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नरवर हादसे में पीड़ित परिजनों से मिले अजय राय, मांगा सरकार से मुआवजा

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय पहुंचे गाजीपुर, नरवर विद्युत हादसे में पीड़ित परिजनों से मिले, सरकारी मदद नहीं मिलने पर जताया दुख।

सरकार से मृतकों के लिए मांगा 50 – 50 लाख रूपया और घायलों के लिए 15 लाख रूपया का मुआवजा।

गाज़ीपुर। उत्तर प्रदेश कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश सरकार के पूर्व मंत्री अजय राय ने मंगलवार को मरदह थाना क्षेत्र के नरवर गांव में काशीदास बाबा की पूजा के दौरान हुए विद्युत हादसे में चार लोगों की मौत और तीन गंभीर रूप से घायल लोगो के परिजनों से मिलकर दुख व्यक्त किया। कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि अब तक सरकारी मदद नहीं मिली है। उन्होंने कहा कि इस हादसे में बिजली विभाग की लापरवाही सामने आई है, सरकार को त्वरित कार्यवाही करते हुए मृतकों के आश्रितों को मुआवजा देना चाहिए। उन्होंने चारों मृतकों के लिए 50-50 लख रुपए और तीन घायलों के लिए 15 – 15 लाख रुपए मुआवजे की मांग की है।


अजय राय ने कहा कि 21 मई को हुए हादसे में चार लोगों की मौत हुई है, लेकिन अब तक सरकारी मदद नहीं मिली है, जो दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि बिजली विभाग का हाइ टेंशन तार मानक से नीचे है और इसका मेंटेनेंस भी नहीं हुआ है, हादसे के कारणों में ये भी एक मुख्य कारण है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने गाजीपुर जिलाध्यक्ष सुनील राम को निर्देश दिया है कि वह कल जिलाधिकारी से मिलकर पीड़ितों के लिए मुआवजे की मांग करेंगे और वह खुद मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर इस मामले में सरकारी मदद दिलवाएंगे और जरूरत पड़ने पर वे भी मिलेंगे।


प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने बताया है कि कांग्रेस कार्यकर्ताओं के दम पर अगला पंचायत चुनाव पूरी दमदारी से पार्टी लड़ेगी और जमीनी स्तर पर अपने नेताओं और कार्यकर्ताओं को मौका देगी।
ऑपरेशन सिंदूर के सवाल पर उन्होंने कहा कि मोदी जी जिसकी मांग में सिंदूर भर कर लाए उसे तो न्याय दे नहीं सके, इसमें सेना ने बेहतरीन काम किया है। ऑपरेशन सिंदूर के बाद बस वे अपनी मार्केटिंग में जुटे हैं और उन्हें बताना चाहिए कि सेना में वे किस पद पर हैं।


अजय राय ने मोदी सरकार की विदेश नीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि आज हमारी विदेश नीति कैसी है कि पहलगाम आतंकी हमले के बाद हमारे साथ कोई देश क्यों नहीं खड़ा दिखाई दे रहा है।
वहीं उन्होंने भारतीय डेलिगेशन में विदेश में गए कांग्रेस के सांसद शशि थरूर पर अपनी टिप्पणी देते हुए कहा कि वह एक बड़े नेता है और विदेश की धरती पर देश के लिए अच्छा काम कर रहे हैं और वहां उनके बयान से कांग्रेस पार्टी संतुष्ट है।

इस अवसर पर उनके साथ प्रमुख रूप से प्रदेश महासचिव देवेंद्र सिंह प्रदेश सचिव फसाहत हुसैन बाबू जिला अध्यक्ष सुनील राम शहर अध्यक्ष संदीप विश्वकर्मा एआईसीसी सदस्य रविकांत राय पूर्व विधायक अमिताभ अनिल दुबे पूर्व विधायक पशुपतिनाथ राय आनंद राय शैलेन्द्र कुमार ओमप्रकाश ओझा मनीष मुरेलिया अजय कुमार श्रीवास्तव राघवेंद्र कुमार ज्ञानेंद्र सिंह मुन्ना चंद्रिका सिंह हामिद अली रामनगीना पांडे विद्याधर पांडे राजेश गुप्ता आशुतोष गुप्ता सुमन चौबे धर्मेंद्र कुमार दिव्यांशु पांडे माधव कृष्ण राकेश राय सुधांशु तिवारी अनुराग पांडे शबीहूल हसन अखिलेश यादव आलोक यादव बृजेश कुमार सतिराम सिंह जिउत बंधन मिश्रा शमशेर अली आदिल गुलबास जेपी यादव ओम प्रकाश राजभर संजय यादव साजिद हुसैन आदि लोगों उपस्थित रहे।

गाजीपुर-वाराणसी हाइवे पर सड़क दुर्घटना में कई की मौत, कई घायल

गाजीपुर। प्रयागराज से महाकुंभ स्नान के बाद तीर्थ यात्रियों को लेकर आ रही गाड़ी नन्दगंज थाना क्षेत्र के कुसुम्ही कला के पास हाईवे पर हादसे का शिकार हो गई।। हादसे में कई लोग घायल हो गए। जबकि आधा दर्जन लोग की मौके पर ही मौत हो गई। सभी घायलों को जिला अस्पताल भेजा जा रहा है। जहां सभी का उपचार किया जा रहा है। एसपी डॉ. ईरज राजा ने बताया कि हादसे में कल 8 लोग की मौत हुई है और 15 लोग घायल है। जिन्हें उपचार के लिए जिला अस्पताल भेजा गया है।

सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले से लोगों में ख़ुशी की लहर:-आमिर अली

सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले से लोगों में ख़ुशी की लहर–आमिर अली

गाजीपुर। सुप्रीम कोर्ट ने आज मंगलवार को एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया। जिसका सीधा असर 10500 मदरसा टीचर्स पर पड़ा है। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से बहुत से लोगों ने राहत की सांस ली। सुप्रीम कोर्ट ने UP बोर्ड ऑफ मदरसा एजुकेशन एक्ट की वैधता बरकरार रखी है। यानी प्रदेश में मदरसा एक्ट जारी रहेगा। मदरसे चलते रहेंगे और 16000 मदरसों के स्टूडेंट सरकारी स्कूल नहीं भेजे जाएंगे। मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने यह आदेश सुनाते हुए हाईकोर्ट के उस फैसले को खारिज कर दिया, जिसमें मदरसा एक्ट को असंवैधानिक बताया गया था। हालांकि, मरदसे अब PG और रिसर्च सिलेबस तय नहीं कर पाएंगे। सुप्रीम कोर्ट ने इस पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने कहा- UP मदरसा एक्ट के सभी प्रावधान मूल अधिकार या संविधान के बेसिक स्ट्रक्चर का उल्लंघन नहीं करते हैं। कोर्ट के फैसले से करीब 17 लाख मदरसा छात्रों को राहत मिली है। 5 अप्रैल 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने मदरसा एक्ट को असंवैधानिक करार देने वाले फैसले पर रोक लगा दी थी। केंद्र और UP सरकार से इस पर जवाब भी मांगा था। इससे पहले, 22 अक्टूबर 2024 को चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की बेंच में इस पर सुनवाई हुई थी। चीफ जस्टिस ने कहा था- धर्मनिरपेक्षता का मतलब है- जियो और जीने दो।

कोर्ट ने कहा था- हाईकोर्ट प्रथम दृष्टया सही नहीं है। ये कहना गलत होगा कि यह मदरसा एक्ट धर्मनिरपेक्षता का उल्लंघन करता है। यहां तक कि यूपी सरकार ने भी हाईकोर्ट में मदरसा एक्ट का बचाव किया था। इसके बाद 22 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई और कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था।
मदरसा मुहम्मद अली दिनी असरी जखनिया के मैनेजर आमिर अली ने कहा के कोर्ट के इस फैसले से मदरसा संचालको,अध्यापको और छात्रों के परिजनों ने राहत की सांस ली है।
सपा जिला उपाध्यक्ष आमिर अली ने कहा कि कोर्ट का कहना था कि मदरसों के छात्रों को दूसरे स्कूल में ट्रांसफर करने का निर्देश देना ठीक नहीं है। देश में धार्मिक शिक्षा कभी भी अभिशाप नहीं रही है। बौद्ध भिक्षुओं को कैसे प्रशिक्षित किया जाता है? अगर सरकार कहती है कि उन्हें कुछ धर्मनिरपेक्ष शिक्षा प्रदान की जाए तो यह देश की भावना है।

दो शिक्षक नेता निलंबित, जांच के लिए टीम गठित

जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने दो शिक्षक नेताओं को किया निलंबित

गाजीपुर । जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी हेमंत राव ने करंडा ब्लाक के दो शिक्षक नेताओ मानवेन्द्र सिंह व चंद्रशेखर सिंह पर निलंबन की बड़ी कार्यवाही कर दी है। उक्त मामले की जांच हेतु त्रिस्तरीय खंड शिक्षा अधिकारियों की टीम का भी गठन कर दिया गया है। मालूम हो कि 15 अक्टूबर को महानिदेशक स्कूल शिक्षा लखनऊ के आदेश के क्रम में पूरे प्रदेश के सभी शिक्षा संकुलों पर शिक्षकों की बैठक आयोजित कर छात्रों को निपुण बनाने संबंधी एजेंडे पर चर्चा की जानी थी। यह बैठक शिक्षकों को विद्यालय में शिक्षण कार्य करने के उपरांत ही किया जाना था ताकि शिक्षण व्यवस्था में कोई व्यवधान उत्पन्न न हो सके । इसके लिये पूरे प्रदेश में मानीटरिंग के लिये सभी बी एस ए , बी ई ओ ,एस आर जी व ए आर पी को महानिदेशक द्वारा पूर्व में ही पत्र जारी कर आदेशित किया गया था। इसी क्रम में विकास खंड करंडा में भी सभी संकुलों में अपराह्न 2.30 बजे से 4 बजे के बीच शिक्षकों की मीटिंग विकास के विभिन्न शिक्षक संकुलों पर आयोजित होनी थी लेकिन शिक्षा संकुल मुड़वल की मीटिंग में सभी आदेशों की धज्जियां उड़ा दी गयी। मुड़वल संकुल के शिक्षक दोपहर बाद अपने विद्यालयों को समय से पहले ही बंद करके बैठक स्थल कंपोजिट विद्यालय धितुआं,करंडा पर एकत्रित हो गये। तत्पश्चात शिक्षक मीटिंग समय से पूर्व ही अपने अपने घर चले गये। उसी दौरान खंड शिक्षा अधिकारी करंडा रवीन्द्र सिंह मीटिंग मे प्रतिभाग करने व पर्यवेक्षण करने हेतु धितुआं विद्यालय पर पहुंचकर अवाक रह गये। क्योंकि मुड़वल संकुल के अधिकांश शिक्षक मीटिंग के निर्धारित समय से पूर्व ही घर जा चुके थे। धितुआ विद्यालय पर वहां कार्यरत शिक्षक उपस्थित सहायक अध्यापक चंद्रशेखर सिंह से संकुल बैठक का रजिस्टर बी ई ओ करंडा द्वारा मांगा गया, जिससे विवाद शुरू हुआ।  बी ई ओ करंडा शिक्षक नेताओं के दबाव में आये बिना तुरंत घटना की जानकारी बी एस ए व पुलिस के उच्चाधिकारियों को दे दी गयी।अब शिक्षक नेता अपने को फंसता देख बी एस ए कार्यालय की परिक्रमा शुरू कर दिये लेकिन बी एस ए ने बिना किसी दबाव के निष्पक्ष होकर दोनों शिक्षक नेताओं पर अनुशासनहीनता,शासकीय कार्यों में व्यवधान व शिक्षक कर्मचारी आचरण नियमावली के विपरीत कार्य के आरोप में निलंबित करते हुये त्रिस्तरीय जांच टीम गठित कर खंड शिक्षा अधिकारी सदर ,जखनियां व कासिमाबाद को संयुक्त रूप से सौंप दी गयी।दोनों शिक्षक नेताओं के निलंबन होने के पश्चात करंडा ब्लाक के अन्य शिक्षकों पर भी तलवार लटक रही है जिन्होंने संकुल बैठक में ससमय प्रतिभाग नहीं किया है। क्योंकि अब त्रिस्तरीय कमेटी द्वारा मामले की जांच होगी। बी एस ए के इस सख्त कार्यवाही से सभी शिक्षकों में हड़कंप मचा हुआ है। वहीं दूसरी तरफ बी ई ओ करंडा ने दोनों शिक्षकों के खिलाफ पुलिस अधीक्षक के यहां भी तहरीर देकर प्राथमिकी दर्ज कराने की मांग की है। अभी तक पुलिस द्वारा इस मामले में आगे कोई कार्यवाही नहीं की गयी है।हालांकि बी ई ओ की तहरीर पुलिस अधीक्षक ने संबंधित थाने को भेज दी है। दूसरी तरफ शिक्षक संगठन भी इस कार्यवाही को लेकर एकजुट हो रहे हैं लेकिन मामला पुलिस प्रशासन के पास होने के कारण शिक्षक नेता भी खुलकर इस घटना में सामने आने में कतरा रहे हैं। इस संदर्भ में देर शाम सभी शिक्षक संगठनों का संयुक्त प्रतिनिधिमंडल बी एस ए से मिलकर निलंबित शिक्षक नेताओं के बहाली की मांग करने पर अड़ा रहा। अब अगर मामले में पुलिस द्वारा प्राथमिकी दर्ज की गयी तो शिक्षक नेताओं की मुश्किलें काफी हद तक और बढ़ जायेंगी।

44 साल बाद मिला हाईकोर्ट से न्याय

गाजीपुर। दादा का किया पोता भुगतता है या भोगता है यह कहावत बहुत पुरानी है लेकिन गाजीपुर में यह कहावत उस वक्त चरितार्थ हुई जब 44 साल के बाद दादा के द्वारा किए हुए मुकदमे के मामले में उसके पोते को बिजली विभाग ने हाई कोर्ट के आदेश पर 1648000 का भुगतान डीडी बनाकर किया । जी हां यह पूरा मामला 44 साल पहले का है जब बाबूलाल शाह जो माल गोदाम रोड के रहने वाले थे और उन्होंने आटा चक्की और स्पेलर मिल लगाया हुआ था। उनपर बिजली विभाग का बकाया था, बकाया भुगतान न करने पर विभाग ने मुकदमा दर्ज किया जिसके बाद उपभोक्ता ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया सिविल कोर्ट ने आदेश दिया था कि उपभोक्ता को बिजली न काटी जाए और बिल जमा कर दिया जाए। बावजूद इसके बिजली काट दी गई थी जिसके बाद उपभोक्ता कोर्ट में चला गया था। वही कोर्ट के आदेश के बाद भी भुगतान नहीं करने पर 14 अगस्त 2024 को बिजली विभाग के सरकारी कार्यालय लाल दरवाजा को सील कर दिया था।

पूरा मामला 20 जनवरी 1980 का है जब सदर कोतवाली इलाके के माल गोदाम रोड के रहने वाले बाबूलाल साहू के द्वारा लगाए गए आटा चक्की और स्पेलर मशीन के लिए बिजली विभाग के द्वारा लिए कनेक्शन के बकाया बिल का भुगतान न करने पर विभाग ने मुकदमा दर्ज कराया था। इसके बाद उपभोक्ता ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और उस वक्त सिविल कोर्ट ने आदेश दिया था कि उपभोक्ता की बिजली न काटी जाए। और वह बिल जमा कर देगा बावजूद उसके विभाग ने उसकी बिजली काट दिया था। जिसके चलते उपभोक्ता का व्यवसाय बंद हो गया था और बाबूलाल साहू ने बिजली काटने से व्यवसाय में नुकसान का मुकदमा 20 जनवरी 1980 को दर्ज कराया था।

इस मामले में लगातार तारीख पर तारीख चलती रही और एक बार 26 मई 1990 को कोर्ट के आदेश पर बिजली विभाग का दफ्तर सील कर दिया गया था। बाद में कोर्ट के माध्यम से विभाग ने इसे खुलवा लिया और उसके बाद ही मामला कोर्ट में चला रहा था। इस मामले में कोर्ट ने 20 जनवरी 1980 से लेकर 1 मई 2014 तक करीब 34 वर्ष का ₹4000 प्रतिमाह के हिसाब से हर्जाना देने का आदेश 1 मई 2014 को दिया था। इसके आदेश के क्रम में पीड़ित को 1648000 मिलना था।

1980 से चल रहे मुकदमे के वादी बाबूलाल साहू जिनकी उम्र हो जाने के बाद उनकी मौत भी हो गई। और फिर इस मुकदमे की पैरवी उनके पोते कृष्ण कुमार साहू और गणेश साहू के द्वारा लगातार किया जाता रहा। कोर्ट के आदेश पर भी पीड़ित को हर्जाने की रकम नहीं देने पर एक बार फिर से 14 अगस्त 2024 को बिजली विभाग का लाल दरवाजा ऑफिस को सील कर दिया गया ।जिसमें अधीक्षण अभियंता बिजली विभाग, अधिशासी अभियंता मीटर के साथ ही अधिशासी अभियंता विद्युत खंड 3 का कार्यालय भी करीब 15 से 16 दिन तक बंद रहा। हालांकि बाद में विभाग के लोगों ने कोर्ट का सहारा लिया और कोर्ट के निर्देश पर इसे खोल दिया गया था।

यह पूरा मामला हाई कोर्ट में चल रहा था जिसमें पिछले दिनों हाईकोर्ट ने बिजली विभाग के साथ ही बाबूलाल के पोते को भी नोटिस भेजा था। इसी नोटिस की जानकारी पर दोनों पक्ष हाई कोर्ट पहुंचे थे और वहीं पर बिजली विभाग के अधिकारी ने कोर्ट के सामने ही 1648000 का बैंक ड्राफ्ट बाबूलाल के पोते गणेश साहू को सौपा।

गणेश साहू जो पेशे से अधिवक्ता भी हैं और अपने केस की वह खुद पैरवी भी कर रहे थे। उन्होंने बताया कि हाईकोर्ट के नोटिस पर वह हाई कोर्ट गए हुए थे । वहां पर बिजली विभाग के अधिकारी भी पहुंचे थे जहां पर मुझे 1648000 का बैंक ड्राफ्ट माननीय कोर्ट के सामने दिया गया। इसके बाद उन्होंने बताया कि अब उनका भुगतान हो जाने पर अब इस केस को खत्म मान लिया जाए।

नगर पालिका मकानों को करेगी ध्वस्त, दिया नोटिस

गाजीपुर। नगर पालिका परिषद गाजीपुर क्षेत्र के झंडा तर मोहल्ले के लोगों को करीब 10 सालों के बाद नरकीय जीवन से मुक्ति मिलने का रास्ता उस वक्त साफ हो गया जब नगर पालिका ने नाले पर अतिक्रमण कर बनाए गए 6 निर्माण के मलिक को 24 घंटे के अंदर मकान खाली करने का नोटिस जारी किया। इसके साथ ही  नोटिस भी जारी किया। नगर पालिका के कर्मचारियों ने 24 घंटे के अंदर मकान को खाली करने का अलॉउसमेंट भी किया। कहा कि अन्यथा की स्थिति में खुद उस मकान के मालिक जिम्मेदार होंगे। पूरा मामला नगर पालिका इलाके के झंडा तर मोहल्ले का है। जहां पिछले 8-10 सालों से पूरे शहर के पानी निकासी के लिए बनाए गए बड़े नाले पर स्थानीय व्यक्ति के द्वारा कब्जा कर मकान बना लिया गया था, जिसके चलते बारिश के दिनों में पूरा मोहल्ला तालाब के रूप में तब्दील हो जाता था लेकिन नगर पालिका के द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की जाती थी। हालांकि अतिक्रमणकारियों में मानिकचंद वर्मा के द्वारा पूर्व में हाई कोर्ट से उस नाले के निर्माण पर हुए अतिक्रमण के फेवर में एक स्टे ले लिया गया था

जिसमें हाईकोर्ट ने 2019 में इस मामले पर नगर पालिका और अतिक्रमणकारियों को बातचीत कर हल निकालने का निर्देश भी दिया था लेकिन नगर पालिका या फिर अतिक्रमणकारियों के द्वारा कोई कार्रवाई नहीं किया गया और आज तक अतिक्रमण जारी है। वहीं इस बार बारिश नहीं होने पर भी पूरा मोहल्ला गंदगी से लबालब होकर पूरा मोहल्ला कीचड़ युक्त तालाब बन चुका है जिसके निकासी के लिए नगर पालिका के द्वारा पिछले दो महीने से करीब पांच जनरेटर और मोटर भी लगाए गए हैं, जिससे पानी निकासी की जाती है। इतना ही नहीं अब तक करीब लाखों रुपए का ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव भी कर दिया गया लेकिन नतीजा जस का तस है। इसी बीच मोहल्ले के कुछ लोगों ने जब प्रशासन के द्वारा कोई कार्रवाई होता नही देखा तो हाईकोर्ट में एक पीआईएल दाखिल कर दिया। उसी पीआईएल पर करीब एक या दो दिन पूर्व हाई कोर्ट में तारीख थी।

हाईकोर्ट ने नगर पालिका से 2019 के कार्रवाई का स्टेटस पूछ लिया और अब आगे इस मामले में 22 सितंबर को अगला डेट लगा दिया है जिसके बाद नगर पालिका के द्वारा आनन फानन में आज सुबह उस अतिक्रमण के जद में आने वाले 6 मकान मालिकों को नोटिस जारी करते हुए अगले 24 घंटे में खाली करने का निर्देश दे चुकी है। यदि उनके द्वारा अतिक्रमण को खाली नहीं किया जाता है तो इसके लिए वह स्वयं जिम्मेदार होंगे। वही इस मामले पर नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी अमिता वरुण से जब बात की गई तो उन्होंने बताया कि इसके लिए लगातार कई बार नोटिस जारी किया जा चुका है। क्योंकि सार्वजनिक रूप से वह अतिक्रमण का मामला है। ऐसे में उस निर्माण को तुड़वाया जाना जरूरी है। जिसे जान माल का कोई हानि ना हो। इसको लेकर नोटिस जारी किया गया है । उन्होंने कहा कि इसके पूर्व जो नोटिस दिया गया था उन्हें चेतावनी दिया गया था लेकिन आज जो नोटिस दिया गया है वह तुड़वाने के लिए दिया गया है। ऐसे में नगर पालिका कानून के अंतर्गत उन्हें नोटिस जारी करते हुए मकान तुड़वाया जाएगा।

नामचीन स्कूल में हुआ छात्रा से छेड़छाड़, हुआ गिरफ्तार

गाजीपुर। जिले के दिलदारनगर स्थित एक नामचीन स्कूल के मैनेजर द्वारा कक्षा 7 की छात्रा से छेड़छाड़ करने का मामला सामने आया है। बता दें कि डालिम्स सनबीम स्कूल की छात्रा से इसी स्कूल के मैनेजर साकिब खान ने अपने केबिन में बुलाकर छेड़छाड़ की। दिलदारनगर थाना क्षेत्र के एक गांव निवासी पीड़िता डालिम्स सनबीम स्कूल रक्सहां में कक्षा सात की छात्रा है। इस बात की जानकारी होते ही पीड़िता के दादा ने दिलदारनगर थाने में आरोपी मैनेजर साकिब खान के खिलाफ तहरीर दी। तहरीर मिलते ही मुकदमा दर्ज कर दिलदारनगर थाना पुलिस ने आरोपी साकिब खान को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार करने के बाद पुलिस द्वारा आगे की कार्रवाई की जा रही है। मालूम हो कि पीड़िता के दादा द्वारा तहरीर दी गयी थी कि उनकी पोती डालिम्स सनबीम स्कूल रक्सहाँ दिलदारनगर में कक्षा 7 की छात्रा है। जिसके साथ 10 सितंबर 2024 को स्कूल के मैनेजर साकिब खान पुत्र सब्बीर खान द्वारा अपने केबिन में बुलाकर मोबाइल नं0 माँगते हुए छेड़खानी की गयी थी। पीढ़ित छात्रा द्वारा इस घटना का वीडियो बनाकर भी सोसल मीडिया पर भी डाला गया था। जिसके बाद इस मामले में दिलदारनगर पुलिस द्वारा छेड़खानी के मामले में कार्यवाही करते हुए डालिम्स सनबीम स्कूल रक्सहाँ दिलदारनगर के मैनेजर को पॉक्सो एक्ट में गिरफ्तार किया गया। इस संबंध में आरोपी के खिलाफ थाना में 129/2024 धारा 75 बीएनएस व 7/8 पाक्सो एक्ट का अभियोग पंजीकृत हुआ। इसके बाद आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया।

अतिक्रमण कारियों पर चला रेलवे प्रशासन का चला बुलडोजर

ग़ाज़ीपुर। जिले में रेलवे प्रशासन का बुलडोजर गरजा। सिटी रेलवे स्टेशन से लेकर अफीम फैक्ट्री तक इस अभियान के तहत कई अवैध कब्जों को रेलवे प्रशासन ध्वस्त किया गया। मालूम हो कि बीते महीने ही रेलवे प्रशासन ने अतिक्रमणकारियों को नोटिस जारी करते हुए कब्जा हटा लेने का निर्देश दिया था। ऐसा न करने पर रेलवे प्रशासन ने बुलडोजर लगाकर अवैध कब्जो को ध्वस्त करने की चेतावनी भी दी थी। मंगलवार को रेलवे की जमीन को कब्जा मुक्त कराने के लिए चलाए गए अभियान से अवैध कब्जदारों में हड़कम्प की स्थिति देखने को मिली। पिछले दिनों रेलवे की तरफ से अतिक्रमणकारियों को नोटिस जारी किया गया था और कुछ लोगों के अवैध कब्जों का ध्वस्तीकरण भी किया गया था। इस दौरान 67 अस्थाई अतिक्रमण हटाये गए थे। इसके बाद अन्य अतिक्रमणकारियों को चिन्हित किया गया। अतिक्रमण को स्वयं हटाने के लिए नोटिस जारी करते हुए उनके मकान पर नोटिस चस्पा कर दिया गया। बावजूद इसके तमाम कब्जदारों ने अतिक्रमण नहीं हटाए। ऐसे में रेलवे प्रशासन को आज यह अभियान चलाना पड़ा। जानकारी के मुताबिक सिटी रेलवे स्टेशन से लंका होते हुए अफीम फैक्ट्री तक रेलवे की लगभग 5 लाख स्क्वायर फीट की जमीन है। जिस पर वर्षों से लोग अतिक्रमण किए हुए हैं। लेकिन अब रेलवे प्रशासन ने अपनी जमीन की सुध ली है।

ज्ञात हो कि ब्रितानी हुकूमत काल में मुख्य डाकघर के पास अफीम फैक्ट्री में कच्चे माल को लाने और तैयार अफीम को सुरक्षित पहुंचाने के लिए अंग्रेजों को सुरक्षित संसाधन की जरूरत महसूस हुई। इसके लिए उन्होंने अफीम फैक्ट्री से लेकर लंका होते हुए सिटी रेलवे स्टेशन तक रेलवे ट्रैक बिछा दी। इसी ट्रैक से ट्रेन के जरिए सिटी रेलवे स्टेशन से कच्चा माल अफीम फैक्ट्री के लिए आता था। साथ ही तैयार अफीम को इसी रूट से सिटी रेलवे स्टेशन तक भेजा जाता था। आजादी के बाद ट्रैक पर ट्रेनें दौड़नी बंद हो गईं। नतीजतन रेलवे ट्रैक अनुपयोगी हो गई। समय बीतने के साथ रेलवे के भूखंड पर कब्जा हो गया। इसी कब्जे को हटाने के लिए रेलवे महकमे ने अब अभियान चलाया है। रेलवे के जनसंपर्क अधिकारी अशोक कुमार ने बताया कि सिटी रेलवे स्टेशन, लंका और अफीम फैक्ट्री के पास रेलवे की जमीनों को आज कब्जा मुक्त कराया जा रहा है। इस अभियान में आरपीएफ की फोर्स भी लगाई गई है। कब्जा मुक्त कराने से पहले सभी कब्जदारों को नोटिस भी जारी की गई थी।

अवैध अतिक्रमण पर रेलवे का चलेगा बुलडोज़र

अफीम की धुलाई के लिए बनाए गए रेलवे ट्रैक के आसपास अतिक्रमण  पर रेलवे चलाएगा बुलडोज़र

5 लाख स्क्वायर फीट जमीन कब्जे से मुक्त कराएगी रेलवे प्रशासन

गाजीपुर। ब्रिटिश हुकूमत काल में मुख्य डाकघर के पास अफीम फैक्ट्री में कच्चे माल को लाने और तैयार अफीम को सुरक्षित पहुंचाने के लिए अंग्रेजों को सुरक्षित संसाधन की जरूरत महसूस हुई। इसके लिए उन्होंने अफीम फैक्ट्री से लेकर लंका होते हुए सिटी रेलवे स्टेशन तक रेलवे ट्रैक बिछा दी। इसी ट्रैक से ट्रेन के जरिए सिटी रेलवे स्टेशन से कच्चा माल अफीम फैक्ट्री के लिए आता था। साथ ही तैयार अफीम को इसी रूट से सिटी रेलवे स्टेशन तक भेजा जाता था। आजादी के बाद ट्रैक पर ट्रेनें दौड़नी बंद हो गईं। नतीजन रैक अनुपयोगी हो गई। समय बीतने के साथ रेलवे की जमीन पर कब्जा शुरू हो गया। इसी कब्जे को हटाने के लिए रेलवे ने 40 लोगों को नोटिस देने के साथ ही उनके मकान पर निशान भी लगा दिया है और एक दिन बाद यदि स्वयं नहीं हटाया जाता है तो रेलवे प्रशासन बुलडोजर चलाने की कार्रवाई करेगा।गाजीपुर सिटी के रेलवे स्टेशन से एक रेल लाइन गाजीपुर की अपनी फैक्ट्री तक के लिए अंग्रेजों ने अफीम की ढुलाई के लिए बनवाया था और इस रेलवे ट्रैक पर काफी दिनों तक अफीम की ढुलाई हुआ करती थी। लेकिन करीब 20 से 25 साल पहले इस रेल लाइन पर इसकी ढुलाई बंद हो गई ।  इसके बाद धीरे-धीरे इस रेल लाइन के आसपास लोगों ने कब्जा कर मकान बनाना आरंभ कर दिया। जिसको लेकर पिछले दिनों रेलवे की तरफ से अतिक्रमणकारियों को नोटिस जारी किया गया था और कुछ लोगों के मकान का ध्वस्तीकरण भी किया गया था।

  इस दौरान 67  अस्थाई अतिक्रमण हटाए गए थे और उसके बाद रेलवे का यह कार्रवाई कुछ दिनों के लिए रुक गया था। अब अन्य अतिक्रमणकारियों जिनमें से 40 लोगों को चिन्हित  रेलवे प्रशासन ने किया है।  13 अगस्त से पूर्व अपने अतिक्रमण को स्वयं हटाने के लिए नोटिस जारी करते हुए उनके मकान पर नोटिस चश्पा कर दिया गया है। बताते चले की सिटी रेलवे स्टेशन से लंका होते हुए अफीम फैक्ट्री तक रेलवे की लगभग 5 लाख स्क्वायर फीट की जमीन है। जिस पर वर्षों से लोग रेलवे की जमीन पर अतिक्रमण किए हुए हैं । जिसमें अस्थाई अतिक्रमण भी है। टिन शेड , झोपड़ी से लेकर पक्के निर्माण तक कर लिए गए। लेकिन अब रेलवे प्रशासन ने अपनी जमीन की सुध ली है। इस अतिक्रमण को हटाए जाने के बाद खाली हुए जमीन पर रेलवे की तरफ से भवन का निर्माण कर सभी सुविधाओं से युक्त कर रेल कर्मियों को एलाट किया जाएगा। ऐसे में 13 अगस्त से दूसरे चरण का अभियान चलाने को लेकर आरपीएफ इंचार्ज गाजीपुर सिटी स्टेशन अमित राय ने बताया कि अतिक्रमण हटाने को लेकर तैयारियां पूरी कर ली गई है।

ईराज राजा होंगे गाजीपुर के नए एसपी

गाजीपुर। उत्‍तर प्रदेश सरकार ने दस आईपीएस अधिकारियों का स्थानांतरण किया है। जिसमें गाजीपुर के पुलिस अधीक्षक ओमवीर सिंह को पुलिस उपायुक्‍त पुलिस कमिश्‍नरेट लखनऊ के पद पर भेजा गया। ईराज राजा को पुलिस अधीक्षक बिजनौर से पुलिस अधीक्षक गाजीपुर के पद पर भेजा गया है।

डॉ. ईराज राजा, मूल रूप से आगरा के रहने वाले हैं। वर्ष 2011 में उन्होंने MBBS की शिक्षा को पूरा की और फिर 4 सालों तक बिजनौर जिले में मेडिकल ऑफिसर के पद पर तैनात रहे। इसके बाद 2017 में UPSC की परीक्षा को पास किया। दरअसल, उत्तर प्रदेश के जालौन में तैनात IPS डॉ. ईराज राजा 2017 बैच के आईपीएस है। सरकार ने उन्हें जब भी मौका दिया तब वह उम्मीदों पर खरे उतरे और अपराधियों की कमर तोड़कर उन्हें सलाखों के पीछे भेज दिया। डॉक्टर का पेशा छोड़ UPSC का एग्जाम क्लियर किया और ट्रेनिंग पूरी करने के बाद पहली पोस्टिंग लखनऊ में मिली। इसके बाद भी 4 महीने मेरठ में ASP रहें। फिर गाजियाबाद जिले के ग्रामीण क्षेत्र में 24 महीने एसपी का कार्यभार संभाला और इन 2 सालों के दौरान करीब 150 हाफ एनकाउंटर किए। इसके बाद जनवरी 2023 में बुंदेलखंड के जालौन जिले का चार्ज मिला। यहां पर भी अपने स्वभाव के मुताबिक अपराधियों पर नकेल कसनी शुरू कर दी। इसका नतीजा यह हुआ कि यहां पर भी हाफ एनकाउंटर की हाफ सेंचुरी बन गई।