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31 साल पुराने मामले में कोर्ट ने सुनाई सजा

गाजीपुर। अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम चन्द्रप्रकाश तिवारी की अदालत ने शुक्रवार को 31 साल पुराने फर्जी स्टाप पेपर व फर्जी टिकट के मामले में इलाहाबाद करैली निवासी बच्चे बाबू उर्फ अमीर बेग को 5 साल की कड़ी कैद के साथ ही 10 हजार रुपये के अर्थदंड से दण्डित किया है।अभियोजन के अनुसार तत्कालीन थानाध्यक्ष AB सिंह अपने हम राहियों के साथ 24 फरवरी 1993 को गस्त पर थे कि गहमर की तरफ से एक फिएट कार आती हुई दिखी। पुलिस बल को देखते ही कार चालक भागने लगा। जिसको पुलिस पीछा करके पकड़ी तथा गाड़ी की तलाशी लिया। तलाशी में कागज में लपेटा हुआ अवैध स्टाप पेपर व टिकट जो लगभग 1 लाख 52 हजार 600 रुपये का बरामद हुआ। पूछने पर सारी घटना बताया। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया और विवेचना उपरान्त आरोप पत्र न्यायालय में पेश किया। दौरान विचारण अभियोजन की तरफ से सहायक शासकीय अधिवक्ता शशिकांत सिंह ने कुल 4 गवाहों को पेश किया। सभी गवाहों ने अपना अपना बयान न्यायालय में दर्ज कराया। शुक्रवार को दोनो तरफ की बहस सुनने के बाद न्यायालय ने उपरोक्त सजा सुनाते हुए अभियुक्त को जेल भेज दिया।

जन्म एवं मृत्यु के एक सप्ताह के अंदर पोर्टल पर हो पंजीकरण

जन्म एवं मृत्यु के एक सप्ताह के अंदर पोर्टल पर हो पंजीकरण

गाजीपुर। जनपद के समस्त चिकित्सा संस्थानों में शत प्रतिशत जन्म मृत्यु पंजीकरण सुनिश्चित कराए जाने के संबंध में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ देश दीपक पाल ने कड़े निर्देश जारी करते हुए एक सप्ताह के अंदर सभी जन्म एवं मृत्यु का पंजीकरण कराए। अन्यथा की हालत में संबंधित अधिकारी और कर्मचारी के साथ विभागीय कार्रवाई के साथ ही वेतन बाधित करने की कार्रवाई की जाएगी। इस पर विशेष निगाह रखने के लिए सीएमओ ने पूर्व में कार्य देख रहे कर्मी को हटाते हुए राघवेंद्र शेखर सिंह को जिम्मेदारी सौंपी है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ देश दीपक पाल ने बताया कि मुख्य सचिव दुर्गा शंकर मिश्र का एक पत्र जनपद में होने वाले जन्म मृत्यु रजिस्ट्रेशन के संबंध में प्राप्त हुआ है। जिसमें बताया गया है कि राज्य में 83% से अधिक प्रसव संस्थागत होते हैं। परंतु समस्त जन्म की जानकारी पंजीकृत नहीं हो रही है। जबकि नियमावली के अनुसार समस्त जन्म मृत्यु की घटनाओं का साथ प्रतिशत पंजीकरण करना अनिवार्य है।इसके लिए भारत सरकार के द्वारा साल 2024 तक निर्धारित सत प्रतिशत पंजीकरण के निर्धारित लक्ष्य की प्राप्ति के लिए कई बिंदुओं पर अनुपालन करने का निर्देश दिया गया है। उन्होंने बताया कि जनपद के समस्त सरकारी अस्पताल सीएचसी पीएचसी पर जन्म लेने वाले बच्चों एवं प्रसूता के डिस्चार्ज होने से पूर्व प्रत्येक दशा में नवजात का जन्म पंजीकरण सीआरएस पोर्टल पर करना अनिवार्य होगा। यदि जन्म की सूचना पोर्टल पर प्राप्त नहीं हुई तो उसे दशा में ऑफलाइन माध्यम से सूचना को इकट्ठा का पोर्टल से प्रमाणित पत्र निर्गत किया जाए।

बैंकर्स को डीएम ने दिया निर्देश

समीक्षा बैठक में डीएम ने दिया बैंकर्स को निर्देश

गाजीपुर। डीसीसी/डीएलआरसी तथा ऋण जमानुपात तिमाही की बैठक जिलाधिकारी आर्यका अखौरी की अध्यक्षता में गुरूवार को कलेक्ट्रेट सभागार में सम्पन्न हुई। बैठक के दौरान प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना, प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना एवं अटल पेंशन योजना, प्रधानमंत्री जनधन योजना एवं रूपे कार्ड वितरण, ऋण जमा अनुपात की प्रगति, वार्षिक ऋण योजना के अन्तर्गत 1 अप्रैल, 2023 से 31 दिसम्बर, 2023 तक की प्रगति, किसान क्रेडिट कार्ड, पी0एम0एफ0एफ0ई योजनांतर्गत, एग्रिकल्चर इन्फ्रास्टक्चर फंड योजना, पशुपालन एवं मत्स्यपालन विभाग की आवेदन स्थिति, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन योजना, प्रधानमंत्री मुद्रा योजना, प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम, मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना, मुख्यमंत्री ग्रामोद्योग रोजगार योजना, एक जनपद एक उत्पाद, राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन योजना, पीएम स्वनिधि योजना एवं दिसम्बर 2023 तक की प्रगति की समीक्षा की गई।

जिसमें वित्तीय समावेशन, ऋण जमानुपात एवं जिले में संचालित विभिन्न सरकारी योजनाओं पर विस्तृत चर्चा की गयी। समीक्षा के दौरान जिलाधिकारी ने सभी बैंकर्स को निर्देशित किया कि शासकीय योजनाओं की लंबित पत्रवालियों को अतिशीघ्र निस्तारित करें। शासकीय योजना संबन्धित आवेदनों को अकारण अस्वीकृत ना करने का निर्देश दिया। उन्होने जनपद के ऋण जमानुपात को बढ़ाने हेतु बैंकों को ऋण प्रवाह बढ़ाने हेतु निर्देशित किया। उन्होने कहा कि सभी जनधन खाताधारकों को सामाजिक सुरक्षा योजना से आच्छादित किया जाये। अग्रणी जिला प्रबन्धक ने सदन को आश्वस्त किया कि सभी बैंकर्स मिलकर विभिन्न योजनाओं हेतु निर्धारित लक्ष्य को अवश्य पूर्ण करेंगे। बैठक में मुख्य विकास अधिकारी संतोष वैश्य, अग्रणी जिला प्रबन्धक पीयूष सिंह परमार, डीडीएम नाबार्ड सुशील कुमार, आरबीआई के अग्रणी जिला अधिकारी मार्कन्डेय चतुर्वेदी तथा सभी बैंक समन्वयक तथा विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

टीबी के मरीज न करें लापरवाही, वरना होंगी अन्य बीमारी

“टीबी मरीज अपना कोर्स पूरा करने में न करें लापरवाही, वरना होंगी अन्य बीमारी”

एक भी दिन दवा छूटने से गंभीर रूप ले सकती है टीबी – डीटीओ

सीएमओ कार्यालय में डिफरेंशिएटेड टीबी केयर विषय पर हुई प्रशिक्षण कार्यशाला



गाज़ीपुर। ऐसा देखा जाता है कि टीबी (क्षय रोग) की बीमारी किसी व्यक्ति को हो जाने पर उसे अन्य बीमारियाँ – डायबिटीज़, एचआईवी/एड्स, कैंसर आदि भी घेरने लगती हैं। टीबी के साथ – साथ इन्हीं बीमारियों की रोकथाम के लिए स्वास्थ्य विभाग तैयारी कर रहा है। इसी क्रम में राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम (एनटीईपी) के अंतर्गत बृहस्पतिवार को मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय सभागार में आयोजित डिफरेंशिएटेड टीबी केयर विषय पर तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला का समापन हुआ। मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ देश दीपक पाल के निर्देशन में हुए इस प्रशिक्षण कार्यशाला के उद्देश्य के बारे में जिला क्षय रोग अधिकारी (डीटीओ) डॉ मनोज कुमार सिंह ने बताया कि प्रधानमंत्री के टीबी मुक्त भारत वर्ष 2025 के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए जनपद प्रतिबद्ध है। इस प्रशिक्षण में एनटीईपी के सीनियर ट्रीटमेंट सुपरवाइज़र (एसटीएस), सीनियर टीबी लैब सुपरवाइज़र (एसटीएलएस) एवं आयुष्मान भारत – हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर के सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (सीएचओ) को टीबी रोगियों में होने वाली अन्य बीमारियों जैसे मधुमेह, मुंह का कैंसर, उच्च रक्तचाप, एचआईवी/एड्स आदि के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। उन्होंने बताया कि टीबी से ग्रसित मरीज यदि अपना सम्पूर्ण उपचार (छह माह या उससे अधिक का कोर्स) पूरा करता है, साथ ही प्रोटीन युक्त पौष्टिक आहार का सेवन करता है, धूम्रपान, तंबाकू, शराब आदि के सेवन से दूर रहता है, तो वह पूरी तरह ठीक हो जाता है, बशर्ते वह एक भी दवा खाना न छोड़े। एक भी दिन दवा छूटने से टीबी बीमारी गंभीर रूप से ले सकती है। यदि कोर्स पूरा न किया गया और खानपान में लापरवाही की गई तो टीबी के अलावा अन्य बीमारियाँ भी हो सकती हैं।

इसके लिए टीबी मरीज और उसके परिजन को बहुत अधिक ध्यान रखने की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि निक्षय पोषण योजना के तहत सरकार की ओर से टीबी मरीज को उपचार के दौरान हर माह 500 रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है। एनटीईपी के जिला कार्यक्रम समन्वयक डॉ मिथलेश कुमार ने बताया कि प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके सभी सीएचओ अपने हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर पर टीबी मरीज की अन्य बीमारियों की जांच करेंगे। ऐसे में कोई अन्य बीमारी टीबी मरीज में पायी जाती है तो इसकी जानकारी निक्षय आईडी पर फीड करेंगे, जिससे उन बीमारियों का भी सम्पूर्ण उपचार किया जा सके। इस कार्य की मॉनिटरिंग एसटीएस व एसटीएलएस के द्वारा की जाएगी। साथ ही नियमित समीक्षा भी की जाएगी। डब्ल्यूएचओ के कंसल्टेंट डॉ वीजे विनोद ने समस्त प्रतिभागियों को प्रस्तुतीकरण के माध्यम से टीबी व अन्य बीमारियों की बेहतर देखभाल को लेकर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि टीबी मरीजों को तभी स्वस्थ किया जा सकता है, जब उनका उपचार का कोर्स पूरा हो और एक भी दिन दवा खाना न छोड़ें। साथ ही उन्हें बेहतर पोषण आहार व देखभाल प्रदान की जा सके। जिला कार्यक्रम समन्वयक (डीपीसी) डॉ मिथलेश कुमार ने बताया कि जनपद में पिछले वर्ष कुल 4868 और इस वर्ष जनवरी से अब तक 445 टीबी रोगी नोटिफ़ाइ किए गए। वर्तमान में 2930 टीबी रोगियों का उपचार चल रहा है। शेष मरीज स्वस्थ हो चुके हैं।

जिला ओलम्पिक संघ के जिला इकाई का हुआ विस्तार

गाजीपुर। जिला ओलम्पिक संघ की वार्षिक बैठक बुधवार को जिले के एक सभागार में हुआ। जिसमे ग्रामीण खिलाड़ियों के उत्थान एवं विकास पर विशेष बल दिया गया और जिले की इकाई का विस्तार भी किया गया। जिसमें सर्वसम्मति से नवीन सिंह को वरिष्ठ उपाध्यक्ष, पंकज श्रीवास्तव एवं अमित सिंह को उपाध्यक्ष मंडल में तथा सुधीर प्रधान को संरक्षक मंडल में शामिल किया गया। उसके बाद आगामी होने वाली प्रतियोगिता के बारे में विचार विमर्श करने के बाद पूर्वांचल स्तर की बेंच प्रेस एवं डेडलिफ्ट प्रतियोगिता होना सुनिश्चित हुआ है। यह प्रतियोगिता 25 फरवरी दिन रविवार को गाजीपुर के नेहरू स्टेडियम गोराबाजार में आयोजित की जाएगी। जिसमें पूरे पूर्वांचल की 18 जिलों से प्रतिभागी प्रतिभाग करेंगे।इस प्रतियोगिता से चयनित ख़िलाड़ी आगे राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर ओलम्पिक खेलो की प्रतियोगिता में भाग लेंगे। बैठक में बॉबी सिंह, मोहित श्रीवास्तव सहित जिला ओलंपिक संघ के सभी पदाधिकारी उपस्थित रहे। यह जानकारी जिला ओलंपिक संघ के महासचिव अमित राय ने दी।

खाद्य पदार्थों के लिए नमूने, किया जांच, दिया चेतावनी

गाजीपुर। जिलाधिकारी आर्यका अखौरी के निर्देश पर बुधवार को सहायक आयुक्त (खाद्य) वाराणसी मण्डल द्वारा एफ0एस0डब्ल्यू वैन के माध्यम से जखनिया तहसील क्षेत्र के विभिन्न खाद्य प्रतिष्ठानों से विभिन्न खाद्य पदार्थों के कुल 40 नमूनें जॉच किये गये। खाद्य पदार्थों के जांच में कमी पाए जाने पर मौके पर ही खाद्य कारोबारकर्ताओं को जॉच रिपोर्ट से अवगत कराया गया एवं उन्हें भविष्य में खाद्य पदार्थ की गुणवत्ता में सुधार हेतु निर्देशित किया गया। इस दौरान मौके पर उपस्थित आम जनमानस को खाद्य पदार्थों में मिलावट के सम्बन्ध में जागरूक भी किया गया। एफएसडब्ल्यू वैन का संचालन जिले के आर०पी० सिंह मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी गाजीपुर के निर्देशन में गुलाबचन्द गुप्ता खाद्य सुरक्षा अधिकारी एवं मो० हनीफ लैब टेक्नीशियन द्वारा किया गया।

मनाया गया वसंत पंचमी का पर्व

गाजीपुर। मठ मंदिर के साथ साथ विद्यालयों में बुद्धवार को वसंत पंचमी पर्व मनाया गया। यह पर्व माघ माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है। यह पर्व ज्ञान, विद्या, संगीत और कला की देवी मां सरस्वती को समर्पित है। शास्त्रत्तें के अनुसार, इसी दिन मां सरस्वती का जन्म हुआ था। मठ मंदिर से लेकर स्कूलों तक में वीणावदिनी की पूजा की जाएगी। इस पर्व पर नदियों में स्नान दान की भी परम्परा है।बसंत पंचमी के इस पावन पर्व पर जनपद गाजीपुर में शिक्षण संस्थान, विद्यालय, कोचिंग संस्थान के साथ ही साथ डिजिटल लाइब्रेरी में भी मां सरस्वती का पूजा किया गया। जहां पर साइलेंट स्टडी डिजिटल लाइब्रेरी उर्दुबाजार में पढ़ने वाले छात्र मा सरस्वती के तस्वीर पर फूल माला अर्पित कर उन्हें लड्डू का भोग भी लगाया और उन्हें अपने जीवन में सफल होने की आशीर्वाद मांगा।पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इसी तिथि पर मां सरस्वती हाथों में पुस्तक, वीणा और माला लिए श्वेत कमल पर विराजमान हो कर प्रकट हुई थीं। इसलिए इस दिन मां सरस्वती की पूजा की जाती है। वसंत पंचमी से बसंत ऋतु की शुरुआत होती है। सनातन धर्म में मां सरस्वती की उपासना का विशेष महत्व है, क्योंकि ये ज्ञान की देवी हैं।

कोतवाली पुलिस ने किया इनामियां को गिरफ्तार

कोतवाली पुलिस ने एक इनामियां फरार को किया गिरफ्तार

गाजीपुर। थाना कोतवाली पुलिस ने 8 फरवरी को ग्राम निगाही बेग थाना कोतवाली क्षेत्र में गोवध की घटना कारित करने वाले वांछित व पुरस्कर घोषित अभियुक्त को गिरफ्तार किया। पुलिस अधीक्षक ओमवीर सिंह के आदेश पर जनपद में अपराध एवं अपराधियों के विरुद्ध चलाये जा रहे गिरफ्तारी अभियान के तहत 8 फरवरी 2024 को निगाही बेग थाना कोतवाली क्षेत्र मे 23.5 कि0ग्रा0 गोमांस, एक लोहे की बांकी, दो लोहे का चाकू, एक लोहे की कुल्हाडी व गोमांस काटने का ठीहा ( गुटका ) बरामद हुआ था। जिसके सम्बन्ध में थाना कोतवाली गोवध निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा पंजीकृत किया गया। जिसमें 8 फरवरी कोही 4 अभियुक्तों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। बचे एक अभियुक्त मेराज पुत्र अब्दुल बारी निवासी मोहल्ला निगाही बेग थाना कोतवाली की गिरफ्तारी जो फरार था शेष थी। फरार अभियुक्त के ऊपर पुलिस अधीक्षक ओमवीर सिंह द्वारा 15000 रुपये का पुरस्कार घोषित किया गया। जिसको बुधवार को निगाही बेग थाना कोतवाली से शहर कोतवाल दीनदयाल पाण्डेय ने अपने पुलिस टीम के साथ पहुंचकर गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी करने वाली पुलिस टीम में उप निरीक्षक कृष्णानन्द यादव, उप निरीक्षक अशोक कुमार गुप्ता और हेड कांस्टेबल रमेश तिवारी थाना कोतवाली शामिल रहे।

परीक्षा खत्म होने तक सीसीटीवी कैमरा बंद नहीं होना चाहिए:डीएम

परीक्षा खत्म होने तक सीसीटीवी कैमरा बंद नहीं होना चाहिए:डीएम

गाजीपुर। 17 व 18 फरवरी को होने वाली पुलिस परीक्षा को देखते हुए परीक्षा केन्द्रो में होने वाली परीक्षाओं को नकल विहीन एवं शुचितापूर्ण, सकुशल, शान्तिपूर्ण ढ़ग से सम्पन्न कराने को लेकर जिलाधिकारी आर्यका अखौरी एवं पुलिस अधीक्षक ओमवीर सिंह ने बुधवार को शहीद स्मारक इंटर कॉलेज नंदगंज, मोतीलाल नेहरू इंटर कॉलेज बासुपुर, टाउन नेशनल इंटर कॉलेज सैदपुर, आदर्श इंटर कॉलेज सियावा भितरी सैदपुर, समता स्नातकोत्तर महाविद्यालय सादात, श्री महंत शिवदास उदासीन इंटर कॉलेज सादात सहित विभिन्न विद्यालयो का स्थलीय निरीक्षण किया।

निरीक्षण में सीसीटीवी कैमरे के संचालन के साथ एक-एक कमरो की निगरानी कैसे हो रही है इसकी जानकारी लेते हुए विद्यालय के प्रधानाचार्य को कड़े निर्देश दिये कि किसी प्रकार से सी0सी0टी0वी कैमरा परीक्षा से पूर्व एवं समाप्ति तक बन्द नही होने चाहिए। विद्युत की पार्याप्त व्यवस्था हेतु जनरेटर मौके पर उपस्थित रखे। उन्होने निर्देशित किया कि परीक्षा के दौरान सभी कर्मचारियों एवं अधिकारियों के साथ केन्द्र व्यवस्थापक का आई कार्ड अवश्य बनाये एवं उन्हे गले में लटकाए। उन्होने कहा कि आयोग द्वारा जारी गाईड लाईन का पालन प्रत्येक दशा में सुनिश्चत करते हुए परीक्षा सम्पन्न कराया जाये। इसमें किसी प्रकार की लापरवाही क्षम्य नही होगी।

स्वास्थ्य विभाग व मेडिकल कॉलेज ने कार्यशाला का किया आयोजन

स्वास्थ्य विभाग और मेडिकल कॉलेज ने कार्यशाला का किया आयोजन

सतत चिकित्सा शिक्षा (सीएमई) के जरिए चिकित्सकों में टीबी को लेकर जिज्ञासा बढ़ाना जरूरी

स्वास्थ्य विभाग व महर्षि विश्वामित्र मेडिकल कॉलेज के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित हुई कार्यशाला

• कॉलेज के हर विभाग से टीबी मरीजों का ज्यादा से ज्यादा नोटिफिकेशन पर दिया ज़ोर
• ज्यादा से ज्यादा लोगों की हो टीबी की स्क्रीनिंग, किसी भी रोगी का न छूटे नोटिफिकेशन – डॉ मनोज
• टीबी के उपचार में सहायक नई दवाओं के लाभ के बारे में दी जानकारी
• उपचार के दौरान एक भी दिन दवा खाना न छोड़ें, सभी दवाएं सुरक्षित व लाभकारी – डॉ मिथलेश

गाज़ीपुर। राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम (एनटीईपी) के तहत मंगलवार को स्वास्थ्य विभाग और महर्षि विश्वामित्र स्वशासी राजकीय मेडिकल कॉलेज के संयुक्त तत्वावधान में ‘सतत चिकित्सा शिक्षा’ (सीएमई) पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। जिलाधिकारी आर्यका अखौरी के निर्देशन व मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ देश दीपक पाल एवं मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य प्रो डॉ आनंद मिश्रा के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यशाला में अधिकारियों के द्वारा टीबी के कारण, लक्षण, स्क्रीनिंग, निदान, नोटिफिकेशन एवं सम्पूर्ण उपचार के साथ जागरूकता पर विस्तार से चर्चा की गई। सभी वक्ताओं ने एकमत से कहा कि टीबी को लेकर चिकित्सकों में जिज्ञासा बढ़ाना जरूरी है। प्राचार्य प्रो डॉ आनंद मिश्रा ने बताया कि कार्यशाला का उद्देश्य राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम को लेकर सतत चिकित्सा शिक्षा के माध्यम से चिकित्सकों के ज्ञान और कौशल को बढ़ाना था, जिससे टीबी रोगियों व जनमानस को बेहतर सेवाएं मिल सकें। साथ ही चिकित्सक सहित अन्य पेशेवरों को बेहतर सेवाएं प्रदान करने के लिए प्रोत्साहन मिल सके। जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ मनोज कुमार सिंह ने बताया कि बैठक में टीबी के उपचार में सहायक नई दवाओं के बारे में विस्तार से चर्चा की गई। कॉलेज के हर विभाग से टीबी मरीजों को नोटिफ़ाई करने का निर्देश दिया गया। साथ ही मेडिकल कॉलेज में मौजूद सीबी नाट व ट्रू नाट जांच को सुदृढ़ करने पर ज़ोर दिया गया। कल्चर जांच (कौन सी दवा चलानी है और कौन सी बंद करनी है) पर भी जानकारी दी गई। कॉलेज के चिकित्सकों के सवालों की जिज्ञासा का समाधान भी किया गया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2025 तक क्षय मुक्त भारत को लेकर देश के प्रधानमंत्री का विजन तभी पूरा हो सकता है जब ज्यादा से ज्यादा लोगों की स्क्रीनिंग हो और किसी भी टीबी रोगी का नोटिफिकेशन न छूटे।
डब्ल्यूएचओ के ज़ोनल ऑफिसर डॉ वीजी विनोद ने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से टीबी के निदान, उपचार, नई दवाओं आदि के बारे में चर्चा की। उन्होंने कहा कि टीबी के सम्पूर्ण उपचार के लिए प्रतिदिन दवा खाना बेहद जरूरी है। सभी दवाएं पूर्ण रूप से सुरक्षित और बेहद फायदेमंद हैं। कई दवाएं बहुत महंगी हैं लेकिन सरकार की ओर से दी जा रही हैं जिसका टीबी रोगियों को लाभ उठाना चाहिए। एनटीईपी के जिला कार्यक्रम समन्वयक (डीपीसी) डॉ मिथलेश कुमार ने कहा कि टीबी रोगी सम्पूर्ण उपचार के दौरान एक भी दिन दवा खाना न छोड़ने के लिए प्रेरित करें। टीबी के सम्पूर्ण उपचार के लिए उसका कोर्स का पूरा होना बहुत जरूरी है। कई टीबी रोगी बीच में ही इलाज छोड़ देते हैं या फिर बदल-बदल कर इलाज करते हैं जिससे उनकी स्थिति बिगड़ जाती और कई बार बीमारी बहुत गंभीर स्थिति में पहुँच जाती है। ऐसे में मरीजों का सरकार द्वारा निर्देशित दवाओं से उपचार करने पर जोर दिया जाना चाहिए। साथ ही एचआईवी, डायबिटीज मरीजों की टीबी की नियमित जांच की जाए। बैठक में सह आचार्या डॉ भानु प्रताप पाण्डेय, डॉ चंद्रमौली मिश्रा, डॉ धनंजय, पीपीएम समन्वयक अनुराग पाण्डेय, एसटीएस सुनील कुमार वर्मा, एसटीएलएस वैंकटेश्वर प्रसाद शर्मा, कमलेश कुमार, संजय सिंह यादव, समस्त प्रोफेसर, सहायक प्रोफेसर, सीनियर व जूनियर रिसर्च फैलोशिप, सभी छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।