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डीएम ने हरी झंडी दिखाकर संचारी रोग नियंत्रण अभियान का किया शुभारंभ

गाजीपुर।संचारी व मच्छर जनित रोगों की रोकथाम व नियंत्रण के लिए जिलाधिकारी आर्यका अखौरी ने मंगलवार को बेसिक शिक्षा विभाग के नगर संसाधन केंद्र से विशेष संचारी रोग नियंत्रण अभियान का शुभारंभ हरी झंडी दिखाकर किया।

इस दौरान जन जागरूकता रैली का भी आयोजन किया गया। जिसमें स्वास्थ्य समेत सभी विभिन्न विभागों के अधिकारियों, स्वास्थ्यकर्मियों, आशा-आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, स्कूली छात्र-छात्राओं ने बढ़-चढ़ कर प्रतिभाग किया।

जिलाधिकारी आर्यका अखौरी ने कहा की संचारी व मच्छर जनित रोगों जैसे डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया, फाइलेरिया, कालाजार आदि बीमारियों की रोकथाम व नियंत्रण के लिए प्रदेश सरकार निरंतर प्रयास कर रही है। इन्हीं बीमारियों की रोकथाम के लिए विशेष संचारी रोग नियंत्रण अभियान की शुरुआत की गई है। यह अभियान 31 अक्टूबर तक चलेगा। इसी बीच 11 से 31 अक्टूबर दस्तक अभियान चलाया जाएगा। अभियान के सफल संचालन के लिए स्वास्थ्य विभाग,शिक्षा विभाग,नगर विकास, पंचायती राज विभाग समेत 11 विभागों की टीम तैनात की गईं हैं,जो घर-घर जाकर बीमारियों की रोकथाम और समुदाय को जागरूक करेंगी। ऐसे में जन समुदाय का भी दायित्व है कि अभियान में सहयोग करे, सतर्क और जागरूक रहें। जिलाधिकारी ने अपील की कि डेंगू का मच्छर दिन में ही काटता है तथा इससे बचाव के लिए पूरे शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनें। मच्छर रोधी क्रीम का इस्तेमाल करें। सोते समय मच्छरदानी का प्रयोग करें। घरों के अंदर और आसपास किसी भी पात्र में पानी इकट्ठा नही होने दे।

प्रशासन व विभिन्न विभागों के साथ ही जन प्रतिनिधि भी इस अभियान को सफल बनाने में सहयोग करेंगे। इन बीमारियों की रोकथाम के लिए एंटी लार्वा छिड़काव, फोगिंग, स्वच्छता, साफ-सफाई आदि का कार्य किया जाएगा। जांच व उपचार के साथ आवश्यक दवा भी प्रदान की जाएगी। इस अभियान में स्वास्थ्य विभाग, नोडल विभाग रहेगा। नगर विकास, पंचायती राज, पशुपालन विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग, शिक्षा विभाग, दिव्यांग जन कल्याण विभाग, कृषि एवं सिंचाई विभाग सहित 11 विभाग आपसी समन्वय बनाकर अभियान को सफल बनाएंगे।

सीएमओ डा. देश दीपक पाल ने कहा कि विशेष संचारी रोग नियंत्रण व दस्तक अभियान उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री का बेहद महत्वाकांक्षी कार्यक्रम है। डेंगू, मलेरिया, फाइलेरिया, कालाजार आदि रोगों को विशेष अभियान चलाकर काबू कर लिया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग के आपसी समन्वय से नगर पालिका व नगर पंचायत की टीमें शहरी क्षेत्र तथा पंचायती राज विभाग की टीमें ग्रामीण क्षेत्रों में बीमारियों की रोकथाम व नियंत्रण कार्य के साथ ही समुदाय को जागरूक करेंगी। सीएमओ ने कहा कि अभियान में अधिक से अधिक प्रचार-प्रसार किया जाएगा। इसमें जन प्रतिनिधियों, प्रभावशाली व्यक्तियों, विभिन्न संस्थाओं के साथ ही जनमानस का भी सहयोग लिया जाएगा।

इस मौके पर बेसिक शिक्षा अधिकारी हेमंत राव,मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डा०ए०के०शाही,डिप्टी सीएमओ, एसीएमओ, चिकित्सा अधीक्षक, जिला मलेरिया अधिकारी, नगर पालिका/नगर पंचायत, पंचायती राज, आईसीडीएस, बेसिक व माध्यमिक शिक्षा विभाग समेत सभी विभागों के प्रमुख अधिकारी व सहकर्मी, सहायक मलेरिया अधिकारी, मलेरिया निरीक्षक एवं अन्य स्वास्थ्यकर्मी उपस्थित रहे।

जिला जेल में बंद सैकड़ो बन्दियों की हुई जांच

जिला जेल के बंदियों की हुई सक्रिय टी बी खोज अभियान (ए सी एफ) के अन्तर्गत टीबी व एचआईवी जांच

सात सौ पन्द्रह बन्दियों का हुआ जांच।

18 से 20 सितम्बर 2024 तक चलेगा बन्दियों के स्वास्थ्य परिक्षण का अभियान।

ग़ाज़ीपुर। बेहतर स्वास्थ्य हर इंसान की पहली जरूरत है और उसे पूरा करना हम सभी की जिम्मेदारी है। ऐसे ही बहुत सारे लोग जो विभिन्न मामलों में गाजीपुर के जिला जेल में निरुद्ध हैं, उनके स्वास्थ्य का ध्यान रखने के लिए प्रमुख सचिव चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण लखनऊ, जिलाधिकारी गाजीपुर, अपर निदेशक, राज्य क्षयरोग नियन्त्रण कार्यक्रम अधिकारी स्वास्थ्य भवन, लखनऊ के निर्देश व मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ देश दीपक पाल के निर्देशन पर स्वास्थ्य विभाग (क्षयरोग विभाग) की टीम जिला जेल पहुंचकर 715 बंदियों की जांच की। इसके साथ ही नि:शुल्क दवाएं भी दी गईं।


जेल अधीक्षक अरुण प्रताप सिंह, जेलर राकेश कुमार वर्मा और जेल चिकित्सा अधिकारी डॉ जितेंद्र कुमार के नेतृत्व में जिला जेल की 32 महिलाओं और 674पुरुष बंदियों की टीबी और एचआईवी की जांच की गई। जेल अधीक्षक ने बताया कि जेल में बंदियों के स्वास्थ्य पर ध्यान देने के लिए शासन स्तर से निर्देश आए थे। इस क्रम में बुधवार से डॉक्टरों और पैरा मेडिकल स्टाफ की टीम जिला जेल भेजा गया ।जिसमें वह स्वयं शामिल थे और वहां पर जेल में बंद करीब 715 बंदियों की जांच की गई। जांच के अनुसार उन्हें तत्काल दवा भी दी गई।


जिला क्षयरोग अधिकारी डाक्टर संजय कुमार ने बताया कि सक्रिय टी बी खोज अभियान (ए सी एफ) जनपद गाजीपुर के 20 प्रतिशत आबादी पर किया जा रहा है जिस में मलिन बस्ती,स्लम एरिया, सब्जी मंडी, वृद्धाश्रम,बाल सुधार गृह, जिला जेल, मदरसा, नवोदय विद्यालय इत्यादि में किया जा रहा है यह कार्यक्रम दिनांक -09/09/2024 से दिनांक – 20/09/2024 तक चलेगा।अब तक इस अभियान के अन्तर्गत कुल मरीजों कि संख्या 86 है दिनांक – 20 तक अभी और मिलने कि सम्भावना है। सभी मिले मरीजों को इलाज पर रख दिया गया है। अभी तक 01जनवरी 2024 से अब तक कुल टी बी मरीजों कि संख्या 3531 है राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम (एनटीईपी) के जिला कार्यक्रम समन्वयक डॉ मिथलेश कुमार ने बताया कि यह कार्यक्रम शासन के निर्देश के क्रम में किया जा रहा है।जिला क्षयरोग विभाग की की टीम ने अपना पूर्ण सहयोग दिया।

इलाज में जेलर और जेल अस्पताल के चिकित्सक के द्वारा संपूर्ण सहयोग किया गया। इस मौके पर डिप्टी जेलर रविन्द्र सिंह मौजूद रहे। स्वास्थ्य टीम में फार्मासिस्ट भुनेश्वर कुमार, डी पी पी एम सी अनुराग कुमार पाण्डेय,एसटीएस सुनील कुमार वर्मा,टी बी एच बी नरेन्द्र कुमार राय, राधेश्याम यादव,काउंसलर आई सी टी सी, सेन्टर, मुहम्मदाबाद से निरा राय, एलटी महेश, राम विलास , आई सी टी सी एल टी गौरव विशाल, अमित कुमार गुप्ता शामिल रहे।

सीएमओ संग स्वास्थ्य विभाग की टीम पहुंची बाढ़ प्रभावित गांवों में,किया दवा वितरण

गोमती से प्रभावित गांवों में मुख्य चिकित्सा अधिकारी संग स्वास्थ्य विभाग की टीम पहुंची बाढ़ प्रभावित गांवों में

गाजीपुर।गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है जिसके चलते जनपद के 5 तहसील के 20 से ऊपर गांव प्रभावित हो चुकी है। वही गंगा के बढ़ने के साथ ही गोमती के बढ़ने का क्रम भी जारी हो गया है। वही गोमती के रौद्र रूप से भी सैदपुर तहसील के गौरी, गोरखा,तेतारपुर ,गौरहट ,भुजारी आदि गांव प्रभावित हो गए हैं। जिसको देखते हुए स्वास्थ्य विभाग की टीम भी एलर्ट मोड में आ चुकी है। मंगलवार को मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ देश दीपक पाल स्वास्थ्य विभाग की टीम के साथ इन गांव में पहुंचे। और ग्रामीणों में दवा का वितरण कराया। इन सभी टीमों के द्वारा कुल 79 मरीजों की देखरेख एवं निशुल्क दवा का वितरण किया गया।

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सैदपुर के अधीक्षक संजीव कुमार सिंह ने बताया कि बाढ़ से प्रभावित इन सभी गांव के लिए डॉक्टरों की देखरेख में कुल चार टीमें बनाई गई है। इन सभी टीमों के माध्यम से प्रभावित लोगों के मध्य दवा का वितरण कराया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि मेडिकल टीम में डॉ राम जी सिंह स्वास्थ्य पर्यवेक्षक संजय कुमार, एनएमएस धनंजय कुमार एवं अन्य लोगों के द्वारा गौरी में आने वाले मरीजों को निशुल्क दवा दी गई।इसके अलावा पटना ,शादी-भादी, सिधौना में भी डॉ बीके राय, डॉ प्रकाश पांडे, हेल्थ सुपरवाईजर सुरेंद्र, चंद्रशेखर ,एनएमएस इंद्रदेव, एएनएम मंजू राय सीएचओ रंजू ,ममता यादव ,उर्मिला सिंह आदि टीम में शामिल है।

अन्य ब्लाकों में भी टीमो के द्वारा निरोधात्मक कार्यवाही की जा रही है।

छूटे हुए लोगों को स्वास्थ्य कर्मी खिला रहे एमडीए दवा

फाइलेरिया उन्मूलन के लिए जनपद में शुरू हुआ मॉप अप राउंड

सोमवार को पाँच हजार छात्रों ने खाई फाइलेरिया से बचाव की दवा

किसी कारण छूटे हुए लोगों को स्वास्थ्यकर्मी खिला रहे एमडीए दवा

तीन दिन और बढ़ा मॉप अप राउंड, 13 सितंबर तक चलेगा

गाज़ीपुर। फाइलेरिया उन्मूलन के लिए जनपद में 10 अगस्त से दो सितम्बर तक सर्वजन दवा सेवन (एमडीए) अभियान चलाया गया। जिलाधिकारी के निर्देशन और मुख्य चिकित्सा अधिकारी के सुपरवीजन में अभियान में किसी कारण छूटे हुये और इन्कार करने वाले लोगों को फाइलेरिया से बचाव की दवा का सेवन कराने के लिए नौ सितम्बर से मॉप राउंड शुरू किया गया, जो पहले 10 सितम्बर तक संचालित किया जाना था। लेकिन अब इसको 13 सितम्बर तक बढ़ा दिया गया है। मॉप अप राउंड के पहले दिन सोमवार को जनपद के विभिन्न स्कूलों और विद्यालयों में बूथ लगाकर हजारों छात्रों को फाइलेरिया से बचाव की दवा का सेवन कराया गया।


जिला मलेरिया अधिकारी (डीएमओ) मनोज कुमार ने बताया कि एमडीए अभियान में किसी कारण से छूटे हुए लोगों को फाइलेरिया से बचाव की दवा का सेवन कराने के लिए मॉप अप राउंड नौ से 13 सितम्बर तक संचालित किया जाएगा। सोमवार को कासिमाबाद के नेशनल इंटर कॉलेज, जखनिया के जलालाबाद स्थित माँ शारदा डिग्री कॉलेज व सरस्वती महिला डिग्री कॉलेज, अलीपुर मदरा स्थित माता तेतरा देवी डिग्री कॉलेज, बाराचवार के गांधी इंटर कॉलेज, बाबा रामाचीज महिला डिग्री कॉलेज, देवकली के आरके डिग्री कॉलेज, भावरकोल के माध्यमिक विद्यालय, सादात के सुभास मंदिर, करंडा के रामस्वरूप द्विवेदी महाविद्यालय समेत अन्य ब्लाकों के विद्यालयों में छात्रों को फाइलेरिया से बचाव की दवा का सेवन कराया गया।


डीएमओ ने बताया कि सोमवार को करीब पाँच हजार छात्रों को फाइलेरिया रोधी दवा का सेवन कराया गया। साथ ही उन्हें फाइलेरिया जैसी गंभीर बीमारी के लक्षण, कारण, जांच, उपचार, देखभाल, बचाव आदि के बारे में जागरूक किया गया। इस दौरान छात्रों से अपील भी की गई कि स्वयं दवा का सेवन करें और जिन्होंने अभी तक दवा का सेवन नहीं किया है उन्हें जागरूक करते हुए फाइलेरिया रोधी दवा का सेवन करने के लिए प्रेरित करें। एमडीए अभियान में पीसीआई और सीफार संस्था के प्रतिनिधियो के द्वारा महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान किया जा रहा है। यह अभियान मरदह, मनिहारी और जमानिया ब्लॉक को छोड़कर सभी ब्लॉकों में संचालित किया जा रहा है।


कासिमाबाद ब्लॉक के नेशनल इण्टर कॉलेज में प्रधानाचार्य दिनेश सिंह व समस्त अध्यापक, स्टेक होल्डर, स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी पंकज गुप्ता व संगिनी अखिला देवी की उपस्थिति में फाइलेरिया पेशेंट सपोर्ट ग्रुप (पीएसजी) नेटवर्क की सदस्य सरिता एवं आशा कार्यकर्ताओं के सहयोग से बूथ लगाकर 1875 छात्रों को फाइलेरिया रोधी दवा खिलाई गई। इस अवसर पर बच्चों से अनुरोध किया कि अगर उनके परिवार में कोई भी सदस्य दवा खाने से छूट गया हो तो अपने गांव की आशा कार्यकर्ता से संपर्क कर उनके सामने दवा जरूर खाएं, जिससे फाइलेरिया जैसी गंभीर बीमारी से बचा जा सके।


अपील – फाइलेरिया लाइलाज बीमारी है। इसको रोकने के लिए बचाव ही एकमात्र उपाय है। इसलिए वर्ष में एक बार चलने वाले फाइलेरिया उन्मूलन (एमडीए) अभियान के तहत फाइलेरिया से बचाव की दवा का सेवन जरूर करें। पाँच साल तक लगातार व साल में एक बार यह दवा खाने से फाइलेरिया संक्रमण से बचा सकता है। एक वर्ष से छोटे बच्चे, गर्भवती महिला और गंभीर रूप से बीमार व्यक्तियों को इस दवा का सेवन नहीं करना है। यह दवा फाइलेरिया से आपको सुरक्षा प्रदान करेगी।

मेडिकल कॉलेज में ऑपरेशन की फीस 400, डॉक्टर ने मांगा डेढ़ लाख

मेडिकल कॉलेज में ऑपरेशन की फीस 400, डॉक्टर ने मांगा ऑपरेशन के डेढ़ लाख

गाजीपुर। डॉक्टर जिन्हें धरती का भगवान कहा जाता है और इस भगवान को अपनी चिकित्सा सुविधा देने की एवज में शासन की तरफ से लाखों रुपए महीने का वेतन दिया जाता है। ताकि उनके रहन-सहन और ऐसो आराम में कोई कमी ना आए। बावजूद इसके डॉक्टर आज भी मरीज से वसूली करने में पीछे नहीं रह रहे हैं। ऐसा ही मामला गाजीपुर के राजकीय मेडिकल कॉलेज का आया है। जहां पर एक वृद्ध महिला की सर्जरी के लिए डेढ़ लाख रुपए की मांग की गई। इतना ही नहीं उस महिला को दो दिनों तक मेडिकल कॉलेज में भी एडमिट किया गया । वहीं अब महिला के परिजन इस मामले को लेकर कॉलेज के प्रिंसिपल से शिकायत किये है।

राजकीय मेडिकल कॉलेज स्थित जिला अस्पताल में मरिज मंगलावती जायसवाल पत्नी शशि भूषण जायसवाल जिनकी उम्र करीब 85 वर्ष है। वह काशीराम आवासीय कॉलोनी बड़ी बाग गाजीपुर में रहती हैं और उनके दाहिने कूल्हे में कुछ दिक्कत आ गई थी। जिसके लिए उन्हें जिला अस्पताल में एडमिट कराया गया था। जहां पर हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ वैभव सिंह के द्वारा उन्हें देखा गया और कूल्हे के इलाज के लिए ऑपरेशन की बात कही गई। मरीज इसके लिए दो दिन तक मेडिकल कॉलेज के जिला अस्पताल में भर्ती भी किया गया। इस दौरान डॉ वैभव सिंह के द्वारा डेढ़ लाख रुपए आपरेशन हेतु डिमांड की गई। जब मरीज के परिजनों के द्वारा इतनी भारी भरकम रकम देने में असमर्थता जाहिर की गई। तब उसे घटाकर 85000 पर ऑपरेशन करने को राजी हुए। इन्ही सब बातों की शिकायत मरीज के परिजन और कुछ समाजसेवी संगठनों के लोगों के द्वारा मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ आनंद मिश्रा से बीते गुरुवार को लिखित रूप से शिकायत किया गया।

समाजसेवी संगठन के अजय कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि महिला बेहद ही गरीब परिवार से है और जब इसकी जानकारी उनके लोगों को हुई तो इस संबंध में उन्होंने मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल से लिखित रूप में शिकायत किया। साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि ऑपरेशन में जिस प्लेट की जरूरत होती है वह प्लेट 10 से 20 हजार में बाजार में मिलती है। लेकिन इसके लिए मेडिकल कॉलेज के ऑर्थो स्पेशलिस्ट डॉ वैभव सिंह के द्वारा डेढ़ लाख रुपए की डिमांड की गई है।

बताते चले की 11 महीना पहले भी जिला अस्पताल में ही एक और मामला आया था जब एक मरीज ऑर्थो सर्जन डॉ रजत सिंह से ऑपरेशन कराना चाह रहा था लेकिन डॉ वैभव उस मरीज का खुद ऑपरेशन करना चाह रहे थे। मरीज और उनके परिजन के द्वारा नहीं कराने पर मरीज को काफी उल्टा सीधा बोला गया था जिसका सोशल मीडिया पर वीडियो भी वायरल हुआ था। तब मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल ने उक्त मामले में कार्रवाई करते हुए डॉ रजत सिंह से ओपीडी का काम लेना बंद कर दिए थे। जबकि शासनादेश के अनुसार सभी डॉक्टरों से ओपीडी करा कर मरीजों को राहत पहुंचाना होता है।

इस मामले में डॉ रजत सिंह से बात की गई तो उन्होंने बताया कि उनसे पिछले 11 महीने से ओपीडी या सर्जरी का काम नहीं लिया जा रहा है। साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि पिछले दो महीने से प्रत्येक बुधवार को छोटे बच्चों के टेढ़े पंजे को सीधा कर ऑपरेशन करने का जो कैंप लगता है सिर्फ उसमें काम लिया जा रहा है।

वही इस पूरे मामले पर मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ आनंद मिश्रा से बात की गई तो उन्होंने बताया कि इस तरह की शिकायत उन्हें गुरुवार को मिला है। जिसके लिए उन्होंने एक जांच कमेटी बैठा दिया है और उस कमेटी के द्वारा इस मामले में जो भी रिपोर्ट दिया जाएगा उस रिपोर्ट के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। इस दौरान उन्होंने यह भी बताया कि मेडिकल कॉलेज में जो भी इलाज है वह निशुल्क है। हालांकि ऑपरेशन के लिए ₹400 शासन के द्वारा फीस निर्धारित की गई है जो मरीज के परिजनों के द्वारा देय होता है। उन्होंने बताया कि कूल्हे के ऑपरेशन के लिए जो भी सर्जिकल सामान लगता है वह मरीज के परिजनों के द्वारा खरीदारी कर उपलब्ध कराना होता है। उसके बाद ही डॉक्टर के द्वारा उनका ऑपरेशन किया जाता है। ऐसे में उन सर्जरी सामानों की कीमत कितना भी हो सकता है।

9 व 10 सितम्बर को चलेगा एमडीए मॉप अप राउंड, छूटे हुए लोग जरूर खा लें दवा

फाइलेरिया रोधी दवा के सेवन के लिए स्वास्थ्य विभाग ने दिया एक और मौका

9 व 10 सितम्बर को चलेगा एमडीए मॉप अप राउंड, छूटे हुए लोग जरूर खा लें दवा

10 दिन में 30 लाख से अधिक लोगों ने किया फाइलेरिया से बचाव की दवा का सेवन

गाज़ीपुर। फाइलेरिया उन्मूलन के लिए 10 अगस्त से दो सितम्बर तक सर्वजन दवा सेवन यानि एमडीए अभियान के तहत लोगों को घर-घर जाकर फाइलेरिया से बचाव की दवा का सेवन कराया गया। जो परिवार व लाभार्थी किन्हीं कारणों से दवा खाने से छूट गए हैं या जिन्होंने इन्कार किया है, उनके लिए मॉप अप राउंड 09 व 10 सितम्बर को चलाया जाएगा।

मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ देश दीपक पाल ने कहा कि फाइलेरिया लाइलाज बीमारी है। इसको रोकने के लिए बचाव ही एकमात्र उपाय है। इसलिए वर्ष में एक बार चलने वाले फाइलेरिया उन्मूलन (एमडीए) अभियान के तहत फाइलेरिया से बचाव की दवा का सेवन जरूर करें। पाँच साल तक लगातार व साल में एक बार यह दवा खाने से फाइलेरिया संक्रमण से बचा सकता है। फाइलेरिया किसी भी व्यक्ति को हो सकता है। यह न तो अमीर देखता है और न गरीब। इसलिए भ्रम न पालें और दवा का सेवन जरूर करें।

वेक्टर बॉर्न डिजीज कार्यक्रम के नोडल अधिकारी व एसीएमओ डॉ जेएन सिंह ने कहा कि यह दवा एक वर्ष से ऊपर के सभी लोगों को खानी है। गर्भवती, एक वर्ष से छोटे बच्चे और गंभीर रूप से बीमार लोगों को इस दवा का सेवन नहीं करना है। यह दवा फाइलेरिया से आपको सुरक्षा प्रदान करेगी।

जिला मलेरिया अधिकारी (डीएमओ) मनोज कुमार ने बताया कि एमडीए अभियान के तहत पिछले 10 दिनों में लक्ष्य के सापेक्ष 30 लाख से अधिक लोगों को फाइलेरिया से बचाव की दवा का सेवन कराया जा चुका है। अभियान के तहत प्रचार-प्रसार पर बेहद ज़ोर दिया जा रहा है। इसी का परिणाम है कि करीब 87 प्रतिशत आबादी को कवर किया जा चुका है। मॉप अप राउंड में इसको 90 प्रतिशत तक ले जाने का प्रयास किया जाएगा। जिन ब्लाकों का कवरेज 85 प्रतिशत से कम है, वहाँ अधिक ज़ोर दिया जाएगा।

फाइलेरिया के लक्षण – फाइलेरिया वाहक क्यूलेक्स मच्छर के काटने के बाद व्यक्ति को बहुत सामान्य लक्षण दिखते हैं। अचानक बुखार आना (आमतौर पर बुखार दो से तीन दिन में ठीक हो जाता है), हाथ-पैरों में खुजली होना, एलर्जी और त्वचा की समस्या, स्नोफीलिया, हाथों में सूजन, पैरों में सूजन के कारण पैर का बहुत मोटा हो जाना, पुरुषों के जननांग और उसके आस-पास दर्द व सूजन होना, पुरुषों के अंडकोष व महिलाओं के स्तन में सूजन आना फाइलेरिया के लक्षण हैं।

प्रतिकूल प्रभाव से न घबराएँ – एमडीए अभियान के दौरान स्वास्थ्य कार्यकर्ता अपने सामने ही फाइलेरिया रोधी दवा का सेवन कराते हैं। दवा खाली पेट नहीं खानी है। दवा खाने के बाद किसी-किसी को जी मिचलाना, चक्कर या उल्टी आना, सिर दर्द, खुजली की शिकायत हो सकती है, ऐसे में घबराने की जरूरत नहीं है। यह एक सामान्य प्रक्रिया है। ऐसा शरीर में फाइलेरिया के परजीवी होने से हो सकता है, जो दवा खाने के बाद मरते हैं। ऐसी प्रतिक्रिया कुछ देर में स्वतः ठीक हो जाती है। यदि यह समस्या बनी रहती है तो रैपिड रिस्पांस टीम या नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करें।

बचाव –घर के आस-पास पानी, कूड़ा और गंदगी जमा न होने दें। घर में भी कूलर, गमलों अथवा अन्य चीजों में पानी न जमा होने दें। सोते समय पूरी बांह के कपड़े पहनें और मच्छरदानी का प्रयोग करें। यदि किसी को फाइलेरिया के लक्षण नजर आते हैं तो वह घबराएं नहीं। विभागीय स्तर पर मरीज का पूरा उपचार होता है। इसलिए लक्षण नजर आते ही सीधे सरकारी अस्पताल जाएं।

नहीं लौटे काम पर तो सीएमओ का चलेगा चाबुक

आयुष्मान आरोग्य मंदिर के कम्युनिटी हेल्थ ऑफीसर (सीएचओ) नहीं लौटे काम पर तो सीएमओ का चलेगा चाबुक

गाजीपुर। उत्तर प्रदेश सरकार के द्वारा ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सुविधा को संवारने के लिए आयुष्मान आरोग्य मंदिर का निर्माण करा कर उसके संचालन के लिए कम्युनिटी हेल्थ ऑफीसर की नियुक्ति कराई। गाजीपुर मैं भी इस योजना के तहत 278 आयुष्मान आरोग्य मंदिर का निर्माण कराया गया जिसमें सभी केंद्रों पर कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर(सीएचओ) की तैनाती भी की गई। लेकिन सभी कम्युनिटी हेल्थ सेंटर पिछले 21 अगस्त से अपने विभिन्न मांगों को लेकर हड़ताल पर चल रहे हैं। जिसके चलते सभी आरोग्य मंदिर की व्यवस्था चरमरा गई है जिसको लेकर मिशन निदेशक राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन उत्तर प्रदेश ने सख्त लहजे में पत्र मुख्य चिकित्सा अधिकारी को भेजा है इसके बाद से ही विभाग में हड़कंप मचा हुआ है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ देश दीपक पाल ने बताया कि जनपद में संचालित सभी आयुष्मान आरोग्य मंदिर पर संविदा सेवा शर्तों के आधार पर कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर की नियुक्ति की गई। जिससे ग्रामीण इलाकों में मरीज को बहुत सारी जांच और इलाज की सुविधा उनके गांव के पास मिल जाए। लेकिन पिछले 21 अगस्त से जनपद के 278 आयुष्मान आरोग्य मंदिर के कम्युनिटी हेल्थ ऑफीसर ऑनलाइन उपस्थिति के विरोध में हड़ताल पर चल रहे हैं। ऐसे सभी लोगों को तत्काल से हड़ताल खत्म कर वापस कार्य पर आने की बात कही है । नहीं आने की दशा में भुगतानअवरुद्ध करने के साथ ही संविदा सेवा शर्तों के अनुरूप कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि मिशन निदेशक राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन उत्तर प्रदेश के द्वारा पत्र भेजा गया है जिसमें उन्होंने बताया है कि कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर के संगठन से सभी तरह की वार्ता हो चुकी है। इसके बाद संगठन ने कम पर लौटने की भी सहमति जाता दिया था। लेकिन जनपद में अभी भी आयुष्मान आरोग्य मंदिर पर तैनात को की वापसी नहीं हुई है। जिसको लेकर अब विभाग ऐसे लोगों के खिलाफ जो अपनी सेवा शर्तों के आधार पर वापस अपनी ड्यूटी पर नहीं आते हैं तो उनके खिलाफ अब अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि इस संबंध में जनपद के सभी अधीक्षक एवं प्रभारी अधिकारी को पत्र लिखकर इस संबंध में अवगत करा दिया गया है। संविदा सेवा शर्तों के अनुरूप यह लोग वापस अपने काम पर नहीं आते हैं तो यह सभी लोग प्रतिकूल प्रविष्ठि हेतु स्वयं जिम्मेदार होंगे। जिसमें किसी भी प्रकार की शिथिलता क्षम्य में नहीं होगी।

फाइलेरिया से बचना है तो दवा का सेवन जरूर करें

ग्राम प्रधान और कोटेदार भी फाइलेरिया रोधी दवा सेवन के लिए कर रहे प्रेरित

दवा खाने से इन्कार करने वाले लोगों को जागरूक कर अभियान में कर रहे सहयोग

हाथीपांव से ग्रसित पीएसजी नेटवर्क के सदस्य बता रहे फाइलेरिया बीमारी की गंभीरता

दो सितंबर तक चलेगा एमडीए अभियान, फाइलेरिया से बचना है तो दवा का सेवन जरूर करें

गाजीपुर। सामुदायिक स्तर पर लोगों फाइलेरिया (हाथीपांव और हाइड्रोसिल) की गंभीरता के बारे में जागरूक करते हुए ग्राम प्रधान और कोटेदार जनपद में संचालित सर्वजन दवा सेवन (एमडीए) अभियान में सहयोग कर रहे हैं। अभियान के दौरान वह लोगों को फाइलेरिया से बचाव की दवा का सेवन करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। इसके अलावा आशा कार्यकर्ताओं और स्वास्थ्यकर्मियों के सामने दवा सेवन से इन्कार करने वाले लोगों को जागरूक कर उन्हें दवा का सेवन करा रहे हैं। इस कार्य में फाइलेरिया (हाथीपांव) से ग्रसित पेशेंट सपोर्ट ग्रुप नेटवर्क के सदस्य भी सहयोग कर रहे हैं। हाथीपांव से पीड़ित सदस्य लोगों को अपने सूजे हुए पैर की गंभीरता के बारे में बता रहे हैं, जिससे प्रभावित होकर लोग दवा का सेवन कर रहे हैं। अब तक 24 लाख 64 हजार से अधिक लोग दवा का सेवन कर चुके हैं।


कासिमाबाद ब्लॉक के सीधौत गाँव की प्रधान कृष्णावती ने बताया कि उन्होंने स्वयं और पूरे परिवार को फाइलेरिया से बचाव की दवा का सेवन किया है। जब उन्हें पता चला कि फाइलेरिया, लाइलाज बीमारी है। एक बार इसके लक्षण (हाथ-पैरों में सूजन) आ जाएं तो यह ज़िंदगी भर साथ रहता है। इसको कोई उपचार भी नहीं है। इसको सिर्फ एमडीए की दवा के सेवन से बचाया जा सकता है। इसलिए ग्रामीणों को दवा सेवन के लिए लगातार जागरूक किया जा रहा है। क्यामपुर गाँव के प्रधान दरसू राम ने बताया कि अभियान शुरू होते ही स्वास्थ्यकर्मी के सामने दवा का सेवन किया है। साथ ही परिवार सहित अन्य आसपास के घरों को भी दवा का सेवन स्वास्थ्यकर्मियों के सामने कराया है। गाँव के ऐसे लोग जो दवा खाने से डर रहे हैं या किसी सामान्य सर्दी खांसी या बुखार से ग्रसित होने पर दवा नहीं खा रहे हैं। उनको बताया जा रहा है कि इस दवा के सेवन से फाइलेरिया (हाथीपांव) जैसी गंभीर बीमारी से बचे रहेंगे। सामान्य सर्दी, खांसी या बुखार में भी इस दवा का सेवन किया जा सकता है। सिर्फ एक साल से कम उम्र के बच्चों, गर्भवती महिलाओं और अति गंभीर रूप से बीमार मरीज को दवा का सेवन नहीं करना है।


इसी तरह सीधौत के कोटेदार गणेश चौहान और क्यामपुर के कोटेदार सुदामा यादव अपने लाभार्थियों को फाइलेरिया से बचाव की दवा का सेवन करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि गाजीपुर में फाइलेरिया मुक्त जनपद बनाने के लिए हम विभाग का पूरा सहयोग कर रहे हैं। जिला मलेरिया अधिकारी मनोज कुमार ने बताया कि फाइलेरिया की गंभीरता को देखते हुए एमडीए अभियान में ग्राम प्रधान, कोटेदार, हाथीपांव से ग्रसित मरीज समेत अन्य प्रभावशाली व्यक्तियों से सहयोग लिया जा रहा है। यह अभियान दो सितंबर तक चलेगा, जिसमें एक वर्ष से कम उम्र के बच्चों, गर्भवती महिलाओं और अति गंभीर रूप से बीमार व्यक्तियों को छोड़कर सभी को डीईसी और एल्बेण्डाज़ोल की दवा का सेवन किया जा रहा है। फाइलेरिया का वाहक मच्छर क्यूलेक्स, जिंदगी भर के लिए दिव्यांग बना सकता है। उन्होंने कहा कि फाइलेरिया (हाथीपांव) से बचाव के लिए दवा का सेवन जरूर करें।

2 सितंबर से शुरू होगा कुष्ठ रोगी खोजी अभियान

2 सितंबर से चलेगा कुष्ठ रोगी खोजी अभियान, तैयारी को लेकर हुआ कार्यशाला

ग़ाज़ीपुर। पल्स पोलियो अभियान की तर्ज पर कुष्ठ रोगी खोजी अभियान 2 सितम्बर से 15 सितम्बर तक संचालित होना है। जिसको लेकर इस प्रोग्राम को बेहतर बनाने के लिए लगातार चिकित्सा अधिकारियों की बैठक की जा रही है । इसी क्रम में शुक्रवार को मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय के सभागार में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ देश दीपक पाल की अध्यक्षता में दो दिवसीय वर्कशाप का आयोजन किया गया। कार्यशाला में जिला कुष्ठ अधिकारी डॉ रामकुमार और उप जिला कुष्ठ अधिकारी डॉ मुंशीलाल के द्वारा आए हुए लोगों को प्रशिक्षित किया गया। जिला कुष्ठ रोग अधिकारी डॉ रामकुमार ने बताया कि जनपद में 2 सितंबर से 15 सितंबर तक कुष्ठ रोगी खोजी अभियान चलाया जाना है। जिसको लेकर दो दिवसीय प्रशिक्षण के लिए वर्कशॉप का आयोजन किया गया है। जिसमें जनपद के सभी चिकित्सा अधिकारी बीसीपीएम व अन्य लोग मौजूद रहे। इस दौरान उन्हें अभियान में मरीजों को किस तरह से खोजा जाना है इसकी बारीकियां के बारे में जानकारी दी गई है।उन्होंने बताया कि इसके पूर्व 21 दिसंबर से 4 जनवरी तक कुष्ठ रोगी खोजी अभियान चलाया गया था जिसमें घर-घर जाकर 62 मरीजों को चिन्हित किया गया था। और सभी को विभाग के द्वारा निशुल्क दवा उपलब्ध कराई गई । वहीं अगर अब तक के रिकॉर्ड की बात करें तो जनपद में कुल 173 मरीज का इलाज चल रहा है। जिसमें पीबी 51 और एमबी मरिज 122 है। पीबी मरीजों का दवा 6 माह और एमबी मरीजों का दवा 1 साल तक चलाया जाता है।

उन्होंने बताया कि इस अभियान को सफल बनाने के लिए कुल 3749 टीम बनाई गई हैं। प्रत्येक टीम में आशा/आंगनबाड़ी और एक पुरुष कार्यकर्ता शामिल रहेगा .जो पल्स पोलियो की तर्ज पर घर-घर जाकर कुष्ठ रोगी के जांच करेगा .और इन सभी टीमों की निगरानी के लिए 758 सुपरवाइजर नियुक्त किए गए हैं। उन्होंने बताया कि कुष्ठ रोगी खोजी अभियान में काम करने वाली आशा आंगनबाड़ी को ₹250 का मानदेय दिया जाता है. और जिन आशा के द्वारा पीबी के मरीज को दवा खिलाया जाता है उस आशा या आंगनबाड़ी को 6 माह का दवा खिलाने पर ₹400 दिया जाता है। और एमबी मरीज को दवा खिलाए जाने के पश्चात ₹600 दिया जाता है। साथ ही उन्होंने बताया कि यदि दिव्यांग और पैर में शून्यता वाले मरीज मिलते हैं तो उन्हें विभाग की तरफ से निशुल्क एमसीआर चप्पल भी दिया जाता है। इस अभियान में धार्मिक, राजनीतिक और शैक्षिक क्षेत्र के प्रभावशाली लोगों का भी सहयोग लिया जाएगा। क्योंकि ऐसे लोग अपने-अपने क्षेत्र में काफी प्रभाव रखते हैं । और लोग इनकी बातों को भी सुनते हैं। इसलिए ऐसे लोगों को इस कार्यक्रम से जोड़ने का शासन ने एक प्रयास किया है। इस बैठक में समस्त अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी, और चिकित्सा अधीक्षक के साथ ही प्रभारी अधिकारी ब्लाक के बीसीपीएम व अन्य उपस्थित रहे।

नोडल अधिकारी ने तीन स्वास्थ्य इकाइयों का किया निरीक्षण

संयुक्त निदेशक डॉ नीना वर्मा ने संचारी रोगों के प्रभावी नियंत्रण व कार्यवाई का जाना हाल

संचारी रोग नियंत्रण की जनपदीय नोडल अधिकारी ने तीन स्वास्थ्य इकाइयों का किया निरीक्षण

सीएचसी करंडा और सैदपुर एवं पीएचसी देवकली पर सुविधाओं आदि की ली जानकारी

गाजीपुर। प्रदेश मुख्यालय से आईं परिवार कल्याण कार्यक्रम की संयुक्त निदेशक एवं संचारी रोग नियंत्रण की जनपदीय नोडल अधिकारी डॉ नीना वर्मा ने गुरुवार को तीन स्वास्थ्य इकाइयों का निरीक्षण किया। उन्होंने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) करंडा और सैदपुर एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) देवकली पर भ्रमण कर संचारी रोग जैसे डेंगू, मलेरिया, फाइलेरिया, कालाजार, चिकनगुनिया, टीबी आदि संचारी रोगों को लेकर की जा रही प्रभावी नियंत्रण व कार्यवाई आदि के बारे में जानकारी ली। संयुक्त निदेशक के साथ जनपद मुख्यालय से जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ संजय कुमार, जिला मलेरिया अधिकारी मनोज कुमार और जिला कार्यक्रम प्रबन्धक प्रभुनाथ शामिल रहे।


डॉ नीना वर्मा ने करंडा सीएचसी के अधीक्षक डॉ अवधेश कुमार राव, सैदपुर सीएचसी के अधीक्षक डॉ संजीव सिंह और पीएचसी देवकली के प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ एसके सरोज से स्वास्थ्य केंद्र पर प्रदान की जा रही सुविधाओं, लैब आदि के बारे में जानकारी ली। उन्होंने कहा कि ओपीडी में आने वाले बुखार, सर्दी, खांसी आदि के मरीजों की जांच कर उन्हें दवा, परामर्श आदि प्रदान करें। डेंगू, मलेरिया, फाइलेरिया, टीबी आदि संभावित लक्षण वाले संभावित मरीजों को सूची बनाकर उनकी जल्द से जल्द जांच कराएं। पॉज़िटिव आने पर उन्हें तत्काल प्रभाव से उपचार पर रखें और आवश्यक परामर्श प्रदान करें। उनके संपर्कियों की जांच कर उन्हें आवश्यक उपचार व परामर्श दें। सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों (सीएचओ), एएनएम, संगिनी और आशा कार्यकर्ताओं के द्वारा समुदाय में लोगों को समस्त संचारी रोगों के लक्षण, कारण, जांच, निदान, उपचार, परामर्श और बचाव के बारे में जागरूक करें।


उन्होंने जनपदवासियों से अपील की है कि संचारी रोगों से बचाव के लिए सभी अपने घरों के आसपास साफ-सफाई रखें। झाड़ियां न उगने दें। जल जमाव न की स्थिति पैदा होने दें। रुके हुए पानी में जला हुआ मोबिल ऑयल या लार्वा रोधी रसायन डालें। कूलर आदि का पानी सप्ताह में एक बार अवश्य बदलें। सोते समय मच्छरदानी का प्रयोग करें। पूरी आस्तीन के कपड़े पहनें। कोई भी बुखार का लक्षण दिखे तो नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर जाकर जांच एवं इलाज़ कराएं। उन्होंने ‘हर रविवार मच्छर पर वार, खत्म करेंगे डेंगू, मलेरिया बुखार’ का संदेश दिया।