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टीकाकरण से परिवार करे इंकार तो उन्हें समझाएं

नियमित टीकाकरण से जब परिवार करे इंकार उन्हें समझाएं इस प्रकार

गाजीपुर। भारत सरकार के द्वारा 0 से 5 साल तक के बच्चे के साथ गर्भवती व धात्री महिलाओं को सुरक्षित रखने के लिए नियमित टीकाकरण कार्यक्रम लगातार चलाया जाता है। लेकिन इस नियमित टीकाकरण में कभी-कभी कुछ परिवारों के द्वारा टीकाकरण कराने से झिझक या इंकार कर दिया जाता है । ऐसे परिवारों को हम कैसे टीकाकरण को प्रति मोटिवेट करें। इसको लेकर शुक्रवार को मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय के सभागार में ब्लॉक रिस्पांस टीम का जिला स्तरीय प्रशिक्षण मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ हरगोविंद सिंह की अध्यक्षता में दिया गया।

मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ हरगोविंद सिंह ने बताया कि नियमित टीकाकरण भारत सरकार और स्वास्थ्य विभाग की एक महत्वपूर्ण योजना है। जिसके चलते हम 0 से 5 साल तक के बच्चों और गर्भवती व धात्री महिलाओं को कई रोगों से बचाने के लिए टीकाकरण का कार्यक्रम चलाते हैं। जिसके लिए हमारे ब्लॉक स्तर की टीम गांव गांव जाकर इस टीकाकरण को अमली रूप देती है। लेकिन जनपद के कई ऐसे इलाकों में समस्या आई है कि कुछ परिवारों के द्वारा टीकाकरण कराने से इनकार किया जाता है या फिर झिझक होती है। इन्हीं सब को लेकर ब्लॉक से आए हुए चिकित्सा अधीक्षक, बीपीएम, बीसीपीएम को प्रशिक्षित करने का काम किया गया।

जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ उमेश कुमार ने बताया कि यह कार्यक्रम यूनिसेफ के द्वारा आयोजित किया गया था। जिसमें ब्लॉकों से आए हुए लोगों को लोगों को अवेयरनेस करने और उनके तरीके के बारे में जानकारी दी गई है। जिससे कि हमारी ब्लॉक स्तर की टीम जब गांव में जाए और ऐसी परिस्थिति बन जाए तो उन्हें कैसे मोटिवेट करें उन्हें भली प्रकार से जानकारी हो।

इस बैठक में यूनिसेफ के रीजनल कोऑर्डिनेटर प्रदीप विश्वकर्मा, डीएमसी अजय उपाध्याय, एसीएमओ डॉ मनोज सिंह, यूएनडीपी के प्रवीण उपाध्याय, चाई के मणिशकर एवं एड्रा इंडिया के सहयोगी के साथ ही अन्य लोग भी बैठक में उपस्थित रहे।

डीएम ने किया सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का निरीक्षण

गाजीपुर। शुक्रवार को जिलाधिकारी आर्यका अखौरी ने मोहम्मदाबाद सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने उपस्थिति रजिस्टर को चेक किया। उन्होंने पूछा कि किस डॉक्टर की या किस स्टॉप की ड्यूटी किस समय लगी है। इसी क्रम में उन्होंने प्रसव कक्ष का निरीक्षण किया। उन्होंने आम मरीजों से यह जानकारी ली की उनको यहां पर दवा एवं इलाज सही समय पर हो रहा है कि नहीं। कहीं वह दवा बाहर से तो नहीं ले रहे हैं। उन्होंने दवा स्टाक रूम को चेक किया तथा दवा की उपलव्धता की जानकारी ली। इसी क्रम में उन्होंने महिला वार्ड का भी निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान वहां गंदगी पाई गयी। उन्होंने स्टाफ नर्स को साफ सफाई कराने का निर्देश दिया। उन्होंने ड्यूटी रूम, उपचारिका रूम, कोविड-19 पीकू वार्ड, नेत्र रोग विभाग, पैथोलॉजी कक्ष का निरीक्षण किया। पैथोलॉजी कक्ष मे कितने मरीज आए कितने लोगों का व्लड टेस्ट किया गया तथा टाइफाइड, हिमोग्लोबिन से संबंधित मरीजों का टेस्ट लेने के लिए कौन सी दवा प्रयोग की जाती है कि जानकारी ली। उन्होंने सैंपल मांग कर भी चेक किया। इसी क्रम में उन्होंने ऑपरेशन कक्ष का भी निरीक्षण किया। आपरेशन कक्ष मे टूटे-फूटे स्थान को उन्होने सही करवाने का निर्देश दिया। मौके पर उपजिलाधिकारी मु0बाद हर्षिता तिवारी के साथ अन्य अधिकारी कर्मचारी उपस्थित रहे।

कुष्ठ उन्मूलन को लेकर कार्यशाला का हुआ आयोजन

कुष्ठ उन्मूलन कार्यक्रम के तहत हुआ कार्यशाला का आयोजन

गाजीपुर। कुष्ठ उन्मूलन कार्यक्रम के अंतर्गत लगातार स्वास्थ्य विभाग के द्वारा कुष्ठ रोग को दूर करने के लिए कार्यक्रम चलाए जाते हैं । इसी क्रम में मंगलवार को मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय के सभागार में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ हरगोविंद सिंह की अध्यक्षता में एक कार्यशाला एवं समीक्षा बैठक का आयोजन किया गया। जिसमें जनपद के सभी ब्लॉकों के चिकित्सा अधीक्षक के साथ ही एनएमए और एनएमएस शामिल रहे।

जिला कुष्ठ रोग अधिकारी डॉ एसडी वर्मा ने बताया कि कुष्ठ रोगी के खोजे जाने और कुष्ठ रोग के बारे में जानकारी के साथ ही इसका कैसे निवारण हो इसको लेकर विभाग हमेशा सचेत रहता है। समय-समय पर कार्यक्रम भी चलाता है इसी क्रम में आज एक कार्यशाला का आयोजन किया गया।। जिसमें जनपद के समस्त ब्लॉकों के चिकित्सा अधीक्षक व अन्य कर्मचारी शामिल रहे।

उन्होंने बताया कि लेप्रोसी के मरीज़ों को अक्सर छुआछूत, कोढ़ और सामाजिक बहिष्कार का सामना करना पड़ता है। जागरुकता के अभाव की वजह से लोगों को लगता है कि यह छूने से फैलता है। जबकि ये बिल्कुल ग़लत है, संक्रामक बीमारी होने के बावजूद यह छूने या हाथ मिलाने, साथ में उठने-बैठने या कुछ समय के लिए साथ रहने से नहीं फैलती। हालांकि, यह संभव है कि लेप्रोसी पीड़ित व्यक्ति के साथ लंबे समय तक रहने से परिवार के सदस्य इसकी चपेट में आ सकते हैं। लेकिन, नियमित रूप से इसका चेकअप और बचाव करने से इससे बचा जा सकता है।

लेप्रोसी या कुष्ठ रोग एक जीर्ण संक्रमण है, जिसका असर व्यक्ति की त्वचा, आंखों, श्वसन तंत्र एवं परिधीय तंत्रिकाओं पर पड़ता है। यह मायकोबैक्टीरियम लैप्री नामक जीवाणु के कारण होता है। हालांकि यह बीमारी बहुत ज्यादा संक्रामक नहीं है, लेकिन मरीज के साथ लगातार संपर्क में रहने से संक्रमण हो सकता है।

लेप्रोसी पीड़ित व्यक्ति के खांसने या छींकने पर उसके श्वसन तंत्र से निकलने वाले पानी की बूंदों में लेप्रे बैक्टीरिया होते हैं। ये बैक्टीरिया हवा के साथ मिलकर दूसरे व्यक्ति के शरीर में पहुंच जाते हैं। स्वस्थ व्यक्ति के शरीर में पहुंच कर इन बैक्टीरिया को पनपने में करीब 4-5 साल लग जाते हैं। कई मामलों में बैक्टीरिया को पनपने (इन्क्यूबेशन) में 20 साल तक लग जाते हैं। प्राइमरी स्टेज पर लेप्रोसी के लक्षणों की अनदेखी करने से व्यक्ति अपंगता का शिकार हो सकता हैं। यह संक्रामक है, पर यह लोगों को छूने, साथ खाना खाने या रहने से नहीं फैलता है। लंबे समय तक संक्रमित व्यक्ति के साथ रहने से इससे संक्रमण हो सकता है, पर मरीज़ को यदि नियमित रूप से दवा दी जाए, तो इसकी आशंका भी नहीं रहती है।

लेप्रोसी के प्राइमरी स्टेज को ट्यूबरक्यूलोइड कहा जाता है। इसमें लेप्रे बैक्टीरिया शरीर के हाथ, पैर, मुंह जैसे एक्पोज या खुले अंगों और उनकी पेरीफेरल नर्व्स या गौण तंत्रिकाओं को ज़्यादा प्रभावित करता है। इसमें ब्लड या ऑक्सीजन की सप्लाई कम होने से प्रभावित अंग सुन्न होने लगते हैं। शरीर की त्वचा पर पैच पड़ने लगते हैं या त्वचा का रंग हल्का पड़ने लगता है और वह जगह सुन्न होने लगती है। वहां का सेंसेशन ख़त्म हो जाता है। समुचित इलाज न कराने से पैच दूसरे अंगों पर भी होने लगते हैं। पैच वाली स्किन ड्राइ और हार्ड होने लगती है। किसी भी प्रकार की चोट लगने या दूसरे इन्फेक्शन होने पर उनमें अल्सर हो सकता है।

आज के इस कार्यशाला में एसीएमओ डॉ जे एन सिंह,डॉ मनोज सिंह के साथ अन्य लोग भी मौजूद रहे।

विश्व मधुमेह दिवस पर आयोजित हुई गोष्ठी

विश्व मधुमेह दिवस पर सीएमओ कार्यालय पर आयोजित हुई गोष्ठी

गाजीपुर। विश्व मधुमेह दिवस’ यानी ‘वर्ल्‍ड डायबिटीज डे’ प्रत्येक वर्ष 14 नवंबर को मनाया जाता है। जिसको लेकर मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय के सभागार में सोमवार को मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ हरगोविंद सिंह की अध्यक्षता में एक गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस अवसर पर सरकार द्वारा सोशल मीडिया के जरिए मधुमेह के जोखिम कारकों, स्वस्थ जीवन शैली और शीघ्र पहचान की आवश्यकता के बारे में जागरूकता अभियान चलाए जाने पर चर्चा किया गया।

मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ हरगोविंद सिंह ने बताया कि मधुमेह एक क्रोनिक रोग है, जिसमें व्यक्ति की रक्त शर्करा उच्च यानि हाइपरग्लेसीमिया हो जाती है या शरीर पर्याप्त इंसुलिन नहीं बनाता हैं। या शरीर इंसुलिन के प्रति ठीक से प्रतिक्रिया नहीं करता है। इंसुलिन अग्न्याशय द्वारा उत्पादित हार्मोन है। यह ऊर्जा बनाने के लिए शरीर की कोशिकाओं द्वारा उपयोग किए जाने के लिए ग्लूकोज (कार्बोहाइड्रेट खाद्य पदार्थ को ग्लूकोज में विभाजित करता है) में मदद करता है।

उन्होंने बताया कि विश्व में मधुमेह (डायबिटीज) के बढ़ते मामलों को देखते हुए वर्ल्‍ड डायबिटीज डे मनाने की पहल की गई थी। इसका मकसद लोगों में इस बीमारी के विभिन्न पहलुओं के प्रति जागरूकता को फैलाना है। इसलिए यह दिन वैश्विक सार्वजनिक स्वास्थ्य मुद्दे के रूप में मधुमेह के बारे में जागरूकता बढ़ाने का अवसर प्रदान करता है।

यह दिवस वर्ष 1991 में अंतर्राष्ट्रीय मधुमेह संघ और विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा बनाया गया था। एक सौ साठ से अधिक देशों में विश्व के सबसे बड़े मधुमेह जागरूकता अभियान के साथ विश्व मधुमेह दिवस वर्ष 2006 से संयुक्त राष्ट्र का आधिकारिक दिवस है।

एसीएमओ डॉ मनोज कुमार ने बताया की इंसुलन हार्मोन की वजह से हमारे शरीर में ब्लड शुगर नियंत्रण में रहता है, लेकिन जब शरीर में इंसुलिन की मात्रा कम हो जाती है तो ब्लड शुगर लेवल बढ़ने लगता है। ऐसे में लोग इस बीमारी के शिंकजे में आ जाते हैं।

डायबिटीज तीन प्रकार का होता है। एक टाइप 1 और दूसरा टाइप 2 और तीसरा गर्भकालीन मधुमेह। टाइप 1 डायबिटीज का प्रमुख लक्षण शरीर में इंसुलिन का बनना बंद हो जाना होता है। जबकि टाइप 2 की स्थिति में शरीर में इंसुलिन जरूरत के हिसाब से नहीं बन पाता। ऐसे में इसका इस्तेमाल ठीक ढंग से नहीं हो पाता। ध्यान रहे डायबिटीज मोटापा, खानपान और खराब लाइफस्टाइल की वजह से हो सकता है। इनके अलावा गर्भकालीन मधुमेह में गर्भावस्था में अस्थायी स्थिति होती है।

डाटा ऑपरेटर को वितरित किया गया प्रमाण पत्र

नियमित टीकाकरण में गति लाने के लिए डाटा आपरेटरो का किया गया प्रशिक्षण

डेटा के आधार पर ब्लॉकों का करें रिव्यु – जिला प्रतिरक्षण अधिकारी

गाजीपुर।मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय के सभागार में नियमित टीकाकरण कार्यक्रम के बेहतर प्रबंधन एवं सुदृढ़ीकरण के लिए सभी डाटा ऑपरेटर का कार्यशाला का आयोजन जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ उमेश कुमार की अध्यक्षता में किया गया। कार्यशाला का आयोजन क्लिंटन हेल्थ एक्सेस इनिशिएटिव एवं स्वास्थ्य विभाग के तत्वाधान मे आयोजन किया गया । कार्यशाला में नियमित टीकाकरण कार्यक्रम में और सुधार लाने व कार्यक्रम के और बेहतर प्रबंधन पर विस्तार पूर्वक चर्चा की गयी |कार्यशाला में सभी ब्लॉक के कोल्ड चैन हैंडलर और डाटा ऑपरेटर शामिल रहे। इस दौरान नियमित टीकाकरण के डाटा को बेहतर तरीके से पोर्टल पर अपलोड करने को लेकर ब्लॉकों से आए हुए डाटा ऑपरेटर को प्रमाण पत्र भी वितरित किया गया।

जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ उमेश कुमार ने बताया कि नियमित टीकाकरण में सुधार लाने के लिए नियमित टीकाकरण बच्चो व माताओं को जानलेवा बिमारियों से बचाने का सबसे सशक्त माध्यम है। स्वास्थ्य विभाग शत प्रतिशत टीकाकरण लक्ष्य की प्राप्ति के लिए सभी डाटा का संकलन कर बेहतर कार्ययोजना बना कर लक्ष्य प्राप्ति कर सकते है। क्लिंटन हेल्थ फाउंडेशन के जनपद में सहयोग के बाद निश्चित ही हमारे नियमित टीकाकरण सेवाओं के परिणाम और बेहतर आएंगे और हम 90 प्रतिशत टीकाकरण के लक्ष्य को प्राप्त कर पाएंगे।

क्लिंटन हेल्थ फाउंडेशन के आज़म एवं मनी शंकर ने टीकाकरण कार्यक्रम में आ रही कठिनाइयों पर विस्तार से चर्चा की और डाटा फीडिंग के लिये सही तरीका बताया उन्होने कहा कि टीकाकरण से बच्चो और माताओं को बीमारियों से बचाया जा सकता है , बीपीएम और डीइओ आपसी सहयोग के जरिये डाटा का सही एनालसिस कर टीकाकरण कार्यक्रम को और बेहतर बनाया जा सकता है।

कार्यशाला मे एसीएमओ डॉ जे एन सिंह, यूएनडीपी के प्रवीण उपाध्याय के साथ सभी ब्लॉकों के डाटा ऑपरेटर शामिल रहे।

सिटी हॉस्पिटल के डाक्टरों ने किया किडजी स्कूल के बच्चों का हेल्थ चेकअप

किडजी स्कूल ने किया मेडिकल कैंप का आयोजन, उप जिलाधिकारी सदर ने किया उद्घाटन

गाजीपुर। गुरुवार को किडजी स्कूल में विद्यार्थियों के लिए हेल्थ चेकअप शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर में स्कूल के विद्यार्थियों का संपूर्ण शारीरिक चेकअप किया गया। बता दें कि इस हेल्थ चेकअप में जिले के प्रतिष्ठित सिटी हॉस्पिटल के डॉक्टरों ने बच्चों का मेडिकल चेकअप किया। जिसमें डॉ अवनीश मिश्रा एमबीबीएस एमएस हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉक्टर, मोईज बीडीएस दंत रोग विशेषज्ञ, डॉक्टर शम्स जनरल फिजिशियन, डॉक्टर सोनू यादव एवं आंख नाक के स्पेशलिस्ट के द्वारा जांच की गई तथा हेल्थ कार्ड देकर अभिभावकों को बच्चों के स्वास्थ्य के प्रति जागरूक किया गया।

कैंप का उद्घाटन सदर उप जिला अधिकारी प्रतिभा मिश्रा ने फीता काटकर किया। उन्होंने स्कूल के बच्चों को चॉकलेट और विटामिन डी सैशे‌ भी वितरित किया। उन्होंने कहा कि किडजी स्कूल विद्यार्थियों के लिए एक बेहतर माहौल और स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता और खेलकूद के साथ अध्ययन का एक सुंदर वातावरण उपलब्ध करा रहा है। मेरी शुभकामनाएं इस विद्यालय और यहां के विद्यार्थियों के लिए सदैव है। कैंप में विद्यालय की प्रिंसिपल जेनब फातिमा, कोऑर्डिनेटर शिवानी पांडे नेहा मैम, कीर्ति मिश्रा, रजदेपुर प्रधान जोगी यादव और सिटी हॉस्पिटल के डॉक्टरों की टीम का विशेष योगदान रहा।

गाजीपुर में चिकित्सा सुविधा की गुणवत्ता को परखने पहुंची पीआरसी की टीम

भारत सरकार के पीआरसी टीम ने 3 दिनों में जनपद के चिकित्सा सुविधा की गुणवत्ता को परखा

गाजीपुर। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण भारत सरकार के अंतर्गत पीआरसी नई दिल्ली की टीम के द्वारा जनपद के विभिन्न चिकित्सा इकाइयों का निरीक्षण किए जाने का कार्य 7 नवम्बर से चल रहा है। जिस के क्रम में टीम के सदस्यों ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय के अंतर्गत तैनात अपर चिकित्सा अधिकारी, प्रोग्राम नोडल ,अर्बन हेल्थ कोऑर्डिनेटर के साथ ही साथ अन्य लोगों के साथ बैठक कर चिकित्सा इकाइयों के बारे में जानकारी लेने के साथ ही साथ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र स्तर पर भी पहुंचकर स्वास्थ्य सेवाओं की जांच कर रहे हैं।

जिला क्षय रोग केंद्र के जिला समन्वयक डॉ मिथिलेश सिंह ने बताया कि मिशन निदेशक राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन उत्तर प्रदेश के द्वारा पिछले दिनों एक पत्र आया था। जिसमें 7 नवंबर से 9 नवंबर के मध्य पीआरसी नई दिल्ली की टीम के द्वारा जनपद के भ्रमण कार्यक्रम की जानकारी दी गई थी। जिसके अंतर्गत टीम के द्वारा 7 नवंबर को मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय में सभी नोडल अधिकारियों व अन्य के साथ बैठक लिया गया। जिला महिला चिकित्सालय में जनवरी 2022 से अप्रैल 2022 तक के सिजेरियन प्रसव का रिकॉर्ड एवं कार्यरत स्टाफ नर्स एवं चिकित्सक के बारे में जानकारी ली गई। इसके पश्चात टीम पीएचसी हाथीखाना पर नोडल अधिकारी अर्बन एवं हेल्थ कोऑर्डिनेटर चिकित्सक एवं समस्त स्टाफ के साथ भी बैठक कर चिकित्सा सुविधाओं के बारे में जानकारी ली गई ।

इसी के क्रम में 8 नवंबर को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मोहमदाबाद एवं हेल्थ वैलनेस सेंटर एवं उप केंद्र पर समस्त चिकित्सक एवं स्टाफ के साथ ही बीपीएमयू के साथ बैठक कर चिकित्सा सेवाओं का फीडबैक लिया। इसके पश्चात प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र अंधऊ पर भी चिकित्सक एवं स्टाफ के साथ फीडबैक लिया गया। इसके अलावा 9 सितंबर बुधवार को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की टीम सैदपुर पहुंची जहां पर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के चिकित्सा अधीक्षक सहित तमाम चिकित्सक को वहां पर कार्यरत स्टाफ के साथ ही बीपीएमयू यूनिट के साथ बैठक कर स्वास्थ्य एवं चिकित्सा संबंधित जानकारी लिया।

गाजीपुर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का डिप्टी सीएम ने किया निरीक्षण, फिर……

स्वास्थ्य मंत्री के निरीक्षण के बाद एलर्ट हुआ स्वास्थ्य महकमा जारी किए निर्देश

गाजीपुर। उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री और डिप्टी सीएम के द्वारा 1 दिन पूर्व मंगलवार को गाजीपुर भ्रमण के दौरान सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मोहम्मदाबाद का निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान स्वास्थ्य मंत्री अधिकारियों के साथ बैठक कर स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को सुदृढ़ करने एवं डेंगू से प्रभावित मरीजों के समुचित उपचार व व्यवस्थाओं के विशेष ध्यान देने के लिए निर्देश दिया था। जिस के क्रम में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ हरगोविंद सिंह ने बुधवार को जनपद के समस्त चिकित्सा अधीक्षक एवं प्रभारी अधिकारी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को स्वास्थ्य मंत्री उत्तर प्रदेश के निर्देश के क्रम में निर्देश जारी किया है।

मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ हरगोविंद सिंह ने बताया कि मंगलवार को स्वास्थ्य मंत्री बृजेश पाठक के द्वारा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मोहमदाबाद का निरीक्षण किया गया था। जिसके बाद उन्होंने कई तरह के निर्देश दिए गए हैं। उसी के क्रम में उन्होंने सभी चिकित्सालय में साफ-सफाई प्रतिदिन कराने के निर्देश के साथ ही सभी चिकित्सकों पैरामेडिकल स्टाफ एवं अन्य कार्मिकों की उपस्थिति नियमित रूप से सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। साथ ही सभी उप मुख्य चिकित्सा अधिकारी प्रतिदिन पांच सामुदायिक प्राथमिक एवं नया प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ,हेल्थ वैलनेस सेंटर ,उप केंद्र का निरीक्षण कर फोटो विभागीय ग्रुप में प्रेषित करने का भी निर्देश दिया है।

उन्होंने बताया कि सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर नियमित समय से ओपीडी सेवा शुरू करने ,आने वाले मरीजों को दवा एवं जांच हेतु परामर्श देने, निशुल्क उपलब्धता सुनिश्चित करें । यदि किसी मरीज के परिजन के द्वारा यदि बाहर की जांच एवं दवा के संबंध में शिकायत की जाएगी तो संबंधित चिकित्सक एवं पैरामेडिकल स्टाफ के विरुद्ध कठोर प्रशासनिक कार्यवाह की जाएगी।

इसके अलावा समस्त चिकित्सालय पर एडीएल के सापेक्ष दवा की उपलब्धता रहे यदि दवा उपलब्ध ना हो तो मांग पत्र तैयार कर केंद्रीय औषधि भंडार से दवा प्राप्त करें तथा एंटी रेबीज एवं एंटी स्नेक वेनम की उपलब्धता भी सुनिश्चित करें। सभी इकाइयों पर शुगर एवं बीपी की दवा उपलब्ध रहे।

डेंगू की जांच अनिवार्य रूप से कराई जाए। डेंगू के मरीज पाए जाने पर नियमानुसार निरोधात्मक कार्यवाही भी सुनिश्चित की जाए। इसके अलावा जनपद में चलने वाले चार मोबाइल मेडिकल वैन को डेंगू प्रभावित क्षेत्रों में ही लगाकर दवा वितरण कराया जाए।

उन्होंने बताया कि निर्देश का पालन सभी चिकित्सा अधिकारी सुनिश्चित करें।इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही क्षम्य नहीं होगी।

आए दिन एंबुलेंस में गूंज रही किलकारी

108 एंबुलेंस में गूंजी किलकारी

गाजीपुर। उत्तर प्रदेश सरकार के द्वारा चलाई गई एंबुलेंस सेवा जाति धर्म से ऊपर उठकर सिर्फ मानव सेवा का कार्य पिछले कई सालों से लगातार कर रही है। आए दिन एंबुलेंस का लाभ आमजन को मिलता दिख रहा है। ऐसा ही कुछ 7 नवंबर को हुआ जब सदर ब्लाक के गाजीपुर घाट से गर्भवती के प्रसव के लिए एंबुलेंस को कॉल किया गया और बताए गए लोकेशन पर पायलट और ईएमटी के द्वारा क्विक रिस्पांस कर पहुंचा गया। और जब गर्भवती को लेकर एंबुलेंस स्वास्थ्य केंद्र के लिए चली लेकिन रास्ते में प्रसव पीड़ा बढ़ जाने के कारण एंबुलेंस के अंदर ही प्रसव कराना पड़ा।

102 और 108 एंबुलेंस के ब्लॉक प्रभारी दीपक राय ने बताया कि ग्राम पंचायत गाजीपुर घाट जो सदर ब्लाक के अंतर्गत आता है। यहां से एक कॉल 108 नंबर के एंबुलेंस के लिए आया और बताया गया कि जगीरू निशा पत्नी समसुद्दीन को प्रसव पीड़ा है। जिसकी जानकारी पर इमरजेंसी मेडिकल टेक्नीशियन गीरजेश कुमार और पायलट अखिलेश के द्वारा बताए गए लोकेशन पर 108 एंबुलेंस को लेकर पहुंचे। जहां पर गर्भवती व परिजनों को लेकर स्वास्थ्य केंद्र के लिए चले। लेकिन रास्ते में प्रसव पीड़ा बढ़ जाने के कारण एंबुलेंस को सड़क किनारे खड़ा किया गया। इमरजेंसी मेडिकल टेक्नीशियन गिरजेश कुमार और परिवार की महिलाओं के सहयोग से एंबुलेंस के अंदर ही महिला का प्रसव कराया गया। जहां पर महिला ने स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया। जिसके बाद जच्चा और बच्चा को जिला महिला अस्पताल में एडमिट कराया गया। डॉक्टरों ने दोनों को स्वस्थ बताया।

गाजीपुर में एम्बुलेंस बना लेबर रूम

एक बार फिर 108 एंबुलेंस बना लेबर रूम

गाजीपुर। 102 और 108 एंबुलेंस जब अपनी सेवा 2012 में शुरू की थी तब विभाग और सरकार को भी यह उम्मीद नहीं थी की एंबुलेंस सेवा लोगों के लिए जीवनदायिनी बन जाएगी। लेकिन लगातार गाजीपुर के ग्रामीण इलाकों में एंबुलेंस सेवा लेबर रूम बन कर प्रसव पीड़िता को नया जीवन देने के साथ ही जच्चा बच्चा के लिए मुफीद साबित होता दिख रहा है। ऐसा ही एक मामला मनिहारी ब्लॉक के दिलावल पट्टी से आया। गर्भवती को लेकर एंबुलेंस स्वास्थ्य केंद्र के लिए चला लेकिन की रास्ते में ही प्रसव पीड़ा बढ़ने के कारण एंबुलेंस में प्रसव कराया गया। जहां गर्भवती ने कन्या को जन्म दिया।

108 एंबुलेंस के ब्लॉक प्रभारी आशुतोष मिश्रा ने बताया कि 5 नवंबर को मनिहारी ब्लॉक के दिलावल पट्टी से फोन कॉल आया। बताया गया की प्रसव पीड़िता को एंबुलेंस की जरूरत है। जिसके बाद बताएंगे लोकेशन पर पायलट अशोक और ईएमटी राजविजय के द्वारा एंबुलेंस लेकर पहुंचा गया। वहां से गर्भवती प्रेमा देवी पत्नी राजन राजभर को लेकर एंबुलेंस स्वास्थ्य केंद्र के लिए चली । लेकिन रास्ते में प्रसव पीड़ा बढ़ जाने के कारण आशा कार्यकर्ता मनीषा देवी और ईएमटी राज विजय के साथ ही परिवार की महिलाओं के सहयोग से एंबुलेंस के अंदर ही प्रसव कराया गया। उसके पश्चात सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मनिहारी पर जच्चा बच्चा को एडमिट कराया गया। जहां पर स्टाफ नर्स माधुरी देवी ने जच्चा और बच्चा को देखा और दोनों को सुरक्षित बताया।