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संचारी व वेक्टर जनित रोगों की रोकथाम के लिए अपर निदेशक ने की समीक्षा बैठक,दिए निर्देश

संचारी व वेक्टर जनित रोगों की रोकथाम के लिए अपर निदेशक ने की समीक्षा बैठक

वाराणसी मण्डल के सभी जनपदों के एसीएमओ, नोडल व अन्य अधिकारियों को दिए निर्देश

डेंगू आधारित गतिविधियों, कांट्रेक्ट ट्रेसिंग, भर्ती मरीजों की ट्रेकिंग आदि पर दिया जाए विशेष ध्यान – डॉ मंजुला सिंह

अपर निदेशक ने की अपील – घर व आसपास रखें साफ-सफाई, न होने दें जल जमाव

गाज़ीपुर। संचारी व मच्छर जनित रोगों की रोकथाम तथा नियंत्रण के लिए विशेष संचारी रोग नियंत्रण अभियान तीन अक्टूबर से संचालित किया जा रहा है। इसके साथ ही 16 अक्टूबर से घर-घर दस्तक अभियान के तहत स्रोत विनष्टीकरण, बुखार, इंफ्लुएंजा लाइक इलनेस (आईएलआई) लक्षण सहित टीबी, कुष्ठ आदि संभावित लक्षण वाले व्यक्तियों को चिन्हित किया जा रहा है। अभियान की लगातार मॉनिटरिंग व समीक्षा की जा रही है। इस क्रम में बुधवार को वाराणसी मण्डल की अपर निदेशक (चिकित्सा एवं स्वास्थ्य) डॉ मंजुला सिंह ने सभी चारों जनपद के अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी, नोडल अधिकारी, जिला मलेरिया अधिकारी, सहायक मलेरिया अधिकारी एवं वेक्टर बोर्न डिसीज़ (वीबीडी) स्टाफ के साथ वर्चुअल बैठक की।
अपर निदेशक ने बताया कि बैठक में मण्डल स्तरीय जनपदों की संचारी रोग नियंत्रण अभियान के तहत अभी तक की गई कार्यवाई, दस्तक अभियान के दौरान की जाने वाली कार्यवाई, तथा वर्तमान में व्याप्त डेंगू एवं अन्य वेक्टर जनित रोगों के नियंत्रण के लिए की जा रही निरोधात्मक गतिविधियों के बारे में गहन समीक्षा की गई। इसके साथ ही विभिन्न सरकारी अस्पतालों में भर्ती मरीजों, ब्लड बैंक में प्लेटलेट्स की स्थिति, डेंगू आधारित जन जागरूक गतिविधियों, फोगिंग मशीन, एंटी लार्वा पम्प व दवाओं की उपलब्धता, घरेलू ब्रीडिंग चेकर्स (डीबीसी) तथा नियमित डाटा फीडिंग के बारे में विस्तार से जानकारी ली गई। बैठक में वाराणसी सहित चंदौली, गाज़ीपुर, जौनपुर के जिला मलेरिया अधिकारी ने अवगत कराया कि वेक्टर बोर्न डिसीज़ के समस्त कर्मियों एवं आशा कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। वह ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में घर-घर जाकर लोगों को जागरूक कर रहे हैं। बुखार आदि से ग्रसित मरीजों को चिन्हित कर उन्हें जांच के लिए प्रेरित कर रहे हैं। साथ ही घर पर पोस्टर आदि भी चस्पा कर रहे हैं। इसके अलावा प्रतिदिन शाम को मॉनिटरिंग व समीक्षा बैठक भी जा रही है।
इस दौरान अपर निदेशक ने समस्त अधिकारियों व स्वास्थ्यकर्मियों को निर्देशित किया कि डेंगू आधारित गतिविधियों ज़ोर दिया जाए। कांट्रेक्ट ट्रेसिंग पर ध्यान दिया जाए। चिकित्सालयों में भर्ती मरीजों को लगातार ट्रैक किया जाए। नगर निगम व नगर पालिका तथा जिला पंचायत से समन्वय स्थापित कर डेंगू निरोधात्मक कार्यवाई पर और गहन कार्य योजना बनाई जाए। इन बीमारियों को लेकर निगरानी बढ़ाने पर ज़ोर दिया जाए। डेंगू के साथ अन्य वेक्टर जनित रोगों जैसे चिकनगुनिया, मलेरिया, फाइलेरिया, स्क्रब टायफस, लेप्टो स्पाइरोसिस आदि लक्षण वाले व्यक्तियों की भी जांच पर विशेष ध्यान दिया जाए। इसके अलावा जनमानस में इन रोगों से बचाव के बारे में व्यापक प्रचार-प्रसार आदि पर ज्यादा से ज्यादा ज़ोर दिया जाए।
अपील – अपर निदेशक ने अपील की है कि संचारी व मच्छर जनित रोगों से बचाव के लिए पूरे वर्ष अभियान चलना चाहिए। सभी अपने घरों के आसपास साफ-सफाई रखें, झाड़ियां न उगने दें, जलजमाव न की स्थिति पैदा होने दें, रुके हुए पानी में जला हुआ मोबिल ऑयल या लार्वा रोधी रसायन डालें, कूलर का पानी सप्ताह में एक बार अवश्य बदलें, सोते समय मच्छरदानी का प्रयोग करें, पूरे शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनें, कोई भी बुखार का लक्षण दिखे तो नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर जाकर जांच एवं इलाज़ कराएं। झोलाछाप डॉक्टर से बचें। बाहर के दूषित भोजन पानी का सेवन न करें। उन्होंने ‘हर रविवार मच्छर पर वार, खत्म करेंगे डेंगू, मलेरिया बुखार’ का संदेश दिया।
इस दौरान मंडलीय नोडल अधिकारी (वीबीडी) व संयुक्त निदेशक डॉ जीसी द्विवेदी, मंडलीय एंटोमोलोजिस्ट डॉ अमित कुमार सिंह मौजूद रहे।

हैंड वॉश को लेकर छात्राओं को किया जागरूक

गाज़ीपुर।राजकीय महिला स्नातकोत्तर महाविद्यालय में प्रज्ञा रेंजर टीम द्वारा 15 अक्टूबर को विश्व धुलाई दिवस के पूर्व दिवस के अवसर पर हैंडवाश को लेकर छात्राओं को जागरूक किया गया।

उन्हें हाथों को साफ करने की विधि को विशेष रूप से प्रदर्शित किया गया। विदित हों कि 15 अक्टूबर को पूरी दुनिया में विश्व हाथ धुलाई दिवस मनाया जाता है। इसका उद्देश्य लोगों को साफ सफाई की आदतों को सुधार करना ताकि उन्हें संक्रामक रोगों से बचाया जा सके और उनके कीमती जीवन की रक्षा की जा सके। 2030 तक प्राप्त होने वाले सतत वैश्विक लक्ष्यों में सभी के लिए स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता और साफ-सफाई भी एक प्रमुख लक्ष्य है। प्राचार्य डॉ सविता भारद्वाज के अनुसार इस प्रकार के कार्यक्रमों के माध्यम से लोग जागरूक होंगे, उनके रोगों से ग्रस्त होने एवं मृत्यु दर में गिरावट आएगी।


इस अवसर पर भारत स्काउट गाइड के निर्देश पर रेंजर प्रभारी डॉ शिव कुमार ने रेंजर छात्राओं को हैंड वॉश के महत्व एवं इसकी विधियों से परिचित कराया। इसके पश्चात रेंजर छात्राओं ने घूम-घूम कर पूरे महाविद्यालय परिसर में उपस्थित छात्राओं को हैंड वॉश का प्रदर्शन करते हुए अपने साफ-सफाई पर विशेष ध्यान देने तथा इस व्यवहार को दूसरों तक प्रसारित करने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम कार्यक्रम का संयोजन सीनियर रेंजर मेट सविता रावत एवं समीना द्वारा किया गया। इस कार्यक्रम में रेंजर्स श्रेया श्रीवास्तव, अंकिता पांडे, सपना कुशवाहा, आस्था सिंह, अर्पिता अग्रहरि, स्नेहा वर्मा, सपना आदि शामिल रही।

फाइलेरिया प्रभावित अंगों के देखभाल के प्रति किया जागरूक

फाइलेरिया प्रभावित अंगों की देखभाल के लिए प्रदान की गईं एमएमडीपी किट

हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर बयेपुर, फतेउलापुर व मुड़वल पर हुआ कार्यक्रम

फाइलेरिया प्रभावित अंगों की समुचित देखभाल के प्रति किया जागरूक

रोगियों की देखभाल में सीएचओ भी निभा रहे अहम भूमिका



गाज़ीपुर। फाइलेरिया एक गंभीर लाइलाज बीमारी है । यह जमीन की ओर लटक रहे जुड़वा अंगों जैसे -महिलाओं के स्तन, महिला पुरुष के हाथ पैर व पुरुषों के अंडकोश में सूजन पैदा कर देती है । प्रभावित अंगों की ठीक से देखभाल न की जाय तो बीमारी अधिक गंभीर हो जाती है । इसके लिए जनपद के हेल्थ एंड वेलनेस सेंटरों में फाइलेरिया रोगियों को (रुग्णता प्रबंधन व दिव्यांग्ता रोकथाम) एमएमडीपी किट प्रदान कर मरीजों को प्रभावित अंगों की देखभाल के तरीके बताए गए। शुक्रवार को सदर ब्लॉक के बयेपुर हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर पर जिला मलेरिया अधिकारी (डीएमओ) मनोज कुमार ने 10 फाइलेरिया रोगियों को एमएमडीपी किट प्रदान की। इस दौरान डीएमओ और सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (सीएचओ) ऋतु सिंह ने फाइलेरिया प्रभावित अंगों की समुचित देखभाल के प्रति जागरूक किया। इसके साथ ही सदर ब्लॉक के ही फतेउलापुर हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर और करंडा ब्लॉक के मुड़वल हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर पर छह-छह रोगियों को एमएमडीपी प्रदान की गई। इस दौरान फतेउलापुर की सीएचओ पूनम पटेल और मुड़वल की सीएचओ जिज्ञासा ने रोगियों को फाइलेरिया के लक्षण, जांच, उपचार व परामर्श के बारे में जानकारी दी। जिला मलेरिया अधिकारी ने बताया कि फाइलेरिया रोग का कोई इलाज नहीं है लेकिन उचित देखभाल से इसे गंभीर होने से रोका जा सकता है। इसके लिए हेल्थ एंड वेलनेस सेंटरों में एमएमडीपी कैंप आयोजित कर प्रभावित अंगों की देखभाल के लिए मरीजों को कुछ व्यायाम का अभ्यास कराया गया और दी गयी किट के माध्यम से प्रभावित अंगों की साफ सफाई के तरीके सिखाये गए ।

जिससे प्रभावित अंगों में किसी प्रकार के संक्रमण न हो। क्या है फाइलेरिया – डीएमओ ने बताया कि फाइलेरिया एक लाइलाज मच्छर जनित रोग है। यह मादा क्यूलेक्स मच्छर के काटने से होता है। इसे लिम्फोडिमा (हाथी पांव) भी कहा जाता है। यह बीमारी न सिर्फ व्यक्ति को दिव्यांग बना देती है बल्कि इस वजह से मरीज की मानसिक स्थिति पर भी बुरा प्रभाव पड़ता है। यह बीमारी न हो इसके लिए साल में एक बार दो वर्ष से अधिक आयु के लोगों को फाइलेरिया से बचाव की दवा का सेवन कराया जाता है। इसके अलावा इस रोग से बचाव के लिए मच्छरदानी का प्रयोग व घर के आस-पास व अंदर साफ-सफाई, इक्कठा हुए पानी को नष्ट कर मच्छरों से बचा जा सकता है । सीएचओ भी निभा रहे अहम भूमिका। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ देश दीपक पाल ने बताया कि फाइलेरिया प्रभावित रोगियों के घर के नजदीक ही एमएमडीपी किट के साथ देखभाल व परामर्श मिलता रहे, इसके लिए हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर पर तैनात सभी सीएचओ को फाइलेरिया उन्मूलन अभियान में सहयोग करने के निर्देश दिये गए हैं हैं। सीएचओ के माध्यम से स्क्रीनिंग, देखभाल, परामर्श के साथ ही आवश्यक दवाएं प्रदान की जा रही हैं। इसके साथ ही गंभीर रोगियों को टेली कंसल्टेंसी के माध्यम से चिकित्सक/विशेषज्ञ से परामर्श की सुविधा दी जा रही है। इसके अलावा आवश्यक जांच व उपचार के लिए उच्च इकाइयों में रेफर किया जा रहा है।

फाइलेरिया प्रभावित अंगों की देखभाल के लिए प्रदान की गईं एमएमडीपी किट,सीएचओ भी निभा रहे अहम भूमिका

फाइलेरिया प्रभावित अंगों की देखभाल के लिए प्रदान की गईं एमएमडीपी किट

हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर बयेपुर, फतेउलापुर व मुड़वल पर हुआ कार्यक्रम

फाइलेरिया प्रभावित अंगों की समुचित देखभाल के प्रति किया जागरूक

रोगियों की देखभाल में सीएचओ भी निभा रहे अहम भूमिका

गाज़ीपुर।फाइलेरिया एक गंभीर लाइलाज बीमारी है । यह जमीन की ओर लटक रहे जुड़वा अंगों जैसे -महिलाओं के स्तन, महिला पुरुष के हाथ पैर व पुरुषों के अंडकोश में सूजन पैदा कर देती है । प्रभावित अंगों की ठीक से देखभाल न की जाय तो बीमारी अधिक गंभीर हो जाती है । इसके लिए जनपद के हेल्थ एंड वेलनेस सेंटरों में फाइलेरिया रोगियों को (रुग्णता प्रबंधन व दिव्यांग्ता रोकथाम) एमएमडीपी किट प्रदान कर मरीजों को प्रभावित अंगों की देखभाल के तरीके बताए गए ।
शुक्रवार को सदर ब्लॉक के बयेपुर हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर पर जिला मलेरिया अधिकारी (डीएमओ) मनोज कुमार ने 10 फाइलेरिया रोगियों को एमएमडीपी किट प्रदान की। इस दौरान डीएमओ और सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (सीएचओ) ऋतु सिंह ने फाइलेरिया प्रभावित अंगों की समुचित देखभाल के प्रति जागरूक किया। इसके साथ ही सदर ब्लॉक के ही फतेउलापुर हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर और करंडा ब्लॉक के मुड़वल हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर पर छह-छह रोगियों को एमएमडीपी प्रदान की गई। इस दौरान फतेउलापुर की सीएचओ पूनम पटेल और मुड़वल की सीएचओ जिज्ञासा ने रोगियों को फाइलेरिया के लक्षण, जांच, उपचार व परामर्श के बारे में जानकारी दी।
जिला मलेरिया अधिकारी ने बताया कि फाइलेरिया रोग का कोई इलाज नहीं है लेकिन उचित देखभाल से इसे गंभीर होने से रोका जा सकता है। इसके लिए हेल्थ एंड वेलनेस सेंटरों में एमएमडीपी कैंप आयोजित कर प्रभावित अंगों की देखभाल के लिए मरीजों को कुछ व्यायाम का अभ्यास कराया गया और दी गयी किट के माध्यम से प्रभावित अंगों की साफ सफाई के तरीके सिखाये गए । जिससे प्रभावित अंगों में किसी प्रकार के संक्रमण न हो।
क्या है फाइलेरिया – डीएमओ ने बताया कि फाइलेरिया एक लाइलाज मच्छर जनित रोग है। यह मादा क्यूलेक्स मच्छर के काटने से होता है। इसे लिम्फोडिमा (हाथी पांव) भी कहा जाता है। यह बीमारी न सिर्फ व्यक्ति को दिव्यांग बना देती है बल्कि इस वजह से मरीज की मानसिक स्थिति पर भी बुरा प्रभाव पड़ता है। यह बीमारी न हो इसके लिए साल में एक बार दो वर्ष से अधिक आयु के लोगों को फाइलेरिया से बचाव की दवा का सेवन कराया जाता है। इसके अलावा इस रोग से बचाव के लिए मच्छरदानी का प्रयोग व घर के आस-पास व अंदर साफ-सफाई, इक्कठा हुए पानी को नष्ट कर मच्छरों से बचा जा सकता है ।
सीएचओ भी निभा रहे अहम भूमिका – मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ देश दीपक पाल ने बताया कि फाइलेरिया प्रभावित रोगियों के घर के नजदीक ही एमएमडीपी किट के साथ देखभाल व परामर्श मिलता रहे, इसके लिए हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर पर तैनात सभी सीएचओ को फाइलेरिया उन्मूलन अभियान में सहयोग करने के निर्देश दिये गए हैं। सीएचओ के माध्यम से स्क्रीनिंग, देखभाल, परामर्श के साथ ही आवश्यक दवाएं प्रदान की जा रही हैं। इसके साथ ही गंभीर रोगियों को टेली कंसल्टेंसी के माध्यम से चिकित्सक/विशेषज्ञ से परामर्श की सुविधा दी जा रही है। इसके अलावा आवश्यक जांच व उपचार के लिए उच्च इकाइयों में रेफर किया जा रहा है।

घर व आसपास न होने दें जल जमाव व गंदगी,नहीं तो रोगों को देंगे बुलावा

घर व आसपास न होने दें जल जमाव व गंदगी,
नहीं तो संक्रामक व संचारी रोगों को देंगे बुलावा

  • आ रहा है त्योहारों का सीजन, रखें साफ-सफाई व स्वास्थ्य का ख्याल
  • जन जागरूकता के साथ फॉगिंग व एंटी लार्वा छिड़काव का कार्य भी तेज
  • बचाव के लिए मच्छर रोधी क्रीम व मच्छरदानी का करें प्रयोग

गाजीपुर।त्योहारों का सीजन आ रहा है। यही मौका है कि घर, छत व आसपास के स्थानों की अच्छे से साफ-सफाई कर ली जाए। छत पर पड़े निष्प्रयोज्य बर्तनों, बोतलों, गमलों, टायरों, कूलर आदि में एकत्रित पानी को अलग कर सफाई कर ली जाए। घर के बाहर लगी झाड़ियों की कटाई कर ली जाए। जमा हुई गंदगी, कचरा आदि को भी दूर कर लिया जाए। यह कहना है मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ देश दीपक पाल का।
उन्होंने कहा कि घर व आसपास कहीं भी जल जमाव या गंदगी एकत्रित न होने दें, क्योंकि जिन स्थानों पर पानी ठहरेगा या जल जमाव की स्थिति पैदा होगी, वहाँ मच्छरों का लार्वा पनपेगा। इसकी वजह से वेक्टर (मच्छर, मक्खी आदि) जनित विभिन्न संक्रामक व संचारी रोग उत्पन्न होंगे। त्योहार के समय में सभी का स्वास्थ्य बेहतर हो, खुशहाल हो, इसके लिए हमें जागरूक और सतर्क रहने की आवश्यकता है। सीएमओ ने कहा कि वर्तमान में स्वास्थ्य समेत 10 विभागों के सहयोग से जनपद में विशेष संचारी रोग नियंत्रण माह अभियान भी संचालित किया जा रहा है। वायरल फीवर और डेंगू पर प्रभावी रोकथाम व नियंत्रण के लिए निरोधात्मक गतिविधियां नियमित रूप से संचालित की जा रही हैं।
जिला मलेरिया अधिकारी (डीएमओ) मनोज कुमार ने बताया कि जनपद में डेंगू, मलेरिया व मच्छर जनित अन्य बीमारियों को रोकने के लिए जन-जागरूकता का कार्य किया जा रहा है जिससे स्वयं के साथ-साथ अपने परिवार को सुरक्षित रखा जा सके। आशा कार्यकर्ताओं के माध्यम से घर-घर जाकर जन-जागरूकता के माध्यम से बदलते मौसम, संचारी रोगों से बचाव और साफ-सफाई के बारे में जानकारी दी जा रही है। शहरी क्षेत्र के लिए गठित की गयी नगर पालिका की टीम वार्ड और मोहल्लों में जाकर जन-जागरूकता के साथ ही फॉगिंग और एंटी लार्वा के छिड़काव का कार्य कर रही हैं, जिससे इन बीमारियों को फैलने से रोका जा सके।
उन्होंने बताया कि वेक्टर जनित अधिकतर बीमारियाँ मच्छरों के काटने से फैलती हैं। इन बीमारियों से बचने के लिए मच्छरों से बचाव करना बहुत जरूरी है। इसके लिए घर व आस-पास साफ-सफाई रखें तथा जल का भराव न होने दें। झाड़ियों और नालियों को साफ सुथरा रखें, आसपास रुके हुए पानी में जला हुआ मोबिल आयल या मिट्टी का तेल डालकर लार्वा को नष्ट करें, घर के दरवाजे और खिड़की पर मच्छर रोधी जाली लगाएं। सोते समय मच्छरदानी का प्रयोग अवश्य करें। पूरे शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनें। कूलर, फ्रिज आदि को साप्ताहिक रूप से साफ करें। छत पर निष्प्रयोज्य बर्तन, पाइप, टायर, नारियल के खोल आदि न डालें। गमलों और फूलदानों को भी साफ रखें।
डीएमओ ने बताया कि इस साल अब तक डेंगू के 167 मरीज मिले हैं। डेंगू से अभी तक किसी की मृत्यु नहीं हुई है। वर्ष 2022 में 176 और 2021 में 115 डेंगू के एलाइजा पुष्ट मरीज पाये गए थे।
खानपान पर दें ध्यान – डीएमओ ने बताया कि बुखार की स्थिति में मरीज को पूरी तरह से आराम करना चाहिए। अधिक से अधिक तरल पदार्थों जैसे ताजे फलों का जूस, दाल का पानी, नारियल पानी, ओआरएस घोल, दूध-छाछ, ताजे फल, प्रतिरक्षा तंत्र मजबूत करने वाले खाद्य पदार्थों आदि का सेवन करना चाहिए। तले भुने, गरिष्ठ भोजन, दर्द निवारक दवाओं आदि से बचना चाहिए।
डेंगू, मलेरिया व बुखार में अंतर समझना जरूरी – डीएमओ ने बताया कि आम लोग यह नहीं समझ पाते हैं कि उन्हें मलेरिया हुआ है या डेंगू या सामान्य बुखार है। मलेरिया का बुखार ठंड देकर आता है तो डेंगू में लगातार बुखार के साथ हड्डियों-जोड़ों में दर्द रहता है। इस तरह के कोई भी लक्षण होने पर तुरंत नजदीकी प्राथमिक या सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर जाकर चिकित्सक से परामर्श लेकर मलेरिया और डेंगू की जाँच करानी चाहिए। जनपद के सभी सरकारी स्वास्थ्य केन्द्रों पर मलेरिया व डेंगू के इलाज की सुविधा उपलब्ध है।

हर ब्लॉक व टीबी यूनिट से स्वास्थ्यकर्मी व एडीओ पंचायत को बनाया गया मास्टर ट्रेनर

टीबी मुक्त पंचायत व फैमिली केयर गिवर मॉड्यूल पर दिया प्रशिक्षण

हर ब्लॉक व टीबी यूनिट से स्वास्थ्यकर्मी व एडीओ पंचायत को बनाया गया मास्टर ट्रेनर

  • अब मास्टर ट्रेनर्स ग्राम प्रधान, सचिव व सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी को करेंगे प्रशिक्षित
  • जनपद में मौजूद हर क्षय रोगी के लिए तैयार होगा एक फैमिली केयर गिवर

गाज़ीपुर।प्रधानमंत्री के आह्वान पर वर्ष 2025 तक टीबी मुक्त भारत के लिए जिला क्षय रोग विभाग और पंचायती राज विभाग मिलकर काम कर रहे हैं, जिससे टीबी मुक्त पंचायत व टीबी फैमिली केयर गिवर मॉड्यूल को शत-प्रतिशत सफल बनाया जा सके। इसके लिए मास्टर ट्रेनर्स का दो दिवसीय प्रशिक्षण मंगलवार को मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय सभागार में संपन्न हुआ। जिला पंचायती राज विभाग से ब्लॉक वार एक -एक प्रतिनिधि के अलावा जिला पब्लिक प्राइवेट मिक्स समन्वयक (डीपीपीएमसी), ब्लॉक कार्यक्रम प्रबन्धक (बीपीएम), ब्लॉक कम्युनिटी प्रोसेस मैनेजर (बीसीपीएम), क्षय रोग विभाग से वरिष्ठ उपचार पर्यवेक्षक (एसटीएस), वरिष्ठ प्रयोगशाला पर्यवेक्षक (एसटीएलएस), टीबीएचवी को जिला कार्यक्रम समन्वयक डॉ मिथलेश कुमार और डब्ल्यूएचओ के डॉ वीजे विनोद ने प्रशिक्षण दिया। सभी को प्रमाण पत्र भी प्रदान किये गये।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ देश दीपक पाल ने प्रशिक्षण सत्र का शुभारंभ करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री के टीबी मुक्त भारत वर्ष 2025 के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए जनपद प्रतिबद्ध है। ट्रेनिंग ले चुके मास्टर ट्रेनर्स अब टीबी मुक्त पंचायत अभियान का लक्ष्य हासिल करने के लिए ग्राम प्रधान और सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों (सीएचओ) को प्रशिक्षण देंगे, साथ ही हर क्षय रोगी के लिए एक फैमिली केयर गिवर भी तैयार करेंगे। इसके साथ पंचायत समिति, जन आरोग्य समिति और ग्राम स्वास्थ्य स्वच्छता एवं पोषण समिति (वीएचएसएनसी) का भी संवेदीकरण करना है। उन्होंने कहा कि इससे सामुदायिक स्तर पर टीबी के प्रति जागरूकता बढ़ेगी और क्षय रोगियों को सामाजिक स्तर पर मिलने वाले तिरस्कार से मुक्ति के साथ ही बेहतर स्वास्थ्य व्यवहार मिलने में मदद मिलेगी। शासन से प्राप्त निर्देशों के मुताबिक क्षय रोगी के परिवार या करीबी लोगों में से ऐसे व्यक्ति की पहचान की जाएगी जो उसे उपचार प्राप्त करने में मदद कर सके, उसकी देखभाल कर सके, रोगी के लिए जरूरी पोषण का ध्यान रख सके। ऐसे व्यक्ति को फैमिली केयर गिवर (प्राथमिक देखभाल कर्ता) कहा जाएगा।
जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ मनोज कुमार ने बताया कि फैमिली केयर गिवर को क्षय रोगी के साथ हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर जाना होगा, जहां सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (सीएचओ) उसे क्षय रोग के उपचार के बारे में विस्तार से बताएंगे। साथ ही इस बात का भी प्रशिक्षण देंगे कि रोगी की दवाओं और उनके असर का उसे किस प्रकार से ध्यान रखना है। उसे बताया जाएगा कि टीबी की दवाओं के साथ अच्छा पोषण जरूरी होता है। रोगी को भोजन में क्या-क्या देना चाहिए। फैमिली केयर गिवर समुदाय में टीबी के प्रति जागरूकता और जानकारी बढ़ाने में भी क्षय रोग विभाग की मदद करेंगे।
जिला कार्यक्रम समन्वयक डॉ मिथलेश कुमार ने बताया कि टीबी मुक्त पंचायत अभियान के तहत एक हज़ार की जनसंख्या पर कम से कम 30 संभावित मरीज की जांच की जाएगी। साथ ही उपचार की सफलता की दर 85 प्रतिशत से अधिक होनी चाहिए। उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण में 19 टीबी यूनिट/ब्लॉक के 35 स्वास्थ्यकर्मी एवं 16 ब्लॉक के एडीओ पंचायत को प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण ले चुके एडीओ पंचायत एवं स्वास्थ्य कर्मी ग्राम प्रधान एवं सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी को प्रशिक्षण देंगे। प्रशिक्षण में प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत टीबी के मरीज़ों को गोद लेने के लिए भी ग्राम प्रधानों को ग्राम स्तर पर प्रोत्साहित करना है।
प्रशिक्षण सत्र में जिला पीपीएम समन्वयक अनुराग कुमार पाण्डेय एवं टीबी विभाग के सभी कर्मचारी शामिल रहे।

हर ब्लॉक व टीबी यूनिट से स्वास्थ्यकर्मी व एडीओ पंचायत को बनाया गया मास्टर ट्रेनर

टीबी मुक्त पंचायत व फैमिली केयर गिवर मॉड्यूल पर दिया प्रशिक्षण

हर ब्लॉक व टीबी यूनिट से स्वास्थ्यकर्मी व एडीओ पंचायत को बनाया गया मास्टर ट्रेनर

  • अब मास्टर ट्रेनर्स ग्राम प्रधान, सचिव व सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी को करेंगे प्रशिक्षित
  • जनपद में मौजूद हर क्षय रोगी के लिए तैयार होगा एक फैमिली केयर गिवर

गाज़ीपुर।प्रधानमंत्री के आह्वान पर वर्ष 2025 तक टीबी मुक्त भारत के लिए जिला क्षय रोग विभाग और पंचायती राज विभाग मिलकर काम कर रहे हैं, जिससे टीबी मुक्त पंचायत व टीबी फैमिली केयर गिवर मॉड्यूल को शत-प्रतिशत सफल बनाया जा सके। इसके लिए मास्टर ट्रेनर्स का दो दिवसीय प्रशिक्षण मंगलवार को मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय सभागार में संपन्न हुआ। जिला पंचायती राज विभाग से ब्लॉक वार एक -एक प्रतिनिधि के अलावा जिला पब्लिक प्राइवेट मिक्स समन्वयक (डीपीपीएमसी), ब्लॉक कार्यक्रम प्रबन्धक (बीपीएम), ब्लॉक कम्युनिटी प्रोसेस मैनेजर (बीसीपीएम), क्षय रोग विभाग से वरिष्ठ उपचार पर्यवेक्षक (एसटीएस), वरिष्ठ प्रयोगशाला पर्यवेक्षक (एसटीएलएस), टीबीएचवी को जिला कार्यक्रम समन्वयक डॉ मिथलेश कुमार और डब्ल्यूएचओ के डॉ वीजे विनोद ने प्रशिक्षण दिया। सभी को प्रमाण पत्र भी प्रदान किये गये।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ देश दीपक पाल ने प्रशिक्षण सत्र का शुभारंभ करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री के टीबी मुक्त भारत वर्ष 2025 के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए जनपद प्रतिबद्ध है। ट्रेनिंग ले चुके मास्टर ट्रेनर्स अब टीबी मुक्त पंचायत अभियान का लक्ष्य हासिल करने के लिए ग्राम प्रधान और सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों (सीएचओ) को प्रशिक्षण देंगे, साथ ही हर क्षय रोगी के लिए एक फैमिली केयर गिवर भी तैयार करेंगे। इसके साथ पंचायत समिति, जन आरोग्य समिति और ग्राम स्वास्थ्य स्वच्छता एवं पोषण समिति (वीएचएसएनसी) का भी संवेदीकरण करना है। उन्होंने कहा कि इससे सामुदायिक स्तर पर टीबी के प्रति जागरूकता बढ़ेगी और क्षय रोगियों को सामाजिक स्तर पर मिलने वाले तिरस्कार से मुक्ति के साथ ही बेहतर स्वास्थ्य व्यवहार मिलने में मदद मिलेगी। शासन से प्राप्त निर्देशों के मुताबिक क्षय रोगी के परिवार या करीबी लोगों में से ऐसे व्यक्ति की पहचान की जाएगी जो उसे उपचार प्राप्त करने में मदद कर सके, उसकी देखभाल कर सके, रोगी के लिए जरूरी पोषण का ध्यान रख सके। ऐसे व्यक्ति को फैमिली केयर गिवर (प्राथमिक देखभाल कर्ता) कहा जाएगा।
जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ मनोज कुमार ने बताया कि फैमिली केयर गिवर को क्षय रोगी के साथ हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर जाना होगा, जहां सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (सीएचओ) उसे क्षय रोग के उपचार के बारे में विस्तार से बताएंगे। साथ ही इस बात का भी प्रशिक्षण देंगे कि रोगी की दवाओं और उनके असर का उसे किस प्रकार से ध्यान रखना है। उसे बताया जाएगा कि टीबी की दवाओं के साथ अच्छा पोषण जरूरी होता है। रोगी को भोजन में क्या-क्या देना चाहिए। फैमिली केयर गिवर समुदाय में टीबी के प्रति जागरूकता और जानकारी बढ़ाने में भी क्षय रोग विभाग की मदद करेंगे।
जिला कार्यक्रम समन्वयक डॉ मिथलेश कुमार ने बताया कि टीबी मुक्त पंचायत अभियान के तहत एक हज़ार की जनसंख्या पर कम से कम 30 संभावित मरीज की जांच की जाएगी। साथ ही उपचार की सफलता की दर 85 प्रतिशत से अधिक होनी चाहिए। उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण में 19 टीबी यूनिट/ब्लॉक के 35 स्वास्थ्यकर्मी एवं 16 ब्लॉक के एडीओ पंचायत को प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण ले चुके एडीओ पंचायत एवं स्वास्थ्य कर्मी ग्राम प्रधान एवं सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी को प्रशिक्षण देंगे। प्रशिक्षण में प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत टीबी के मरीज़ों को गोद लेने के लिए भी ग्राम प्रधानों को ग्राम स्तर पर प्रोत्साहित करना है।
प्रशिक्षण सत्र में जिला पीपीएम समन्वयक अनुराग कुमार पाण्डेय एवं टीबी विभाग के सभी कर्मचारी शामिल रहे।

हर ब्लॉक व टीबी यूनिट से स्वास्थ्यकर्मी व एडीओ पंचायत को बनाया गया मास्टर ट्रेनर

टीबी मुक्त पंचायत व फैमिली केयर गिवर मॉड्यूल पर दिया प्रशिक्षण

हर ब्लॉक व टीबी यूनिट से स्वास्थ्यकर्मी व एडीओ पंचायत को बनाया गया मास्टर ट्रेनर

  • अब मास्टर ट्रेनर्स ग्राम प्रधान, सचिव व सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी को करेंगे प्रशिक्षित
  • जनपद में मौजूद हर क्षय रोगी के लिए तैयार होगा एक फैमिली केयर गिवर

गाज़ीपुर।प्रधानमंत्री के आह्वान पर वर्ष 2025 तक टीबी मुक्त भारत के लिए जिला क्षय रोग विभाग और पंचायती राज विभाग मिलकर काम कर रहे हैं, जिससे टीबी मुक्त पंचायत व टीबी फैमिली केयर गिवर मॉड्यूल को शत-प्रतिशत सफल बनाया जा सके। इसके लिए मास्टर ट्रेनर्स का दो दिवसीय प्रशिक्षण मंगलवार को मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय सभागार में संपन्न हुआ। जिला पंचायती राज विभाग से ब्लॉक वार एक -एक प्रतिनिधि के अलावा जिला पब्लिक प्राइवेट मिक्स समन्वयक (डीपीपीएमसी), ब्लॉक कार्यक्रम प्रबन्धक (बीपीएम), ब्लॉक कम्युनिटी प्रोसेस मैनेजर (बीसीपीएम), क्षय रोग विभाग से वरिष्ठ उपचार पर्यवेक्षक (एसटीएस), वरिष्ठ प्रयोगशाला पर्यवेक्षक (एसटीएलएस), टीबीएचवी को जिला कार्यक्रम समन्वयक डॉ मिथलेश कुमार और डब्ल्यूएचओ के डॉ वीजे विनोद ने प्रशिक्षण दिया। सभी को प्रमाण पत्र भी प्रदान किये गये।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ देश दीपक पाल ने प्रशिक्षण सत्र का शुभारंभ करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री के टीबी मुक्त भारत वर्ष 2025 के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए जनपद प्रतिबद्ध है। ट्रेनिंग ले चुके मास्टर ट्रेनर्स अब टीबी मुक्त पंचायत अभियान का लक्ष्य हासिल करने के लिए ग्राम प्रधान और सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों (सीएचओ) को प्रशिक्षण देंगे, साथ ही हर क्षय रोगी के लिए एक फैमिली केयर गिवर भी तैयार करेंगे। इसके साथ पंचायत समिति, जन आरोग्य समिति और ग्राम स्वास्थ्य स्वच्छता एवं पोषण समिति (वीएचएसएनसी) का भी संवेदीकरण करना है। उन्होंने कहा कि इससे सामुदायिक स्तर पर टीबी के प्रति जागरूकता बढ़ेगी और क्षय रोगियों को सामाजिक स्तर पर मिलने वाले तिरस्कार से मुक्ति के साथ ही बेहतर स्वास्थ्य व्यवहार मिलने में मदद मिलेगी। शासन से प्राप्त निर्देशों के मुताबिक क्षय रोगी के परिवार या करीबी लोगों में से ऐसे व्यक्ति की पहचान की जाएगी जो उसे उपचार प्राप्त करने में मदद कर सके, उसकी देखभाल कर सके, रोगी के लिए जरूरी पोषण का ध्यान रख सके। ऐसे व्यक्ति को फैमिली केयर गिवर (प्राथमिक देखभाल कर्ता) कहा जाएगा।
जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ मनोज कुमार ने बताया कि फैमिली केयर गिवर को क्षय रोगी के साथ हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर जाना होगा, जहां सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (सीएचओ) उसे क्षय रोग के उपचार के बारे में विस्तार से बताएंगे। साथ ही इस बात का भी प्रशिक्षण देंगे कि रोगी की दवाओं और उनके असर का उसे किस प्रकार से ध्यान रखना है। उसे बताया जाएगा कि टीबी की दवाओं के साथ अच्छा पोषण जरूरी होता है। रोगी को भोजन में क्या-क्या देना चाहिए। फैमिली केयर गिवर समुदाय में टीबी के प्रति जागरूकता और जानकारी बढ़ाने में भी क्षय रोग विभाग की मदद करेंगे।
जिला कार्यक्रम समन्वयक डॉ मिथलेश कुमार ने बताया कि टीबी मुक्त पंचायत अभियान के तहत एक हज़ार की जनसंख्या पर कम से कम 30 संभावित मरीज की जांच की जाएगी। साथ ही उपचार की सफलता की दर 85 प्रतिशत से अधिक होनी चाहिए। उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण में 19 टीबी यूनिट/ब्लॉक के 35 स्वास्थ्यकर्मी एवं 16 ब्लॉक के एडीओ पंचायत को प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण ले चुके एडीओ पंचायत एवं स्वास्थ्य कर्मी ग्राम प्रधान एवं सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी को प्रशिक्षण देंगे। प्रशिक्षण में प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत टीबी के मरीज़ों को गोद लेने के लिए भी ग्राम प्रधानों को ग्राम स्तर पर प्रोत्साहित करना है।
प्रशिक्षण सत्र में जिला पीपीएम समन्वयक अनुराग कुमार पाण्डेय एवं टीबी विभाग के सभी कर्मचारी शामिल रहे।

मानसिक रोगियों में हुआ फल और सर्टिफिकेट वितरण,दी गई जानकारी

विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर मानसिक रोगियों में हुआ फल और सर्टिफिकेट वितरण

ग़ाज़ीपुर।विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस जो प्रत्येक वर्ष 10 अक्टूबर को पूरे देश में मनाया जाता है इसी को लेकर मंगलवार को मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय के सभागार में एक गोष्ठी का आयोजन प्रभारी सीएमओ डॉ जे एन सिंह की अध्यक्षता में किया गया। इस अवसर पर लोगों में मानसिक स्वास्थ्य के प्रति कैसे जागरूक रहना है और अन्य को करना है इस बारे में विस्तृत रूप से जानकारी दी गई। इस बार का थीम मेंटल हेल्थ इस यूनिवर्सल ह्यूमन राइट रहा। इस कार्यक्रम में गोष्ठी के अलावा हस्ताक्षर अभियान के साथ ही मानसिक विकलांग को सर्टिफिकेट और फल वितरण का भी कार्यक्रम किया गया।

प्रभारी सीएमओ डॉ जे एन सिंह ने बताया की हर साल 10 अक्टूबर को ‘विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस’ मनाया जाता है। वर्ल्ड फेडरेशन फॉर मेंटल हेल्थ और वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन ने मिलकर वर्ष 1992 में 10 अक्टूबर के दिन ‘वर्ल्ड मेंटल हेल्थ डे’ सेलिब्रेट करने की घोषणा की थी। उसके बाद से यह दिन प्रत्येक वर्ष मनाया जाने लगा। इस दिन को मनाने का उद्देश्य है मानसिक स्वास्थ्य के बेहतर बनाए रखने के प्रति लोगों के बीच जागरूकता बढ़ाना है। साथ ही लोगों को मानसिक स्वास्थ्य के बारे में शिक्षित करने और मेंटल हेल्थ के मुद्दों को लेकर समाज में मौजूद स्टिग्मा को कम करना भी है। हर साल इसे एक खास थीम के तहत सेलिब्रेट किया जाता है।

उन्होंने बताया की हमारे शारीरिक स्वास्थ्य और मानसिक स्वास्थ्य के बीच गहरा संबंध है। लेकिन अभी भी ज्यादातर लोग इसपर ध्यान नहीं देते। फिजिकल और मेंटल हेल्थ एक ही सिक्के के दो पहलू की तरह हैं। किसी भी एक पहलू को नजरअंदाज करना दूसरे पहलू को नकारात्मक तरीके से प्रभावित करता है। बड़े-बूढ़े से लेकर स्कूल जाने वाले बच्चे भी इस समस्या से जूझ रहे हैं। तो इस प्रॉब्लम को छिपाने की जगह उस पर ध्यान देने की जरूरत है। वरना आने वाले समय में स्थिति और बिगड़ सकती है।

मानसिक रोग के लक्षण

नींद ना आना या देर से नींद आना, चिंता घबराहट या उलझन, आत्महत्या का विचार आना ,बेहोशी के दौरे आना, बेवजह शक से ग्रसित रहना, शराब गाजा भांग का नशा करना, आवश्यकता से अधिक साफ सफाई ,उदास या मायूस रहना ,किसी कार्य में मन ना लगा ,गुस्सा आना, सर दर्द या भारीपन बना रहना, बुद्धि का विकास कम होना, बुढ़ापे में याददाश्त की कमी का होना, भूत प्रेत देवी देवता की छाया का भ्रम होना।

इस कार्यक्रम में जिला मलेरिया अधिकारी मनोज कुमार, एनसीडी से रवि शंकर चौरसिया ,डॉ शाहबाज, अंकित आनंद, गौरव कुमार गिरी, राघवेंद्र शेखर सिंह, अनिल चौबे, अनिल शर्मा ,वीरेंद्र पांडे, नीरज श्रीवास्तव व अन्य लोग मौजूद रहे।

181 छात्राओं की जांच के साथ हुई प्रतियोगिता

किशोर स्वास्थ्य मंच 2023 के तहत 181 छात्राओं की जांच के साथ हुए प्रतियोगिता

ग़ाज़ीपुर।राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम के अन्तर्गत किशोर स्वास्थ मंच 2023 का आयोजन सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र मुहम्मदाबाद के अन्तर्गत राजकीय बालिका इंटर कालेज मुहम्मदाबाद पर मंगलवार को वृहद रूप से आयोजित किया गया। जहां पर 181 छात्राओं का जांच किया गया और जांच के उपरांत उन्हें सलाह और एनीमिया ,आयरन और आईएफए की गोली दी गई। इस दौरान कई तरह की प्रतियोगिताओं का भी आयोजन किया गया और विजय प्रतिभागियों को पुरस्कृत किया गया।

चिकित्सा अधीक्षक डॉ आशीष राय ने बताया कि मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय की तरफ से कॉलेजों में इस कार्यक्रम के आयोजन के लिए निर्देश दिया गया था। उसी के क्रम में राजकीय बालिका इंटर कॉलेज मोहम्मदाबाद में किशोर स्वास्थ्य मंच का आयोजन किया गया। जिसमें सभी छात्रों का हीमोग्लोबिन जांच कर एनिमिया व अन्य बीमारियों की पहचान एवं संदरभन साथ एनीमिया, आयरन और आई एफ ए की गोलियों के साप्ताहिक सेवन की जानकारी दी गई। इस दौरान उन्हें पोषण के महत्व के बारे में और प्रतिभागियों को किशोरी सूरक्षा योजना, विशेषकर मेन्स्टूअल हाईजीन, लिंग हिंसा , तम्बाकू एवं अन्य मादक पदार्थों का सेवन व उनके दुष्परिणामों से भी अवगत कराया गया।

इस दौरान आयुष्मान कार्ड लाभार्थियों को अपना आयुष्मान कार्ड जल्द से जल्द बनवा लेने के बारे में भी जानकारी दिया गया। जिस की जरूरत पड़ने पर आयुष्मान कार्ड का लाभ उठाया जा सके। इसके अलावा टीबी के लक्षणों के बारे में भी जानकारी दी गई और बताया गया कि अगर लगातार 2 सप्ताह तक खांसी आ रही हो तो उसकी जांच अवश्य करा ले। क्योंकि 2025 तक टीबी मुक्त भारत का प्रधानमंत्री का सपना है।

छात्रों को एनीमिया यौन एवं प्रजनन स्वास्थ्य तथा मानसिक स्वास्थ्य से सम्बंधित पेंटिंग प्रतियोगिता, वाद विवाद , रंगोली तथा भाषण प्रतियोगिताओ का भी आयोजन किया गया। जिसमें प्रथम स्थान पर इंटर की सरिता, द्वितीय स्थान प्राप्त रचना एवं मोनिका हाईस्कूल की छात्रा रही। एवं रंगोली प्रतियोगिता में जानकी क्लास 12, एवं रिमझिम क्लास10 रही । सभी को अधीक्षक डॉ आशीष राय के द्वारा पुरस्कृत किया गया।

इस कार्यक्रम में 181 छात्राओं की जांच किया गया जिसमें आरबीएसके की टीम डा आर के वर्मा, आशा सिंह स्टाफ नर्स, रंजना देवी एएनएम , डब्ल्यू एच ओ से अभिषेक द्विवेदी,मोहित एल टी , सतीश के साथ साथ विद्यालय से कंचन एवं निशा एवं अन्य रही।

कार्यक्रम का संचालन ब्लॉक कार्यक्रम प्रबंधक संजीव कुमार ने किया एवं विद्यालय प्रबंध समिति का कार्यक्रम के आयोजन को लेकर सभी को धन्यवाद ज्ञापित किया गया।