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“जानें क्यों” हॉटस्पॉट एरिया है शहर का कई इलाका

गाजीपुर। उत्तर प्रदेश में डेंगू के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। बात जिले कि करें तो पिछले 24 घंटों में 7 नए पॉजिटिव मामले सामने आए हैं। ये मामले शहर के कई हिस्सों से जिला अस्पताल में दर्ज किए गए। जिले में अबतक कुल 276 मामले डेंगू के जिला अस्पताल में आए हैं। जिसमें से 238 मरीज आज मंगलवार तक स्वस्थ होकर घर जा चुके हैं। शेष मरीजों का अभी जिला अस्पताल में इलाज चल रहा है। बता दें कि डेंगू मरीजों के ज्यादा मामले नगर पालिका परिषद गाजीपुर क्षेत्र के सकलेनाबाद, तुलसीसागर, तिलकनगर कालोनी, कलेक्टर घाट, पुलिस लाइन और आमघाट से आए हैं। इसीलिए इन सब इलाकों को हॉटस्पॉट एरिया घोषित कर दिया गया है।

डिटॉल बनेगा स्वस्थ इंडिया के तहत मनाया गया विश्व शौचालय दिवस

गाजीपुर। डिटॉल बनेगा स्वस्थ इंडिया के बैनर तले चल रहे कार्यक्रम डिटॉल डायरिया नेट जीरो के साथ विश्व शौचालय दिवस का आयोजन सैदपुर ब्लाक के ग्रामीण क्षेत्र की महिला लीड गुलाबी दीदी के द्वारा सोमवार को विश्व शौचालय दिवस को उत्सव के रूप में मनाया गया। पूजा प्रिया पांडेय ने बताया कि विश्व शौचालय दिवस’ मनाने का उद्देश्य लोगों को विश्व स्तर पर स्वच्छता के संकट से निपटने के लिए प्रेरित करता है। खुले में शौच करना मतलब बीमारियों को न्योता देना है। खुले में शौच करने का सबसे अधिक दुष्प्रभाव महिलाओं एवं बच्चों के स्वास्थ्य पर पड़ता है। ऐसे में इन सारी चीजों का बेहद खास ध्यान देना चाहिए। खुले में शौच करने से बीमारी होने की सम्भावना बढ़ जाती है।

गुलाबी दीदी ने प्रभात भेरी निकाला और जनसभा का आयोजन करते हुए लोगों को संदेश दिया कि खुले में शौच करने से पर्यावरण प्रदूषित होता है और साफ-सफाई में भी बड़ा रोड़ा आता है। इसलिए भारत सरकार और राज्य की सरकारे विभिन्न कार्यक्रमों के द्वारा उन लोगो को मदद करती है। जिन के घर मे शौचालय नही है। विश्व शौचालय दिवस 2022 का अभियान, “अदृश्य को दृश्य बनाना ‘ कहा जाता है। इस अभियान में महिलाओं ने रंगोली का आयोजन स्वच्छता का संदेश दिया। इस कार्यक्रम में ग्राम प्रधान, प्राथमिक विद्यालय, ब्लॉक कम्युनिटी मोबिलाइजर, अंजली कुमारी, लक्षमीना देवी, गीता गौतम आदि उपस्थित रहे।

23 नवम्बर से शुरू होगा सक्रिय टीबी रोगी खोज अभियान

जनपद में 23 नवम्बर से शुरू होगा सक्रिय टीबी रोगी खोज अभियान

स्वास्थ्यकर्मी घर-घर जाकर खोजेंगे टीबी रोगी, 221 टीम तैयार

अभियान में 20 प्रतिशत आबादी की होगी स्क्रीनिंग

संवेदनशील क्षेत्रों को चिन्हित कर लक्षणयुक्त लोगों की भी होगी जांच

गाज़ीपुर।टीबी मुक्त भारत अभियान को सफल बनाने के लिए क्षय रोग विभाग निरंतर प्रयासरत है। इसके लिए टीबी की शीघ्र जाँच और इलाज पर पूरा जोर है। इसी के तहत विभाग एक बार फिर टीबी रोगियों को खोजने के लिए एक्टिव केस फाइंडिंग (एसीएफ) यानि सक्रिय टीबी रोगी खोज अभियान शुरू करने जा रहा है। इस बारे में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन-उत्तर प्रदेश की मिशन निदेशक डॉ पिंकी जोवल ने सभी जिलाधिकारियों और मुख्य चिकित्सा अधिकारियों को पत्र भेजा है। अभियान की तैयारियों को लेकर शुक्रवार को सीएमओ कार्यालय में बैठक आयोजित हुई।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ देश दीपक पाल ने बताया – मिशन निदेशक के पत्र में माइक्रोप्लान तैयार कर संवेदनशील क्षेत्रों में 23 नवंबर से पांच दिसंबर तक एसीएफ अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं। जनपद की आबादी करीब 44.55 लाख है लेकिन विशेष अभियान के तहत 20 प्रतिशत आबादी की स्क्रीनिंग की जाएगी। टीबी के लक्षण युक्त (संभावित रोगियों) व्यक्तियों की जांच की जाएगी और जांच में टीबी की पुष्टि होने पर तत्काल उपचार शुरू किया जाएगा।


जिला क्षय रोग अधिकारी (डीटीओ) डॉ मनोज कुमार सिंह ने बताया – राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम (एनटीईपी) के अन्तर्गत 23 नवंबर से पांच दिसंबर तक यह अभियान चलेगा। स्वास्थ्य कर्मी घर-घर जाकर टीबी रोगियों को खोजेंगे। माइक्रोप्लान तैयार किया जा चुका है। अभियान के लिए कुल 221 टीम और 43 सुपरवाइजार तैयार की गईं हैं। समस्त स्वास्थ्यकर्मियों को प्रशिक्षित किया जा रहा है। स्वास्थ्यकर्मी संभावित क्षय रोगियों की जांच करेंगे और टीबी की पुष्टि होने पर 48 घंटे के अंदर उपचार शुरू किया जाएगा। उन्होंने बताया- अभियान के दौरान आवासीय परिसरों, जैसे अनाथालयों, वृद्धाश्रमों, नारी निकेतन, बाल संरक्षण गृह, मदरसों और छात्रावासों में कैंप आयोजित कर टीबी के प्रति संवेदीकरण किया जाएगा और लक्षण युक्त व्यक्ति के स्पुटम (बलगम) के नमूने एकत्र किए जाएंगे ।
जिला कार्यक्रम समन्वयक डॉ मिथलेश कुमार ने बताया – अभियान के दौरान माइक्रोप्लान के मुताबिक संवेदनशील क्षेत्रों (घनी बस्ती और स्लम एरिया) को कवर करते हुए जनपद की 20 प्रतिशत आबादी की स्क्रीनिंग की जाएगी। स्क्रीनिंग में मिलने वाले लक्षण युक्त व्यक्तियों की जांच की जाएगी। जांच में टीबी की पुष्टि होने पर हर रोगी की सीबीनॉट जांच कराई जाएगी ताकि उसके लिए सटीक दवा का निर्धारण करने में आसानी हो। इसके साथ ही सभी रोगियों की शुगर और एचआईवी जांच भी की जाएगी और पूरा डेटा निक्षय पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा ।
जनपद में क्षय रोग के मरीज – डॉ मिथलेश ने बताया कि वर्तमान में जनपद में करीब 3700 टीबी रोगी नोटिफ़ाइ हैं, जिनका स्वास्थ्य विभाग द्वारा निरंतर उपचार किया जा रहा है। साथ ही गोद लिए गए सभी क्षय रोगियों को हर माह पोषण पोटली भी प्रदान की जा रही है। निक्षय पोषण योजना में क्षय रोगियों को उपचार के दौरान हर माह 500 रुपये भी डीबीटी के द्वारा भेजे जा रहे हैं।
क्षय रोग के बारे में जानें – दो सप्ताह या अधिक समय तक खांसी आना, खांसी के साथ बलगम आना, बलगम में कभी-कभी खून आना, सीने में दर्द होना, शाम को हल्का बुखार आना, वजन कम होना और भूख न लगना टीबी के सामान्य लक्षण हैं।

जिले के कई मेडिकल स्टोर का किया निरीक्षण

गाजीपुर। जिलाधिकारी के आदेश पर अपर जिलाधिकारी (वि0/रा0)के निर्देशन में नशीली एवं नकली दवाओं के बिक्री पर रोकथाम के लिए औषधि निरीक्षक बृजेश कुमार मौर्य द्वारा जनपद में स्थित विभिन्न स्टाकिस्टों जैसे राधेश्याम सर्जिकल एजेंसी छावनी लाईन, पूर्वाचल डिस्टीब्यूटर एवं पूर्वांचल मेडिकल एजेन्सी, भट्ट कटरा, मिश्र बाजार पर औचक निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान दवा प्रतिष्ठानों पर कुछ अनियमितताए पाई गई। जिसे निरीक्षण प्रपत्र पर अंकित करके आवश्यक कार्यवाही हेतु सहायक आयुक्त (औषधि) वाराणसी मण्डल, वाराणसी को प्रेषित किया जा रहा है। निरीक्षण के दौरान दुकानदारों को निर्देशित किया गया है कि दवाओं का क्रय पक्की बिल के माध्यम से किया जाए तथा दवाओं का विक्रय बिल के द्वारा ही किया जाए।मेडिकल स्टोरों पर जांच प्रक्रिया निरंतर जारी रहेगा।

बच्चे के दिल का आरबीएसके ने सफलता पूर्वक करवाया ऑपरेशन

बच्चे के दिल का आरबीएसके ने सफलता पूर्वक करवाया ऑपरेशन

गाजीपुर।स्वास्थविभाग के द्वारा चलाई जा रही योजनाओं के माध्यम से लगातार लोगों को लाभ होता दिख रहा है। इन योजनाओं के माध्यम से गंभीर से गंभीर बीमारियों का इलाज निशुल्क किया जा रहा है। ऐसा ही एक निशुल्क ऑपरेशन आरबीएसके के टीम के द्वारा एक डेढ़ साल के बच्चे का कराया गया। जिसके दिल में छेद था । जिसे आरबीएस के टीम के द्वारा पहले जिला अस्पताल में एडमिट कराया गया। वहां से जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज मुस्लिम यूनिवर्सिटी अलीगढ़ को रेफर किया गया। जहां पर बच्चों का सफल ऑपरेशन हुआ और बच्चा स्वस्थ है।

डीपीएम प्रभु नाथ ने बताया कि जखनियां ब्लाक के ग्राम वृंदावन के रहने वाले मोहुपाल अपने डेढ़ वर्षीय पुत्र को लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जखनिया आए हुए थे। जहां पर कार्यरत चिकित्सक डॉ एस के सिंह एवं स्टाफ नर्स राजेश के द्वारा इस मामले को आरबीएस के टीम को सौपा। टीम ने बच्चों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से रेफर कर जिला अस्पताल एडमिट कराया और फिर यहां से जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज मुस्लिम यूनिवर्सिटी अलीगढ़ को रेफर कराया गया। जहां पर बच्चे का 3 अक्टूबर को एडमिशन हुआ और 4 अक्टूबर को सीएचडी का ऑपरेशन निशुल्क हुआ। मौजूदा समय में बच्चा पूरी तरह से स्वस्थ है।

उन्होंने बताया कि यदि बच्चे को निशुल्क सुविधा नहीं मिली होती तो इस ऑपरेशन में करीब 4 से 5 लाख रुपए परिवार का खर्च होता। जो इतनी बड़ी राशि परिवार दे पाने में असफल रहता है। उन्होंने बताया कि बच्चों को अलीगढ़ तक भिजवाने में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर देश दीपक पाल की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

सीएमओ को भेंट किया मच्छरदानी

गाज़ीपुर।शुक्रवार को राष्ट्रीय नेतृत्व के आह्वान पर समाजवादी छात्रसभा के राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य राहुल सिंह के नेतृत्व में‌ कार्यकर्ताओं ने प्रदेश में लगातार बढ़ रहे डेंगू के प्रकोप के सवाल पर मुख्य चिकित्साधिकारी गाजीपुर को ज्ञापन सौंपा।

अस्पताल में आ रहे मरीजों की गहन जांच और उचित इलाज कराने की मांग किया। जनपद के सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों पर सीवीसी जांच कराने की भी‌ व्यवस्था कराए जाने की मांग किया।
इस अवसर पर कार्यकर्ताओं ने सीएमओ को मच्छरदानी और मार्टिन तथा मच्छर से बचने के लिए अगरबत्ती भेंट किया।उन्होंने कहा कि यदि मरीजों की जान नहीं बचा सकते तो स्वयं की जान बचायें।
समाजवादी छात्र सभा के राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य राहुल सिंह ने कहा कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में स्वास्थ्य सेवा बदहाल है। डेंगू,मियांदी बुखार और‌ चिकनगुनिया के प्रकोप के चलते पूरे प्रदेश में हाहाकार मचा हुआ है। अस्पतालों में बेड भरे पड़े हैं, मरीजों के लिए जगह नहीं है।न दवा की व्यवस्था है और न ही जांच की।उन्होंने कहा कि सरकार इन प्रकोपों से जनता को बचाने में नाकामयाब साबित हुई है। सरकार पूरी तरह से लापरवाह बनी हुई है। भाजपा सरकार जन जीवन के प्रति गंभीर नहीं है।
ज्ञापन देने वालों में मुख्य रूप से इरफान कुरैशी,रोहन यादव,सत्या कुमार, कमलेश यादव, संतोष यादव, भीष्म यादव, मनीष यादव, प्रवीण यादव, रविकांत यादव रवि,संजय यादव,बबलू आदि शामिल थे।

जिला पंचायत अध्यक्ष सपना सिंह ने 51 टीबी मरीजों को लिया गोद

जिला पंचायत अध्यक्ष ने 51 टीबी मरीजों को लिया गोद

गाजीपुर।2025 तक टीबी मुक्त भारत का सपना प्रधानमंत्री के द्वारा देखा गया है। और इसे पूरा करने के लिए विभाग के द्वारा लगातार कार्य किया जा रहा हैं। इसी कड़ी में टीबी मरीजों को प्रोटीन युक्त पोषण पोटली देकर उन्हें सेहतमंद करने की भारत सरकार की योजना है। इसी कड़ी में गुरुवार को जिला अस्पताल जिला स्थित क्षय रोग विभाग में आयोजित कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष सपना सिंह ने 51 टीबी मरीजों को गोद लिया। इन सभी को पोषण पोटली प्रदान किया जो प्रत्येक माह इन मरीजों को इनके ठीक होने तक दिया जाएगा।

जिला पंचायत अध्यक्ष सपना सिंह ने बताया कि उनके द्वारा पूर्व में 63 टीबी मरीजों को गोद लिया गया था। और उन्हें प्रतिमाह पोषण पोटली उनके स्वस्थ होने तक उपलब्ध कराया गया । अब सभी मरीज स्वस्थ हो चुके हैं । अब एक बार फिर से 51 टीबी मरीजों को गोद लिया गया है। और इन सभी को भी स्वस्थ होने तक इन्हें पोषण पोटली उनके द्वारा दिया जाएगा । ताकि इन्हें प्रोटीन की कहीं से कोई कमी ना रह जाए। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री का सपना है कि 2025 तक टीबी मुक्त पंचायत, टीबी मुक्त भारत का सपना साकार हो।इस लिए इस कार्यक्रम को प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान के रूप चलाया जा रहा है।

टीवी मरीजों के आंकड़ों की बात करें तो जनपद में जनवरी 2023 से अक्टूबर 2023 तक कल 3716 मरीज को चिन्हित किया गया है। जिन्हें क्षय रोग विभाग की तरफ से निशुल्क दवा उपलब्ध करने के साथ ही निश्चय पोषण योजना के तहत उनके खाते में ₹500 प्रतिमाह भेजा जाता है।

इस कार्यक्रम मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ देश दीपक पाल ,राजकीय मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ आनंद मिश्रा, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ राजेश सिंह,जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ मनोज कुमार सिंह,जिला कार्यक्रम समन्वयक डॉ मिथिलेश सिंह के साथ ही क्षय रोग विभाग के अन्य कर्मचारी शामिल रहे।

कुपोषित क्षय रोगियों की पहचान कर लिया जाएगा गोद

कुपोषित क्षय रोगियों की पहचान कर लिया जाएगा गोद, मिलेगा पोषण व स्वास्थ्य सहयोग

जनपद की समस्त स्वास्थ्य इकाइयों व केन्द्रों पर होगी बीएमआई माप प्रक्रिया

प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत इस पहल को दी जाएगी प्राथमिकता

स्वास्थ्य और बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग के संयुक्त प्रयास को मिलेगा बल

गाज़ीपुर। प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान (पीएम-टीबीएमबीए) के अंतर्गत जनपद में कुपोषित क्षय रोगियों को गोद लेने की शुरुआत की जा रही है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ देश दीपक पाल ने बताया कि शासन की ओर से मिले निर्देश के क्रम में जिले में मौजूद वर्तमान कुपोषित क्षय रोगियों को गोद लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
जिला क्षय रोग अधिकारी (डीटीओ) डॉ मनोज कुमार ने कहा कि इसके लिए जनपद की समस्त स्वास्थ्य इकाइयों पर बाडी मास इंडेक्स (बी०एम०आई०) की मापने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। बीएमआई की गणना करते हुये 18 किलो ग्राम प्रति वर्ग मीटर से कम वाले रोगियों को अभियान के अंतर्गत स्वयं सेवी संस्थाओं के माध्यम से गोद लेकर पोषण पोटली दिलाने तथा छह माह से छह वर्ष तक के बच्चों को बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग के माध्यम से अतिरिक्त पोषण सहायता प्रदान की जाएगी। उन्होंने कहा कि कुपोषण और क्षय रोग का सीधा संबंध होता है। टीबी रोगियों को बेहतर प्रोटीन युक्त आहार न मिल पाने के कारण रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने लगती है। लगातार वजन में भी कमी होती है। इस वजह से वह कुपोषण की स्थिति में भी आ सकता है। इसलिए कोई भी टीबी रोगी गंभीर स्थिति में न पहुंचे, इसके लिए सरकार की ओर से लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम (एनटीईपी) के जिला कार्यक्रम समन्वयक (डीपीसी) डॉ मिथलेश कुमार ने बताया कि नोटिफिकेशन अधिक होने के साथ ही रोगियों का सफलतापूर्वक उपचार पूरा करना भी आवश्यक है। वर्तमान में जनपद का टीबी सक्सेस रेट 00 प्रतिशत है। दूसरी ओर वर्तमान में 2962 क्षय रोगी उपचार पर हैं। जनपद में निक्षय मित्रों की संख्या 2246 है। उपचारित रोगियों में से 2246 क्षय रोगियों को निक्षय मित्रों द्वारा गोद लिया जा चुका है। इसमें 14 वर्ष तक के 117 और 14 वर्ष से अधिक के 2129 टीबी रोगी शामिल हैं। शेष टीबी रोगियों के गोद लिए जाने की प्रक्रिया चल रही है। यह सभी क्षय रोगी निक्षय मित्रों से जुड़े हुये हैं।
उन्होंने बताया कि सितम्बर 2023 के द लैसेंट जरनल में प्रकाशित लेख “न्यूट्रीशनल सपोर्ट फॉर एडल्ट विथ माइक्रो बायोलोजिकली कन्फ़र्म्ड पल्मोनरी टीबी आउटकम्स इन अ प्रोपोर्शन कोहार्ट नेस्टेड विथ-इन राशन ट्राइल इन झारखंड, इंडिया” के अनुसार वयस्क पुरुषों में 42 किग्रा तथा वयस्क स्त्रियों में 36 किग्रा वजन होना कुपोषण को इंगित करता है। यदि इन रोगियों को प्राथमिकता पर निक्षय पोषण योजना का लाभ प्रदान किया जाए तथा सामुदायिक सहायता यानि गोद लिया जाए तो उन्हें सफतापूर्वक उपचारित किया जा सकता है।
उन्होंने बताया कि जनपद में क्षय रोगियों की डायग्नोसिस (निदान) होने के उपरान्त उन्हें तीन दिनों के भीतर ही क्षय रोगी की बीएमआई कराई जाएगी। एक सप्ताह के भीतर रोगी के खाते में निक्षय पोषण योजना के तहत धनराशि जमा हो जाए। तथा दो सप्ताह के भीतर क्षय रोगियों को गोद लिये जाने की कार्यवाह पूरी कर ली जाए।
ऐसे निकालें बीएमआई – बीएमआई अर्थात बॉडी मास इंडेक्स मोटापे की जांच करने का अंतर्राष्ट्रीय मानक है। अपना बीएमआई मापने के लिए अपने वजन को अपनी लंबाई (इंच में) से भाग करें। बीएमआई के आधार पर आप यह जांच सकते हैं कि आपका वजन सामान्य है या उससे अधिक। भारतीय स्वास्थ्य मंत्रालय के मानकों के अनुसार सामान्य बीएमआई 18.5 से 24.9 होना चाहिए। इससे ज्यादा बीएमआई वालों को मोटापे की श्रेणी में रखा गया है।

एम्बुलेंस कर्मियों के द्वारा मनाया गया विजयदशमी का पर्व

102 और 108 एम्बुलेंस कर्मियों के द्वारा मनाया गया विजयदशमी का पर्व

गाजीपुर। असत्य पर सत्य की जीत का प्रतीक विजयदशमी का पर्व पूरे देश में मनाया गया। इस पर्व पर लोग एक दूसरे को बधाई भी देते नजर आए। वही बहुत सारे प्रतिष्ठानों में मां दुर्गा के नौ रूपों का पूजा-पाठ भी संपन्न हुआ । एक दूसरे को प्रसाद भी वितरण किए गए। कुछ ऐसा ही जनपद में चलने वाले 102 और 108 एंबुलेंस के जिला अस्पताल स्थित कार्यालय में भी हुआ ।यहां पर 102 और 108 एंबुलेंस के ईएमटी और पायलट के साथ उनके उच्च अधिकारियों ने विजयादशमी की पर्व को मनाया साथ ही साथ प्रसाद भी वितरण किया। 102 और 108 एंबुलेंस के प्रभारी दीपक राय ने बताया कि 102 और 108 एंबुलेंस के चालक और ईएमटी परिवार के सदस्य की तरह है। यह लोग अपनी तत्परता से प्रतिदिन लोगों को नई जिंदगी देने का भी काम करते हैं। ऐसे में इस त्यौहार के मौके पर जब यह लोग अपने परिवार से दूर है तो इन लोगों को परिवार के जैसा माहौल देना हम सभी लोगों का कर्तव्य बन जाता है। जिसको लेकर इस तरह के कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में जिला प्रोग्राम मैनेजर संदीप चौबे, अखंड ,आशुतोष के साथ ही पायलट और ईएमटी शामिल हुए।

घर-घर दे रही है दस्तक

दस्तक अभियान के तहत आशा और आंगनबाड़ी घर-घर दे रही है दस्तक

गाजीपुर। विशेष संचारी रोग नियंत्रण अभियान जो 3 अक्टूबर से 31 अक्टूबर तक चल रहा है। जिसमे 16 से 31 अक्टूबर तक दस्तक अभियान स्वास्थ्य विभाग के द्वारा चलाए जा रहा है। इस अभियान में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के द्वारा घर-घर दस्तक अभियान का सफल संचालन कर रही है। इस दौरान इन लोगों के द्वारा स्वास्थ्य विभाग के द्वारा चलने वाले विभिन्न योजनाओं को पहुंचाने एवं जागरूक करने का कार्य कर रही है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मोहम्मदाबाद के चिकित्सा अधीक्षक आशीष कुमार राय ने बताया कि समस्त ग्राम पंचायत एवं ग्रामों में स्थानीय आशा एवं आंगनबाड़ी द्वारा घर-घर भ्रमण कर दस्तक अभियान के सफल क्रियान्वयन हेतु प्रत्येक घरों में जागरूकता एवं आवश्यक जानकारी के साथ-साथ अपने एवं अपने आसपास को साफ सुथरा रखने की जानकारी दी जा रही। ग्राम स्वास्थ्य स्वच्छता एवं पोषण समिति का बैठक कर नियमित टीकाकरण दिवसों पर छोटे बच्चों एवं गर्भवती महिलाओं का टीकाकरण कराने के साथ-साथ आशा प्रत्येक दिवस पर माइक्रो प्लान के अनुसार अपने क्षेत्र में कार्यों का संपादन कर रही है। कुपोषित बच्चों के उपचार एवं उन्हें संदर्भ पर विशेष बल देते हुए कार्य करना। दिमागी बुखार के प्रभाव को कम करने के क्रम में घरों में जागरूकता करना एवं प्रत्येक घरों में कम से कम पांच सवालों को करना पहले क्या परिवार में कोई सदस्य को बुखार है, यदि है तो उनको जांच हेतु सूचीबद्ध करना, दूसरा सवाल परिवार में किसी सदस्य को दो सप्ताह से कम की खांसी सांस लेने में परेशानी तो नहीं है, यदि है तो उनकी आवश्यक जांच कराने हेतु नजदीकी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र या सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर लाना। परिवार में कोई ऐसा सदस्य तो नहीं है जिसको 1 सप्ताह से अधिक खांसी आ रही हो या वजन कम हो रहा हो या बलगम में खून आ रही हो तो यह संभावित क्षय रोग के लक्षण हैं। यदि ऐसा दिखता है तो इन परिवारों को निकटतम हेल्थ एंड वैलनेस सेंटर या प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ,सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर लाना। फ्रंटलाइन वर्कर आशा कार्यकर्ता के द्वारा मच्छर जनित रोग मलेरिया, फाइलेरिया, डेंगू, चिकनगुनिया जापानी इनफ्लाइट्स, कालाजार इत्यादि से बचाव के विषय में परिवार के सदस्यों को अवगत कराना मुख्य काम है। घरों में मच्छरों से प्रजनन की अनुकूल स्थितियों के विषय में संवाद करते हुए परिवार के सदस्यों से आग्रह करें कि वह घर में देखें की कोई ऐसा पात्र या जगह तो नहीं है जहां मच्छरों का प्रजनन की संभावनाएं अधिक है जैसे कलर टूटी हुई मटकी फटे हुए टायर इत्यादि यदि ऐसे हैं तो इन्हें तुरंत इन्हे निसप्रयोजित करना आदि के बारे में जानकारी दी जा रही है।