमओ ने जिला क्षय रोग इकाई के कर्मचारियों को निर्देश दिया कि वह जल्द से जल्द सभी उपचारधीन टीबी रोगियों की बैंक डीटैल को प्राप्त करे, जिससे उन्हें निक्षय पोषण योजना का लाभ मिल सके। नोटिफिकेशन के लक्ष्य को समसी रहते प्राप्त करें। निजी चिकित्सकों को ज्यादा से ज्यादा टीबी मरीजों के नोटिफिकेशन के लिए प्रेरित करें। उन्होंने बताया कि क्षय रोग से संबन्धित सभी प्रकार की जांच, दवाइयाँ सभी सरकारी चिकित्सालयों में निःशुल्क मौजूद हैं। टीबी के नए मरीज को 500 रुपये प्रति माह अच्छे पोषण के लिए सरकार द्वारा दिये जा रहे हैं। निजी चिकित्सालयों में भी जिन टीबी मरीजों का इलाज चल रहा है, उन टीबी मरीजों को भी 500 रुपये सरकार द्वारा प्रदान किया जाना है। यदि कोई व्यक्ति नए क्षय रोगी की प्रथम सुचन देता है तो उसे भी सरकार द्वारा 500 रुपये प्रदान किए जाते हैं। जिला कार्यक्रम समन्वयक (डीपीसी) डॉ मिथलेश कुमार ने बताया कि जनपद में टीबी की जांच व उपचार की सुविधाएं मौजूद हैं। इसमें टीबी यूनिट की संख्या 19, समस्त 16 ब्लॉक सीएचसी व पीएचसी में बलगम परीक्षण केंद्र (डीएमसी) की संख्या 37, सीबी नाट की सुविधा जिला क्षय रोग केंद्र (डीटीसी) एवं सीएचसी मुहम्मदाबाद और ट्रू नाट की सुविधा डीटीसी, सीएचसी जखनिया, भदौरा और सैदपुर में मौजूद है।
उन्होंने बताया कि निक्षय पोषण योजना के तहत वर्तमान में 4734 पंजीकृत हुये हैं। इसमें से 4177 रोगियों की बैंक डीटैल प्राप्त हुईं हैं, जिसमें से 3865 (82%) रोगियों की जानकारी वैरिफ़ाई हुई हैं। वर्तमान में 3473 टीबी रोगियों के खाते में लगभग 88.21 लाख रुपये का भुगतान किया जा चुका है। इस मौके पर जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ मनोज कुमार सिंह, जिला पीपीएम समन्वयक एके पाण्डेय समेत अन्य अधिकारी व स्वास्थ्यकर्मी मौजदु रहे।
गाजीपुर। शासन के निर्देशानुसार बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना अंतर्गत प्रत्येक माह के प्रथम एवम तृतीय सोमवार को कन्या जन्म उत्सव मनाए जाने के निर्देश प्राप्त हुए है जिसके क्रम में जिला प्रोबेशन अधिकारी संजय कुमार सोनी के निर्देशन के क्रम में सोमवार को कन्या जन्म उत्सव का आयोजन महिला चिकित्सालय मे किया गया, जिसमें 12 बच्चियों के जन्म पर केक काटकर हर्षाेल्लास के साथ कन्या जन्म उत्सव मनाया गया। कार्यक्रम में बालिकाओं की माताओं को हिमालया बेबी किट, तोलिया एवं मिष्ठान देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में महिला कल्याण विभाग द्वारा संचालित समस्त विभागीय योजनाओं के बारे में विस्तृत जानकारी दिया गया। कार्यक्रम में मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, महिला शक्ति केंद्र से जिला समन्वयक, शिखा सिंह गौतम जिला समन्वयक, लक्ष्मी मौर्य व आशा बहने मौजूद रही।
पल्स पोलियो की तर्ज पर घर-घर खोजे जाएंगे कुष्ठ रोगी
गाजीपुर। कुष्ठ रोगी खोजी अभियान जो 21 दिसंबर से 4 जनवरी तक चलाया जाना है। इस अभियान में पल्स पोलियो अभियान की तर्ज पर घर-घर कुष्ठ रोगियों की खोज की जाएगी। जिसको लेकर शनिवार को मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय के सभागार में सीएमओ डॉ देश दीपक पाल की अध्यक्षता में एक वर्कशॉप का आयोजन किया गया। जिला कुष्ठ रोग अधिकारी डॉ रामकुमार यादव ने बताया कि 21 दिसंबर से 4 जनवरी तक कुष्ठ रोगी खोजी अभियान चलाया जाना है। जो पल्स पोलियो अभियान की तरह चलाया जाएगा। अभियान के तहत घर-घर कुष्ठ रोगियों की खोज की जाएगी। उन्होंने बताया कि इस तरह का अभियान साल 2018 में विभाग के द्वारा जनपद में चलाया गया था। वहीं अब 5 साल के बाद इस अभियान को एक बार फिर से चलाया जाएगा। जिसको लेकर वर्कशॉप का आयोजन किया गया है। वर्कशॉप में शामिल लोगों को कुष्ठ रोगियों की कैसे पहचान और पहचान करने के बाद उनका किस तरह से इलाज किया जाएगा इसके बारे में विस्तृत रूप से जानकारी दी जा रही है।
उन्होंने बताया कि अभी पिछले दिनों 1 सितंबर से 30 सितंबर तक कुष्ठ रोगी खोजी अभियान चलाया गया था। जिसमें कुल 42 नए मरीज मिले थे। जिन्हें एमडीटी उपचार दिया गया। साथ ही उन्होंने बताया कि पूरे जनपद में 181 कुष्ठ रोगी व आठ अन्य कुष्ठ रोगी मरीज है । जिनकी कुल संख्या 189 होती है। उन्होंने बताया कि अप्रैल 2023 से अब तक कुष्ठ रोग विभाग के द्वारा किए गए इलाज से कुल 180 कुष्ठ रोगी स्वस्थ भी हुए हैं। इस वर्कशॉप में सभी ब्लॉकों के चिकित्सा अधिकारी बीसीपीएम, एनएमए, एनएमएस ,एचईओ के साथ ही विभाग से जुड़े जयप्रकाश ,श्याम बिहारी, आरके मिश्रा, अभय कुमार, अखिलेश व अन्य मौजूद रहे।
रैली निकाल कर स्वास्थ्य विभाग ने किया एड्स के प्रति जागरूक
सीएमओ कार्यालय में हस्ताक्षर अभियान व संगोष्ठी का हुआ आयोजन
संक्रमित व्यक्ति के छूने, साथ बैठने व खाने से नहीं फैलता एचआईवी/एड्स – डॉ. देश दीपक पाल
रोकथाम के लिए बचाव व जागरूकता ही एकमात्र उपाय – डॉ मनोज कुमार सिंह
गाज़ीपुर। ‘ह्यूमन इम्यूनोडेफिशिएंसी वायरस – एक्वायर्ड इम्यूनोडेफिशिएंसी सिंड्रोम’ यानि एचआईवी/एड्स के प्रति जन जागरूकता के लिए शुक्रवार को विश्व एड्स दिवस मनाया गया। इस मौके पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ देश दीपक पाल ने गोरा बाजार स्थित जिला चिकित्सालय से रैली को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह रैली जिला अस्पताल से पीजी कॉलेज चौराहा से होते हुए विकास भवन, रिवर बैंक कॉलोनी से होकर मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय पर आकर समाप्त हुई। इसके बाद सीएमओ ने हस्ताक्षर अभियान का शुभारंभ किया। इस अवसर पर जन जागरूकता गोष्ठी भी का आयोजन किया गया। मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने कहा कि जन जागरूकता के उद्देश्य से हर साल एक दिसंबर को विश्व एड्स दिवस मनाया जाता है। इस वर्ष की थीम ‘लेट कम्यूनिटीज़ लीड’ निर्धारित की गई है। यह थीम इस बात पर ज़ोर देती है कि एड्स से प्रभावित लोग अपने जीवन को बेहतर बनाने के लिए अपनी आवाज उठाने में सक्षम बनें। बीमारी को रोकने के लिए समाज की अहम भूमिका के बारे में जागरूक करने के लिए इस थीम को चुना गया है।
सीएमओ ने कहा कि संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से एड्स की बीमारी नहीं होती है। इसके साथ ही संक्रमित व्यक्ति के छूने, साथ बैठने और खाने से भी यह बीमारी नहीं फैलती है। संक्रमित व्यक्ति के साथ असुरक्षित यौन सम्बन्ध बनाने से यह बीमारी फैलती है।इससे बचाव के लिए सावधानी बरतने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि समाज में एड्स से बचने के लिए जागरूकता अत्यन्त जरूरी है। एचआईवी/एड्स रोगी से समानता का व्यवहार किया जाए और कोई दुर्व्यवहार न हो। जिला एड्स नियंत्रण अधिकारी डॉ. मनोज कुमार ने कहा कि एचआईवी-एड्स लाइलाज बीमारी है। इसकी रोकथाम के लिए बचाव व जागरूकता ही एकमात्र उपाय है। इसके लिए लोगों को जागरूक होना जरूरी है। एड्स के प्रति सामाजिक मिथकों को दूर करना, आहार, पोषण, स्वच्छता और स्वस्थ जीवन शैली के लिए युवाओं को प्रेरित होने की ज़रूरत है। एचआईवी-एड्स के मरीजों से सार्वजनिक स्थलों जैसे दफ्तर, स्कूल आदि जगहों पर भेदभाव न किया जाए। यह छूने या बात करने से नहीं फैलता है। उन्होंने बताया कि जिला चिकित्सालय सहित सभी सरकारी स्वास्थ्य इकाइयों पर जांच व उपचार की सुविधा उपलब्ध है।
इस मौके पर जिला मलेरिया अधिकारी मनोज कुमार, जिला कार्यक्रम समन्वयक डॉ. मिथिलेश कुमार सिंह, सुनील वर्मा, संजय यादव, फिरोज बाबू, अंजू सिंह, श्वेता, स्वर्ण लता, संगीता, अजय क्षयरोग विभाग, एआरटी सेन्टर, आईसीटीसी सेन्टर, एसटीआई सेन्टर, पीपीसीटीसी सेन्टर, टीआई सेन्टर के सम्बन्ध अधिकारी एवं कर्मचारी मौजूद रहे। इन्सेट — एचआईवी/एड्स के कारण – संक्रमित व्यक्ति के शरीर से निकलने वाले द्रव या पदार्थ के संपर्क में आने से कोई भी स्वस्थ व्यक्ति संक्रमित हो सकता है। इसके अलावा रक्त संचरण, असुरक्षित यौन संबंध, असुरक्षित इंजेक्शन साझा करना, संक्रमित गर्भावस्था, प्रसव या स्तनपान द्वारा बच्चे को हो सकता है। इसलिए समय पर जांच करवाना बेहद जरूरी है। लक्षण – बुखार, ठंड लगना, गले में खराश, मांसपेशियों में दर्द, शरीर पर चकत्ते होना, रात को पसीना आना, थकान होना, जोड़ों में दर्द और ग्रंथियों में सूजन, पेट में समस्या बने रहना, वजन कम होना और भूख न लगना आदि। बचाव – किसी दूसरे की इस्तेमाल की हुई सिरिंज या इंजेक्शन का इस्तेमाल न करें। इसका इस्तेमाल करने के बाद नष्ट कर दें। यौन संबंध बनाते समय कंडोम का प्रयोग करें और सही से निपटान करें। यदि कोई गर्भवती महिला संक्रमित है तो बच्चे को संक्रमण से बचाने के लिए उसका इलाज कराएं, जिससे बच्चे को एचआईवी/एड्स से बचाया जाए।
विशेष अभियान चलाकर 20 प्रतिशत आबादी की होगी स्क्रीनिंग
अभियान के सफल संचालन के लिए 221 टीम और 43 सुपरवाइज़र तैनात
आवासीय परिसरों और संवेदनशील क्षेत्रों में भी स्क्रीनिंग पर होगा ज़ोर
गाज़ीपुर। प्रधानमंत्री के वर्ष 2025 तक टीबी मुक्त भारत बनाने के संकल्प को लेकर विभाग हर संभव प्रयास कर रहा है। इसी क्रम में बृहस्पतिवार को राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम (एनटीईपी) व प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत जनपद में सक्रिय टीबी रोगी खोज (टीबी एसीएफ़) अभियान का शुभारंभ किया गया। नगर सहित समस्त 16 ब्लॉक में टीम ने स्क्रीनिंग का कार्य भी शुरू किया गया। इसके साथ ही समस्त सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों (सीएचओ) को भी अभियान को सफल बनाने के लिए निर्देशित किया गया।
सीएमओ डॉ देश दीपक पाल ने जिला क्षय रोग अधिकारी, सरकारी चिकित्सालयों के अधीक्षक एवं जिला कार्यक्रम समन्वयक के साथ बैठक कर तैयारियों के बारे में जाना। सीएमओ ने बताया कि अभियान को सफल बनाने के लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। यह अभियान पाँच दिसंबर तक चलेगा। जनपद की आबादी करीब 44.55 लाख है लेकिन विशेष अभियान के तहत 20 प्रतिशत आबादी की स्क्रीनिंग की जाएगी। उन्होंने कहा कि टीबी के जीवाणु रोगी के खाँसने, छींकने और थूकने से हवा में फैल जाते हैं और साँस लेने से स्वस्थ व्यक्ति के फेफड़े में पहुँचकर रोग उत्पन्न करते हैं। टीबी का रोगी एक वर्ष में 10 से 15 स्वस्थ व्यक्तियों को संक्रमित कर सकता है। इसलिए इस अभियान में टीबी के लक्षण युक्त (संभावित रोगियों) व्यक्तियों की जांच की जाएगी और जांच में टीबी की पुष्टि होने पर तत्काल उपचार शुरू किया जाएगा। इसके साथ ही निक्षय पोषण योजना के तहत टीबी रोगियों को उनके उपचार के दौरान हर माह 500 रुपये की आर्थिक सहायता डीबीटी के माध्यम से बैंक खाते में प्रदान की जाती है।
जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ मनोज कुमार सिंह ने बताया कि अभियान के लिए 221 टीम और 43 सुपरवाइजर तैनात किए गए हैं। स्वास्थ्यकर्मी संभावित क्षय रोगियों की जांच करेंगे और टीबी की पुष्टि होने पर 48 घंटे के अंदर उपचार शुरू किया जाएगा। उन्होंने बताया कि अभियान के दौरान आवासीय परिसरों, जैसे अनाथालयों, वृद्धाश्रमों, नारी निकेतन, बाल संरक्षण गृह, मदरसों और छात्रावासों में कैंप आयोजित कर टीबी के प्रति संवेदीकरण किया जाएगा और लक्षण युक्त व्यक्ति के स्पुटम (बलगम) के नमूने एकत्र किए जाएंगे।
संवेदनशील क्षेत्रों पर होगा ज़ोर – जिला कार्यक्रम समन्वयक (डीपीसी) डॉ मिथलेश कुमार ने बताया कि अभियान के दौरान माइक्रोप्लान के मुताबिक संवेदनशील क्षेत्रों (घनी बस्ती और स्लम एरिया) को कवर करते हुए जनपद की 20 प्रतिशत आबादी की स्क्रीनिंग की जाएगी। रोगी के बलगम की जांच करवाने पर फेफड़ों की टीबी का पता लग सकता है। बलगम के दो नमूनों की जांच माइक्रोस्कोपी एवं सीबीनॉट मशीन द्वारा की जाती है, जिससे टीबी की पुष्टि होती है। इसके साथ ही सभी रोगियों की शुगर और एचआईवी जांच भी की जाएगी। अभियान की समस्त रिपोर्ट को निक्षय पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा।
इन्सेट– टीबी का इलाज – टीबी रोगी के इलाज के लिए जिले में टीबी की दवा स्वास्थ्य कार्यकर्ता के सीधी देखरेख में खिलाई जाती हैं जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि मरीज सही दवा निश्चित समय पर पूरी अवधि तक खाकर शीघ्र रोग मुक्त हो जाए। इन बातों का रखें ध्यान –
दो हफ्ते या उससे अधिक खाँसी, खाँसी के साथ बलगम आना, रात में पसीना आना, भूख न लगना और वजन में लगातार गिरावट टीबी हो सकती है। ऐसे लक्षण देने पर तुरन्त नजदीकी स्वास्थ्य केन्द्र पर सम्पर्क करें।
टीबी की समस्त आधुनिक जाँच एवं सम्पूर्ण उपचार समस्त सरकारी स्वास्थ्य केन्द्रों पर निःशुल्क उपलब्ध है।
अधिक जानकारी के लिए टोल फ्री नम्बर 1800-11-6666 पर संपर्क कर सकते हैं और टीबी आरोग्य सेतु एप को भी डाउनलोड करें।
फाइलेरिया उन्मूलन व दिव्यांगता रोकथाम पर स्वास्थ्यकर्मियों को मिला प्रशिक्षण
प्रशिक्षण में फाइलेरिया प्रभावित अंगों की समुचित देखभाल के प्रति किया जागरूक
अब सीएचओ, स्वास्थ्यकर्मियों और आशा कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित करेंगे प्रशिक्षक
गाज़ीपुर।मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) कार्यालय सभागार में मंगलवार को सीएमओ डॉ देश दीपक पाल की अध्यक्षता में समस्त ब्लॉक के एक-एक चिकित्सा अधिकारी, ब्लॉक सामुदायिक प्रक्रिया प्रबंधक (बीसीपीएम) और लैब टैक्नीशियन (एलटी) को फाइलेरिया उन्मूलन जागरूकता रुग्णता प्रबंधन एवं दिव्यांगता रोकथाम (एमएमडीपी) के लिए प्रशिक्षकों का प्रशिक्षण संपन्न हुआ। प्रशिक्षण जिला मलेरिया अधिकारी (डीएमओ) मनोज कुमार एवं पाथ संस्था के आरएनटीडीओ डॉ. अबू कलीम ने दिया। प्रशिक्षण का उद्देश्य – सीएमओ ने बताया कि फाइलेरिया मरीजों की दृष्टि से एक अति संवेदनशील जनपद है। लिम्फोडिमा मरीजों को लिम्फोडिमा प्रबंधन का प्रशिक्षण अति आवश्यक होता है जिसमें मरीजों को एक्सरसाइज, सूजन प्रबंधन, चोट प्रबंधन, संक्रमण प्रबंधन, मच्छरों से बचाव आदि के बारे में विधिवत प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण प्राप्त कर प्रशिक्षक ब्लॉक स्तरीय कर्मचारियों जैसे आशा, सामुदायिक स्वास्थ्य कर्मियों (सीएचओ), एएनएम आदि को एमएमडीपी का प्रशिक्षण देंगे। इसके साथ ही मरीजों के बीच ब्लॉक स्तर पर लगाए जाने वाले एमएमडीपी कैंप में मरीजों को भी जानकारी उपलब्ध कराएंगे। फाइलेरिया को जानें – प्रशिक्षण में डीएमओ मनोज कुमार ने बताया कि फाइलेरिया मच्छर जनित रोग है। यह मादा क्यूलेक्स मच्छर के काटने से होता है। इसे लिम्फोडिमा (हाथी पांव) भी कहा जाता है। इसके प्रभाव से पैरों व हाथों में सूजन, पुरुषों में हाइड्रोसील (अंडकोष में सूजन) और महिलाओं में स्तन में सूजन की समस्या आती है। यह बीमारी न सिर्फ व्यक्ति को दिव्यांग बना देती है बल्कि इस वजह से मरीज की मानसिक स्थिति पर भी बुरा प्रभाव पड़ता है। शुरू में डॉक्टर की सलाह पर दवा का सेवन किया जाए तो बीमारी को बढ़ने से रोक सकते हैं। इसके अलावा प्रशिक्षण के दौरान स्वास्थ्यकर्मियों को फाइलेरिया प्रभावित अंगों के रुग्णता प्रबंधन का अभ्यास कराया। फाइलेरिया के मरीजों को प्रभावित अंग की अच्छी तरह से साफ-सफाई करनी चाहिए, जिससे किसी प्रकार के संक्रमण से मरीज न प्रभावित हो। इसके लिए उन्हें साफ-सफाई और दवा का सेवन नियमित रूप से करना जरूरी है। प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके कासिमाबाद ब्लॉक के बीसीपीएम शमा परवीन ने बताया कि फाइलेरिया के बारे में मिली विस्तार से जानकारी को अब ब्लॉक के अन्य सीएचओ, स्वास्थ्यकर्मियों और आशा कार्यकार्यताओं को दी जाएगी जिससे वह भी फाइलेरिया संभावित रोगियों की स्पष्ट पहचान कर सकें। प्रशिक्षण में फाइलेरिया रोगी सहायता समूह (पीएसजी) के सदस्य भी शामिल रहे। सिधानगर कासिमाबाद ब्लॉक की पीएसजी सदस्य गुड्डी देवी ने बताया कि प्रशिक्षण में आकर फाइलेरिया (हाथीपांव) रोग के प्रबंधन, साफ- सफाई, पैर की धुलाई, उचित आकार के चप्पल, चोट लगने, कटने, जलने से बचाव के बारे में बहुत अच्छी जानकारी मिली। सुखदेहरा भांवरकोल ब्लॉक की पीएसजी सदस्य लछिया देवी ने बताया कि प्रशिक्षण में आकर उन्हें विस्तार से फाइलेरिया के लक्षण, बचाव, उपचार, व्यायाम के बारे में जानकारी मिली, जिसका वह नियमित रूप से पालन कर रही हैं। प्रशिक्षण में एसीएमओ डॉ रामकुमार सिंह, एसीएमओ डॉ मनोज कुमार सिंह, पाथ संस्था के आरएनटीडीओ डॉ. अबू कलीम, जिला समन्वयक रामकृष्ण, सीफार संस्था के प्रतिनिधि आदि उपस्थित रहे।