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नगर पालिका मकानों को करेगी ध्वस्त, दिया नोटिस

गाजीपुर। नगर पालिका परिषद गाजीपुर क्षेत्र के झंडा तर मोहल्ले के लोगों को करीब 10 सालों के बाद नरकीय जीवन से मुक्ति मिलने का रास्ता उस वक्त साफ हो गया जब नगर पालिका ने नाले पर अतिक्रमण कर बनाए गए 6 निर्माण के मलिक को 24 घंटे के अंदर मकान खाली करने का नोटिस जारी किया। इसके साथ ही  नोटिस भी जारी किया। नगर पालिका के कर्मचारियों ने 24 घंटे के अंदर मकान को खाली करने का अलॉउसमेंट भी किया। कहा कि अन्यथा की स्थिति में खुद उस मकान के मालिक जिम्मेदार होंगे। पूरा मामला नगर पालिका इलाके के झंडा तर मोहल्ले का है। जहां पिछले 8-10 सालों से पूरे शहर के पानी निकासी के लिए बनाए गए बड़े नाले पर स्थानीय व्यक्ति के द्वारा कब्जा कर मकान बना लिया गया था, जिसके चलते बारिश के दिनों में पूरा मोहल्ला तालाब के रूप में तब्दील हो जाता था लेकिन नगर पालिका के द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की जाती थी। हालांकि अतिक्रमणकारियों में मानिकचंद वर्मा के द्वारा पूर्व में हाई कोर्ट से उस नाले के निर्माण पर हुए अतिक्रमण के फेवर में एक स्टे ले लिया गया था

जिसमें हाईकोर्ट ने 2019 में इस मामले पर नगर पालिका और अतिक्रमणकारियों को बातचीत कर हल निकालने का निर्देश भी दिया था लेकिन नगर पालिका या फिर अतिक्रमणकारियों के द्वारा कोई कार्रवाई नहीं किया गया और आज तक अतिक्रमण जारी है। वहीं इस बार बारिश नहीं होने पर भी पूरा मोहल्ला गंदगी से लबालब होकर पूरा मोहल्ला कीचड़ युक्त तालाब बन चुका है जिसके निकासी के लिए नगर पालिका के द्वारा पिछले दो महीने से करीब पांच जनरेटर और मोटर भी लगाए गए हैं, जिससे पानी निकासी की जाती है। इतना ही नहीं अब तक करीब लाखों रुपए का ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव भी कर दिया गया लेकिन नतीजा जस का तस है। इसी बीच मोहल्ले के कुछ लोगों ने जब प्रशासन के द्वारा कोई कार्रवाई होता नही देखा तो हाईकोर्ट में एक पीआईएल दाखिल कर दिया। उसी पीआईएल पर करीब एक या दो दिन पूर्व हाई कोर्ट में तारीख थी।

हाईकोर्ट ने नगर पालिका से 2019 के कार्रवाई का स्टेटस पूछ लिया और अब आगे इस मामले में 22 सितंबर को अगला डेट लगा दिया है जिसके बाद नगर पालिका के द्वारा आनन फानन में आज सुबह उस अतिक्रमण के जद में आने वाले 6 मकान मालिकों को नोटिस जारी करते हुए अगले 24 घंटे में खाली करने का निर्देश दे चुकी है। यदि उनके द्वारा अतिक्रमण को खाली नहीं किया जाता है तो इसके लिए वह स्वयं जिम्मेदार होंगे। वही इस मामले पर नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी अमिता वरुण से जब बात की गई तो उन्होंने बताया कि इसके लिए लगातार कई बार नोटिस जारी किया जा चुका है। क्योंकि सार्वजनिक रूप से वह अतिक्रमण का मामला है। ऐसे में उस निर्माण को तुड़वाया जाना जरूरी है। जिसे जान माल का कोई हानि ना हो। इसको लेकर नोटिस जारी किया गया है । उन्होंने कहा कि इसके पूर्व जो नोटिस दिया गया था उन्हें चेतावनी दिया गया था लेकिन आज जो नोटिस दिया गया है वह तुड़वाने के लिए दिया गया है। ऐसे में नगर पालिका कानून के अंतर्गत उन्हें नोटिस जारी करते हुए मकान तुड़वाया जाएगा।

नामचीन स्कूल में हुआ छात्रा से छेड़छाड़, हुआ गिरफ्तार

गाजीपुर। जिले के दिलदारनगर स्थित एक नामचीन स्कूल के मैनेजर द्वारा कक्षा 7 की छात्रा से छेड़छाड़ करने का मामला सामने आया है। बता दें कि डालिम्स सनबीम स्कूल की छात्रा से इसी स्कूल के मैनेजर साकिब खान ने अपने केबिन में बुलाकर छेड़छाड़ की। दिलदारनगर थाना क्षेत्र के एक गांव निवासी पीड़िता डालिम्स सनबीम स्कूल रक्सहां में कक्षा सात की छात्रा है। इस बात की जानकारी होते ही पीड़िता के दादा ने दिलदारनगर थाने में आरोपी मैनेजर साकिब खान के खिलाफ तहरीर दी। तहरीर मिलते ही मुकदमा दर्ज कर दिलदारनगर थाना पुलिस ने आरोपी साकिब खान को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार करने के बाद पुलिस द्वारा आगे की कार्रवाई की जा रही है। मालूम हो कि पीड़िता के दादा द्वारा तहरीर दी गयी थी कि उनकी पोती डालिम्स सनबीम स्कूल रक्सहाँ दिलदारनगर में कक्षा 7 की छात्रा है। जिसके साथ 10 सितंबर 2024 को स्कूल के मैनेजर साकिब खान पुत्र सब्बीर खान द्वारा अपने केबिन में बुलाकर मोबाइल नं0 माँगते हुए छेड़खानी की गयी थी। पीढ़ित छात्रा द्वारा इस घटना का वीडियो बनाकर भी सोसल मीडिया पर भी डाला गया था। जिसके बाद इस मामले में दिलदारनगर पुलिस द्वारा छेड़खानी के मामले में कार्यवाही करते हुए डालिम्स सनबीम स्कूल रक्सहाँ दिलदारनगर के मैनेजर को पॉक्सो एक्ट में गिरफ्तार किया गया। इस संबंध में आरोपी के खिलाफ थाना में 129/2024 धारा 75 बीएनएस व 7/8 पाक्सो एक्ट का अभियोग पंजीकृत हुआ। इसके बाद आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया।

अतिक्रमण कारियों पर चला रेलवे प्रशासन का चला बुलडोजर

ग़ाज़ीपुर। जिले में रेलवे प्रशासन का बुलडोजर गरजा। सिटी रेलवे स्टेशन से लेकर अफीम फैक्ट्री तक इस अभियान के तहत कई अवैध कब्जों को रेलवे प्रशासन ध्वस्त किया गया। मालूम हो कि बीते महीने ही रेलवे प्रशासन ने अतिक्रमणकारियों को नोटिस जारी करते हुए कब्जा हटा लेने का निर्देश दिया था। ऐसा न करने पर रेलवे प्रशासन ने बुलडोजर लगाकर अवैध कब्जो को ध्वस्त करने की चेतावनी भी दी थी। मंगलवार को रेलवे की जमीन को कब्जा मुक्त कराने के लिए चलाए गए अभियान से अवैध कब्जदारों में हड़कम्प की स्थिति देखने को मिली। पिछले दिनों रेलवे की तरफ से अतिक्रमणकारियों को नोटिस जारी किया गया था और कुछ लोगों के अवैध कब्जों का ध्वस्तीकरण भी किया गया था। इस दौरान 67 अस्थाई अतिक्रमण हटाये गए थे। इसके बाद अन्य अतिक्रमणकारियों को चिन्हित किया गया। अतिक्रमण को स्वयं हटाने के लिए नोटिस जारी करते हुए उनके मकान पर नोटिस चस्पा कर दिया गया। बावजूद इसके तमाम कब्जदारों ने अतिक्रमण नहीं हटाए। ऐसे में रेलवे प्रशासन को आज यह अभियान चलाना पड़ा। जानकारी के मुताबिक सिटी रेलवे स्टेशन से लंका होते हुए अफीम फैक्ट्री तक रेलवे की लगभग 5 लाख स्क्वायर फीट की जमीन है। जिस पर वर्षों से लोग अतिक्रमण किए हुए हैं। लेकिन अब रेलवे प्रशासन ने अपनी जमीन की सुध ली है।

ज्ञात हो कि ब्रितानी हुकूमत काल में मुख्य डाकघर के पास अफीम फैक्ट्री में कच्चे माल को लाने और तैयार अफीम को सुरक्षित पहुंचाने के लिए अंग्रेजों को सुरक्षित संसाधन की जरूरत महसूस हुई। इसके लिए उन्होंने अफीम फैक्ट्री से लेकर लंका होते हुए सिटी रेलवे स्टेशन तक रेलवे ट्रैक बिछा दी। इसी ट्रैक से ट्रेन के जरिए सिटी रेलवे स्टेशन से कच्चा माल अफीम फैक्ट्री के लिए आता था। साथ ही तैयार अफीम को इसी रूट से सिटी रेलवे स्टेशन तक भेजा जाता था। आजादी के बाद ट्रैक पर ट्रेनें दौड़नी बंद हो गईं। नतीजतन रेलवे ट्रैक अनुपयोगी हो गई। समय बीतने के साथ रेलवे के भूखंड पर कब्जा हो गया। इसी कब्जे को हटाने के लिए रेलवे महकमे ने अब अभियान चलाया है। रेलवे के जनसंपर्क अधिकारी अशोक कुमार ने बताया कि सिटी रेलवे स्टेशन, लंका और अफीम फैक्ट्री के पास रेलवे की जमीनों को आज कब्जा मुक्त कराया जा रहा है। इस अभियान में आरपीएफ की फोर्स भी लगाई गई है। कब्जा मुक्त कराने से पहले सभी कब्जदारों को नोटिस भी जारी की गई थी।

अवैध अतिक्रमण पर रेलवे का चलेगा बुलडोज़र

अफीम की धुलाई के लिए बनाए गए रेलवे ट्रैक के आसपास अतिक्रमण  पर रेलवे चलाएगा बुलडोज़र

5 लाख स्क्वायर फीट जमीन कब्जे से मुक्त कराएगी रेलवे प्रशासन

गाजीपुर। ब्रिटिश हुकूमत काल में मुख्य डाकघर के पास अफीम फैक्ट्री में कच्चे माल को लाने और तैयार अफीम को सुरक्षित पहुंचाने के लिए अंग्रेजों को सुरक्षित संसाधन की जरूरत महसूस हुई। इसके लिए उन्होंने अफीम फैक्ट्री से लेकर लंका होते हुए सिटी रेलवे स्टेशन तक रेलवे ट्रैक बिछा दी। इसी ट्रैक से ट्रेन के जरिए सिटी रेलवे स्टेशन से कच्चा माल अफीम फैक्ट्री के लिए आता था। साथ ही तैयार अफीम को इसी रूट से सिटी रेलवे स्टेशन तक भेजा जाता था। आजादी के बाद ट्रैक पर ट्रेनें दौड़नी बंद हो गईं। नतीजन रैक अनुपयोगी हो गई। समय बीतने के साथ रेलवे की जमीन पर कब्जा शुरू हो गया। इसी कब्जे को हटाने के लिए रेलवे ने 40 लोगों को नोटिस देने के साथ ही उनके मकान पर निशान भी लगा दिया है और एक दिन बाद यदि स्वयं नहीं हटाया जाता है तो रेलवे प्रशासन बुलडोजर चलाने की कार्रवाई करेगा।गाजीपुर सिटी के रेलवे स्टेशन से एक रेल लाइन गाजीपुर की अपनी फैक्ट्री तक के लिए अंग्रेजों ने अफीम की ढुलाई के लिए बनवाया था और इस रेलवे ट्रैक पर काफी दिनों तक अफीम की ढुलाई हुआ करती थी। लेकिन करीब 20 से 25 साल पहले इस रेल लाइन पर इसकी ढुलाई बंद हो गई ।  इसके बाद धीरे-धीरे इस रेल लाइन के आसपास लोगों ने कब्जा कर मकान बनाना आरंभ कर दिया। जिसको लेकर पिछले दिनों रेलवे की तरफ से अतिक्रमणकारियों को नोटिस जारी किया गया था और कुछ लोगों के मकान का ध्वस्तीकरण भी किया गया था।

  इस दौरान 67  अस्थाई अतिक्रमण हटाए गए थे और उसके बाद रेलवे का यह कार्रवाई कुछ दिनों के लिए रुक गया था। अब अन्य अतिक्रमणकारियों जिनमें से 40 लोगों को चिन्हित  रेलवे प्रशासन ने किया है।  13 अगस्त से पूर्व अपने अतिक्रमण को स्वयं हटाने के लिए नोटिस जारी करते हुए उनके मकान पर नोटिस चश्पा कर दिया गया है। बताते चले की सिटी रेलवे स्टेशन से लंका होते हुए अफीम फैक्ट्री तक रेलवे की लगभग 5 लाख स्क्वायर फीट की जमीन है। जिस पर वर्षों से लोग रेलवे की जमीन पर अतिक्रमण किए हुए हैं । जिसमें अस्थाई अतिक्रमण भी है। टिन शेड , झोपड़ी से लेकर पक्के निर्माण तक कर लिए गए। लेकिन अब रेलवे प्रशासन ने अपनी जमीन की सुध ली है। इस अतिक्रमण को हटाए जाने के बाद खाली हुए जमीन पर रेलवे की तरफ से भवन का निर्माण कर सभी सुविधाओं से युक्त कर रेल कर्मियों को एलाट किया जाएगा। ऐसे में 13 अगस्त से दूसरे चरण का अभियान चलाने को लेकर आरपीएफ इंचार्ज गाजीपुर सिटी स्टेशन अमित राय ने बताया कि अतिक्रमण हटाने को लेकर तैयारियां पूरी कर ली गई है।

ईराज राजा होंगे गाजीपुर के नए एसपी

गाजीपुर। उत्‍तर प्रदेश सरकार ने दस आईपीएस अधिकारियों का स्थानांतरण किया है। जिसमें गाजीपुर के पुलिस अधीक्षक ओमवीर सिंह को पुलिस उपायुक्‍त पुलिस कमिश्‍नरेट लखनऊ के पद पर भेजा गया। ईराज राजा को पुलिस अधीक्षक बिजनौर से पुलिस अधीक्षक गाजीपुर के पद पर भेजा गया है।

डॉ. ईराज राजा, मूल रूप से आगरा के रहने वाले हैं। वर्ष 2011 में उन्होंने MBBS की शिक्षा को पूरा की और फिर 4 सालों तक बिजनौर जिले में मेडिकल ऑफिसर के पद पर तैनात रहे। इसके बाद 2017 में UPSC की परीक्षा को पास किया। दरअसल, उत्तर प्रदेश के जालौन में तैनात IPS डॉ. ईराज राजा 2017 बैच के आईपीएस है। सरकार ने उन्हें जब भी मौका दिया तब वह उम्मीदों पर खरे उतरे और अपराधियों की कमर तोड़कर उन्हें सलाखों के पीछे भेज दिया। डॉक्टर का पेशा छोड़ UPSC का एग्जाम क्लियर किया और ट्रेनिंग पूरी करने के बाद पहली पोस्टिंग लखनऊ में मिली। इसके बाद भी 4 महीने मेरठ में ASP रहें। फिर गाजियाबाद जिले के ग्रामीण क्षेत्र में 24 महीने एसपी का कार्यभार संभाला और इन 2 सालों के दौरान करीब 150 हाफ एनकाउंटर किए। इसके बाद जनवरी 2023 में बुंदेलखंड के जालौन जिले का चार्ज मिला। यहां पर भी अपने स्वभाव के मुताबिक अपराधियों पर नकेल कसनी शुरू कर दी। इसका नतीजा यह हुआ कि यहां पर भी हाफ एनकाउंटर की हाफ सेंचुरी बन गई।

आत्मदाह करने एसपी ऑफिस पहुंचा  परिवार

आत्मदाह करने एसपी ऑफिस पहुंचा पीड़ित परिवार

दबंग परिवार के दबंगई से परेशान होकर उठाया यह कदम

गाजीपुर। पुलिस ऑफिस पर बुधवार को उस वक्त हड़कंप मच गया जब एक ही परिवार के पति-पत्नी और दो बच्चों ने सामूहिक रूप से आत्मदाह करने का प्रयास पुलिस अधीक्षक कार्यालय पर किया। इन लोगों ने पुलिसकर्मियों के सामने ही अपने ऊपर पेट्रोल से भरा बोतल उड़ेल दिया। इस दौरान वहां पर खड़े पुलिस कर्मी और एल आई यू के सिपाहियों ने तत्काल महिला के हाथ से पेट्रोल का बोतल छीना और उन सभी लोगों को पड़कर पुलिस ऑफिस में अंदर ले जाकर बातचीत करना शुरू किया। पूछताछ में पता चला कि यह लोग थाना करीमुद्दीनपुर के कामुपुर गांव के रहने वाले हैं और इन लोगों के गांव में ही एक दबंग परिवार के दबंगई से परेशान है, जिसको लेकर कई बार थाने पर भी गए लेकिन थाने पर उनकी सुनवाई नहीं हो रही है, जिससे परेशान होकर इन लोगों ने इस तरह का आज कदम उठाया है। पीड़ित करीमुद्दीनपुर थाना क्षेत्र के कामुपुर मुबारकपुर निवासी अशोक यादव, पत्नी गीता यादव, पुत्र युवराज यादव, पुत्री रागिनी यादव और पुत्री वैष्णवी यादव ने बताया कि पड़ोसी एवं पट्टीदार दयाशंकर यादव, सुरेंद्र यादव व सुरेश यादव से पानी बहाने को लेकर विवाद है। वही इस घटना के बाद पुलिस के अधिकारी पीड़ित दंपति और उनके बच्चों से लगतार वार्ता करने में जुटे हुए हैं ताकि सच्चाई का पता चल सके।

देखें गाजीपुर में अमित शाह का लाइव रोड शो

गाजीपुर में लोकसभा प्रत्याशी पारस राय के समर्थन में गृह मंत्री अमित शाह ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय की मूर्ति पर माल्यार्पण कर रोड शो शुरू किया।

मुख्तार के कब्र पर फातिया पढ़ेंगे अब्बास, सुप्रीम कोर्ट ने दिया इजाजत

गाजीपुर। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (9 अप्रैल) को उत्तर प्रदेश के विधायक अब्बास अंसारी को अपने पिता मुख्तार अंसारी के सम्मान में 10 अप्रैल को होने वाले ‘फातिहा’ समारोह में शामिल होने की अनुमति दे दी। मुख्तार अंसारी गैंगस्टर से राजनेता बने थे और 28 मार्च को आजीवन कारावास की सजा काटते समय दिल का दौरा पड़ने से उनकी मौत हो गई थी। जस्टिस सूर्यकांत और केवी विश्वनाथन की बेंच ने आदेश दिया कि अब्बास को आज ही (शाम 5 बजे से पहले) रस्म में शामिल होने के लिए उनके गृहनगर ले जाया जाए और 13 अप्रैल को वापस कासगंज जेल लाया जाए। गौरतलब है कि अब्बास अंसारी फिलहाल शस्त्र लाइसेंस मामले में जेल में हैं। पिछले साल नवंबर में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उन्हें जमानत देने से इनकार कर दिया था और कहा था कि नई दिल्ली में उनके परिसर से भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद बरामद किया गया था। हाईकोर्ट ने आगे कहा कि अंसारी द्वारा गवाहों को प्रभावित करने और सबूतों से छेड़छाड़ करने का जोखिम है। हालांकि मौजूदा याचिका शुरू में अंसारी को अपने पिता के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए दायर की गई थी, लेकिन इसे समय पर सूचीबद्ध नहीं किया जा सका।  इस प्रकार, पिछली तिथि पर अंसारी को याचिका में संशोधन करने और प्रतिवादी-राज्य को इसकी एक प्रति प्रदान करने की अनुमति दी गई थी। आज सुनवाई के दौरान, वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने अब्बास की ओर से आग्रह किया कि अंतिम संस्कार की रस्में पहले ही पूरी हो चुकी थीं, जिसमें वह शामिल नहीं हो सके क्योंकि मामला समय पर सूचीबद्ध नहीं था। यह प्रार्थना की गई कि अब्बास को फातिहा समारोह (और उसके बाद कुछ समय) के लिए अपने परिवार के सदस्यों के साथ रहने की अनुमति दी जाए, जो कल के लिए निर्धारित है। उत्तर प्रदेश राज्य की ओर से पेश एएजी गरिमा प्रसाद ने अब्बास की ओर से की गई प्रार्थना का पुरजोर विरोध करते हुए कहा कि वह एक हिस्ट्रीशीटर है, जिसका चित्रकूट जेल के अंदर का आचरण उसे कासगंज जेल में स्थानांतरित करने का कारण बना। एएजी ने आगे दावा किया कि कल के लिए कोई समारोह निर्धारित नहीं था और ‘फातिहा’ में भाग लेने की अनुमति मांगने वाला आवेदन राज्य को नहीं दिया गया था। आपत्ति जताते हुए सिब्बल ने कहा, “ऐसा मत कहो, आपको सेवा दी गई है। हम सेवा का सबूत दिखा सकते हैं”। हालांकि एएजी ने कहा कि संशोधित रिट याचिका, जो पिछले आदेश के अनुसार दी गई थी, में ‘फातिहा’ के बारे में कोई कथन नहीं था। उन्होंने सुझाव दिया कि एक खुशहाल त्योहार आने वाला है, और अब्बास शायद इसके लिए अदालत से राहत पाने की कोशिश कर रहा था। पक्षों की दलीलें सुनने के बाद, बेंच ने नोट किया कि अब्बास के पिता का 28 मार्च को निधन हो जाना विवाद का विषय नहीं था। इसके अलावा, अब्बास ने विशेष रूप से दावा किया कि फातिहा कल के लिए निर्धारित थी। ऐसे में, याचिका को अस्वीकार करने का कोई कारण नहीं था।
इस पृष्ठभूमि में, निम्नलिखित निर्देश पारित किए गए:
(1) अब्बास को कासगंज जेल से उसके गृहनगर (गाजीपुर) पुलिस हिरासत में और पर्याप्त सुरक्षा के साथ ले जाया जाएगा। पुलिस महानिदेशक, यूपी को इस संबंध में आवश्यक कार्रवाई करनी है!
(2) पुलिस अधिकारी, जेल अधिकारियों के साथ समन्वय करके यह सुनिश्चित करेंगे कि अब्बास आज जल्द से जल्द अपनी यात्रा शुरू करें, शाम 5 बजे से पहले नहीं!
(3) अब्बास को पुलिस हिरासत में कल की फातिहा की रस्म में भाग लेने की अनुमति दी जाएगी। रस्में समाप्त होने के बाद, उसे अस्थायी रूप से स्थानीय जेल यानी सेंट्रल जेल,गाजीपुर में स्थानांतरित कर दिया जाएगा!
(4) गाजीपुर में पुलिस अधिकारी यह सत्यापित करेंगे कि क्या 11 अप्रैल से कोई अन्य रस्में होनी हैं। यदि ऐसा है, तो अब्बास को पुलिस हिरासत में रहते हुए ऐसी रस्मों में भाग लेने की अनुमति दी जाएगी।10 अप्रैल के बाद कोई रस्म न होने पर भी अब्बास को 11 और 12 अप्रैल को अपने परिवार/आगंतुकों से मिलने की अनुमति होगी।
(5) पुलिस अधिकारी आगंतुकों की तलाशी लेंगे और सुनिश्चित करेंगे कि कोई भी व्यक्ति (अधिकृत हथियार सहित) फातिहा वाले स्थान या अब्बास के पैतृक घर पर हथियार न ले जाए।
गरिमा प्रसाद द्वारा अब्बास के मीडियाकर्मियों से बातचीत न करने के संबंध में स्पष्टीकरण मांगे जाने पर सिब्बल ने आश्वासन दिया कि वह केवल परिवार के सदस्यों से मिलेंगे। पीठ ने सिब्बल के इस कथन को दर्ज किया कि अब्बास मीडियाकर्मियों से बातचीत नहीं करेंगे और केवल अपने परिवार के सदस्यों से मिलेंगे।अंत में यह स्पष्ट किया गया कि प्रवर्तन निदेशालय द्वारा भी निर्देशों का अनुपालन किया जाएगा (क्योंकि उत्तर प्रदेश राज्य को केवल 3 एफआईआर में अब्बास को स्थानांतरित करने का अधिकार है)।

नाबालिग बच्चों को दी बाइक या कार तो जाएंगे जेल, भरेंगे जुर्माना

लखनऊ। अब प्रदेश में 18 साल से कम आयु के कोई भी व्यक्ति किसी सार्वजनिक स्थल में दो-चार पहिया वाहन नहीं चलाएगा। शासन की ओर से इसे लेकर जारी निर्देश के बाद परिवहन विभाग के सहयोग से माध्यमिक विद्यालयों में सख्ती की जाएगी। इसके लिए अभियान चलाकर युवाओं को जागरूक किया जाएगा। साथ ही छात्रों को सड़क सुरक्षा के प्रति विभिन्न माध्यमों से जानकारी भी दी जाएगी। इसके तहत हर विद्यालय में एक रोड सेफ्टी क्लब का गठन किया जाएगा। सभी कक्षाओं में एक-एक विद्यार्थी को रोड सेफ्टी कैप्टन बनाया जाएगा। विद्यालय में एक क्लास सड़क सुरक्षा की जानकारी पर भी लगेगी। हर विद्यालय में एक शिक्षक को नोडल बनाकर परिवहन विभाग के सहयोग से ऑनलाइव व ऑफलाइन प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। वहीं 18 साल से कम आयु के बच्चे कोई भी मोटर वाहन न चलाएं, इसके लिए जागरूकता के साथ सख्ती भी की जाएगी। परिवहन आयुक्त चंद्र भूषण सिंह की ओर से इसे लेकर विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। इसमें कम उम्र में वाहन चलाने से होने वाली दुर्घटनाओं पर रोक लगाने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही माध्यमिक शिक्षा निदेशक से इसके लिए विद्यालयों में अभियान चलाने को कहा गया है। इसी क्रम में माध्यमिक शिक्षा निदेशक डॉ. महेंद्र देव ने सभी डीआईओएस को इसके लिए निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा है कि शिक्षकों को भी रोड सेफ्टी नोडल शिक्षक नामित किया जाए। प्रार्थना सभा में विद्यार्थियों को सड़क सुरक्षा की जानकारी दें और उन्हें इसकी शपथ भी दिलाई जाए। विद्यालयों में सड़क सुरक्षा के नियमों से संबंधित वॉल पेंटिंग कराई जाए। विद्यार्थियों के वाट्सअप ग्रुप बनाकर इससे संबंधित जानकारी व सुझाव साझा किए जाएं। निदेशक ने कहा है कि सोशल मीडिया प्लेटफार्म का भी इसके लिए प्रयोग किया जाए। छात्रों को बताया जाए कि बिना लाइसेंस के वाहन चलाने पर उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया है कि विद्यालयों में रोड सेफ्टी क्ल्ब के गठन के लिए प्रति विद्यालय पांच हजार कुल 44.95 लाख रुपये के बजट की और विद्यालय की दीवारों पर यातायात नियमों व स्लोगन लिखवाने के लिए भी प्रति विद्यालय 500 रुपये के बजट की व्रूवस्था के लिए परिवहन आयुक्त को पत्र भेजा गया है। निदेशक ने कहा है कि परिवहन विभाग के अधिकारियों से समन्वयक कर इस पर कार्यक्रम आयोजित किए जाएं।

सुप्रीम कोर्ट ने दिया अफजाल अंसारी को बड़ी राहत

नई दिल्ली। गाज़ीपुर से बसपा के पूर्व सांसद अफजाल अंसारी को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। गैंगस्टर मामले में चार साल की सजा मिलने के बाद संसद की सदस्यता गंवा चुके बीएसपी के पूर्व सांसद अफजाल अंसारी की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का आदेश आया है। अफजाल अंसारी को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिली है। अफजाल की दोषसिद्धि पर सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम रोक लगाई है। हाईकोर्ट को 30 जून 2024 तक अफजाल के मामले की सुनवाई पूरी कर फैसला देने का आदेश दिया गया है। गाजीपुर लोकसभा सीट पर उप चुनाव नहीं होगा। एमपी लैड स्कीम के पैसे का इस्तेमाल हो सकेगा।
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस सूर्यकांत की बेंच ने यह फैसला सुनाया है। अफजाल अंसारी को सुप्रीम कोर्ट से राहुल गांधी की तर्ज पर राहत दिए जाने की मांग की गई थी। अपनी याचिका में अफजाल अंसारी ने 2007 के गैंगस्टर एक्ट मामले में अपनी दोषसिद्धि को निलंबित करने की मांग सुप्रीम कोर्ट से की थी।