102/108 एंबुलेंस के पायलट हुए सम्मानित
गाजीपुर। गणतंत्र दिवस के पावन अवसर पर पूरे देश में सरकारी और गैर सरकारी संस्थाएं इसे राष्ट्रीय पर्व के रूप में मनाया। इसी क्रम में गाजीपुर के स्वास्थ्य विभाग में चलने वाले 102 और 108 एम्बुलेंस जो मरीज को क्विक रिस्पांस करते हुए उनके मौजूदा स्थल से पास के स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंच कर उन्हें जीवन दान देने का काम करती है। उनके अधिकारी और कर्मचारियों ने भी इस पर्व को हर्षोल्लाष के साथ मनाया। इस मौके पर बेस्ट पायलट का अवार्ड भी दिया गया। जिला प्रभारी संदीप चौबे ने बताया कि 26 जनवरी के पावन पर्व को हम सभी लोगों ने काफी खुशी के साथ मनाया। इस दौरान मरीज को क्विक रिस्पांस कर स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचा कर उनकी जान बचाने के साथ ही साथ गर्भवती महिलाओं को स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचाने में प्रथम रहे पायलट राम प्रवेश को बेस्ट पायलट का पुरस्कार देखकर उनका हौसला अफजाई किया गया। ताकि अन्य पायलट भी मरीज को कम से कम समय में स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचाएं। इस अवसर पर ब्लॉक प्रभारी दीपक कुमार राय, अखंड प्रताप ,अरविंद कुमार सहित अन्य कर्मचारी ,एंबुलेंस के पायलट और इमरजेंसी मेडिकल टेक्नीशियन मौजूद रहे।
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रोगियों को दी गई योजनाओं की जानकारी
रोगियों को दी गई योजनाओं की जानकारी
एचआईवी एड्स के रोगियों को दी गई सामाजिक सुरक्षा एवं सरकारी योजनाओं की जानकारी
समय से दवा का सेवन करने, पौष्टिक आहार लेने व स्वच्छता बनाए रखने को लेकर दिया गया परामर्श
मेडिकल कॉलेज से संबद्ध जिला पुरुष चिकित्सालय में हुआ दो दिवसीय जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन


गाज़ीपुर। ह्यूमन इम्यूनो डेफिशियेंसी वायरस (एचआईवी) – एक्वायर्ड इम्यून डेफिशियेंसी सिंड्रोम (एड्स) के रोगियों को उपचार व पोषण के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से गोरा बाजार स्थित महर्षि विश्वामित्र स्वशासी राजकीय मेडिकल कालेज से संबद्ध जिला पुरुष चिकित्सालय सभागार में मंगलवार व बुधवार को दो दिवसीय जन जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। जिलाधिकारी आर्यका अखौरी के निर्देशन व मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. देश दीपक पाल, मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य प्रो. डॉ. आनंद मिश्रा तथा मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राजेश कुमार सिंह के नेतृत्व में आयोजित शिविर में एचआईवी रोगियों को सामाजिक सुरक्षा एवं सरकारी योजनाओं से सम्बन्धित जानकारी दी गई।
इस दौरान जिला एचआईवी एड्स नियंत्रण अधिकारी डॉ. मनोज कुमार सिंह ने रोगियों को समय से दवा का सेवन करने और पौष्टिक आहार लेने के बारे में विस्तृत परामर्श दिया। उन्होंने कहा कि अपने आस पास का वातावरण स्वच्छ रखें, साफ सफाई बनाए रखें, बार-बार हाथ धोएं और बीमार लोगों से दूरी बनाकर रखें। एचआईवी का निदान होने के बाद डॉक्टर के पास नियमित रूप से चेकअप कराने जाएं। कोई भी दवा लेने से पहले डॉक्टर से परामर्श लें , क्योंकि अपने आप किसी दवा के सेवन से साइड इफेक्ट का खतरा हो सकता है। प्रधानाचार्य प्रो डॉ आनंद मिश्रा ने कहा कि हम सभी लोगों की जिम्मेदारी है कि अपनी सुरक्षा के साथ अपने परिवार, समाज व देश में रह रहे सभी लोगों की सुरक्षा करें और नैतिक जिम्मेदारी के कारण एड्स को समाज में फैलने से रोकें। सुरक्षित तरीकों के प्रयोग से हम इसके प्रसार को बहुत आसानी से रोक सकते हैं। एचआईवी एड्स के रोगियों से किसी भी प्रकार का भेदभाव नहीं करना चाहिए, उन्हें भी समानता का अधिकार मिलना चाहिए। जिला पुरुष चिकित्सालय स्थित एंटी रेट्रोवायरल थेरेपी (एoआरoटीo) सेन्टर की काउंसलर अंजू सिंह ने एचआईवी एड्स अधिनियम के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि एचआईवी ग्रसित रोगियों की सुरक्षा के लिए गोपनीयता बनाये रखना हम सभी की जिम्मेदारी है। अगर इसका कोई उल्लंघन करता है तो उसे तीन महीने से लेकर दो वर्ष की सजा हो सकती है या अधिकतम एक लाख रुपए तक का जुर्माना या दोनों सजा हो सकती हैं। इसके साथ ही उन्होंने डायल 1097 के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अगर किसी भी रोगी को ए०आर०टी० सेन्टर पर किसी भी तरह की समस्या हो तो तुरन्त 1097 पर कॉल करके अवगत कराएं ताकि जल्द से जल्द उनकी समस्या का निराकरण किया जा सके। इस मौके पर स्वयं सेवी संस्थाओं – अहाना, ज्योति ग्रामीण संस्था, केयर एंड सपोर्टर एवं सुभिक्षा के सभी कर्मचारियों को प्रशस्ति पत्र व स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में जिला प्रोबेशन अधिकारी, एसीएमओ डॉ. रामकुमार, एनटीईपी के डीपीसी डॉ. मिथिलेश कुमार सिंह, पीपीएम समन्वयक अनुराग कुमार पाण्डेय, एआरटी सेन्टर की काउंसलर संगीता सिंह एवं एआरटी के सर्वेश कुमार, राहुल पांडेय, सौरभ कुमार, राहुल मौर्या, वैभव विशाल, एसटीआई काउंसलर, आईसीटीसी, पीपीसीटीसी काउंसलर, अहाना, सीएससी तथा सुभिक्षा के सभी कर्मचारी उपस्थित थे।
100 से ज्यादा बच्चों का हो चुका है क्लब फुट का इलाज और ऑपरेशन

3 सालों में 100 से ऊपर बच्चों का हो चुका है क्लब फुट का इलाज और ऑपरेशन (टेनोटोमी)
गाजीपुर। अनुष्का फाउंडेशन फॉर एलिमिनेटिंग क्लबफुट (एएफईसी) एक गैर-लाभकारी संगठन है जो भारत में क्लबफुट को खत्म करने के लिए समर्पित है। बुधवार को मेडिकल कॉलेज स्थित जिला अस्पताल में अनुष्का फाउंडेशन, कोटक एसेट मैनेजमेंट के सीएसआर इनिशिएटिव के सहयोग से 4 बच्चों का क्लब फुट के तहत सफल ऑपरेशन (टेनोटोमी) एवं इलाज किया गया। जनपद में चल रहे इस तरह के ऑपरेशन (टेनोटोमी)का अवलोकन करने के लिए डॉ शुभलाल देवरिया से गाजीपुर जिला अस्पताल पहुंचे जहां पर पिछले कई बुधवार से क्लब फुट के तहत चल रहे इलाज एवं ऑपरेशन के तहत 25 बच्चों का अवलोकन किया। मेडिकल कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ केके यादव ने बताया कि इस तरह के क्लब फुट का ऑपरेशन एवं इलाज पिछले 3 सालों से चल रहा है। अब तक करीब इस कार्यक्रम के तहत करीब 100 से ऊपर बच्चों का क्लब फुट के तहत ऑपरेशन एवं इलाज किया गया। उन्होंने बताया कि दो बच्चो का टेनोटोमी तथा दो बच्चो का प्लास्टर एवम् 21 बच्चो का इलाज का अवलोकन करने के लिए देवरिया के डॉ शुभलाल आज गाजीपुर आए हुए थे जो की पॉन्सेटी मेथड के ट्रेनर है उन्होंने सभी बच्चों का अवलोकन किया जो कि जूते (ब्रेस) पहन रहे है अब तक गाजीपुर क्लब्फ़ूट क्लिनिक पर 100 से ऊपर बच्चो का इलाज किया जा चुका हैं। मेडिकल कॉलेज गाजीपुर के डॉ सतीश सिंह ने बताया की क्लबफुट, एक जन्म दोष जिसमें एक या दोनों पैर अंदर की ओर मुड़े होते हैं, बच्चों में विकलांगता का एक प्रचलित कारण है, जो भारत में सालाना 800 नवजात शिशुओं में से 1 को प्रभावित करता है। हमारे देश में हर साल 33,000 बच्चे क्लबफुट के साथ पैदा होते हैं। उचित उपचार के बिना, क्लबफुट वाले बच्चों को स्थायी विकलांगता का सामना करना पड़ता है। अनुपचारित क्लबफुट बेहद दर्दनाक हो सकता है, और प्रभावित बच्चों में भेदभाव, उपेक्षा, मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं, अशिक्षा और शारीरिक और यौन शोषण का खतरा अधिक होता है। सौभाग्य से, पोन्सेटी विधि, एक न्यूनतम लागत की स्वर्ण मानक प्रक्रिया है जो एक प्रभावी समाधान प्रदान करती है। कार्यक्रम का उद्देश्य जिला अस्पतालों / मेडिकल कॉलेज में आर्थोपेडिक डॉक्टरों की क्षमता बढ़ाकर स्थानीय उपचार प्रदान करना है। अनुष्का फाउंडेशन देश के हर जिले में क्लबफुट कार्यक्रम लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है ताकि हर बच्चे को इलाज तक पहुंच मिल सके। एएफईसी पूरे भारत में 10 राज्यों और 137 जिलों में क्लबफुट कार्यक्रम संचालित करता है, इसकी स्थापना के बाद से इसमें 12,000 से अधिक बच्चे नामांकित हैं। क्लबफुट क्लिनिक पर सपोर्टिव सुपरविज़न के दौरान ब्रांच मैनेजर अनुष्का फ़ाउंडेशन भूपेश सिंह तथा आनन्द विश्वकर्मा ज़िला समन्वयक ग़ाज़ीपुर क्लब्फूट कार्यक्रम आदी लोग उपस्थित रहे।
108 एंबुलेंस ने मरीज की बचाई जान
108 एंबुलेंस ने गंभीर मरीज की बचाई जान
हार्ट के मरीज को 108 ने ईलाज करते हुए पहुचाया बीएचयू वाराणसी

गाजीपुर।108 और 102 एम्बुलेंस स्वास्थ्य विभाग की तरफ से आमजन के लिए निशुल्क एक ऐसी सुविधा जिससे अब तक न जाने कितने लोगों की जान बचाई जा चुकी है। इसी कड़ी में बुधवार को एक बार फिर हार्ट प्रॉब्लम के क्रिटिकल मरीज को जिला अस्पताल से हायर सेंटर बीएचयू वाराणसी को इमरजेंसी मेडिकल टेक्नीशियन की देखरेख में पहुंचाया गया। रास्ते में स्थिति गंभीर होने पर इलाज करते हुए मरीज को बीएचयू वाराणसी में एडमिट कराया गया। जहां उसकी हालत खतरे से बाहर है।
102 और 108 एंबुलेंस के प्रभारी दीपक राय ने बताया कि करंडा ब्लॉक के लोखंच आंध्रकला गांव के रहने वाले कालू बिंदु जिनके हार्ट में प्रॉब्लम थी। वह जिला अस्पताल में एडमिट थे। यहां के डॉक्टर के द्वारा उन्हें बेहतर इलाज के लिए बीएचयू वाराणसी के लिए रेफर किया था। जिसके लिए 108 एंबुलेंस की डिमांड की गई और उस डिमांड के सापेक्ष मनिहारी ब्लॉक के ईएमटी संतोष यादव और पायलट कन्हैयालाल कन्हैया लाल यादव अपनी गाड़ी लेकर तत्काल जिला अस्पताल पहुंचे। उसके बाद मरीज को वाराणसी के लिए रेफर कर कर चले। इस दौरान रास्ते में एक दो जगह मरीज को समस्या आई। जिसके लिए इमरजेंसी मेडिकल टेक्नीशियन संतोष यादव ने ईआरसीपी से सलाह लेकर मरीज को रास्ते में दवा देते हुए बीएचयू तक पहुंचाया। जहां पर उसे एडमिट करा कर उसका इलाज शुरू किया गया। जहां पर वह खतरे से बाहर है।
ग्राम पंचायतें होंगी टीबी मुक्त, विभाग पूर्ण रूप से तैयार

जनपद की 22 ग्राम पंचायतें होंगी टीबी मुक्त, स्वास्थ्य व पंचायती राज विभाग पूर्ण रूप से तैयार
‘टीबी मुक्त ग्राम पंचायत’को सफल बनाए जाने के लिए जनपद स्तरीय सत्यापन समितियां गठित
निर्धारित छह मानकों के अनुसार होगा ग्राम पंचायतों व उनके आंकड़ों का भौतिक सत्यापन
गाज़ीपुर। प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान व राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम के अंतर्गत ग्राम पंचायतों को टीबी मुक्त बनाए जाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। इसी के मद्देनजर जनपद के 12 ब्लॉक की 22 ग्राम पंचायतों को ‘टीबी मुक्त ग्राम पंचायत’ बनाए जाने के लिए चिन्हित किया गया है। शासन से निर्धारित छह मानकों को पूरा कर प्रथम चरण में सभी 22 ग्राम पंचायतों को टीबी मुक्त ग्राम पंचायत घोषित किया जाएगा। यह जानकारी मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ देश दीपक पाल ने दी।
सीएमओ ने बताया कि राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम के अंतर्गत चिन्हित ग्राम पंचायतों को टीबी मुक्त ग्राम पंचायत बनाए जाने के लिए जनपद स्तरीय तीन सत्यापन समिति का गठन किया गया है। ब्लॉक स्तर पर गठित समितियों के द्वारा चिन्हित ग्राम पंचायतों एवं उनके आंकड़ों का भौतिक सत्यापन का कार्य पूर्ण किया जाएगा। इस अभियान को शत-प्रतिशत सफल बनाए जाने के लिए स्वास्थ्य एवं पंचायती राज विभाग पूर्ण रूप से तैयार व सक्रिय हैं। इस संबंध में मंगलवार को शासन स्तर से विभिन्न दिशा निर्देश प्राप्त हुये हैं, जिनको जिला पंचायती राज अधिकारी (डीपीआरओ) अंशुल कुमार मौर्य के सहयोग से पूरा किया जाएगा।
जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ मनोज कुमार सिंह ने बताया कि राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम के अंतर्गत जनपद के 12 ब्लॉक से 22 ग्राम पंचायतों क्रमशः रेवतीपुर से दशमंतपुर व सुगमालिया, कासिमाबाद से रोहिली व शक्करपुर, सादात से भीरभन व रानीपुर, बारचवार से पिहुली व कुबरी, मोहम्मदाबाद से करनपुरा, भांवरकोल से गोदीखास, करंडा से लीलापुर व सोनहरिया, बिरनों से माधोपुर व बल्लीपुर, देवकली से शिवदासीचक व लोनेपुर, सैदपुर से ईचवल व गौरी, मरदह से कंसहरी व कलवार, जमानिया से रामपुर सलेनपुर, करजही, जगदीशपुर व सरया को चिन्हित किया गया है। इस कार्य में पंचायती राज विभाग व अन्य विभागों का सहयोग लिया जाएगा।
एनटीईपी के जिला कार्यक्रम समन्वयक (डीपीसी) डॉ मिथलेश कुमार ने बताया कि जनपद स्तरीय सत्यापन टीम में मुख्य चिकित्सा अधिकारी को अध्यक्ष एवं जिला क्षय रोग अधिकारीको सहयोजक नामित किया गया है। जनपद स्तरीय सत्यापन कमेटी में मुख्य चिकित्सा अधिकारी एवं उनके द्वारा नामित सदस्य जिला पंचायती राज अधिकारी एवं उनके द्वारा नामित सदस्य, जिला क्षय रोग अधिकारी, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के प्रतिनिधि, मेडिकल कॉलेज के कम्युनिटी मेडिसिन के प्रतिनिधि एवं अन्य विभागों के प्रतिनिधियों को सम्मिलित करते हुए टीम का गठन किया गया है।प्रत्येक टीम में दो जनपद स्तरीय अधिकारियों (प्रथम सदस्य के रूप में चिकित्सा अधिकारी, आईएमएके प्रतिनिधि, मेडिकल कालेज के कम्युनिटी मेडिसिन के प्रतिनिधि, द्वितीय सदस्य के रूप में डीपीआरओ, एडीपीआरओ, उप डीपीआरओ एवं अन्य विभाग के प्रतिनिधि) को सम्मिलित किया गया है। इसके अतिरिक्त प्रत्येक टीम को एनटीईपी के सदस्य फैसिलिटेटर के रूप में सहयोग प्रदान करेंगे। इन टीमों के द्वारा भौतिक सत्यापन किया जाएगा।
यह होंगे निर्धारित मानक – डीपीसी डॉ मिथलेश कुमार ने बताया कि टीबी मुक्त ग्राम पंचायत बनाए जाने के लिए शासन स्तर से छह मानक निर्धारित किए गए हैं, जो इस प्रकार हैं-
• संभावित टीबी जांच की संख्या (प्रति 1000 की आबादी पर),
• टीबी नोटिफिकेशन दर (प्रति 1000 की आबादी पर),
• टीबी उपचार की सफलता दर,
• दवा संवेदनशीलता जांच की दर,
• निक्षय पोषण योजना
• टीबी मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत टीबी मरीजों को प्राप्त पोषण संबंधी सहायता
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के एएनएम की हुई विदाई

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मनिहारी पर एएनएम सविता चौबे का हुआ विदाई समारोह
गाजीपुर। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मनिहारी पर तैनात एएनएम सविता चौबे जो 31 दिसंबर को अपने नौकरी के कार्य अवधि को पूरा करते हुए सेवानिवृत हुई। उनका सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर सोमवार को भव्य तरीके से विदाई समारोह का आयोजन अधीक्षक डॉ धर्मेंद्र कुमार की अध्यक्षता में आयोजित किया गया।। इस अवसर पर संबंधित कर्मियों ने सविता चौबे के कार्यकाल के दौरान किए गए बेहतर कार्य की सराहना किया। बीपीएम धीरज विश्वकर्मा ने बताया कि सविता चौबे जो नियमित टीकाकरण के साथ ही साथ विभागीय कार्यों को पूरी तत्परता से निभाते हुए सेवानिवृत हुई है। साथ ही उन्होंने बताया कि कोविड-19 के दौरान जिस तरह से महामारी चली हुई थी । और टीकाकरण का कार्य जोरो पर था। ऐसे वक्त में सविता चौबे ने अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। जिसे विभाग कभी भुला नहीं पाएगा। इस कार्यक्रम में अधीक्षक डॉ धर्मेंद्र कुमार और अन्य सभी कर्मचारियों की तरफ से सविता चौबे का विधिवत विदाई समारोह किया गया। जिसमें उन्हें रामचरितमानस ,छड़ी वह अन्य उपहार दिए गए। इस अवसर पर विपिन तिवारी, बीसीपीएम विजय बहादुर, अनुराग चौबे, जेपी यादव ,रंजू देवी उपस्थिति रही। वहीं कार्यक्रम का संचालन लल्लन राम के द्वारा किया गया।
54 नए कुष्ठ रोगी हुए चिन्हित
कुष्ठ रोगी खोजी अभियान में 54 नए कुष्ठ रोगी हुए चिन्हित

ग़ाज़ीपुर।कुष्ठ रोगी खोजी अभियान जो 21 दिसंबर से 4 जनवरी तक पूरे जनपद में पल्स पोलियो अभियान की तर्ज पर चलाया गया। जिसका सकारात्मक परिणाम भी निकाल कर सामने आया। इस अभियान में 54 कुष्ठ रोगियों की खोज हुई है।जिन्हें एमडीटी के तहत इलाज किया गया। साथ ही यह संभव है कि इस अभियान का आने वाले कुछ समय में और परिणाम निकल कर सामने आए। क्योंकि बहुत सारे लोग सामाजिक डर से अपने इस रोग को किसी को बताना नहीं चाहते हैं। इस अभियान में स्वास्थ्य कर्मियों के साथ ही साथ एसीएमओ और नोडल कुष्ठ रोग डॉ रामकुमार खुद इस अभियान में ग्राउंड पर पहुंचकर रोगियों की खोज की।
नोडल डॉ रामकुमार ने बताया कि यह अभियान एक महत्वपूर्ण अभियान में था। क्योंकि सरकार के द्वारा इसे पल्स पोलियो अभियान की तर्ज पर चलाया गया था। जिसमें घर-घर स्वास्थ्य कर्मी पहुंचे और रोगियों के बारे में जानकारी हासिल किया। इसी क्रम में वह स्वयं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सैदपुर के अंतर्गत ग्राम होलीपुर सहित कई गांव में रोगियों के खोज में जुटे।
यह अभियान 21 दिसंबर से शुरू होकर 4 जनवरी तक चला। जिसमें करीब 35 लाख लोगों का परीक्षण किया गया। जिसमें से 2060 संदिग्ध रोगी पाए गए। संदिग्ध की जांच के पश्चात 54 कुष्ठ रोगी की पुष्टि हुई। इसके पश्चात इन सभी मरीजों को एमडीटी योजना के तहत इलाज किया गया।
कुष्ठ एक संक्रामक रोग है। यह ‘माइकोबैक्टीरियम लेप्रे’ नामक जीवाणु के कारण होता है, जो एक एसिड-फास्ट रॉड के आकार का बेसिलस है। यह त्वचा के अल्सर, तंत्रिका क्षति और मांसपेशियों को कमजोर करता है। कुष्ठ रोग में त्वचा पर हल्के रंग के धब्बे दिखाई देते हैं।धब्बे संवेदना रहित होते हैं और रोग की शुरुआत बहुत धीमी गति व शांति से होती है। यह तंत्रिकाओं, त्वचा और आंखों को प्रभावित करता है। सभी संक्रामक रोगों में कुष्ठ रोग अत्यधिक घातक है, क्योंकि इस रोग में स्थाई शारीरिक दिव्यांगता हो सकती है एवं इस रूप में विशेष रुप से रोग में दिखने वाली दिव्यांगता ही मरीज के साथ होने वाले सामाजिक भेदभाव के लिए जिम्मेदार है।
यदि समय पर इसका इलाज नहीं किया जाए तो यह गंभीर विकृति और दिव्यांगता का कारण बन सकता है। कुष्ठ रोगियों के पैरों के तलवों में छाले, मांसपेशियों की कमजोरी और वजन में कमी सामान्य सी बात है।
कुष्ठ रोग का शीघ्र पता चल जाए तो इसका उपचार मल्टी ड्रग थेरेपी (एम.डी.टी.) द्वारा संभव है। एमडीटी के उपचार के बाद इस रोग की पुनरावृत्ति दुर्लभ होती है | कुष्ठ रोग के लक्षण दिखने पर अपने क्षेत्र की आशा या एएनएम से संपर्क करें या निकटतम स्वास्थ्य केंद्र पर जाएं। सभी सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर एमडीटी निःशुल्क उपलब्ध है।
न्यू मार्केट के दो दवा विक्रेताओं पर गिरी गाज

गाजीपुर। आयुक्त खाद्य सुरक्षा एवं औषद्यि प्रशासन लखनऊ के आदेश पर जिलाधिकारी तथा अपर जिलाधिकारी (वि0/रा0) के निर्देश पर औषधि निरीक्षक, खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन गाजीपुर द्वारा नगर में स्थित दो थोक दवा विक्रेता चौरसिया मेडिसिन कार्नर, प्रो0-नितिन चौरसिया न्यू मार्केट मिश्र बाजार और दवा केन्द्र प्रो0-धीरज गुप्ता न्यू मार्केट मिश्र बाजार के प्रतिष्ठान का दिनांक 15 सितम्बर 2023 को औचक निरीक्षण कर छापा मारा गया था। छापेमारी के दौरान इनके प्रतिष्ठान पर रखे हुए दस्तावेजो का गहन निरीक्षण किया गया। दस्तावेजो के निरीक्षण से पता चला कि उपरोक्त प्रतिष्ठान नशीली दवाओं और फेन्सिडिल कफ सिरफ (कोडिनयुक्त) के क्रय-विक्रय में लिप्त हैं। इस मामले में आख्या सहायक आयुक्त (औषधि) वाराणसी मण्डल वाराणसी को अग्रिम कार्यवाही हेतु प्रेषित की गयी थी। जिसके क्रम में बुधवार को सहायक आयुक्त (औषधि) वाराणसी मण्डल वाराणसी द्वारा कार्यवाही करते हुए दोनो थोक विक्रेताओं के प्रोडक्ट परमीशन को निरस्त कर दिया गया है। जनपद में नशीली दवाओं के दुरुपयोग को रोकने हेतु औषधि निरीक्षक, खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन गाजीपुर द्वारा निरन्तर जांच प्रक्रिया जारी रहेगी। इस दौरान नशीली दवाओं के दुरुपयोग करने पर दोषियों के विरुद्ध औषधि प्रसाधन एवं सामग्री अधिनियम-1940 के अन्तर्गत विधिक कार्यवाही की जायेगी।
सीएमओ कार्यालय में मिला बीपीएम व बीसीपीएम को प्रशिक्षण
टीबी उन्मूलन के लिए निक्षय पोर्टल पर सही फीडिंग व कार्यों की मॉनिटरिंग जरूरी
सीएमओ कार्यालय में क्षय उन्मूलन कार्यक्रम के तहत बीपीएम व बीसीपीएम को मिला प्रशिक्षण
अधिक नोटिफिकेशन, स्क्रीनिंग, निर्धारित मानकों पर शत-प्रतिशत रिपोर्टिंग पर भी दिया ज़ोर
वर्ष 2025 तक देश को टीबी मुक्त बनाना हम सभी की प्राथमिकता – डीटीओ

गाज़ीपुर। जनपद के गोरा बाजार स्थित मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय सभागार में शनिवार को राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम (एनटीईपी) के अंतर्गत एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान समस्त 16 प्राथमिक व सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों के ब्लॉक कार्यक्रम प्रबन्धक (बीपीएम) और ब्लॉक सामुदायिक प्रक्रिया प्रबन्धक (बीसीपीएम) को प्रशिक्षित किया गया। जिलाधिकारी आर्यका अखौरी के निर्देशन व मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ देश दीपक पाल के नेतृत्व में सभी प्रतिभागियों को निक्षय पोर्टल 2.0 पर टीबी नोटिफिकेशन व निक्षय पोषण योजना की सही फीडिंग, ज्यादा से ज्यादा लोगों की स्क्रीनिंग, नोटिफिकेशन और टीबी मुक्त भारत के तहत निर्धारित किए गए 11 मानकों पर लक्ष्य के सापेक्ष शत-प्रतिशत रिपोर्टिंग करने पर ज़ोर दिया। जिला क्षय रोग अधिकारी (डीटीओ) डॉ मनोज कुमार सिंह, जिला कार्यक्रम समन्वयक (डीपीसी) डॉ मिथलेश कुमार सिंह, जिला पीपीएम समन्वयक अनुराग कुमार पाण्डेय एवं डब्ल्यूएचओ के क्षेत्रीय अधिकारी डॉ वीजी विनोद ने करीब 35 स्वास्थ्यकर्मियों को प्रशिक्षण दिया। डीटीओ डॉ मनोज कुमार सिंह ने बताया कि शासन समेत जिलाधिकारी और मुख्य चिकित्सा अधिकारी के निर्देश के क्रम में जनपद में टीबी नोटिफिकेशन बढ़ाने पर पूरा ज़ोर दिया जा रहा है। इसके लिए समय-समय पर अभियान और विशेष शिविर लगाकर लोगों की स्क्रीनिंग की जा रही है। ब्लॉक सीएचसी-पीएचसी के समस्त स्टाफ समेत एनटीईपी के सभी कर्मी और स्वास्थ्यकर्ताओं को लगातार प्रशिक्षित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2025 तक देश को टीबी मुक्त बनाना हम सभी की प्राथमिकता है।

डीपीसी डॉ मिथलेश कुमार ने बताया कि प्रशिक्षण में बीपीएम को निक्षय पोर्टल 2.0 और निक्षय पोषण योजना को लेकर की जा रही फीडिंग की सही मॉनिटरिंग की जानी चाहिए, जिससे जनपद की उपलब्धि बेहतर प्रदर्शित हो। बीसीपीएम को समुदाय में लोगों की ज्यादा से ज्यादा टीबी स्क्रीनिंग, नोटिफिकेशन और टीबी स्कोर के लिए निर्धारित मानकों को लेकर लक्ष्य के सापेक्ष शत-प्रतिशत रिपोर्टिंग हर माह समय से की जाए। टीबी स्कोर से ही जनपद की रैंकिंग निर्धारित की जाती है। इसके अलावा आयुष्मान भारत – हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर पर कार्यरत सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (सीएचओ) के टीबी उन्मूलन कार्यों की भी मॉनिटरिंग की जाए। सामुदायिक स्तरीय बैठकों में लोगों के बीच टीबी के लक्षण, कारण, स्क्रीनिंग, जांच, उपचार व निक्षय पोषण योजना के तहत रोगियों को उपचार के दौरान हर माह दिए जा रहे 500 रुपये के बारे में भी ज्यादा से ज्यादा प्रचार-प्रसार किया जाए। टीबी के सम्पूर्ण उपचार व इलाज अधूरा न छोड़ने के बारे में भी जानकारी दी जाए। कासिमाबाद ब्लॉक की बीसीपीएम शमा परवीन ने बताया कि प्रशिक्षण में टीबी के नोटिफिकेशन बढ़ाने के साथ ही ज्यादा से ज्यादा लोगों की स्क्रीनिंग जांच व उपचार के बारे में जानकारी दी गई। जन जागरूकता पर भी ज़ोर दिया गया। अब वह ब्लॉक पर जाकर समस्त स्वास्थ्यकर्मियों, सीएचओ और आशाओं को इसके बारे में विस्तार से बताएंगी जिससे वह लोगों को जागरूक कर सकें। देवकली ब्लॉक के बीपीएम प्रदीप कुमार ने कहा कि प्रशिक्षण में निक्षय पोर्टल और निक्षय पोषण योजना के सही फीडिंग को लेकर मिली जानकारी के बारे में वह डाटा ओपरेटर व अन्य संबन्धित स्वास्थ्यकर्मी को इसकी जानकारी देंगे, जिससे रिपोर्टिंग बेहतर हो सके।

सीएमओ कार्यालय में स्वास्थ्यकर्मियों को मिला प्रशिक्षण
टीबी नोटिफिकेशन बढ़ाने व ज्यादा से ज्यादा स्क्रीनिंग, जांच करने पर दिया जाए ज़ोर
सीएमओ कार्यालय में राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम के तहत स्वास्थ्यकर्मियों को मिला प्रशिक्षण
नोटिफिकेशन के साथ ही टीबी रोगियों का सफलतापूर्वक उपचार पूरा करना भी आवश्यक
वर्ष 2025 तक टीबी मुक्त भारत के लक्ष्य को प्राप्त करना हम सभी की की प्राथमिकता


गाज़ीपुर। जनपद के गोरा बाजार स्थित मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय सभागार में बुधवार को राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम (एनटीईपी) के अंतर्गत समस्त प्राथमिक व सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों के स्वास्थ्य कर्मियों और एनटीईपी के कर्मचारियों का एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिलाधिकारी आर्यका अखौरी के निर्देशन व मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ देश दीपक पाल के नेतृत्व में सीएचसी व पीएचसी के लैब टेकनीशियन (एलटी), लैब असिस्टेंट (एलए) और कोविड-19 एलटी समेत एनटीईपी के सभी कर्मचारियों को टीबी नोफिकेशन बढ़ाने और अधिक से स्क्रीनिंग व जांच करते हुए प्रिविलेन्स ऑफ टीबी रिएक्टिव (पीटीआर) के लिए प्रशिक्षण दिया गया। जिला क्षय रोग अधिकारी (डीटीओ) डॉ मनोज कुमार सिंह, जिला कार्यक्रम समन्वयक (डीपीसी) डॉ मिथलेश कुमार सिंह और डब्ल्यूएचओ के क्षेत्रीय अधिकारी डॉ वीजे विनोद ने समस्त 60 स्वास्थ्यकर्मियों को प्रशिक्षण दिया। डीपीसी डॉ मिथलेश कुमार ने बताया कि शासन समेत जिलाधिकारी और मुख्य चिकित्सा अधिकारी के निर्देश के क्रम में जनपद में टीबी नोटिफिकेशन बढ़ाने पर पूरा ज़ोर दिया जा रहा है। इसके लिए समय समय पर अभियान और विशेष शिविर लगाकर लोगों की स्क्रीनिंग की जा रही है। एनटीईपी के सभी कर्मी, सीएचसी-पीएचसी के स्वास्थ्यकर्मियों और स्वास्थ्यकर्ताओं को लगातार प्रशिक्षित किया जा रहा है। वर्तमान में जनपद में टीबी का नोटिफिकेशन रेट लक्ष्य के सापेक्ष 74 प्रतिशत चल रहा है जिसको वर्ष के अंत तक शत-प्रतिशत पूरा कर लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि नोटिफिकेशन अधिक होने के साथ ही टीबी रोगियों का सफलतापूर्वक उपचार पूरा करना भी आवश्यक है। वर्तमान में जनपद का टीबी सक्सेस रेट 88 प्रतिशत चल रहा है। टीबी रोगियों को लगातार निक्षय मित्रों द्वारा गोद लेकर उनके उपचार व पोषण में मदद की जा रही है। साथ ही उन्हें भावनात्मक सहयोग भी दिया जा रहा है। वर्तमान में जनपद में 235 निक्षय मित्रों ने 402 मरीजों को गोद लिया है, जिनका उपचार चल रहा है।


दवा का पूरा कोर्स जरूरी
डॉ मिथलेश ने बताया कि यदि टीबी के लक्षणों के आधार इसकी पहचान शुरुआती दिनों में हो जाए तो मरीज छह माह के सम्पूर्ण उपचार से ठीक हो जाता है। टीबी का इलाज अधूरा छोड़ने पर यह गंभीर रूप लेकर मल्टी ड्रग रेजिस्टेंट (एमडीआर) टीबी के रूप में सामने आता है। टीबी के मरीज ड्रग रेजिस्टेंट न हों इसके लिए स्वास्थ्य विभाग और जिला टीबी नियंत्रण इकाई मरीजों का नियमित फॉलोअप कर रही है। टीबी मरीजों को निक्षय पोषण योजना के तहत उपचार के दौरान प्रतिमाह 500 रुपये पोषण भत्ते के रूप में सीधे मरीज के खाते में भेजे जाते हैं।
वर्ष 2025 तक प्राप्त करना है लक्ष्य
डब्ल्यूएचओ के डॉ वीजे विनोद ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विश्व स्तर पर निर्धारित समय सीमा से पांच साल पहले यानि साल 2025 तक भारत से टीबी उन्मूलन के लिए एक अभियान शुरू किया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, टीबी के उन्मूलन का मतलब होगा कि वर्ष 2025 तक देश की एक लाख की आबादी पर टीबी के अधिक से अधिक 44 मामले से अधिक न हों। डब्ल्यूएचओ ग्लोबल टीबी रिपोर्ट 2023 के अनुसार वर्तमान में देश की एक लाख की आबादी पर 199 टीबी रोगी मौजूद हैं जिसको वर्ष 2025 तक बेहद कम कर लक्ष्य को प्राप्त करना हम सभी की प्राथमिकता है।
